कुदरत  का  कहर  क़यामत  के  आने   की  दस्तक  है  पानी  ही  पानी. इस से भी ख़राब हालात होंगे २०१२ में   ये परिणाम है  कुदरत से खिलबाड़ का........ “Plant Trees to Save Environment” , *खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "bundelkhandlive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | विचार

वास्तु : बेडरूम से बढ़ाए दाम्पत्य सुख

Posted on 14 August 2010 by admin

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वास्तु शास्त्रियों का मानना है कि वास्तु में न सिर्फ सुख-समृद्धि के अपितु सुखद दाम्पत्य के सूत्र भी छिपे हैं। दाम्पत्य जीवन में बेडरूम काफी खास होता है। यदि बेडरूम में नीचे लिखे वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो दाम्पत्य जीवन कहीं अधिक सुखमय हो सकता है।
1-यदि आप दाम्पत्य जीवन में खुशी चाहते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम शांत, ठंड़ा, हवादार व बिना दबाव वाला होना चाहिए। बेडरूम में बेकार सामान नहीं होना चाहिए।
2-बेडरूम में निजता कायम रहे। इसके लिए ध्यान रखें कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले। शयन कक्ष की आवाज बाहर नहीं आना चाहिए। इससे दाम्पत्य जीवन में मिठास बढ़ती है।
3-शयन कक्ष में पेंट हल्का व अच्छा हो। दीवारों पर चित्र कम हों, चित्र मोहक होना चाहिए।
4-बेडरूम में पलंग आवाज करने वाला न हो तथा सही दिशा में रखा हो। सोते समय सिर दक्षिण की ओर होना चाहिए। आरामदायक व भरपूर नींद से दाम्पत्य जीवन अधिक सुखद बनता है।
5-बाथरूम बेडरूम से लगा हुआ होना चाहिए। बाथरूम का दरवाजा बेडरूम में खुलता हो तो उसे बंद रखना चाहिए। उस पर परदा भी डाल सकते हैं।
6-बेडरूम में पेयजल की सुविधा होना चाहिए ताकि रात को उठकर बाहर न जाना पड़े।
7- बेडरूम में प्रकाश की उचित व्यवस्था होना चाहिए। सोते समय जीरो वॉट का बल्ब जलाना चाहिए। रोशनी सीधी पलंग पर नहीं पडऩी चाहिए।

Vikas Sharma
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काल सर्प दोष में आते है ऐसे सपने

Posted on 14 August 2010 by admin

सपनों में बहुत सारी घटनाएं फिल्म के रुप में भी दिखाई देती हैं। जो कि सपने देखने वाले के लिए आने वाले भविष्य के संकेत होते हैं।

इन फिल्मों में दर्शक और नायक एक ही व्यक्ति होता है, वो होते हैं हम खुद। लेकिन क्या आप जानतें हैं कभी डरावने और कभी लुभावने आने वाले ये सपने हमें अपनी कुंडली में उपस्थित काल सर्प दोष के बारे में भी जानकारी देते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे स्वप्न संकेतों के बारे में जो आपकी पत्रिका या हाथ में पाए जाने वाले काल सर्प दोष की पुष्टी करते हैं।

23- सोते हुए सर्प को अपने शरीर की तरफ आते देख घबरा जाना।

- पानी पर तैरता हुआ सांप देखना।

- सपने में सांप को उड़ता हुआ देखना।

- सांप के जोड़े को हाथ पैरों में लिपटा हुआ देखना।

- सपने में असंख्य सांप दिखाई देना।

इस तरह के किसी भी स्वप्न का दिखाई देना आपके जीवन में काल सर्प दोष होने की और संकेत करता है, और ऐसे स्वप्नों के बार-बार दिखाई देने पर काल सर्प दोष की पूजा आवश्यक रुप से करनी चाहिये। इससे काल सर्प दोष की शांति के होने पर मानसिक शांति तो मिलती ही है साथ ही इस तरह के बुरे स्वप्न भी आने बंद हो जाते हैं।

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ऑफिस से ऐसे मिटाए वास्तु दोष

