Posted on 04 January 2010 by admin
देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक ऐसी शादी हुई जो शायद इससे पहले तक न ही तो देखी न ही सुनी गई। शादी से पहले बाकायदा इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज पर मैरिज प्रीमियर लीग का आयोजन किया गया।
बात हो रही है राजस्थान के दो परिवारों की। जिन्होंने अपने बच्चों की शादी के लिए न केवल देहरादून को चुना बल्कि शादी को यादगार बनाने के लिए क्रिकेट मैच का भी आयोजन किया। वर पक्ष की टीम को नाम दिया गया बंग इलेवन, जिसकी कमान स्वयं दूल्हे संदीप बंग ने संभाली। वधू पक्ष की टीम थी कालानी इलेवन जिसकी कमान सौंपी गई वधू छवि के भाई वैभव को। इसके लिए अभिमन्यु क्रिकेट अकादमी के ग्राउंड को चुना गया। दर्शक बने दोनों पक्षों की ओर से आए नाते-रिश्तेदार। आईपीएल की तर्ज पर ही मनोरंजन के लिए बाकायदा चीयर लीडर्स का इंतजाम भी हुआ। वर पक्ष ने टास जीतकर फील्डिंग चुनी। बंग इलेवन के कप्तान संदीप का यह निर्णय सही साबित हुआ। एक समय कालानी इलेवन 25 के योग पर छह विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी। ऐसे में दुल्हन के भाई वैभव ने 42 रन की नाबाद पारी खेलते हुए टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। कालानी इलेवन 93 रन पर सिमट गई। बंग इलेवन के लिए अंकित ने हैट्रिक बनाई। लक्ष्य का पीछा करने उतरी बंग इलेवन ने कप्तान संदीप के 41 रन की बदौलत लक्ष्य को 10 ओवर में सात विकेट शेष रहते हासिल कर लिया। छवि के उद्योगपति पिता ने बताया कि यह अपनी तरह की अनूठी पहल है। फिर शादी में सभी पारंपरिक रीति-रिवाज निभाए गए। छवि पेशे से टेक्सटाइल डिजाइनर है ओर दूल्हा संदीप साफ्टवेयर इंजीनियर। दोनों अमेरिका में रहते हैं। छवि ने बताया कि आम शादियों से हटकर कुछ करने की चाहत में इस आयोजन के लिए दून की धरती को चुना गया।
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Posted on 04 January 2010 by admin
हरिद्वार। पुण्य की चाह में गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं को अब डूबने का खतरा नहीं होगा। महाकुंभ स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए चार सौ जल पुलिस जवान व गोताखोर तैनात रहेंगे। हरकी पैड़ी सहित महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर राउंड द क्लाक नजर रहेगी। पुलिस को इसके लिए जरूरी आधुनिक उपकरण मुहैया कराए गए हैं।
महाकुंभ में खतरा केवल असामाजिक तत्वों का ही नहीं है, बल्कि गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं के असावधानी के कारण डूबने का खतरा भी रहता है। स्नान के समय लोग गंगा में काफी आगे निकल जाते हैं। नतीजतन पुण्य की चाह में गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालु कभी-कभी गंगा की असीम गहराइयों में समा जाते हैं। पिछले स्नान पर्वो के आंकड़े गवाह हैं कि अक्सर इस प्रकार की घटनाएं होती हैं। बहरहाल, महाकुंभ में डूबने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस बार मेला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। प्रशासन का आकलन है कि इस बार करीब पांच करोड़ श्रद्धालु गंगा स्नान को आएंगे, जिसे देखते हुए महाकुंभ के लिए करीब चार सौ जल पुलिस जवानों व गोताखोरों की तैनाती की गई है। पहला स्नान 14 जनवरी को है और जल पुलिस के जवान यहां पहुंच चुके हैं। जिन घाटों