चित्रकूट - तीर्थक्षेत्र चित्रकूट के मध्यप्रदेश सीमान्तर्गत स्थित अन्तर्राज्यीय बस अड्डे के समीप निर्माणाधीन मकान रविवार की रात ढह जाने से अन्दर सो रहे तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मकान गिरता देख भाग रहे एक मजदूर को हल्की चोटें आई हैं। हादसे की खबर सुन घटना स्थल पर लोगों का हुजूम जमा हो गया। मौके पर पहुंची एम.पी. पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से मलवे में दबे मजदूरों के शवों को काफी मशक्कत से निकाल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की छानबीन करने में लगी हुई है।
तीर्थक्षेत्र चित्रकूट मध्यप्रदेश सीमान्तर्गत स्थित अन्तर्राज्यीय बस अड्डे के समीप अन्नपूर्णा पैलेस नाम का एक भवन काफी अर्से से खाली पड़ा था। जिसे इलाहाबाद में रहने वाली श्रीमती उमा मिश्रा ने भवन मालिक से खरीदते हुए अपने नाम रजिस्ट्री कराई थी। मालूम हुआ है कि खरीदने के बाद श्रीमती मिश्रा ने इमारत को नए सिरे से बनवाने की सोची और आपरेशन पोस्ट भरतकूप निवासी अपने भाई राजू द्विवेदी को जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद राजू ने मकान को बनवाने के लिए कुछ दिन पहले मैटेरियल आदि डलवा दिया था। और मकान में काम करवाने के लिए आस-पास के गांवों के मजदूरों को लाया था और मकान में साफ-सफाई आदि शुरू करवाई थी। लगातार काम करवाने की गरज से उसने अपने साथ लाए मजदूरों के रहने खाने की व्यवस्था भी मकान में ही कर दी थी। आस-पास के लोगों ने बताया कि मजदूरों के मनोरंजन के लिए सीडी आदि की भी व्यवस्था की गई थी। लोगों ने बताया कि मकान में काम आरम्भ करवाने से पहले राजू ने बगल से निकले बरसाती नाले की कुछ जमीन को अपना बताते हुए इसकी जेसीबी मशीन से खुदाई करवाते हुए मिट्टी नाले में ही डाल दी। नाले के करीब बने टीले पर मौजूद इस मकान की नाले की ओर बनी नींव भी खुल गई थी। रविवार की रात जब मजदूर काम करने के बाद लगभग 11 बजे मकान में बने 30 बाई 100 के हाल में सोने के लिए गए। और राजू कुछ मजदूरों के साथ बाहर खड़े होकर बातचीत करने लगा। इस बीच ही अचानक पूरा मकान भरभरा कर ढह गया। जब तक वहां मौजूद लोग माजरे को समझ पाते तब तक मकान गिरने से गिरधारी 40 पुत्रा भूरेलाल, विजय 18 पुत्रा भगवानदीन निवासीगण पहरा व मनुआ 28 पुत्रा राजाराम निवासी देवखेर थाना बदौसा जिला बान्दा मलवे में दब चुके थे। जबकि मकान से उड़ रहा मलवे का गुबार इस तरह फैल गया था कि आस-पड़ोस के लोगों को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। धूल का गुबार कम होने पर बाहर मौजूद लोगों ने देखा तो राममूरत पुत्रा बाबूलाल निवासी पहरा लहूलुहान अवस्था में कुछ दूर पड़े कराह रहा था। वहीं भारी भरकम अन्नपूर्णा पैलेस पूर्ण रूप से जमीन्दोज हो चुका था। लोगों ने तत्काल मामले की सूचना नयागांव थाने के टीआई अवनीश द्विवेदी को देते हुए बचाव कार्य में जुट गए। लेकिन रात होने के चलते अन्दर दबे तीनों मजदूरों को बाहर निकालने के लिए मलवे में तांकझांक करते रहे लेकिन माकान की छत की स्लेप के नीचे दबे मजदूरों को निकालने के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे थे। वहीं घायल राममूरत को नजदीक ही स्थित सद्गुरु चिकित्सालय भेज इलाज शुरू कराया गया। इसके बाद सोमवार की तड़के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में जेसीबी मशीन से माकान के उस हिस्से का मलवा हटाना शुरू किया गया। जहां तीनों मजदूरों के दबे होने की आशंका थी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस कर्मियों ने मलवे में दबे एक-एक मजदूर को बाहर निकाला। जिसमें तीनों के शव बुरी तरह क्षतविक्षत हो चुके थे। इधर घटना की खबर हवा की तरह फैलने से सैकड़ों लोगों का हुजूम मौके पर जमा होने लगा था। उधर मृतकों के परिजन भी सूचना मिलने पर वहां आ गए थे। जिनका रोना-विलखना देख अन्य लोगों की भी आंखे गीली हो उठी थी। पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिए। पुलिस ने घटना को लेकर घायल मजदूर राममूरत की ओर से मामला दर्ज किया है। जबकि घटना स्थल पहुंचे लोग हादसे के लिए भवन स्वामी व उसके भाई को जिम्मेदार बता रहे थे।















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