Posted on 14 August 2010 by admin

ऑफिस वह स्थान होता है जहां अनेक कर्मचारी एक ही स्थान पर मिलकर एक-दूसरे से सामंजस्य बनाकर कार्य करते हैं। यदि ऑफिस में वास्तु दोष हो तो उसके कर्मचारियों तथा कंपनी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऑफिस के वास्तु दोषों को नीचे लिखे उपायों से दूर किया जा सकता है-
1- कार्यालय के मुख्य प्रभारी का कक्ष सबसे पहले नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार के समीप किसी ऐसे सहायक का कक्ष हो जो आगन्तुकों को जानकारी उपलब्ध करवा सके।

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2- कार्यालय में किसी भी कमरे के दरवाजे के ठीक सामने टेबल नहीं होना चाहिए।
3- ऑफिस में हरे या गहरे रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह रंग रोशनी अधिक खाता है। सफेद, क्रीम या पीला जैसे हल्के रंग का उपयोग करना चाहिए।
4- कार्यालय में पानी की व्यवस्था ईशान कोण में करनी चाहिए। ईशान में पानी तब ही शुभ होगा, जब उसका संबंध जमीन से हो। यदि धरातल से ऊंचे स्थान पर पानी रखना हो तो अपनी सुविधानुसार किसी भी स्थान पर रख सकते हैं।
5- कैशियर को ऐसे स्थान पर नहीं बैठाना चाहिए, जहां से उसे कार्य करते हुए अधिकाधिक कर्मचारी देखें।
6- कुबेर का वास उत्तर दिशा में माना गया है इसलिए जहां तक संभव हो कैशियर को उत्तर दिशा में ही बैठाएं।

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क्या वाकई प्यार ,सेक्स और धोखा है

Posted on 23 July 2010 by admin

जब से छोटे परदे की महारानी एकता कपूर और दिवाकर बनर्जी की फिल्म प्यार धोखा और सेक्स की बाते शुरू है एक बार फिर से बाज़ार की गर्माहट बढ़ गई है. इस फिल्म का विषय पर लोग चर्चा करने से बचते है और युवा पीढ़ी को कोसना शुरू कर देते है उनकी सारी नैतिकता की दुहाई युवाओ से शुरू होती है और वही ख़तम हो जाती है. और लगे हाथ हम लग जाते है सुचना क्रांति को गरियाने . पर सोचिये क्या समाज मे होने वाली इन घटनाओ के लिए सिर्फ युवा पीढ़ी और नई क्रांति ही जिम्मेदार है. कुछ लोगो का मत है की आज का युवा सिर्फ मस्ती और रोमांच की दुनिया मे जीना चाहता है और सबसे पथ से भटकी हुई है. पर कौन है जो एकता और दिवाकर जैसे लोगो को इन युवाओ के कंधे पर रख कर बंदूक चलाने की इजाजत देते है आप और हम. क्यूंकि इन लोगो को संबंधो का तमाशा बनने मे मज़ा आता है, सेक्स जैसी चीज़ जो निहायत किसी का निजी मामला होता है और आपसी समझ पर आधारित है उसे कुछ लोगो की विकृत मानसिकता का शिकार बनते ज्यादा समय नहीं लगता है. इसका कारण है की शुरू से ही समाज मे लडकियो को सिर्फ उत्पादन की वस्तु समझा जाता है आप किसी भी घर मे देखो आपको मेरी कही बात का सबूत मिल जायेगा परिवार की इज्जत और मर्यादा को निभाने का सबक लड़कियो को घुट्टी की तरह पिलाया जाता है और लड़को को घर के बाहर इधर उधर मुह मरने की खुली छुट होती है उनके लिए अपनी बहन घर की इज्जत और दुसरो की बहन उपयोग की वस्तु. आखिर कौन है इन सब का जन्मदाता, यह दकियानुशी समाज, समाज के ये कथित ठेकेदार और परिवार का बंधन युक्त माहोलजरा सोचिये की आज  अगर परिवार का माहोल बंधन युक्त न हो कर खुशनुमा और दोस्ताना हो तो क्या युवा पीढ़ी घर के बाहर इस तरह छुपे कैमरे की पहुच मे इस तरह से आते रहेंगे. शायद नहीं क्यूंकि तब उन्हें यह पता होगा की परिवार की सुरक्षा और विश्वास उनके साथ है. बाकि सब दिखावा है. अभी तक हमारे ईद गिद अगर कोई घटना होती है तो उसका कसूरवार सिर्फ महिलाओ को बनाया जाता है. भले जुर्म मे लड़का बराबर का भागीदार हो पर उसकी इज्जत पर कभी आंच नहीं आती है. उसकी बदनामी नहीं होती है क्यूंकि वो लड़का अहि हमें इस भेदभाव पर काबू पाना ही होगा वरना एकता और उस जैसे कई और लोग इसे भारतीय समाज का सच बता कर अपनी दूकान चलते रहेंगे और इन घटिया चीजो को देखा कर युवाओ को बरगलाते रहेंगे. हमारे संस्कृति का पतन पश्चिमी विचार धरा से प्रभावित हो कर इतना नहीं होगा जितना इन जैसे लोगो की सोच से होगा. आप जरा यह सोचिये चाहे लड़का हो या लड़की अगर उससे जाने अनजाने कोई गलती होती है तो क्या वो अपने परिवार को बता सकता है नहीं क्यूंकि उसके मन मे यह डर बैठा होता है की उनकी स्वतंत्रा छीन जायेगे और उन्हें बेरियो मे बाँध दिया जायेगा. इस डर से उनका शोषण होता चला जाता है घर के बाहर और भीतर हर स्तर पर जब घर ही शोषण की शुरुआत कर दे तो बाहर क्यों शोषण नहीं होगा. और क्यू कोई mms और कोई video क्लिप नहीं बनेगी. सबसे पहले हमे अपने संस्कारों को मजबूत करना होगा विश्वास की नीव रख कर. तब कोई भी तकनीक कुछ भी बिगाड़ सकती. जरा सोचिये सिर्फ युवा ही नहीं समाज भी क्यूंकि प्यार कभी धोखा नहीं हो सकता है और जहा धोखा हो वोह प्यार नहीं आ सकता है.