में श्रद्धालु ज्यादा संख्या में स्नान को आएंगे वहां अधिक जवान तैनात रहेंगे। प्रत्येक घाट के लिए अलग टीम बनाई गई है और हर टीम में 12 जवान रहेंगे। जल पुलिस को जरूरी संसाधन मुहैया करा दिये गये हैं। महाकुंभ में पहली बार इतनी बड़ी तादाद में गोताखोर व जल पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। इन गोताखोर को 18 बोट भी दी गई हैं। जिन मुख्य घाटों पर विशेष रूप से जल पुलिस व गोताखोर के जवान तैनात रहेंगे, उनमें हरकी पैड़ी कुशावर्त घाट, वीआईपी घाट, बिरला घाट, प्रेम आश्रम घाट, सिंहद्वार घाट, पुल जटवाड़ा घाट शामिल है। कुंभ मेला डीआईजी आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने तैयारी की है। जल पुलिस व गोताखोर के सभी जवान उत्तराखंड के ही हैं। इन जवानों में पीएसी के तैराक भी हैं।
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Posted on 04 January 2010 by admin
ऋषिकेश, कलयुगी बाबा ने तीन वर्ष से साथ रह रही विदेशी शिष्या पर तेजाब फेंक दिया। तेजाब से झुलसी स्पेनिश महिला को गंभीर अवस्था में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया है। जानकारी के मुताबिक, बार्सिलोना स्पेन निवासी ग्लोरिया 44 पत्नी एस्पानोला तीन वर्ष पूर्व भारत आई थी। जहां वह एक बाबा के संपर्क में आ गई। पिछले तीन वर्ष से राजगिरी नामक यह साधु विदेशी महिला को शिष्या बताकर साथ रखता था। मुनिकीरेती पुलिस को दी तहरीर में स्पेन निवासी ग्लोरिया ने बताया वे तीस दिसंबर को नेपाल गए थे। जहां से वह शनिवार को लौटे। रात्रि करीब साढ़े ग्यारह बजे जब वह एक आटो में ऋषिकेश से तपोवन जा रहे थे, तभी बाबा राजगिरी ने पास से एक एसिड का बर्तन निकाला और उसके चेहरे पर फेंक दिया। एसिड से उसका चेहरा, शरीर व पांव बुरी तरह से झुलस गए। बाबा ने ही उसे रात को राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया, जहां से चिकित्सकों ने सुबह महिला को हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।
कुसुम भट्ट
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Posted on 04 January 2010 by admin
पौड़ी गढ़वाल।(श्रीनगर) नगरपालिका मलेथा से फरासू तक दो सिटी बसों का संचालन कर रहा है। सिटी बसों से पालिका को अनुमान के अनुसार आय नहीं मिल पा रही है। इसके लिए पालिका अब इन बसों पर महिला परिचालकों की नियुक्ति करेगी। नगरपालिका बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सिटी बसों में महिला परिचालकों की नियुक्तियां की जाय। यह नियुक्तियां सार्वजनिक विज्ञप्ति के माध्यम से की जाएंगी। भक्तियाना में गैस गोदाम के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए नगरपालिका निशुल्क भूमि भी पुलिस विभाग को उपलब्ध कराएगी। खेत संख्या 442 में से 7 मीटर चौड़ी और 10 मीटर लंबी भूमि प्रस्तावित पुलिस चौकी के लिए दी जाएगी। बैठक में बताया गया कि श्रीयंत्र टापू शहीद स्मृति पार्क में स्मारक निर्माण के लिए तीन बार निविदाएं की गयी, लेकिन कोई भी उचित निविदा प्राप्त नहीं हुई। नगरपालिका बोर्ड ने निर्णय लेते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष में कम समय को देखते हुए अब स्मारक का निर्माण कार्य किसी अनुभवी भवन निर्माण ठेकेदार को इस शर्त पर दे दिया जाएगा। शहर में पानी के पाइप लाइनों से होने वाली पानी की लीकेज समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इस समस्या के समाधान के लिए पालिका सभासद सुधांशु नौडियाल को प्रभारी पेयजल पालिका परिषद नियुक्त किया गया है।
