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	<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 16:23:24 +0000</pubDate>
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		<title>राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के गठन को मंजूरी</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 16:23:24 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Latest news]]></category>

		<category><![CDATA[राज्य]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद् की बैठक में निम्न निर्णय लिए गए
लखनऊ -  उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिषद् ने आज राज्य वन विकास अभिकरण के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। साथ ही मन्त्रिपरिषद् ने राज्य वन विकास अभिकरण का गठन सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के अन्तर्गत किए [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् की बैठक में निम्न निर्णय लिए गए</strong></p>
<p>लखनऊ -  उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् ने आज <strong>राज्य वन विकास अभिकरण</strong> के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। साथ ही मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् ने राज्य वन विकास अभिकरण का गठन सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के अन्तर्गत किए जाने तथा सोसाइटी के मेमोरेण्डम ऑफ एसोसिएशन एवं नियमावली को भी अनुमोदित कर दिया है।</p>
<p>गौरतलब है कि प्रदेश में वन क्षेत्रों के कुछ भागों का संरक्षण संवर्धन एवं विकास स्थानीय ग्रामवासियों के साथ सहभागी प्रबन्धन से किया जा रहा है। इसके लिए वित्त पो<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>ण राश्ट्रीय वनीय कार्यक्रम के तहत राश्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकीय विकास बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। अब इस कार्यक्रम के संशोधित संचालन मार्ग निर्देश में राज्य स्तर पर वन विकास अभिकरण के गठन करने के निर्देश हैं।</p>
<p>प्रस्तावित राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के समस्त प्रभागों के वन विकास अभिकरणों के संघ के रूप में कार्य करेगा। पूर्व में प्रभागों द्वारा वन विकास अभिकरण के प्रस्ताव भारत सरकार को अलग-अलग प्रेशित किए जाते थे। वर्तमान निर्देश के अनुसार समस्त वन प्रभागों से सम्बन्धित प्रस्ताव संहत रूप से भारत सरकार को प्रेशित किया जाना है। पूर्व में भारत सरकार द्वारा वित्त पो<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>ण सीधे प्रभाग स्तरीय वन विकास अभिकरण को किया जाता था। अब नए मार्ग निर्देश के अनुसार प्रदेश स्तर पर धनरािश भारत सरकार द्वारा राज्य वन विकास अभिकरण को उपलब्ध करायी जायेगी।<br />
<strong><br />
लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तिशल्पियों व निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनायें बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर देने का निर्णय</strong></p>
<p>मन्त्रिपरिषद ने लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तशिल्पियों तथा निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनाओं का नामकरण बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों के नाम पर किये जाने का निर्णय लिया है।</p>
<p>मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से जानी जायेगी। विशिष्ट हस्त शिल्पियों को दिये जाने वाला प्रादेशिक पुरस्कार योजना भी अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर विशिष्ट हस्तशिल्पी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से होगी। इसी प्रकार निर्यात पुरस्कार योजना का नाम `मान्यवर श्री कांशीराम निर्यात पुरस्कार योजना` कर दिया गया है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य हैं। प्रदेश के लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा प्रदेश के लघु उद्यमियों को लघु उद्योग पुरस्कार, हस्तशिल्पियों को हस्तशिल्प पुरस्कार एवं निर्यातकों को निर्यात पुरस्कार दिये जाने की योजना विद्यमान है। राज्य सरकार ने इन पुरस्कारों को बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर तथा मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों की स्मृति स्वरूप, इनके नाम पर संचालित करने का फैसला किया है। इन महानुभावों का देश व समाज के उन्नयन में बहुमूल्य योगदान रहा है। मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द के निर्णय से जहां एक ओर  इन पुरस्कार योजनाओं का मान बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर इन पुरस्कारों को पाने वाले व्यक्ति स्वयं को गौरवािन्वत महसूस करेंगे।<br />
<strong><br />
कृशि विश्वविद्यालयों एवं डीम्ड विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षकों/समकक्षीय संवर्ग को पुनरीक्षित वेतनमान देने का निर्णय</strong></p>
<p>मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् ने आज कृ<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">षि</span> विश्वविद्यालय, मेरठ, फैजाबाद, कानपुर एवं इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट (डीम्ड विश्वविद्यालय) इलाहाबाद के <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षकों/समकक्षीय संवर्ग को छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वेतनमान पुनरीक्षित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।<br />
मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षकों/समकक्षीय संवर्ग के वेतनमानों का 01 जनवरी, 2006 से पुनरीक्षण कृ<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">षि</span> मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 13 मार्च, 2009 के अनुसार होगा। वेतनमानों का पुनरीक्षण उन्हीं मामलों में अनुमन्य होगा, जिनमें 01 जनवरी, 2006 को भारतीय कृ<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">षि</span> अनुसंधान परि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द के देय वेतनमान पा रहे थे। पुनरीक्षण वेतनमान का लाभ 01 जनवरी, 2006 से देय होगा तथा अन्य भत्ते उसी प्रकार दिए जायेंगे, जैसा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को स्वीकृत किये जाते हैं।</p>
<p>मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार नए वेतनमानों में नोशनल फिक्सेशन कर भुगतान 01 दिसम्बर, 2008 से देय होगा। पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर भुगतान के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया है कि 01 जनवरी, 2006 से 30 नवम्बर, 2008 तक के अवशेश/अन्तरवेतन का भुगतान तभी अनुमन्य होगा, जब आई0सी0ए0आर0 (भारत सरकार) दिनांक 01 जनवरी, 2006 से दिनांक 31 मार्च, 2010 तक की अवधि के एरियर के व्यय भार का 80 प्रतिशत वहन करने के लिए सहमति प्रदान करते हुए इस हेतु देय धनरािश अवमुक्त कर दे। देय अवशेश धनरा<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span> का आधा भुगतान <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2010-11 में एवं शेश आधा भुगतान <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2011-12 में किया जायेगा। भुगतान की पद्धति राज्य कर्मचारियों के समान ही होगी।</p>
<p><strong>अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु शिक्षण शुल्क का निर्धारण</strong><br />
मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं ( इन्जीनियरिंग कालेज) में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्तमान में लागू शुल्क दरों को संशोधित किये जाने के प्रस्ताव को मन्जूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार सरकार द्वारा अनुदानित समस्त अभियन्त्रण संस्थाओं में, एन0आर0आई कोटे की पांच प्रतिशत सीटों को छोड़ते हुए <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण सत्र 2010-11 से बी0 टेक, बी0 आर्क, बी0फार्मा आदि के लिये 40 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार एम0सी0ए0, एम0बी0ए0, एम0टेक के लिए 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इस शुल्क में छात्रावास शुल्क तथा परीक्षा शुल्क सम्मिलित नहीं है। छात्रावास शुल्क संस्थाओं द्वारा नियमानुसार अपनी अधिशाशी समिति के माध्यम से निर्धारित की जायेगी। परीक्षा शुल्क प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित किया जायेगा।</p>