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धरती का मौसम है 2010

Posted on 20 July 2010 by admin

धरती का वर्ष 2010 अपने साथ कई पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर आया है। यह वर्ष सबसे अधिक गर्म वर्ष बनने का रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर तो है, इसके साथ ही इस साल सबसे अधिक 17 तूफानों के आने की आशंका भी जताई जा रही है।
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फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी(एफएसयू) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यूनिक कम्प्यूटर मॉडल ने 2010 के तूफानों वाले वर्ष होने की भविष्यवाणी की है। एफएसयू के एसोसिएट स्कॉलर साइंटिस्ट टिम ला रॉ और उनके सहयोगियों के मुताबिक इस साल सबसे अधिक 17 तूफानों के आने की आशंका है। इनमें से अटलांटिक से उठने वाले कम से कम 10 तूफान भयंकर रूप धारण कर सकते हैं। इन सभी तूफानों के एक जून से 30 नवंबर के बीच आने की आशंका है। वैज्ञानिकों के अनुसार तूफानों के कारण पूर्वी अमरीका और खाड़ी देशों के तटीय क्षेत्रों में भू-स्खलन भी हो सकता है।

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धरती का मौसम है 2010

Posted on 16 July 2010 by admin

धरती का वर्ष 2010 अपने साथ कई पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर आया है। यह वर्ष सबसे अधिक गर्म वर्ष बनने का रिकॉर्ड बनाने की दहलीज पर तो है, इसके साथ ही इस साल सबसे अधिक 17 तूफानों के आने की आशंका भी जताई जा रही है।

फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी(एफएसयू) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यूनिक कम्प्यूटर मॉडल ने 2010 के तूफानों वाले वर्ष होने की भविष्यवाणी की है। एफएसयू के एसोसिएट स्कॉलर साइंटिस्ट टिम ला रॉ और उनके सहयोगियों के मुताबिक इस साल सबसे अधिक 17 तूफानों के आने की आशंका है। इनमें से अटलांटिक से उठने वाले कम से कम 10 तूफान भयंकर रूप धारण कर सकते हैं। इन सभी तूफानों के एक जून से 30 नवंबर के बीच आने की आशंका है। वैज्ञानिकों के अनुसार तूफानों के कारण पूर्वी अमरीका और खाड़ी देशों के तटीय क्षेत्रों में भू-स्खलन भी हो सकता है।


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सिगरेट छोड़ दो आईक्यू बढ़ाना है तो

