आपसी विवाद में बुन्देलखण्ड विकास सेना बनी खुद मुद्दा

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ललितपुर-बुन्देलखण्ड पृथक राज्य सहित जिले के विभिन्न मुद्दों को लेकर संघर्ष करने वाली बुन्देलखण्ड विकास सेना आज खुद मुद्दा बनी दिखी। तेजी से बदले घटनाक्रम में बुविसे के केन्द्रीय महामंत्री महेन्द्र अगिन्होत्री को सेना प्रमुख घोषित कर दिया गया। यह सब लोकसभा चुनाव में कतिपय प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार को लेकर घटित हुआ।

रेलवे स्टेशन के निकट आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संगठन पूरी तरह से अराजनैतिक है, लेकिन सेना के कुछ जिम्मेवार पदाधिकारी उसका राजनीतिकरण करने पर तुले है। भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए चुनावों में किसी भी राजनैतिक दल को समर्थन न देने का निर्णय लिया गया। इधर, एक अन्य बैठक में केन्द्रीय महामंत्री को निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में संगठन के कार्यो की समीक्षा करते हुए संस्था के सदस्यों ने कहा कि बुन्देलखण्ड विकास सेना के गठन के समय कुछ नियम बनाये गये थे, जिसमें प्रमुख रूप से यह तय था कि सेना पूरी तरह से दलीय राजनीति से दूर एक गैर राजनैतिक संगठन के रूप में बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के साथ-साथ क्षेत्र के विकास के लिए संघर्ष करेगा। बुन्देलखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में सेना को भरपूर समर्थन मिला। खासतौर पर झासी-ललितपुर में संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता विभिन्न समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे है। बुन्देलखण्ड का मजबूत संगठन होने की वजह से राजनैतिक दलों की दृष्टि भी इस पर है और वह उसे अपने तरीके से इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे है। लोकसभा चुनाव से पूर्व हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि सेना किसी भी प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार में स्वतंत्र रूप से नहीं जायेंगे और न ही सेना के नाम का इस्तेमाल किसी प्रत्याशी के लिए किया जायेगा। अफसोस की बात है कि संगठन के कुछ जिम्मेवार पदाधिकारियों ने सेना की भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए एक प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार किया। इससे संगठन में भारी आक्रोश व्याप्त है। वक्ताओं ने कहा कि संगठन के समस्त पदाधिकारियों के सदस्यों ने यह संकल्प लिया है कि भविष्य में संगठन चुनाव में किसी भी प्रत्याशी का प्रचार नहीं करेगा और न ही सेना के नाम का दुरुपयोग होने दिया जायेगा।

करीब एक घण्टे विचार विमर्श के बाद बुन्देलखण्ड सेना की कमान केन्द्रीय महामंत्री महेन्द्र अगिन्होत्री को सौंपने का निर्णय लिया गया। सेना के संस्थापक सदस्य विश्वनाथ शुक्ला ने महेन्द्र अगिन्होत्री के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। नवनियुक्त सेना प्रमुख ने कहा कि जिस आशा व विश्वास के साथ उन्हे यह महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी गयी है वह उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे तथा बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण की लड़ाई को मूर्तरूप दिया जायेगा।

बैठक में मौजूद अजीज कुरैशी, शरीफ जावेद, बृज बिहारी उपाध्याय, मु.फईम, राजकुमार राठौर, विजय जैन, राम प्रकाश, मुन्ना खा, सूरज यादव, सुनील जैन, बृजेन्द्र पाराशर आदि ने नवनियुक्त सेना प्रमुख का स्वागत किया।

बैठक में हरीश खन्ना, सुनील अग्रवाल, राकेश वैस, मुशीर अहमद, जीवन लाल बड़कुल, बबलू शर्मा, पप्पू शर्मा, राजेश अग्रवाल, डब्बू जैन, राकेश सिरौठिया, अब्दुल खा, असलम खा, ललित जाटव, लखन शर्मा, मानव श्रीवास्तव, फरीद खा, मान सिंह, शकील, जय नारायण शर्मा, बाबू लाल, आनंद जैन, सतीश सराफ, सुनील पुरोहित, प्रभु सराफ, डा.मुकेश तिवारी, रज्जाब अल्ताफ, इदरीश खा, प्रभु दयाल पाराशर, घनश्याम साहू, सुनील मोदी, धर्मेन्द्र अग्रवाल, सलीम मंसूरी, हितेन्द्र बड़घरिया, संतोष सिंह, बृजेश सोनी, विजय शर्मा, आशुतोष शर्मा, अश्वनी पुरोहित, राजेन्द्र अहिरवार, विक्रम सिंह, अनुराग खरे, पार्षद लवली शर्मा, के.के.पंथ, पंकज जैन, शैलेन्द्र रिछारिया, अविनाश जैन, अनूप मोदी, अंकुर साहू, बंटी जैन, जुनेद खा, यूसुफ खा, अरशद, असलम, अशफाक कुरैशी, कलीम, रोहित, जगपाल, मुकेश तिवारी, मेहरबान सिंह, विद्या मालवीय आदि मौजूद थे। अध्यक्षता अजीज कुरैशी व संचालन विश्वनाथ शुक्ला ने किया।

इधर, इस बैठक के परिप्रेक्ष में बुविसे की एक अन्य बैठक सेना प्रमुख हरीश कपूर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इसमें संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने तथा अनुशासनहीनता के चलते केन्द्रीय महामंत्री महेन्द्र अगिन्होत्री को पदच्युत करते हुए 6 वर्ष के लिए निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में कहा गया कि विकास सेना के बैनर तले कार्यकर्ता पृथक राज्य निर्माण आदोलन में यथायोग्य आहूति देने के लिए सदैव तत्पर है। बैठक में विजय सोनी, सुधेश नायक, मुकेश मुड़रा, भगत सिंह राठौर, राजीव पटवारी, हरविंदर सलूजा, रामबाबू अगिन्होत्री, के.पी.सिंह, दुष्यंत बड़ौनिया, सुरेश, अखलेश जैन, राजकुमार कुशवाहा, विनोद साहू, सुदेश सोनी, प्रदीप गोस्वामी आदि उपस्थित थे।