<p>यह शुल्क ऐसे छात्रों से लिया जायेगा, जो <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण सत्र 2010-11 में प्रवेश लेंगे। <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण सत्र 2010-11 से पूर्व के छात्रों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। पिछले <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण सत्र में प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्र जो या तो फेल हो गये हैं या किसी अन्य कारण से परीक्षा नहीं दे सके हैं और पुन: सत्र 2010-11 में प्रथम <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> में प्रवेश लेते हैं, उन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू होगी।</p>
<p>एन0आर0आई0 की अधिकतम पांच प्रतिशत सीटों पर अधिकतम शुल्क 07 हजार यू0एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रति वर्ष होगा। इसके अलावा प्रवेश के समय छात्रों से एक बार पांच हजार रू0 की धनरा<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span> प्रतिभूति के रूप में ली जायेगी, जो पाठ्यक्रम के अन्तिम <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> के समाप्त होते ही सम्बंधित छात्र को नियमानुसार वापस कर दी जायेगी।</p>
<p>राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण भविश्य में आवश्यकता/औचित्य को देखते हुए संस्थान की प्रशासकीय परि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द द्वारा किया जायेगा।<br />
ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में बी0टेक0, बी0आर्क तथा बी0 फार्मा पाठ्यक्रमों हेतु 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span>, समस्त स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम हेतु 17 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> तथा एन0आर0 आई0 सीट हेतु पांच हजार यू0 एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रति<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> फीस <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2003 में निर्धारित की गई थी। अभियन्त्रण संस्थाओं को प्राप्त होने वाला अनुदान <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 1998-99 से फ्रीज है। पिछले सात <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्षो</span> में मुद्रा स्फीति की दरों तथा विभिन्न उपकरणों एवं अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में हुई वृद्धि एवं छठे वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू किये जाने से वित्तीय भार में हुई बढोत्तरी को दृिश्टगत रखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व निर्धारित शुल्क को पुनरीक्षित करने का फैसला किया है।<br />
<strong>01 अप्रैल, 2005 के पूर्व राज्य सरकार के अधीन किसी पेंशनयुक्त सेवा संवर्ग में नियुक्त ऐसे कर्मी जो 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पेंशनयुक्त सेवा में नियुक्त हों, को पुरानी परिभाशित लाभ पेंशन योजना से आच्छादित माने जाने की अनुमति </strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द ने आज राज्य कर्मचारियों की पेंशन से सम्बन्धित एक मसले पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसके तहत ऐसे सभी कर्मचारी जिन्होंने राज्य सरकार की अथवा ऐसे समस्त शासन के नियन्त्रणाधीन स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण संस्थाओं, जिनमें राज्य कर्मचारियों की पेंशन योजना की भान्ति पेंशन योजना लागू थी और उनका वित्त पोशण राज्य सरकार की समेकित निधि से किया जाता है, की पेंशनयुक्त सेवा में 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार की अथवा शासन के नियन्त्रणाधीन उक्त उिल्लखित स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>क्षण संस्थाओं की पेंशनयुक्त सेवा में अपनी पूर्व सेवा से कार्यमुक्त होकर अथवा तकनीकी त्यागपत्र देकर नियुक्त होते हैं, तो उसी पेंशन योजना से आच्छादित माने जायेंगे, जिस पेंशन योजना से वे दिनांक 01 अप्रैल, 2005 के पूर्व आच्छादित थे।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात नई भर्तियों से आने वाले कर्मियों पर नई परिभाशित अंशदायी पेंशन योजना अनिवार्य रूप से लागू किया है।<br />
<strong>उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम का नाम परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किया गया</strong></p>
<p>मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम के नाम को परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।<br />
<strong>बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स, इको फ्रेण्डली व बीज शोधक रसायनों पर <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2010-11 में अनुदान दिये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत</strong><br />
मन्त्रिपरिषद ने बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों पर <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2010-11 में अनुदान दिये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। यह अनुदान वित्तीय <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 2009-10 की भान्ति दिया जायेगा।<br />
मन्त्रिपरिषद के फैसले के अनुसार लघु एवं सीमान्त कृशकों को बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।</p>
<p>अनुसूचित जाति/जन जाति के कृषकों को बायोपेस्टीसाइड्स तथा बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में भी 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।<br />
बीज शोधक रसायनों पर कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा।  25 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति/जनजाति के होंगे जिनमें महिला लाभार्थी 30 प्रतिशत होंगी।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों की खपत में बढ़ोत्तरी के लिए इन पर अनुदान की योजना लागू की गई। इस योजना के लागू होने से फसलों में कीट/रोग नियन्त्रण की नई तकनीक को बढ़ावा मिला है।<br />
<strong>उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित</strong></p>
<p>मन्त्रिपरिषद ने उ0प्र0 अधिनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) संवर्ग एक अधीनस्थ अराजपत्रित सेवा है, जिसमें राजकीय विद्यालयों में विभिन्न विषयों का अध्यापन कार्य सम्पादित करने वाले सहायक अध्यापक/सहायक अध्यापिका के पद सम्मिलित है। इस वर्ग के शिक्षकों के लिए उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 तथा उसका प्रथम संशोधन 1992 प्रख्यापित की गई थी।</p>
<p>नियम-8 (यथा संशोधित) में प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी के अध्यापकों के विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती की शैक्षिक <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अहर्ता</span>यें निर्धारित हैं। सीधी भर्ती के वर्तमान <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अहर्ता</span>ओं में डा0 शकुन्तला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा प्रदत्त बी0एड0 (विशेष शिक्षा) की <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अहर्ता</span> को कतिपय पदों की सीधी भर्ती की <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अहर्ता</span> में सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित था। यह संशोधन विकलांगों को सेवा योजन का अवसर प्रदान किये जाने के उद्देश्य से किया गया था।</p>
<p>सीधी भर्ती की प्रक्रिया सम्बन्धी नियमों में आवेदन पत्र के साथ ली जाने वाली फीस निर्धारित है। वर्तमान में यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के अभ्यर्थियों के लिए 5 रूपये तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए 15 रूपये निर्धारित है। यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 40 रूपये तथा अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 100 रूपये प्रस्तावित किया गया।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रिम</span></strong> <strong>अनुमन्य किए जाने का निर्णय</strong></p>