Posted on 02 July 2010 by admin

अमेरिकी अध्ययन के मुताबिक धूम्रपान करने वालों की बौद्धिक क्षमता होती है कम

न्यूयॉर्क - अगर आप अपना आईक्यू बढ़ाना चाहते हैंए तो सिगरेट से नाता तोड़ लेने में ही भलाई होगी। एक नए अध्ययन के मुताबिक धूम्रपान करने वालों की बौद्धिक क्षमता धीरे.धीरे कम होती जाती है। अमेरिकी शोधकर्ता इस्त्राइली सेना के 20,000 से ज्यादा जवानों पर किए गए रिसर्च के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने पाया कि हम जितना ज्यादा धूम्रपान करते हैंए हमारा आईक्यू उतना ही कमजोर होता जाता है।

101 अंक रहा नॉन स्मोकर्स का आईक्यू
प्रमुख शोधकर्ता डा. मार्क वीजर के अनुसार रिसर्च में शामिल 28 फीसदी प्रतिभागी रोजाना कम से कम एक सिगरेट जरूर सुलगाते थे। बाकी चार फीसदी लोग स्मोकिंग से तौबा कर चुके थे, जबकि 68 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कभी सिगरेट को हाथ ही नहीं लगाया था। उन्होंने बताया कि आईक्यू टेस्ट में नॉन स्मोकर्स ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उनकी झोली में सर्वाधिक 101 अंक गिरे। वहींए कुछ माह पहले सिगरेट से दोस्ती करने वालों का आईक्यू लेवल 94 अंक पर रहा। वीजर की मानें तो जैसे-जैसे सिगरेट की संख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता कम हो जाती है। रोजाना एक या उससे ज्यादा पैकेट सिगरेट पीने वाले युवाओं का आईक्यूए धूम्रपान नहीं करने वालों की तुलना में 7ण्5 अंक कम था। औरों के मुकाबले ऐसे लोगों में तनाव की आशंका भी ज्यादा थी। उन्होंने ‘जरनल एडिक्शनश् में कम आईक्यू वाले प्रतिभागियों को धूम्रपान रोकथाम कार्यक्रम में शामिल किए जाने की हिदायत दी। ताकि वे धीरे-धीरे स्मोकिंग की लत से छुटकारा पा सकें।

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शादी के पहले योनि दुरुस्त कराएं!

Posted on 16 June 2010 by admin

शहरों में बढ़ा कृत्रिम कौमार्य पाने का चलन : भारतीय समाज में शादी से पहले लड़कियों में कौमार्य अनिवार्य सी शर्त मानी जाती है, और शायद इसीलिए पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित महानगरों में अब ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें लड़कियां सुंदर नैन नक्श की तरह ही कौमार्य भी कृत्रिम तौर पर हासिल कर रही हैं। आम तौर पर शारीरिक संबंधों, खेल संबंधी शारीरिक गतिविधियों या कभी किसी चोट के कारण योनि के भीतर की हायमन झिल्ली फट जाती है, जिसे दुरूस्त कराने की प्रक्रिया हायमेनोप्लास्टी कहलाती है। इस सर्जरी का उपयोग अब कृत्रिम तौर पर कौमार्य पाने के लिए भी किया जा रहा है।

क्या हायमेनोप्लास्टी के बढ़ते मामलों के पीछे महानगरीय संस्कृति भी एक बड़ा कारण है, इस सवाल के जवाब में मुंबई के कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ अनुराग तिवारी ने कहा कि निश्चित तौर पर, महानगरों में आज कल शादी से पहले शारीरिक संबंध आम बात हो गई है और इसी के चलते कई लड़कियां, जिनकी जल्द शादी होने वाली है, कॉस्मेटिक सर्जन का रुख करती हैं, ताकि शादी के पहले के शारीरिक संबंधों के बारे में भावी पति को पता न चले। हालांकि उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि लंबे समय तक खेलों और ऐसी ही अन्य शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं लड़कियां भी कई बार हायमेनोप्लास्टी कराती हैं।

