उत्तर प्रदेष के युवा तेजस्वी मुख्यमंत्री अखिलेष सिंह से बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सहरिया आदिवासियों की गुहार

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उत्तर प्रदेष बुन्देलखण्ड के चित्रकूट, ललितपुर, जहां पर मध्य प्रदेष के बार्डर से कोल आदिवासी एवं सहरिया गौंड आदिवासी लाखों की संख्या में रहते हैं। उनके जीवन में भूख कुपोषण, अषिक्षा, शोषण उत्पीडन भय से मुक्त करके समाजवादी पार्टी की नई सरकार के कुछ विषेष कार्यक्रम संचालित होने चाहिए। अगर हम झांसी ललितपुर पर ध्यान दें तो सर्वप्रथम संसदीय क्षेत्र में सहरिया आदिवासियों के लिए षिक्षा के विषेष प्रयास किये जायें। जो मजरे षिक्षा से वंचित हैं उनमें स्कूल खोले जायें तथा सायंकालीन अनौपचारिक आदिवासी साक्षरता केन्द्र संचालित किये जायें। सायंकाल 6 से 7 बजे तक इस कार्य को किया जा सकता है।
षिक्षा साक्षरता के लिए सहरिया एवं गौंड़ आदिवासी बस्तियों में उजाले की आवष्वकता पडे़गी, इसके लिए ऐसी बस्तियों में विद्युतीकरण हो। ललितपुर के वन विभाग की सीमा जंगल के अंदर बसे गांवों में बिजली नहीं पहुंच पा रही है, इसके लिए सोलर चार्जिंग स्टेषन स्थापित करके घर-घर में सोलर लालटेन पहुंचाना होगा। अक्षय ऊर्जा, नेडा विभाग इसके लिये विषेष योजना बना सकता है।
आदिवासियों के जीवन में सर्वागींण विकास के लिए वन अधिकार अधिनियम 2005-2006 को पूरी तरह से लागू करना चाहिए। क्योंकि जंगलों के अंदर कई पीढि़यों से बसे आदिवासी परिवारों के लिए सड़क, बिजली, स्कूल, षिक्षा, स्वास्थ्य, जलाषय, सिंचाई एवं पेयजल आदि की बुनियादी सुविधायें उपलब्ध नहीं हो सकीं हैं। ललितपुर जिले के कई क्षेत्रों में दर्जनों गांव जैसे- लंखजर, पापड़ा, वनगुवां, कुर्रट, जैतूपुरा, बड़वार आदि देखे जा सकते हैं। पंचायतों में सहरिया आदिवासियों को आरक्षण सुनिष्चत किया जाये।
ललितपुर के सहरिया आदिवासियों को वर्ष 2003 में जनजाति का दर्जा मिल चुका है। ललितपुर में गोंड़ तथा झांसी के सहरिया परिवार जनजाति के दर्जे से वंचित हैं, उनको जनजाति के श्रेणीं में कर दिया जाये।
बुन्देलखण्ड में दलित, अनुजनजाति तथा अति पिछ़ड़ी जातियों को सरकार द्वारा पटटे की भूमि में कब्जा दिलाया जये, क्योंकि दबंगों ने उनेकी पटटे की जमीनों पर कब्जा कर रखा है, उसे छोड़ नहीं रहे हैं। भूमि माप अभियान चलाकर कब्जा दिलाया जाये।
ललितपुर वन क्षेत्र के अंदर महुवा तथा चिरौंजी के हजारों पेड़ों पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है आदिवासियों की आजीविका के लिए तत्काल दबंगों का कब्जा हटाया जाये। बुन्देलखण्ड के ललितपुर में कई सिंचाई बांध परियोजनाऐं अधूरी पड़ीं हैं उनको शीघ्र पूरा कराया जाये।
पिछली मुलायम सरकार ने उत्तर प्रदेष के समस्त गांवों में तैनात ग्राम चैकीदारों को मानदेय देकर तथा परिचय पत्र बनवाकर उनके चैकीदार के पद को सम्मानजनक पद के रूप में स्थापित किया था। इस कार्य से गांव का चैकीदार गांव की सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस थाने में डयूटी करने में अपने आपको सम्मानजनक तथा प्रोत्साहनपूर्ण स्थिति को महसूस करता था। ग्राम चैकीदार भी सरकार का वफादार अंग ऐसा संदेष सम्पूर्ण जन मानस में गया था। ग्राम चैकीदारों को पुनः वर्तमान सरकार द्वारा प्रोत्साहित करने की जरूरत है उनको बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की जरूरत है ताकि गांवों में किसी भी तरह की आपराधिक घटनायें न घट सकें, गांवों में शांति एवं सुरक्षा का वातावरण बन सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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