अनवरत जारी है अवैध शिकारियों का काला धंधा ,नहीं हुई कभी ठोस कार्रवाई

0
239

मानिकपुर-बढ़ी हुई ठण्ड से निपटने के लिए जहां एक ओर लोगों द्वारा तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं वहीं पाठा के जंगलों में अवैध रूप से जानवरों का शिकार कर शिकारियों द्वारा सर्दी दूर की जा रही है। ऐसा नहीं है कि यहां होने वाले अवैध शिकारो की जानकारी विभागीय लोगों को न हो लेकिन कोई कार्रवाई न होने के चलते पाठा के जंगलों में बिना किसी डर के अवैध शिकार किया जा रहा है। दुर्लभ जानवरों का शिकार करने वाले शिकारी जंगल के बीच से निकली हाईटेशन बिजली की तारों में कटिया डाल जमीन में तार बिछा देते हैं। जिसकी चपेट में जानवर फंस कर इनका शिकार बन जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत सम्बंधित अधिकारियों को की लेकिन अभी इस मामले में कुछ नहीं किया गया।

विकास खण्ड मानिकपुर का ज्यादातर क्षेत्र ग्रामीण है और जंगलों से सटा हुआ है। पाठा क्षेत्र के घनघोर जंगलों में आज भी हिरन, बारहसिंगा, चीतल सहित अन्य दुर्लभ प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं। इन जानवरों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने इस क्षेत्र को सेंचुरी क्षेत्र घोषित करते हुए शिकार पर प्रतिबंध कर दिया गया। प्रतिबंध के बावजूद भी शौकीन शिकारी आज भी इन जंगलों में अवैध शिकार करते हुए जानवरों के गोश्त की दावतें उड़ाते हैं। सूत्र बताते हैं कि इन शिकारियों की हरकतें सर्दी के मौसम में बढ़ जाती हैं। जाड़े की ठण्डी रातों में ये शिकारी बेखौफ हो अपनी करतूतों को अंजाम देते है। बताया जाता है कि पकड़े जाने के भय के चलते जानवरों का अवैध शिकार करने वाले लोग नई-नई तरकीबें खोजते रहते हैं। ग्रामीण इलाकों का विद्युतीकरण हो जाना उनके लिए लाभदायी सिद्ध हो रहा है। सूत्रा बताते हैं कि शिकारी जंगलों में बिजली की नंगी तारे बिछा कर इन तारों को बिजली विभाग द्वारा गांव में बिजली पहुंचाने के लिए जंगलों से निकाली गई हाईटेंशन तार में कटिया फांस देते हैं। इसके बाद वे आस पास छिप कर बैठ जाते हैं। रात के समय निकले जानवर बिजली की इन तारों में बह रहे करंट से चिपक जाते हैं और शिकारियों का शिकार बन जाते हैं। ग्रामीण तो यहां तक बताते हैं कि कभी-कभी रात के समय इन क्षेत्रां से गुजरने वाले लोग भी इसका शिकार हो अकार मृत्यु का शिकार होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शिकार करने वाले शिकारियों की करतूतों की जानकारी वन विभाग सहित सम्बंधित अधिकारियों को है लेकिन इनकी मिली भगत से कोई भी कुछ करने की पहल नहीं करता। सूत्रा बताते हैं कि क्षेत्र के हेला, बगदरी, निही चिरैया, रानीपुर, गिदुरुहा, चमरौहां, सकरौहां, ऊंचाडीह, कोटा कदैला, बराहमाफी, चूल्ही, दराई आदि गांव दूर जंगलों से सटे होने के कारण यहां शिकारियों की चहलकदमी अधिक रहती है। इतना ही नहीं इन शिकारियों की करतूतों के चलते यहां की विद्युत व्यवस्था भी चौपट रहती है। इनके द्वारा हाईटेंशन तार में कटिया फांसने के कारण लाइन में फाल्ट हो जाता हैं और ग्रामीण इलाकों की बिद्युत आपूर्ति रात-रात भर गायब रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शिकार करने वाले शिकारियों की शिकायतें कई बार वन विभाग व पुलिस विभाग में की गई लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं न होने से अवैध शिकार का सिलसिला अनवरत जारी रहता है। ग्रामीणों ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से इस सम्बंध में उचित कार्रवाई करने की मांग करते हुए पाठा के जंगलों में रहने वाले दुर्लभ जानवरों की सुरक्षा करने के की मांग की है।