डॉ़ तिवारी ने कहा कि हायमेनोप्लास्टी मुख्य तौर पर योनि में कसाव लाने की प्रक्रिया है। पहले शारीरिक संबंध के बाद हायमन झिल्ली फट जाती है, जिसे दोबारा दुरूस्त करने के लिए हायमेनोप्लास्टी की जाती है। इसकी जरूरत कई बार उन लड़कियों को भी पड़ती है, जो खेलों या एथलेटिक्स संबंधी गतिविधियों में शामिल होती हैं, ताकि शादी के बाद किसी तरह की गलतफहमी न पैदा हो। इस संबंध में दिल्ली के ख्यातिप्राप्त कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ पीके तलवार ने बताया कि पिछले कुछ सालों में हायमेनोप्लास्टी के मामलों में इजाफा हुआ है और जल्द शादी करने जा रही लड़कियां यह सर्जरी कराने से नहीं हिचक रहीं।

डॉ़ तलवार ने बताया कि निश्चित तौर पर लड़कियों और महिलाओं का हायमेनोप्लास्टी की ओर रुझान बढ़ा है। यह सर्जरी कराने वालों में हर वर्ग की महिलाएं शामिल हैं। कॉलेज जाने वाली लड़कियां, जिनकी शादी होने वाली है और कई तो शादीशुदा भी, इस सर्जरी से भावी जीवन का आनंद उठाने से नहीं हिचक रहीं। डॉ़ तलवार ने कहा शादीशुदा महिलाएं प्रसव के बाद भी कई बार इस सर्जरी का सहारा लेती हैं। कई महिलाएं ऐसी भी आती हैं, जिनकी शादी को 20 से भी ज्यादा वर्ष हो गए हैं और वे आगे भी वैवाहिक जीवन का भरपूर सुख उठाना चाहती हैं, इसलिए इस सर्जरी का विकल्प अपनाती हैं।

कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ मनीषा मनसुखानी उपचार की सुलभता को हायमेनोप्लास्टी के बढ़ते मामलों के पीछे का कारण मानती हैं। डॉ़ मनीषा ने बताया कि देर से शादी और सामाजिक तौर पर खुलेपन के कारण भी लड़कियां हायमेनोप्लास्टी कराती हैं। कॉस्मेटिक सर्जन ने बताया कि देर से शादी और ब्वॉयफ्रेंडस की लंबी फेहरिस्त अब सोशल स्टेटस सिंबल बन गए हैं। ऐसे में लड़कियों को हायमेनोप्लास्टी के रूप में एक आसान विकल्प मिल जाता है। मेडिकल तकनीक दिनों-दिन आसान होती जा रही है और इसका फायदा हर वर्ग उठा रहा है। डॉ़ मनीषा के मुताबिक इसके बाद भी कहा जा सकता है कि अब तक यह प्रक्रिया काफी हद तक उच्च या मध्यम वर्ग की महिलाओं के बीच ही सीमित है।


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गांधीजी की सेक्स लाइफ

Posted on 14 June 2010 by admin

gsexक्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स बीहैवियर वाले अर्द्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स-जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “गांधीः नैक्ड ऐंबिशन” में एक ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हवाले से ऐसा ही कहा गया है। महात्मा गांधी पर लिखी किताब आते ही विवाद के केंद्र में आ गई है जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उसकी मांग बढ़ गई है। मशहूर ब्रिटिश इतिहासकार जैड ऐडम्स ने पंद्रह साल के अध्ययन और शोध के बाद “गांधीः नैक्ड ऐंबिशन” को किताब का रूप दिया है।

किताब में वैसे तो नया कुछ नहीं है। राष्ट्रपिता के जीवन में आने वाली महिलाओं और लड़कियों के साथ गांधी के आत्मीय और मधुर रिश्तों पर ख़ास प्रकाश डाला गया है। रिश्ते को सनसनीख़ेज़ बनाने की कोशिश की गई है। मसलन, जैड ऐडम्स ने लिखा है कि गांधी नग्न होकर लड़कियों और महिलाओं के साथ सोते ही नहीं थे बल्कि उनके साथ बाथरूम में “नग्न स्नान” भी करते थे।