<p>मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् ने आज उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर राज्य कर्मचारियों को भवन निर्माण/क्रय, भवन मरम्मत/विस्तार, मोटर कार/मोटर साइकिल/स्कूटर/मोपेड तथा व्यक्तिगत कम्प्यूटर क्रय हेतु <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रिम</span> अनुमन्य किए जाने की मंजूरी प्रदान कर दी है।</p>
<p>मन्त्रिपरि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार भवन निर्माण/क्रय हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 7.50 लाख अथवा भवन की लागत, जो भी कम हो, भवन मरम्मत/विस्तार हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 1.80 लाख अथवा विस्तार की लागत, जो भी कम हो, को अनुमति प्रदान कर दी गई है। इसी प्रकार मोटर कार<strong> </strong><span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रिम</span> हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 19,530 या अधिक की पात्रता निर्धारित की गई है। मोटर साइकिल/स्कूटर हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 8,560 या अधिक तथा मोपेड/आटो साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 5,060 या अधिक पाने वाले कर्मचारियों को <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रिम</span> देने का निर्णय लिया गया है। साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 9,300 या कम की पात्रता निर्धारित की गई है। व्यक्तिगत कम्प्यूटर <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रिम</span> हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 14,880 या अधिक पाने वाले कर्मियों की पात्रता निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि विभिन्न <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रि</span>मों की अधिकतम अनुमन्य रा<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">शि</span>यों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">अग्रि</span>मों से सम्बन्धित यह सभी निर्णय केन्द्र सरकार के वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर लिए गए हैं।</p>
<p><strong>विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परि<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">ष</span>द एवं विकास प्राधिकरणों में कार्यरत वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को विनियमित करने का निर्णय</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में वशZ 1991 के पूर्व नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विनियमित करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>मन्त्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार विभिन्न विभागों में नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अधिसंख्य पद सृजित किये जायेंगे। इस निर्णय से सरकार पर लगभग 20 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा।</p>
<p>इसी प्रकार नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिनकी नियुक्ति 1991 से पहले की है, को सम्बंधित संस्थाओं में अधिसंख्य पद सृजित करते हुए विनियमित किया जायेगा। इन कर्मियों के विनियमितीकरण से स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों पर लगभग 60 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा, जिसे सम्बंधित निकाय/प्राधिकरण द्वारा वहन किया जायेगा।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में लगभग 10 हजार वर्कचार्ज तथा 9़800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 1991 के पहले से कार्यरत है। इसी प्रकार नागर निकायों में लगभग 03 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, आवास-विकास परिशद तथा विभिन्न प्राधिकरणों में लगभग 03 हजार वर्कचार्ज और एक हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्ष</span> 1991 से पूर्व कार्य कर रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों में से अधिकांश को मा0 उच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशो के तहत न्यूनतम वेतन तथा उस पर देय भत्ता प्रदान किया जा रहा है। यह भी ज्ञातव्य है कि शासन द्वारा 29 जून, 1991 के पश्चात् दैनिक वेतन अथवा वर्कचार्ज पर नियुक्ति प्रतिबन्धित है।</p>
<p><strong>राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 5200-20200 रू0 वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड-पे देने का निर्णय</strong></p>
<p><strong>सरकार के इस निर्णय से 3 लाख कर्मचारी लाभािन्वत होंगे</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के तहत केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 रूपये वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>मन्त्रिपरिषद के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 03 लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च वेतन बैण्ड का लाभ मिलेगा, जिस पर लगभग 350 करोड़ रूपये का वार्शिक व्यय भार आयेगा। भारत सरकार की भान्ति राज्य सरकार द्वारा समस्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तात्कालिक प्रभाव से नई भर्ती नहीं करने का निर्णय लिया है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि वर्तमान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 रूपये का वेतन बैण्ड तथा 1300 रूपये ग्रेड पे रिप्लेसमेंट के रूप में दिया जा रहा है। वेतन समिति द्वारा यह संस्तुति की गई थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 का वेतन बैण्ड दिया जाय तथा ग्रेड पे 1300 रूपये से बढ़ाकर 1400 रूपये किया जाये तथा इनके ऊपर वाले वेतन में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिनकी संख्या लगभग 30 हजार होगी, को केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 वेतन बैण्ड एवं 1800 ग्रेड पे के रूप में दिया जाये।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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		<title>संशोधित  किसानों की हर सम्भव मदद की जायें - सहकारिता मन्त्री</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 15:45:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>

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		<description><![CDATA[उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक आधुनिक कार्य संस्कृति अपनायें
बैंक की ऋण वसूली में आशातीत सुधार विगत एक साल में 268 कार्मिकों की पदोन्नतियॉ
लखनऊ -  उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सदस्यों की संख्या विगत तीन वर्षो में 120694 से बढ़कर 132.841 हो गई। जिसके फलस्वरूप बैंक की अंश पूंजी तथा निजी पूंजी भी क्रमश: [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उ0प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक आधुनिक कार्य संस्कृति अपनायें</strong></p>
<p><strong>बैंक की ऋण वसूली में आशातीत सुधार विगत एक साल में 268 कार्मिकों की पदोन्नतियॉ</strong></p>
<p>लखनऊ -  उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सदस्यों की संख्या विगत तीन<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi"> वर्षो</span> में 120694 से बढ़कर 132.841 हो गई। जिसके फलस्वरूप बैंक की अंश पूंजी तथा निजी<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi"> पूं</span>जी भी क्रमश: 254 करोड़ से 471 करोड़ रूपये एवं 422 करोड़ से बढ़कर 457 करोड़ रूपये हो गई है। इसी अवधि में ऋण वितरण का लक्ष्य भी 490 करोड़ से बढ़कर 703 करोड़ रूपये हो गया है। विगत दस <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्षो</span> से ऋण वसूली में आ रही गिरावट को रोकने के लिये बैंक शाखाओं के अभिलेखों को विगत तीन <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">वर्षो</span> में दुरूस्त कराया गया, जिसके कारण वसूली में आशातीत बढ़ोत्तरी हुयी है।</p>
<p>यह बात सहकारिता मन्त्री श्री बाबू सिंह कुशवाहा ने आज विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में बैंक के तीन वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा करने के बाद कही। उन्होंने कहा कि बैंक की शाखाओं के अभिलेख पूर्ण कराये जाने से ऋण वसूली में सहूलियत हुयी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की ऋण माफी एवं ऋण राहत योजना के पूर्ण होने के उपरान्त बैंक की वसूली हेतु विशेष प्रयास किये गये। वित्तीय वर्ष 2008-09 में 38 प्रतिशत के सापेक्ष 2009-10 में 44 प्रतिशत वसूली हुयी, जो गत वर्ष से 6 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार बैंक की नकद वसूली में अपेक्षित सुधार हुआ।</p>
