अपनों ने किया मंदाकिनी को मैला

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चित्रकूट- मठ, मंदिरों के नाले खुले आम उप्र व मप्र दोनो प्रदेशों से लगातार वर्षो से गिरते आ रहे हैं। इनको रोकने को किसी ने प्रयास तो किये नही उलटा सीएनडीएस को सीवेज प्लांट का काम और दे डाला। कच्छप गति से चल रहा सीवरेज का यह प्लांट मंदाकिनी को प्रदूषित कर रहा है। राम घाट के रहने वाले तमाम लोग मंदाकिनी में सीवरेज का मलबा डालने से आक्रोशित हैं।
मंदाकिनी के रामघाट पर डाला जाना गंदा सीवरेज पूरे जिले के लोगों के अस्पताल पहुंचने का साधन बन चुका है। हैजा, पीलिया, कालरा व पेट की खराबी से संबंधित सभी प्रकार की बीमारियों का द्योतक मंदाकिनी का जल इसलिए हो चुका है कि इसी से जल संस्थान ट्रीटमेंटों में पानी ले जाकर पूरे जिले में पानी की सप्लाई करता है। ट्रीटमेंट प्लांटों की हालत यह है कि यहां पर सफाई के नाम पर बोर्डो में तारीख तो बदल दी जाती है पर सफाई होती कभी नही है।

वर्ष 1992-2000 में प्रदेश सरकार से मंदाकिनी के प्रदूषण निवारण के लिए 99.91 लाख रुपये स्वीकृत हुये थे। इसके पहले 1996 में राज्यपाल ने डेढ़ करोड़ रुपये की घोषणा की थी। 1997-1998 में 96.34 लाख रुपये शासन द्वारा भी मिले थे। मंदाकिनी प्रदूषण को निपटाने के लिये पूरी योजना 257.50 लाख रुपये की प्रस्तावित थी, पर हुआ क्या आज यह नदी अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहा रही है। जल निगम अस्थायी खंड के अधिशाषी अभियंता पीसी अग्रवाल की माने तो उनका काम पूरा हो चुका है पर सच्चाई यह यह है कि काम काफी जगहों पर अधूरा है। ट्रीटमेंट बनाने की जगह खुले गंदे नाले सीधे मंदाकिनी में गिराये जा रहे हैं।
इसे प्रदूषित करने का काम वर्षो से ‘अपने’ ही कर रहे हैं। शहर भर का मलबा जहां जल निगम अस्थायी खंड डाल रहा है वहीं शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाने वाला नगर पालिका परिषद भी इसे कूड़े के ढेर में तब्दील करने में किसी भी प्रकार का संकोच नही कर रहा है।
इसे प्रदूषित करने का काम वर्षो से ‘अपने’ ही कर रहे हैं। शहर भर का मलबा जहां जल निगम अस्थायी खंड डाल रहा है वहीं शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाने वाला नगर पालिका परिषद भी इसे कूड़े के ढेर में तब्दील करने में किसी भी प्रकार का संकोच नही कर रहा है।

सबसे खराब स्थिति तो यहां पर पैदा उन्होंने की है जो सुबह उठते ही कामतानाथ के साथ मंदाकिनी का जयकारा लगाते हैं। मंदिरों में रहने वाले संतों व महंतों के नाले सीधे तौर मंदाकिनी में ही जाकर उसे प्रदूषित करते हैं। नदी में प्रदूषण फैलाने का काम नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोग भी खूब करते हैं।

‘नदी पुनीत पुरान बखानी,अत्रिप्रिया निज तप बल आनी। सुरसरि धार नाउ मंदाकिनी, जो सब पोतक पोतक पोषक डाकिनी।’ यहां की धरती पर बैठकर नौ दिनों तक इस चौपाई को लेकर राम कथा की महिमा का गान करने वाले संत मोरारी बापू ही क्या जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य, स्वामी अवधेशानंद, स्वामी डा. रामकमल नयन दास वेदांती जैसे दर्जनों कथावाचक मंदाकिनी की दुर्दशा पर अपने आंसू रोक नहीं पाये। सभी ने माना कि सरकारें इसके प्रति उदासीन हैं आम लोग ही आगे आकर इसको प्रदूषण से मुक्त कर सकते हैं।

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