महात्मा गांधी हत्या के साठ साल गुज़र जाने के बाद भी हमारे मानस-पटल पर किसी संत की तरह उभरते हैं। अब तक बापू की छवि गोल फ्रेम का चश्मा पहने लंगोटधारी बुजुर्ग की रही है जो दो युवा-स्त्रियों को लाठी के रूप में सहारे के लिए इस्तेमाल करता हुआ चलता-फिरता है। आख़िरी क्षण तक गांधी ऐसे ही राजसी माहौल में रहे। मगर किसी ने उन पर उंगली नहीं उठाई। ऐसे में इस किताब में लिखी बाते लोगों ख़ासकर, गांधीभक्तों को शायद ही हजम हों। दुनिया के लिए गांधी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के आध्यात्मिक नेता हैं। वह अहिंसा के प्रणेता और भारत के राष्ट्रपिता भी हैं। जो दुनिया को सविनय अवज्ञा और अहिंसा की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।  कहना न होगा कि दुबली काया वाले उस पुतले ने दुनिया के कोने-कोने में मानव अधिकार आंदोलनों को ऊर्जा दी, उन्हें प्रेरित किया।

नई किताब यह खुलासा करती है कि गांधी उन युवा महिलाओं के साथ ख़ुद को संतप्त किया जो उनकी पूजा करती थीं और अकसर उनके साथ बिस्तर शेयर करती थीं। बहरहाल, ऐडम्स का दावा है कि लंदन से क़ानून की पढ़ाई करने के बाद वकील से गुरु बने गांधी की इमैज कठोर नेता की बनी जो अपने अनोखी सेक्सुअल डिमांड से अनुयायियों को वशीभूत कर लेता है।

पर लोग के लिए यह आचरण असहज हो सकता है पर गांधी के लिए सामान्य था। ऐडम्स ने किताब में लिखा है कि गांधी ने अपने आश्रमों में इतना कठोर अनुशासन बनाया था कि उनकी छवि 20वीं सदी के धर्मवादी नेताओं जैम्स वॉरेन जोन्स और डेविड कोरेश की तरह बन गई जो अपनी सम्मोहक सेक्स अपील से अनुयायियों को क़रीब-क़रीब ज्यों का त्यों वश में कर लेते थे। ब्रिटिश हिस्टोरियन के मुताबिक महात्मा गांधी सेक्स के बारे लिखना या बातें करना बेहद पसंद करते थे। किताब के मुताबिक हालांकि अन्य उच्चाकाक्षी पुरुषों की तरह गांधी कामुक भी थे और सेक्स से जुड़े तत्थों के बारे में आमतौर पर खुल कर लिखते थे। अपनी इच्छा को दमित करने के लिए ही उन्होंने कठोर परिश्रम का अनोखा स्वाभाव अपनाया जो कई लोगों को स्वीकार नहीं हो सकता।

किताब की शुरुआत ही गांधी की उस स्वीकारोक्ति से हुई है जिसमें गांधी ख़ुद लिखा या कहा करते थे कि उनके अंदर सेक्स-ऑब्सेशन का बीजारोपण किशोरावस्था में हुआ और वह बहुत कामुक हो गए थे। 13 साल की उम्र में 12 साल की कस्तूरबा से विवाह होने के बाद गांधी अकसर बेडरूम में होते थे। यहां तक कि उनके पिता कर्मचंद उर्फ कबा गांधी जब मृत्यु-शैया पर पड़े मौत से जूझ रहे थे उस समय किशोर मोहनदास पत्नी कस्तूरबा के साथ अपने बेडरूम में सेक्स का आनंद ले रहे थे।

किताब में कहा गया है कि विभाजन के दौरान नेहरू गांधी को अप्राकृतिक और असामान्य आदत वाला इंसान मानने लगे थे। सीनियर लीडर जेबी कृपलानी और वल्लभभाई पटेल ने गांधी के कामुक व्यवहार के चलते ही उनसे दूरी बना ली। यहां तक कि उनके परिवार के सदस्य और अन्य राजनीतिक साथी भी इससे ख़फ़ा थे। कई लोगों ने गांधी के प्रयोगों के चलते आश्रम छोड़ दिया। ऐडम ने गांधी और उनके क़रीबी लोगों के कथनों का हवाला देकर बापू को अत्यधिक कामुक साबित करने का पूरा प्रयास किया है। किताब में पंचगनी में ब्रह्मचर्य का प्रयोग का भी वर्णन किया है, जहां गांधी की सहयोगी सुशीला नायर गांधी के साथ निर्वस्त्र होकर सोती थीं और उनके साथ निर्वस्त्र होकर नहाती भी थीं। किताब में गांधी के ही वक्तव्य को उद्धरित किया गया है। मसलन इस बारे में गांधी ने ख़ुद लिखा है, “नहाते समय जब सुशीला निर्वस्त्र मेरे सामने होती है तो मेरी आंखें कसकर बंद हो जाती हैं। मुझे कुछ भी नज़र नहीं आता। मुझे बस केवल साबुन लगाने की आहट सुनाई देती है। मुझे कतई पता नहीं चलता कि कब वह पूरी तरह से नग्न हो गई है और कब वह सिर्फ अंतःवस्त्र पहनी होती है।”