<p>मन्त्री ने बताया कि किसानों में जागरूकता अभियान चलाने के लिये नाबार्ड के सहयोग से प्रदेश में 202 कृषक क्लबों का गठन किया जा चुका है। बैंक के अपने आय स्त्रोत विकसित करने हेतु सावधि जमा योजना के अन्तर्गत रू0 40.00 करोड़ तक की जमा वर्ष 2009-10 करायी गई, जो विगत तीन वर्ष पहले के 3.34 करोड़ रू0 से 36.66 करोड़ रूपये अधिक है। इससे बैंक के वित्तीय स्त्रोतों में वृद्धि हुयी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बैंक में अधिकतम कर्मचारियों एवं अधिकारियों के सेवा सम्बंधी मामलों का निस्तारण करते हुये 268 पदोन्नतियॉं वर्ष 2009-10 में की गई, जो बैंक के इतिहास में कर्मचारी हित में एक अभूतपूर्व निर्णय है। बैंक में नयी कार्य प्रणाली एवं कार्य संस्कृति विकसित करने के लिये स्वस्थ परिवेश सृजन तथा अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब का निर्माण कराया गया। किसानों तथा बैंक के प्रधान कार्यालय पर आने वाले आगन्तुकों के दर्शनार्थ बैंक की कार्य पद्धति-प्रणाली एवं प्रगति को प्रदर्शित करते हुये आकर्षक प्रदर्शनी कक्ष बनाया गया है। उन्होंने निर्देश दिये कि किसानों में सहकारिता के प्रति जागरूकता पैदा की जाये तथा किसानों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध करायी जाये, जिससे उनकी आय में इजाफा हो सके।</p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री अमल कुमार वर्मा, प्रबंध निदेशक श्री नवल किशोर सहित बैक के सभी अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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		<title>राहुल ने सुनी समस्याएं</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 07:24:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>

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		<description><![CDATA[



कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने  अमेठी के अपने तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शुक्रवार को स्थानीय लोगों से  मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता  अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया, &#8221;कांग्रेस महासचिव ने मुंशीगंज अतिथि गृह  में शुक्रवार को संसदीय क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से आए करीब [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: x-large;"><br />
</span></p>
<div>
<div>
<p>कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने  अमेठी के अपने तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन शुक्रवार को स्थानीय लोगों से  मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता  अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया, &#8221;कांग्रेस महासचिव ने मुंशीगंज अतिथि गृह  में शुक्रवार को संसदीय क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से आए करीब 1,500  ग्रामीणों का दुख-दर्द सुना।&#8221;</p>
<p>सिंह के मुताबिक लोगों ने बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा एंव स्वास्थ्य  सेवाओं से संबंधित अपनी समस्याओं से कांग्रेस महासचिव को अवगत कराया। राहुल  ने एक-एक करके सबकी समस्याओं को ध्यान से सुना और उनका हरसंभव समाधान करने  का वायदा किया।</p>
<p>सिंह ने कहा कि समस्याएं सुनने के बाद राहुल ने ग्रामीणों से उनके गांव  में चल रही केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे  में जानकारी ली। ज्यादातर लोगों की तरफ से योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें  की गईं। इससे पहले राहुल ने सुबह स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ एक  बैठक की।</p>
<p>प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस महासचिव को मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल  का दौरा करना है। वह गांवों का औचक भ्रमण भी कर सकते हैं। राहुल शुक्रवार  शाम दिल्ली के लिए रवाना होंगे।</p>
<p>दौरे के दूसरे दिन गुरुवार रात को राहुल एक महिला की हत्या के मामले में  मुसाफिरखाना थाने पहुंचे और वहां के पुलिस अधिकारियों को निर्धारित समय के  अंदर जांच पूरी करने के निर्देश दिए। इससे पहले गौरीगंज कस्बे में राहुल  ने भारतीय संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की 3जी मोबाइल सेवाओं का लोकार्पण  किया।</p></div>
</div>
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		<title>दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का तबादला</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 07:18:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार ने एक मामूली  प्रशासनिक फेर बदल के तहत प्रमुख सचिव के पद पर तैनात दो वरिष्ठ आईएएस  अधिकारियों का तबादला कर दिया।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया है कि उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय  अग्रवाल को कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात  [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><span style="font-size: x-large;"></span>उत्तर प्रदेश सरकार ने एक मामूली  प्रशासनिक फेर बदल के तहत प्रमुख सचिव के पद पर तैनात दो वरिष्ठ आईएएस  अधिकारियों का तबादला कर दिया।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता ने बताया है कि उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय  अग्रवाल को कृषि, शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात  किया गया है, अग्रवाल कपिल देव की जगह लेंगे।</p>
<p>कपिल देव को स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर तैनात  किया गया है। यह विभाग अब तक मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर सिंह  के पास था, जो कि वाणिज्य कर एवं मनोरंजन कर विभाग तथा नागरिक उड्डयन विभाग  के प्रमुख सचिव भी है।</p>
<p>Vikas Sharma<br />
Editor<br />
www.upnewslive.com , www.bundelkhandlive.com ,<br />
E-mail :editor@bundelkhandlive.com<br />
Ph-09415060119</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>रास्ते में खतरे के पहले ट्रेन रुक जाएगी</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 06:18:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[झाँसी]]></category>

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		<description><![CDATA[झांसी- पटरी पर यदि खतरा है या आगे कोई गाड़ी खड़ी हुई है और सिग्नल लाल है और चालक लापरवाह तो भी डरने की जरूरत नहीं। ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हो ही नहीं सकती क्योंकि वह खतरे से कई मीटर दूरी पर अपने आप रुक जाएगी।
दुर्घटना रहित सुरक्षित यात्रा को सम्भव बनाया है टीपीडब्लूएस अर्थात ट्रेन [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>झांसी- पटरी पर यदि खतरा है या आगे कोई गाड़ी खड़ी हुई है और सिग्नल लाल है और चालक लापरवाह तो भी डरने की जरूरत नहीं। ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हो ही नहीं सकती क्योंकि वह खतरे से कई मीटर दूरी पर अपने आप रुक जाएगी।</p>
<p>दुर्घटना रहित सुरक्षित यात्रा को सम्भव बनाया है टीपीडब्लूएस अर्थात ट्रेन प्रोटेक्शन एण्ड वार्निग सिस्टम ने। इस प्रणाली को प्रयोग के तौर पर अभी ताज एक्सप्रेस व महाकौशल एक्सप्रेस के इजनों में लगाया गया है। दोनों ट्रेनों में इसका परीक्षण आगरा-मथुरा स्टेशनों के बीच किया जा रहा है। इस प्रणाली का एक सप्ताह का प्रशिक्षण झाँसी में प्रणाली बनाने वाली कम्पनी के इजीनियरों ने शताब्दी, मेल ट्रेन चालकों, लोको इस्पेक्टरों व संरक्षा से जुड़े लोगों को दिया।</p>
<p>बताया गया है कि जिस इजन में यह प्रणाली लगी होगी उसके रूट की रेल लाइन व सिग्नल की रिले को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। यदि ट्रेन का चालक लाल सिग्नल के बावजूद गाड़ी को नहीं रोकता है तो इजन में लगा सिस्टम 600 मीटर दूर से ही चेतावनी देना शुरू कर देगा। चालक के फिर भी सतर्क नहीं होने की स्थिति में खतरे से 30 मीटर की दूरी पर ही इमर्जेन्सी ब्रेकिंग प्रणाली से रफ्तार पर ब्रेक लगा कर ट्रेन को रोक देगा। इसके बाद तभी गाड़ी आगे बढ़ सकेगी जब चालक इजन में लगे सिस्टम को पुन: चालू करेगा।</p>
