उत्तर प्रदेश प्रमुख सचिव हरमिन्दर राज सिंह ने की आत्महत्या.. सच्चाई क्या ?.

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लखनऊ। प्रदेश के प्रमुख सचिव आवास हरमिन्दर राज सिंह ने देर रात सरकारी आवास में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उनका लाइसेंसी रिवाल्वर लाश के बगल पड़ा पाया गया। इस हादसे की जानकारी मिलते ही 6, विक्रमादित्य मार्ग स्थित  आवास पुलिस व प्रशासन के अधिकारी रात में ही मौके पर पहुंच गये। रात में ही पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को परिजन दिल्ली ले गये। 

जिस समय हादसा हुआ घर में सिर्फ प्रमुख सचिव और पत्नी आशिमा सिंह मौजूद थे। शनिवार को प्रमुख सचिव पत्नी के साथ, आईएएस अधिकारी देश दीपक वर्मा के यहां आयोजित समारोह में गये थे। वहां से रात करीब साढ़े दस बजे घर वापस लौटने के बाद रात में सवा एक बजे उनकी पत्नी की आंख गोली चलने की आवाज पर खुली। कमरे में पति को न देखकर दूसरे बेडरूम में पहुंचीं, जहां उन्होंने बिस्तर पर पति को खून से लथपथ देखा। खून से लथपथ प्रमुख सचिव को हजरतगंज पुलिस ने तत्काल ट्रामा सेंटर पहुंचाया। इस बीच डीआईजी प्रेम प्रकाश, एडीजी कानून-व्यवस्था एके जैन, जिलाधिकारी अमित कुमार घोष तथा अन्य अधिकारी भी पहुंच गये। ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों ने प्रमुख सचिव को मृत अवस्था में लाया गया घोषित कर दिया। गोली उनकी दाहिनी कनपटी से लगकर सिर फाड़ते हुए बाहर निकल गयी थी। अधिकारियों का कहना है कि मौके पर किसी तरह का कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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लेकिन उनकी मौत के बाद न केवल उत्तर प्रदेश सरकार पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं बल्कि मुख्यमंत्री मायावती और उनके एक विश्वस्त मंत्री के ऊपर भी सवालिया निशान लग रहे हैं. उधर, मुख्यमंत्री मायावती ने इस घटना पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि मिलनसार, मृदुभाषी और व्यक्तित्व के धनी हरमिन्दर राज सिंह कुशल योग्य और कर्मठ अधिकारी थे। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन में अधिकारियों की कितनी दुर्दशा है यह किसी से छिपा नहीं है. अपने प्रशासनकाल में मायावती ने कभी भी अधिकारियों को कोई खास तवज्जो नहीं दिया जिसके कारण मायावती की सुप्रीमेसी तो जरूर कायम हुई लेकिन अधिकारियों पर दबाव लगातार बढ़ता चला गया है. लेकिन हरमिन्दर राज द्वारा खुद को गोली मारना थोड़ा आश्चर्यजनक है. आश्चर्यजनक इसलिए क्योंकि वे खुद भी मायावती के बहुत करीबी अफसर कहे जाते थे और मायावती प्रशासन में उस विभाग का काम देख रहे थे जो सीधे तौर पर कुछ महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को हैण्डल कर रहा था. इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अम्बेडकर पार्क का निर्माण है. इसके अलावा कुछ बड़े औद्योगिक समूह के लीज के एक्सटेंशन और लैण्ड यूज चेन्ज के मामलों को लेकर उनका विभागीय मंत्री से प्रतिरोध चल रहा था. खबर यह भी है शुक्रवार को उक्त आईएएस अधिकारी की माया सरकार के विश्वस्त और विभागीय मंत्री नसीमुद्दीन के साथ कोई झड़प हो गयी थी. हालांकि इस बारे में अब कुछ भी प्रामाणिक रूप से नहीं कहा जा सकता क्योंकि हरमिन्दर राज अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन कुछ सूत्रों का दावा है कि विभिन्न प्रोजेक्टों को लेकर भी मायावती के मंत्री नसीमुद्दीन ने उक्त अधिकारी पर दबाव बनाया था और दोनों के बीच कोई झड़प भी हुई थी. हालांकि उनकी आत्महत्या के बाद यह खबर भी फैलायी जा रही है कि वे पिछले कुछ महीनों से हाइपर टेंशन के शिकार थे. लेकिन ये सिर्फ अफवाहें ही जान पड़ती हैं क्योंकि पिछले एक सवा महीने से वे लगातार काम कर रहे थे और उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली थी.

प्रमुख सचिव ने आत्महत्या क्यों की, इसकी अभी न तो अधिकारियों को कोई जानकारी मिल सकी और न ही प्रमुख सचिव की पत्नी इस बाबत कुछ बता सकीं। अधिकारियों का कहना है कि प्रमुख सचिव को ब्लड प्रेशर की बीमारी थी, जिसका वे इलाज कर रहे थे। संभवत: ‘डिप्रेशन’ के कारण उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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