किताब के ही मुताबिक जब बंगाल में दंगे हो रहे थे गांधी ने 18 साल की मनु को बुलाया और कहा “अगर तुम साथ नहीं होती तो मुस्लिम चरमपंथी हमारा क़त्ल कर देते। आओ आज से हम दोनों निर्वस्त्र होकर एक दूसरे के साथ सोएं और अपने शुद्ध होने और ब्रह्मचर्य का परीक्षण करें।” ऐडम का दावा है कि गांधी के साथ सोने वाली सुशीला, मनु और आभा ने गांधी के साथ शारीरिक संबंधों के बारे हमेशा अस्पष्ट बात कही। जब भी पूछा गया तब केवल यही कहा कि वह ब्रह्मचर्य के प्रयोग के सिद्धांतों का अभिन्न अंग है।

ऐडम्स के मुताबिक गांधी अपने लिए महात्मा संबोधन पसंद नहीं करते थे और वह अपने आध्यात्मिक कार्य में मशगूल रहे। गांधी की मृत्यु के बाद लंबे समय तक सेक्स को लेकर उनके प्रयोगों पर लीपापोती की जाती रही। हत्या के बाद गांधी को महिमामंडित करने और राष्ट्रपिता बनाने के लिए उन दस्तावेजों, तथ्यों और सबूतों को नष्ट कर दिया, जिनसे साबित किया जा सकता था कि संत गांधी दरअसल सेक्स मैनियैक थे। कांग्रेस भी स्वार्थों के लिए अब तक गांधी और उनके सेक्स-एक्सपेरिमेंट से जुड़े सच को छुपाती रही है। गांधीजी की हत्या के बाद मनु को मुंह बंद रखने की सलाह दी गई। सुशीला भी इस मसले पर हमेशा चुप ही रहीं।

किताब में ऐडम्स दावा करते हैं कि सेक्स के जरिए गांधी अपने को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध और परिष्कृत करने की कोशिशों में लगे रहे। नवविवाहित जोड़ों को अलग-अलग सोकर ब्रह्मचर्य का उपदेश देते थे। ऐडम्स के अनुसार सुशीला नायर, मनु और आभा के अलावा बड़ी तादाद में महिलाएं गांधी के क़रीब आईं। कुछ उनकी बेहद ख़ास बन गईं। बंगाली परिवार की विद्वान और ख़ूबसूरत महिला सरलादेवी चौधरी से गांधी का संबंध जगज़ाहिर है। हालांकि गांधी केवल यही कहते रहे कि सरलादेवी उनकी “आध्यात्मिक पत्नी” हैं। गांधी जी डेनमार्क मिशनरी की महिला इस्टर फाइरिंग को प्रेमपत्र लिखते थे। इस्टर जब आश्रम में आती तो बाकी लोगों को जलन होती क्योंकि गांधी उनसे एकांत में बातचीत करते थे। किताब में ब्रिटिश एडमिरल की बेटी मैडलीन स्लैड से गांधी के मधुर रिश्ते का जिक्र किया गया है जो हिंदुस्तान में आकर रहने लगीं और गांधी ने उन्हें मीराबेन का नाम दिया।

ऐडम्स ने कहा है कि नब्बे के दशक में उसे अपनी किताब “द डाइनैस्टी” लिखते समय गांधी और नेहरू के रिश्ते के बारे में काफी कुछ जानने को मिला। इसके बाद लेखक की तमन्ना थी कि वह गांधी के जीवन को अन्य लोगों के नजरिए से किताब के जरिए उकेरे। यह किताब उसी कोशिश का नतीजा है। जैड दावा करते हैं कि उन्होंने ख़ुद गांधी और उन्हें बेहद क़रीब से जानने वालों की महात्मा के बारे में लिखे गए किताबों और अन्य दस्तावेजों का गहन अध्ययन और शोध किया है। उनके विचारों का जानने के लिए कई साल तक शोध किया। उसके बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे।