<p>यही स्थिति कॉशन आर्डर अर्थात निश्चित स्थान पर ट्रेन के इजन की निर्धारित से कम गति पर संचालन के समय पर रहेगी। यदि चालक कॉशन आर्डर का पालन नहीं कर लापरवाही से ट्रेन की अपनी गति से निकालने की कोशिश करेगा तो वार्निग के बाद उसकी रफ्तार स्वत: नियन्त्रित हो जाएगी। इतना ही नहीं इजन के आगे के खतरे की जानकारी उपकरण के साथ लगी स्क्रीन पर भी स्पष्ट होगी।</p>
<p>यह उपकरण पाँच-पाँच मिनट में विशेष संकेत देकर चालक को सतर्क करता रहेगा। चालक द्वारा संकेत का जवाब नहीं देने की प्रतिक्रिया स्वरूप उपकरण इजन को रोक देगा। इतना ही नहीं चालक अपनी लापरवाही को छिपा नहीं पाएगा। उपकरण चालक की लापरवाही व गल्तियों को उजागर कर देगा। फिलहाल इस उपकरण के झाँसी तक काम करने की बेसब्री से प्रतीक्षा है।</p>
<p>&#8211;<br />
Vikas Sharma<br />
Editor<br />
www.upnewslive.com , www.bundelkhandlive.com ,<br />
E-mail :editor@bundelkhandlive.com<br />
Ph-09415060119</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को निर्धारित समय से पूरा करें-  सिंचाई मन्त्री</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 17:34:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड]]></category>

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		<description><![CDATA[लक्ष्य से कम सिंचाई दर्ज कराने वाले प्रखण्डों के अभियन्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही होगी 
प्रदेश के सिंचाई मन्त्री श्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को निर्धारित समय के अन्तर्गत पूरा किया जाय, जिससे उनका लाभ किसानों को मिल सके। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने हेतु पुनरीक्षित आगणन भेजने की परम्परा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लक्ष्य से कम सिंचाई दर्ज कराने वाले प्रखण्डों के अभियन्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही होगी </strong></p>
<p>प्रदेश के सिंचाई मन्त्री श्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को निर्धारित समय के अन्तर्गत पूरा किया जाय, जिससे उनका लाभ किसानों को मिल सके। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने हेतु पुनरीक्षित आगणन भेजने की परम्परा को समाप्त किया जाय। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य से कम सींच अधिकांश क्षेत्रों में रही है। उन्होंने कहा कि कम सींच दर्ज करने वाले प्रखण्डों को चििन्हत करके वहॉ के अभियन्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।</p>
<p>श्री सिद्दीकी आज यहॉ बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियन्ताओं, अधीक्षण अभियन्ताओं तथा अधीशासी अभियन्ताओं के साथ बैठक करके बुन्देलखण्ड क्षेत्र की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।</p>
<p>बैठक में उन्होंने निर्देश दिये कि वाणसागर नहर परियोजना की फीडर चैनल माह अक्टूबर 2010 तक पूर्ण करके आगामी रबी फसल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाय। इन परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु ए0आई0बी0पी0 के अन्तर्गत भारत सरकार से मिलने वाली सहायता धनराशि को शीघ्र प्राप्त करने के लिए उन्होंने  मुख्य अभियन्ता को निर्देश दिये। बैठक में अवगत कराया गया कि अन्तर्राज्यीय कनहर, सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार एवं झारखण्ड राज्यों से अनापत्ति प्राप्त हो चुकी है तथा यह योजना  भारत सरकार में विचाराधीन है। उन्होंने निर्देश दिये कि योजना भारत सरकार से अनुमोदित कराने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाय। तदोपरान्त इस वर्ष बजट आवंटन के सापेक्ष इस परियोजना पर कार्य कराये जायें।<br />
श्री सिद्दीकी ने यह निदेेZश दिये कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस वर्ष पूर्ण कराये गये लखेरी, सिजार, कुरार एवं रसिन बांध परियोजनाओं में जल संग्रह सुनिश्चित किया जाय तथा आगामी रबी फसल में परियोजनाओं से सिंचाई सुनिश्चित की जाय। यमुना नदी पर औगासी पम्प नहर परियोजना के विषय में उन्होंने निर्देश दिये कि इसका निर्माण कार्य मार्च 2011 तक प्रत्येक दशा में पूर्ण किया जाय। यमुना नदी पर ही निर्माणाधीन चिल्लीमल लिफ्ट परियोजना के कार्य पर असन्तोष व्यक्त करते हुए उन्होंने निर्देश दिये</p>
<p>कि इसका निर्माण कार्य तत्काल प्रारम्भ किया जाय तथा मार्च 2012 तक समस्त निर्माण कार्य पूर्ण कर लिये जायें।<br />
जनपद बान्दा में निर्माणाधीन बाढ़ परियोजनाओं की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सिंचाई मन्त्री ने निर्देश दिये कि इस वर्ष लक्षित कार्य प्रत्येक दशा में पूर्ण किये जायेंं। सिंचाई निर्माण खण्ड द्वितीय झांसी के अन्तर्गत अधीशाषी अभियन्ता के द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिये।<br />
श्री सिद्दीकी ने बुन्देलखण्ड में निर्माणाधीन लहचूरा बॉध, कचनौदा बॉध, अर्जुन सहायक परियोजना, पहाडी बॉध, इटारी बॉध, रोहिणी बॉध, भौरठ बॉध, जमरार बॉध, पहुंज बाध की परियोजनाओं की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये कि इनके कार्य में तेजी लाई जाय।    सिंचाई मन्त्री ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र में मनरेगा की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इसके अन्तर्गत अनुरक्षण तथा मूल निर्माण कार्य कराये जायें तथा इस सम्बन्ध में जिला स्तर पर समन्वय करके लक्ष्य के अनुरूप प्रगति प्राप्त की जाय। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं में लक्ष्य से कम की जा रही सींच पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त किया तथा यह निर्देश दिये कि इस वर्ष बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खरीफ की फसल में सिंचाई निर्धारित लक्ष्य 1, 35, 000 हेक्टेयर से किसी भी दशा में कम नहीं होनी चाहिए। सिंचाई में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध उन्होंने कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिये।<br />
इस अवसर पर प्रमुख सचिव सिंचाई श्री किशन सिंह अटौरिया, प्रमुख अभियन्ता श्री देवेन्द्र मोहन तथा सुरेश तिवारी सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं मुख्य अभियन्ता उपस्थित थे।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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		<title>राज्य के छ: विश्वविद्यालयों को इस वर्ष 10 स्तरीय सेमिनार कराने होंगे</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 17:25:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड]]></category>

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		<description><![CDATA[सेमिनार हेतु राज्य सरकार द्वारा साढ़े आठ लाख रूपये स्वीकृत
राज्य सरकार ने राज्य के छ: विश्वविद्यालयों में अकादमिक गतिविधियॉ बढ़ाने के लिए 10 सेमिनारों के आयोजन किये जाने हेतु साढ़े आठ लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। विश्वविद्यालयों को इसी वर्ष सेमिनारों का आयोजन करना होगा।
यह जानकारी देते हुए विशेष सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सेमिनार हेतु राज्य सरकार द्वारा साढ़े आठ लाख रूपये स्वीकृत</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने राज्य के छ: विश्वविद्यालयों में अकादमिक गतिविधियॉ बढ़ाने के लिए 10 सेमिनारों के आयोजन किये जाने हेतु साढ़े आठ लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। विश्वविद्यालयों को इसी वर्ष सेमिनारों का आयोजन करना होगा।</p>
<p>यह जानकारी देते हुए विशेष सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती अनीता मिश्रा ने बताया कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर,  चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी, लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय तथा डा0 राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय लखनऊ में इस वित्तीय वर्ष में 10 उच्च स्तरीय सेमिनारों का आयोजन कराया जायेगा।</p>
