अंधत्व का मतलब मोतियाबिंद नही

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चित्रकूट- नेत्र रोगियों को नई तकनीक से इलाज करने की कार्यशाला संपन्न हुई। जानकी कुंड के सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय में आयोजित कार्यशाला में चिकित्सालय के निदेशक डा. बी के जैन ने कहा कि अंधत्व को दूर करने में नेत्र सहायक रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते है। इनके बिना अंधत्व निवारण का संकल्प पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले और आज की चिकित्सा तकनीकी में काफी बदलाव है।

आज का ज्ञान नया है। इसके पहले अंधत्व का मतलब लोग मोतियाबिंद समझते थे। आज ग्लोकोमा, रेटिनोपैथी, आक्यूलोप्लास्टी, आंख का नासूर, मंद दृष्टि व तिरक्षापन आंख की गंभीर बीमारी है। इनका इलाज जरूरी है। इन सबका पहले चीरा लगाकर आपरेशन होता था। अब फैको विधि से बिना चीरा से आपरेशन संभव है। भारतवर्ष के नेत्र सहायकों को यहां मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला में बिहार के कार्यक्रम अधिकारी डा. अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि स्थानीय चिकित्सालय का कार्य सराहनीय है। यहां के नेत्र सहायकों के साथ काम करके कुछ नया सीखने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में एक सुपर स्पेशलिटी नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की गई है, परंतु जानकीकुंड के इस अस्पताल से काफी कुछ सीखने को मिल रहा है। कार्यशाला में बिहार, राजस्थान, उ.प्र., म.प्र., झारखंड आदि भारत के प्रांतों से 30 लोग प्रशिक्षण लेंगे।