इस बारे में ऐडम्स ने स्वीकार किया है कि यह किताब विवाद से घिरेगी। उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं इस एक किताब को पढ़कर भारत के लोग मुझसे नाराज़ हो सकते हैं लेकिन जब मेरी किताब का लंदन विश्वविद्यालय में विमोचन हुआ तो तमाम भारतीय छात्रों ने मेरे प्रयास की सराहना की, मुझे बधाई दी।” 288 पेज की करीब आठ सौ रुपए मूल्य की यह किताब जल्द ही भारतीय बाज़ार में उपलब्ध होगी। ‘गांधीः नैक्ड ऐंबिशन’ का लंदन यूनिवर्सिटी में विमोचन हो चुका है। किताब में गांधी की जीवन की तक़रीबन हर अहम घटना को समाहित करने की कोशिश की गई है। जैड ऐडम्स ने गांधी के महाव्यक्तित्व को महिमामंडित करने की पूरी कोशिश की है। हालांकि उनके सेक्स-जीवन की इस तरह व्याख्या की है कि गांधीवादियों और कांग्रेसियों को इस पर सख़्त ऐतराज़ हो सकता है।

लेखक हरिगोविंद विश्वकर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं. इस लेख का स्रोत ब्रिटिश अख़बारों में “गांधीः नैक्ड ऐंबिशन” के छपे रिव्यू और रिपोर्ताज हैं.


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पानी के लिए बेहाल देश………

Posted on 06 April 2010 by admin

बूंद-बूंद पानी को तरसता देश कोई लेकिन पानी की राजनीति ने प्रक्रति के इस स्वभाव को भुलाने की अक्षम्य गलती की है। इसलिए लोग बूंद-बूंद पानी के लिए बेहाल है। एक बड़ी गलती हमसे यह हुई कि हमने पानी रोकने के समय सिद्ध और स्वयं सिद्ध तरीकों को पुराना या परम्परागत कहकर छोड़ दिया।

भारत के पास विश्व की 2.45 प्रतिशत् धरती है और लगभग 17 प्रतिशत् आबादी। 1947 में देश के 223 गाव में पानी कम था। अब उनकी संख्या लगभग 90 हजार हो गई है। 90 प्रतिशत् ग्रामीण आबादी गहरे या उथले भूमिगत जल पर निर्भर है। देश की 80 प्रतिशत् आबादी भू-जल का अनियन्त्रण दोहन कर रही है। भारत वर्ष की आबादी दिन भर दिन बढ़ती ही जा रही है। परन्तु पानी के लिए आज तक सटीक कदम नहीं उठाया गया। जिससे आने वाले संकट से बचा जा सके।

हमारा देश कभी तो पानी की मार झेलता है तो कभी पानी की किल्लत को। अगर सही योजनाबद्ध तरीके से नदियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाए तो ना पानी की मार और न ही किल्लत का सामना करना पड़ेगा परन्तु हमारे देश के कई राजनीतिज्ञ ही विकास में सबसे बड़ी बाधा डालने वाले है जो काम 2 वर्ष मे पूरा होना चाहिए उसे 4 वर्ष से पहले पूरा होने ही नहीं देते। हमारे देश की विकास दर बहुत धीमी गति से चल रही है। अगर राजनीतिज्ञ विकास में रोड़ा न बने तो यह देश बहुत तेज गति से विकास करे। जिस तरह अन्य देश बहुत तेज गति से विकास कर रहे है। उदाहरणार्थ चीन की विकास दर भारत देश के मुकाबले में बहुत ज्यादा है परन्तु चीन का बहुत सारा भू-भाग लगभग 2/3 भाग जो कि निर्जन है कहने का तात्पर्य है कि वह भाग जहां पर लगभग सारा वर्ष बर्फ पड़ी रहती है जहां पर जीवन व्यतीत करना काफी कठिन है। लेकिन फिर भी चीन अपने विकास का झण्डा फहराये हुए है। पता नहीं कि हमारा देश भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की मार कब तक झेलेगा।


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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