<p>विशेष सचिव ने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में समाज शास्त्र विभाग द्वारा कन्टेम्पोरेरी ट्रेन्डस ऑफ फेमिली इन इण्डिया,      कला संकाय विभाग द्वारा वर्कशाप ऑन रिसर्च मैथोडोलॉजी, डा0 राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में रिलेवेन्स ऑफ इण्डियन पेनल कोड़ इन कन्ट्रोलिंग एण्ड  काम्बैटिंग क्राइम इन मॉडर्न एज, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा ग्लोबल फाइनेिन्सयल क्राइसिस : इश्यूज, कन्सन्र्स एण्ड चैलेन्जेज फार इण्डिया एण्ड इमरजिंग मार्केट इकोनोमीज, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में एडल्ट कन्टीन्यूइंग एजुकेशन एण्ड एक्सटेन्सन विभाग द्वारा इनवारामेन्टल कन्जेरवेशन एण्ड सोशल  अवेयरनेस तथा फार्मेसी विभाग द्वारा करेन्ट ट्रेन्डस इन हर्बल हेल्थ केयर, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुस्तकालय विभाग द्वारा नेशनल कान्फ्रेन्स ऑफ  द इण्डियन एसोसिऐशन ऑफ स्पेशल लाइब्रेरीज एण्ड इन्फारमेशन सेन्टर्स, भूगोल विभाग द्वारा पापुलेशन ग्रोथ एण्ड रीजनल डेवलेपमेन्ट इन उत्तर प्रदेश तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अप्लाइड इकोनोमिक्स विभाग द्वारा सेमिनार ऑन इमरजिंग ट्रेन्डस इन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट इन इण्डिया तथा डिफेन्स स्टडीज विभाग द्वारा न्यूक्लीयर टेरोरिज्म एण्ड वल्र्ड सिक्योरिटी विषयों पर सेमिनार कराये जाने की राजाज्ञा जारी की गई है।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा के तहत10 लाख वंचित परिवारों को रोजगार</title>
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		<pubDate>Sun, 29 Aug 2010 13:40:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड]]></category>

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		<description><![CDATA[महिलाओं को बराबर का प्रतिनिधित्व
लखनऊ -  उत्तर प्रदेश सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना अन्तर्गत 10 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अत्यन्त वंचित वर्ग के पांच लाख परिवारों व 5 लाख महिला जॉबकार्ड धारकों अर्थात 10 लाख वंचितों [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>महिलाओं को बराबर का प्रतिनिधित्व</strong></p>
<p>लखनऊ -  उत्तर प्रदेश सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना अन्तर्गत 10 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अत्यन्त वंचित वर्ग के पांच लाख परिवारों व 5 लाख महिला जॉबकार्ड धारकों अर्थात 10 लाख वंचितों को <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">चिन्हित</span> करते हुए इन्हें 100 दिन का रोजगार वित्तीय वर्ष 2010-11 में उपलब्ध कराना है।</p>
<p>यह जानकारी ग्राम्य विकास, सचिव श्री मनोज कुमार सिंह ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि वंचित वर्ग के लोग न केवल सबसे अधिक अशिक्षित हैं वरन् इनकी मुख्य सम्पत्ति भी प्राय: इनकी श्रम शक्ति ही है। उन्होंने बताया कि एक रणनीति बनाकर मनरेगा के तहत इन अत्यन्त वंचित वर्ग के परिवारों को लक्षित किया जाये तो योजना का सीधा लाभ निर्धनतम तबके के परिवारों को पहुंच सकता है।</p>
<p>श्री सिंह ने बताया कि मनरेगा के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्यांचल के जनपदों को छोड़कर प्रदेश के अन्य जनपदों में योजना के तहत महिलाओं की भागेदारी निर्धारित 33 प्रतिशत से बहुत कम है। इस कारण प्रदेश के 26 जनपदों में यह प्रस्तावित किया गया है कि कम से कम 5 लाख महिला जॉबकार्ड धारकों को <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">चिन्हित</span> कर उन्हें योजना के अन्तर्गत काम पर आने के लिए प्रोत्साहित किया जाय।</p>
<p>ग्राम्य विकास सचिव ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए सर्वप्रथम लक्षित जनपदों में वंचित परिवारों को <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">चिन्हित</span> कर इनका कम्प्यूटराइज्ड डाटावेस तैयार किया जायेगा। यह कार्य नोडल एजेन्सी तथा इसके द्वारा चयनित सिविल सोसाइटी अर्गनाइजेशन के द्वारा किया जायेगा। उन्होंने बताया कि लक्षित परिवारों को ग्राम पंचायतवार <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">चिन्हित</span> करने के उपरान्त सिविल सोसाइटी अर्गनाइजेशन द्वारा इन्हें प्रोत्साहित कर मनरेगा के अन्तर्गत समूह गठित कर नियत प्रक्रिया के अनुसार काम के लिए आवेदन कराया जायेगा।</p>
<p>श्री सिंह ने बताया कि नोडल एजेन्सी एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था होनी चाहिए और इसका चयन एक समीति द्वारा किया जायेगा। चयन समीति सचिव, ग्राम्य विकास की अध्यक्षता में गठित की गई है। आयुक्त ग्राम्य विकास, निदेशक गिरि इंस्टीट्यूट लखनऊ, निदेशक अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान चित्रकूट तथा उपायुक्त मनरेगा समीति के सदस्य हैं। अपर आयुक्त मनरेगा को समीति का सदस्य सचिव बनाया गया है। श्री सिंह ने बताया कि इस पूरे अभियान और रणनीति के तहत की जा रही कार्यवाही और इसके प्रभाव का मूल्यांकन थर्ड पार्टी द्वारा कराया जायेगा।</p>
<p>श्री सिंह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण रणनीति के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों/जिला कार्यक्रम समन्वयकों और मुख्य विकास अधिकारियों को भेज दिये गये हैं।<br />
सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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		<item>
		<title>दादा ध्यानचंद की होकी झाँसी के साथ-साथ देश से  भी अनाथ हो गई है</title>
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		<pubDate>Sun, 29 Aug 2010 05:37:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[झाँसी]]></category>

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		<description><![CDATA[झाँसी  - दादा ध्यानचंद जिनका जन्मदिन (29 अगस्त) पूरा देश खेल दिवस के रूप में मनाता है  ध्यानचंद ने तीन ओलंपिक खेलों [1928], [1932] और [1936] में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया। आंकड़ों से भी पता चलता है कि वह वास्तव में हाकी के जादूगर थे। भारत [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>झाँसी  - <span style="font-size: 10pt;">दादा ध्यानचंद जिनका जन्मदिन (29 अगस्त) पूरा देश खेल दिवस के रूप में मनाता है </span> ध्यानचंद ने तीन ओलंपिक खेलों [1928], [1932] और [1936] में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया। आंकड़ों से भी पता चलता है कि वह वास्तव में हाकी के जादूगर थे। भारत ने 1932 में 37 मैच में 338 गोल किए जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे। ध्यानचंद की अगुवाई में 1947 में भारत की युवा टीम ने पूर्वी अफ्रीका का दौरा किया। असल में तब जो न्यौता दिया गया था उसमें लिखा गया था कि यदि ध्यानचंद नहीं तो कोई टीम नहीं। ध्यानचंद तब 42 साल के थे और उन्होंने 22 मैच में 61 गोल दागे।<span style="font-size: 10pt;"> उसी जादूगर की सबसे प्रिय &#8216;हॉकी&#8217; आज कितनी दयनीय अवस्था में पहुँच गई है&#8230;</span> ध्यानचंद की कर्म स्थली झाँसी में हर वर्ष  ध्यानचंद  की समाधी स्थल हीरोज फिल्ड पर हाकी एक वार फिर जिन्दा हो जाती है इस दिन झाँसी में मेराथन दोड़ का सुबह आयोजन किया जाता है और जगह जगह स्कूल कालेजो में खेलो का आयोजन किया जाता है&#8230;&#8230;. वही  ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद देश में होकी के गिरते स्थर के लिए चिंतित है उनका कहना है की होकी के स्थर हो सुधारना है तो खिलाडियों को किरकेट  की  तर्ज पर शुभिधाओ  की अबशाकता है</p>
<p><span style="font-size: 10pt;">बताने की जरूरत नहीं है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, लेकिन इस खेल के साथ 14 सालों तक जो खिलवाड़ हुआ , उसी का नतीजा रहा कि 8 स्वर्ण, 1 रजत और2 काँस्य ओलिम्पिक पदक जीतने वाला भारत 80 साल के ओलिम्पिक इतिहास में पहली मर्तबा बाहर था।<br />
</span></p>
<p><span style="font-size: 10pt;">दादा ध्यानचंद हॉकी के जादूगर थे और अपने काल में ऐसा नाम कमाया कि &#8216;क्रिकेट के संत&#8217; माने जाने वाले डॉन ब्रैडमैन भी उनके कायल हो गए थे। हॉकी को उन्होंने भरपूर जीया और देश के लिए तीन ओलिम्पिक (1928 एम्सटर्डम), 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन) खेलें और इन तीनों में वे ओलि‍‍म्पिक स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा बने। यदि दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध में नहीं झोंकी जाती तो दादा ध्यानचंद के गले में और स्वर्ण पदक लटकते रहते। </span></p>
