इलाज के दौरान लड़की की हुई मौत पुलिस ने नहीं दर्ज की शिकायत पीड़ित पिता ने चौकी पुलिस पर मामला सुलटाने का लगाया आरोप घटना के बाद दोनों पक्षों को काफी देर तक बैठाए रखा गया चौकी में सीतापुर पुलिस ने मामले से जताई अनभिज्ञता

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झोला छाप डाक्टर के यहां डायरिया का इलाज कराने के दौरान बेटी की मौत हो जाने के बाद डाक्टर से विवाद होने पर मौके पर पहुंची  पुलिस दोनों को अपने साथ सीतापुर चौकी ले आई। जहां देर शाम मृतक बालिका के पिता को बच्ची के अन्तिम संस्कार करने की बात कह कर चौकी इंचार्ज द्वारा घर जाने को कह कर टरका दिया और उसके जाने के कुछ देर बाद ही डाक्टर को भी बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया। पीड़ित जहां पुलिस के इस रवैये से अवाक है वहीं खास लोग बताते हैं कि लेन-देन के बाद मामले को निपटा दिया गया है। नहीं तो पुलिस अन्तिम संस्कार कराने की बजाए लड़की के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती तभी उसकी मौत के पीछे के असली कारणों का खुलासा हो जाता।

मिली जानकारी के अनुसार पड़ोसी जनपद बान्दा के ओरन थानान्तर्गत रानीपुर गांव का रहने वाला राजेश सिंह परमार अपने परिवार के साथ काफी समय से जिले के सीतापुर कस्बे के अहिरन टिकुरा स्थित एक माकान में किराए से रह कर बिल्डिंग कास्ट्रेक्शन का छोटा-मोटा काम करता है। राजेश सिंह ने बताया कि बीते मंगलवार की देर रात बीए में पढ़ने वाली उसकी पुत्री सपना (19) को अचानक उल्टी व दस्त की शिकायत हो गई। रात काफी होने पर वह अपनी पुत्राी का घरेलू इलाज कर राहत देने का प्रयास करता रहा। बुधवार की तड़के ही वह रामघाट के पास स्थित एक प्राइवेट डाक्टर के यहां इलाज के लिए अपनी बेटी सपना को लेकर पहुंचा। जहां उसने स्थिति नाजुक बताते हुए ड्रिप लगा इलाज करना शुरू कर दिया। इस बीच उसने बोतल में तीन चार इंजेक्शन भी डाले। जिसके बाद काफी देर तक पुत्री की हालत में सुधार होता रहा और वह बातचीत करती रही। लेकिन इसी बीच दोपहर बाद उसने पेट में दर्द होने की शिकायत की। राजेश ने बताया कि पुत्राी की तकलीफ की बात उसने डाक्टर को बताई जिस पर उसने क्लीनिक में ही काम करने वाले लड़के से कोई इंजेक्शन दोबारा लगाने के लिए कहा। उसने बताया कि सपना के इंजेक्शन लगते ही कुछ पलों पहले सामान्य हालत में बातें कर रही उनकी बेटी का शरीर अकड़ गया और आंखे उबाल मारने लगीं तो उसने फिर डाक्टर को तत्काल बुला उसकी हालत दिखाई। जिस पर डाक्टर ने हालत नाजुक बताते हुए अपने एक आदमी को टैंपों स्टैण्ड भेज गाड़ी बुलवा दी और तुरन्त जानकीकुण्ड अस्पताल ले जाने को कहा। जहां अस्पताल पहुंचते ही डाक्टरों ने सपना की मौत काफी पहले होने की बात कहते हुए उन्हें चौंका दिया। जिस पर राजेश अपनी पुत्री का शव लेकर वापस डाक्टर के यहां पहुंचा और उलाहना देते हुए लड़की की मौत के पीछे दवा का कारण बताया। जिस पर वादविवाद होने लगा। राजेश ने बताया कि डाक्टर ने फोन कर पुलिस को बुला लिया। मौके पर पुलिस बल के साथ चौकी इंचार्ज आई पी बुन्देला पहुंच गए और डाक्टर व उनको अपने साथ सीतापुर चौकी ले आए। जहां मौजूद एक सिपाही जिसकी सीतापुर में ही सगी रिश्तेदारियां हैं ने उन पर मामले को सुलटाने का दबाव बनाया। उसने बताया कि जब डाक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की बात लेकर डट गए तो चौकी इंचार्ज बुन्देला ने उनसे बेटी का अन्तिम संस्कार करने के बाद गुरुवार की सुबह आने की बात कह घर भेज दिया। राजेश ने बताया कि अन्य लोगों से उसे पता चला कि उसके जाते ही डाक्टर को भी पुलिस चौकी से  चलता कर दिया गया था। उसने बताया कि कार्रवाई की तो बात दूर उसकी शिकायत भी सीतापुर चौकी में नहीं लिखी गई। इधर सूत्राों की माने तो स्थानीय पुलिस ने पूरे मामले को निपटाने की रात में ही भूमिका तैयार कर ली थी। जिसमें सबसे पहले इलाज के दौरान मृत हुई लड़की का पंचनामा करवा पोस्टमार्टम की बजाए अन्तिम संस्कार करवा दिया था।  और डाक्टर को भी छोड़ दिया गया। जबकि इस सम्बंध में चौकी पुलिस से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके यहां इस तरह का कोई मामला ही नहीं आया।