<p><span style="font-size: 10pt;">दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चलाने वालों को कुछ सद्‍बुद्धि आई और उन्होंने दादा ध्यानचंद को हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा खेल नायक मानकर हर साल 29 अगस्त को देश में &#8216;खेल दिवस&#8217; के रूप में मनाने का फैसला किया। बीते कई सालों से इस दिन पूरे देश में हॉकी यकायक जिंदा होती और अगले दिन फिर से मर जाती है। लकड़ी का यह जरा-सा डंडा (‍हॉकी स्टिक) सिर्फ उन हाथों तक सीमित रहता है, जो नियमित रूप से इसे गले से लगाए हुए हैं। </span></p>
<p><span style="font-size: 10pt;">हिन्दुस्तान की हॉकी की दुर्दशा देखकर हर भारतीय का दु:खी होना लाजिमी है। जो लोग क्रिकेट को पागलों की तरह प्यार करते हैं, उनके दिल में भी राष्ट्रीय खेल के प्रति आस्था है लेकिन हॉकी पर से विश्वास इसलिए कम हो गया, क्योंकि बीते सालों में ऐसी लगातार कामयाबियाँ नहीं मिली, जिस तरह क्रिकेट में मिली। </span><br />
<span style="font-size: 10pt;">बेशक यूरोपीय देश बहुमत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने तरीके से नियम बनाते चले गए और मैदान पर खेली जाने वाली एशियाई शैली की हॉकी को &#8216;हिट एंड रन&#8217; वाली शैली में तब्दील करके इसे नाइलोन की घास वाले मैदान तक ले गए, जहाँ घास गर्म होने पर उसे पानी की फुहारों से ठंडा किया जाने लगा। आधुनिक हॉकी एशियाई हॉकी को पूरी तरह लील गई। </span><br />
<span style="font-size: 10pt;">जब नियम बनाए जा रहे थे, तब भारत, पाकिस्तान, कोरिया, जापान जैसे ताकतवर एशियाई देशों ने विरोध नहीं किया। एक गलती यह भी है कि यदि नए नियम और एस्ट्रोटर्फ आ गए थे तो क्यों नहीं भारत ने भी इसके लिए तैयारियाँ की? हकीकत यह है कि इस बदलाव में हम काफी पिछड़ गए। </span><br />
<span style="font-size: 10pt;">यह ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे कि गाँवों में मिट्‍टी पर लड़ने वाले पहलवान को बड़ा होने पर कुश्ती की मैट मिले और सुशील कुमार जैसे कम ही भाग्यशाली पहलवान होते हैं, जो अभाव में पलकर भी ओलिम्पिक से काँसे का पदक ले आते हैं। अब जबकि &#8216;गुदड़ी के दो लालों&#8217; ने भारत को गरीब खेल माने जाने वाले कुश्ती और बॉक्सिंग में दो ओलिम्पिक पदक दिला दिए हैं तो हो सकता है कि इन खेलों का उद्धार करने पर भारत सरकार ध्यान दें।</span><br />
<span style="font-size: 10pt;">1979 </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">दाद</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">ध्यानचं</span><span style="font-size: 10pt;">द </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">कोम</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">जान</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">बा</span><span style="font-size: 10pt;">द </span><span style="font-size: 10pt;">मृत्य</span><span style="font-size: 10pt;">ु </span><span style="font-size: 10pt;">हु</span><span style="font-size: 10pt;">ई </span><span style="font-size: 10pt;">लेकि</span><span style="font-size: 10pt;">न </span><span style="font-size: 10pt;">ज</span><span style="font-size: 10pt;">ब </span><span style="font-size: 10pt;">त</span><span style="font-size: 10pt;">क </span><span style="font-size: 10pt;">व</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">हो</span><span style="font-size: 10pt;">श </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">रह</span><span style="font-size: 10pt;">े, </span><span style="font-size: 10pt;">भारती</span><span style="font-size: 10pt;">य </span><span style="font-size: 10pt;">हॉक</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">प्रत</span><span style="font-size: 10pt;">ि </span><span style="font-size: 10pt;">चिंति</span><span style="font-size: 10pt;">त </span><span style="font-size: 10pt;">रहे</span><span style="font-size: 10pt;">। </span><span style="font-size: 10pt;">बेट</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">अशो</span><span style="font-size: 10pt;">क </span><span style="font-size: 10pt;">स</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">हमेश</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">कहत</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">थ</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ि </span><span style="font-size: 10pt;">मेर</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">यह</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">सपन</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">ह</span><span style="font-size: 10pt;">ै </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ि </span><span style="font-size: 10pt;">भारती</span><span style="font-size: 10pt;">य </span><span style="font-size: 10pt;">हॉक</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">ए</span><span style="font-size: 10pt;">क </span><span style="font-size: 10pt;">बा</span><span style="font-size: 10pt;">र </span><span style="font-size: 10pt;">फि</span><span style="font-size: 10pt;">र </span><span style="font-size: 10pt;">स्वर्णि</span><span style="font-size: 10pt;">म </span><span style="font-size: 10pt;">यु</span><span style="font-size: 10pt;">ग </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">पहुँचे</span><span style="font-size: 10pt;">। </span><span style="font-size: 10pt;">अ</span><span style="font-size: 10pt;">ब </span><span style="font-size: 10pt;">मेर</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">बूढ़</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">शरी</span><span style="font-size: 10pt;">र </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">भल</span><span style="font-size: 10pt;">े </span><span style="font-size: 10pt;">ह</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">द</span><span style="font-size: 10pt;">म </span><span style="font-size: 10pt;">नही</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">रह</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">ह</span><span style="font-size: 10pt;">ो </span><span style="font-size: 10pt;">लेकि</span><span style="font-size: 10pt;">न </span><span style="font-size: 10pt;">मै</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">भार</span><span style="font-size: 10pt;">त </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">हॉक</span><span style="font-size: 10pt;">ी </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ो </span><span style="font-size: 10pt;">सम्मानजन</span><span style="font-size: 10pt;">क </span><span style="font-size: 10pt;">स्थित</span><span style="font-size: 10pt;">ि </span><span style="font-size: 10pt;">मे</span><span style="font-size: 10pt;">ं </span><span style="font-size: 10pt;">देखन</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">चाहत</span><span style="font-size: 10pt;">ा </span><span style="font-size: 10pt;">हू</span><span style="font-size: 10pt;">ँ </span><span style="font-size: 10pt;">ताक</span><span style="font-size: 10pt;">ि </span><span style="font-size: 10pt;">खु</span><span style="font-size: 10pt;">द </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">ो </span><span style="font-size: 10pt;">जवा</span><span style="font-size: 10pt;">न </span><span style="font-size: 10pt;">महसू</span><span style="font-size: 10pt;">स </span><span style="font-size: 10pt;">क</span><span style="font-size: 10pt;">र </span><span style="font-size: 10pt;">सकूँ</span><span style="font-size: 10pt;">। </span><br />
<span style="font-size: 10pt;">इसमें कोई दो मत ‍नहीं कि दादा ध्यानचंद की आत्मा आज जहाँ भी होगी, वह इस बदहाली पर आँसू बहा रही होगी। जिस शख्स ने हॉकी में भारत की पहचान स्थापित की, आज उनकी ही कर्म स्थति झाँसी के साथ देश भी  हॉकी से  अनाथ हो गया  है। </span></p>
<p><strong></strong><span><strong><span style="color: #333333;">परिचय</span></strong> -हॉकी के जादूगर दादा ध्यानचंद का जन्म प्रयाग (उत्तरप्रदेश) के राजपूत घराने में 29 अगस्त 1905 को हुआ था। उनके पिता सामेश्वर दत्त सिंह भारतीय फौज में सूबेदार थे। सेना में रहते हुए उन्होंने भी खूब हॉकी में अपने जौहर दिखाए। मूलसिंह और रूपसिंह ध्यानचंद के दो भाई थे। ध्यानचंद की तरह रूपसिंह का भी हॉकी का जाना-माना चेहरा थे। पिता के तबादले के कारण ध्यानचंद ढंग से किताबों में मन नहीं लगा सके। यही वजह थी कि छठी कक्षा के बाद ही उन्हें पढ़ाई को अलविदा कहना पड़ा। कालांतर में पूरा परिवार झाँसी आकर बस गया। </span><br />
<span style="color: #888888;"><br />
&#8211;<br />
Vikas Sharma<br />
Editor<br />
<a href="http://www.upnewslive.com/" target="_blank">www.upnewslive.com</a> , <a href="../../" target="_blank">www.bundelkhandlive.com</a> ,<br />
E-mail :<a href="mailto:editor@bundelkhandlive.com" target="_blank">editor@bundelkhandlive.com</a><br />
Ph-09415060119</span></p>
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		<title>बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जायें- मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती</title>
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		<pubDate>Sat, 28 Aug 2010 15:32:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>

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		<description><![CDATA[बाढ़ राहत काकार्यो के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 10 करोड़ रू0 अवमुक्त
बाढ़ में फंसे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए
क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलियों की मरम्मत के लिए 02 करोड़ रू0 अलग से जारी
पी0ए0सी0 को ढाई करोड़ रू0 33 नई रबराइज़ड बोट, मोटर बोट तथा अन्य जरूरी जीवन रक्षक उपकरणों हेतु उपलब्ध [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बाढ़ राहत का<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 10 करोड़ रू0 अवमुक्त</p>
<p>बाढ़ में फंसे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए</p>
<p>क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलियों की मरम्मत के लिए 02 करोड़ रू0 अलग से जारी</p>
<p>पी0ए0सी0 को ढाई करोड़ रू0 33 नई रबराइज़ड बोट, मोटर बोट तथा अन्य जरूरी जीवन रक्षक उपकरणों हेतु उपलब्ध कराये गये</p>
<p>बाढ़ पीड़ितों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाए तथा संक्रामक रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जाए</p>
<p>चरसरी बांध के कटाव की युद्धस्तर पर मरम्मत करायी जाए, सिंचाई मन्त्री तत्काल हवाई सर्वेक्षण कर बांध के कटाव से उत्पन्न स्थिति का जायजा लें</strong><br />
लखनऊ -   उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सम्बन्धित जिलों के स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे बाढ़ पीड़ितों को युद्धस्तर पर सुरक्षित स्थानों में राहत शिविरों में पहुंचाकर राहत सामग्री एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा है कि राहत या बचाव कार्य में शिथिलता बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।</p>
<p>सुश्री मायावती आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में बाढ़ राहत <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> की गहन समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि बाढ़ राहत <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 10 करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त की गई है और सभी जनपदों को आवश्यकतानुसार धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलियों की मरम्मत के लिए 02 करोड़ रूपये अलग से दे दिए गए हैं। इसके अलावा बचाव एवं राहत<span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> के लिए 33 नई रबराइज़ड बोट, मोटर बोट तथा अन्य जरूरी जीवन रक्षक उपकरणों की व्यवस्था हेतु पी0ए0सी0 को ढाई करोड़ रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी गई है।</p>
<p>मुख्यमन्त्री ने कहा कि बाढ़ राहत मद में धन की कोई कमी नहीं है। इसलिए आवश्यकता के अनुरूप नाव, मोटर बोट, खाद्य सामग्री और औषधियों की समुचित व्यवस्था की जाए और प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि बाढ़ के कारण जो लोग फंसे हों, उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।</p>
<p>सुश्री मायावती ने कहा कि उनके निर्देश पर प्रदेश के सिंचाई मन्त्री श्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बाढ़ प्रभावित बिजनौर, कांशीराम नगर, बलिया, गोण्डा तथा बहराइच जनपदों में राहत <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> की मौके पर समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि उनके निर्देशों के क्रम में शासन स्तर पर बाढ़ राहत एवं बचाव सम्बन्धी उपायों की समीक्षा मुख्य सचिव द्वारा विगत 25 अगस्त को की गई। उन्होंने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में कराये जा रहे राहत एवं बचाव <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> की नियमित समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार संसाधनों की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं।</p>
<p>मुख्यमन्त्री ने बन्धों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाराबंकी-गोण्डा जनपदों की सीमा पर स्थित परसावल गांव में चरसरी बांध में आज हुए कटाव की युद्धस्तर पर मरम्मत कराने का निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई मन्त्री को तत्काल हवाई सर्वेक्षण कर बांध के कटाव से उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित ग्रामों के निवासियों को त्वरित बचाव एवं राहत सहायता पहुंचाने के आदेश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से जहां भी नदियों में उफान के कारण बांध प्रभावित हुए हैं, उनकी भी मरम्मत करायी जाए। उन्होंने कहा कि कई बार बंधों के रख-रखाव में लापरवाही के कारण नदियों में बाढ़ के समय में बंधे टूट जाते हैं, जिससे कृषि योग्य भूमि एवं क्षेत्र की आबादी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि बंधों के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>
<p>सुश्री मायावती ने बाढ़ पीड़ितों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा संक्रामक रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को नामित करने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देशों के अनुपालन में बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर-खीरी, पीलीभीत, कांशीराम नगर, मेरठ तथा बाराबंकी जिलों के लिए अपर स्वास्थ्य निदेशकों को बाढ़ राहत शिविरों में चिकित्सा सुविधाओं का प्रबन्धन एवं अनुश्रवण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p>मुख्यमन्त्री ने बाढ़ प्रभावित जनपदों में जिलाधिकारियों के अधीन स्थापित बाढ़ नियन्त्रण कक्ष को और अधिक प्रभावी बनाने तथा यहां प्राप्त होने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी सड़कें एवं पुल बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करायी जाए, ताकि आवागमन में कोई असुविधा न हो और राहत कार्य सुचारू रूप से चल सके। उन्होंने कहा कि मरम्मत <span class="spanDispArea" style="font-size: 12px; line-height: 20px; font-family: Mangal,'Arial Unicode MS',Arial,Verdana,Helvetica,sans-serif;" lang="hindi">कार्यो</span> को कराने में कोई विलम्ब न हो, इसलिए सम्बन्धित मण्डलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को शासन द्वारा अधिकार प्रतिनिधानित कर दिए गए हैं, ताकि वे अपने स्तर से निर्णय लेकर तत्काल कार्य प्रारम्भ करा सकें। उन्होने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए आवश्यकतानुसार चारा की व्यवस्था करने तथा बीमारियों से बचाव के लिए अभियान चलाकर पशुओं का टीकाकरण कराने के निर्देश दिए।<br />
सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
मो0 9415508695<br />
upnewslive.com</p>
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