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Posted on 02 January 2010 by admin
उत्तराखंड (कुसुम भट्ट ) टिहरी गढ़वाल।
तीन दिवसीय टिहरी महोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या पर लोकगायक वीरू जोशी के गीतों ने समा बांधा।
टिहरी महोत्सव के अंतिम दिन प्रेस क्लब में आयोजित सांस्कृतिक संध्या पर चमोली जनपद के लोक गायक वीरू जोशी एंड पार्टी के गीतों ने समा बांधा। सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत जय हो, नंदा देवी तेरी जय हो से हुई। उसके बाद कालू का डांडा, तिलका तेरी लम्बी लटी, गोपेश्वर की बांद आदि गीतों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। इस अवसर पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता भागवत सिंह नेगी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चमोली प्रीतम सिंह रावत, हरीश ज्योति, नित्यानंद देवराड़ी, दीप प्रकाश नौटियाल, विकास जोशी, मदन सुयाल, जयानंद, प्रेस क्लब अध्यक्ष विक्रम बिष्ट, महामंत्री शिवानंद पांडेय, पूर्व अध्यक्ष गोविन्द बिष्ट आदि उपस्थित थे।
कुसुम भट्ट
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Posted on 02 January 2010 by admin
उत्तराखंड से कुसुम भट्ट-
टिहरी राजघराने का ग्वालियर, उदयपुर लबोह और झालावाड़ के साथ ही जयपुर राजघराने से भी पुराना रिश्ता रहा है। इसलिए आज भी टिहरी और उत्तरकाशी में जहां-तहां राजस्थानी कला संस्कृति की झलक मिलती है। अब ऐसी ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खोती जा रही है।
इतिहास बताता है कि तत्कालीन गढ़वाल रियासत में पाल वंश के अंतिम दौर में राजस्थान के पंवार वंश से रिश्ता जुड़ गया था। इसलिए राजस्थान के राजा महाराजाओं का गढ़वाल का आना-जाना लगातार बना रहता था। चूंकि उस दौरान संपूर्ण गढ़वाल के साथ उत्तरकाशी भी टिहरी रियासत का ही अंग था और गंगोत्री यात्रा का भी यह मुख्य पड़ाव था। इसलिए उस समय जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह ने उत्तरकाशी में काशीविश्वनाथ के साथ एकादश रुद्र मंदिर की स्थापना कर उत्तरकाशी को पूर्ण काशी का रूप देने वाला जयपुर मंदिर व धर्मशालाएं बनवाई। इनमें आज भी राजस्थानी कला की झलक साफ दिखाई देती है। विडंबना यह है कि इन ऐतिहासिक मंदिरों व धर्मशालाओं की ओर ना तो पर्यटन विभाग और ना ही स्थानीय प्रशासन का ध्यान जा रहा है। इसके चलते उत्तरकाशी पहुंचने वाले अधिकांश तीर्थयात्री व पर्यटक इनसे रूबरू नहीं हो पाते। स्थानीय विद्वतजनों ने 19 वीं सदी के अंत में तत्कालीन माहराजा नरेंद्रशाह के कार्यकाल में जयपुर के माहराजा सवाई माधो सिंह से मदद का अनुरोध किया। इस पर उन्होंने अपनी महारानी बारवा राठौर के नाम पर नागर शैली के मंदिर व धर्मशाला का निर्माण करवाया। वर्ष 1901 में हुआ यह निर्माण काफी भव्य था। इस दौरान गंगोत्री धाम सहित धराली में भी जयपुर धर्मशालाएं स्थापित की गई। किंतु बिना देखरेख के दोनों का ही अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग से संचालित एकादश रुद्र मंदिर भी उपेक्षा का शिकार होकर अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। प्रदेश सरकार की उपेक्षा के चलते लंबे समय से मंदिर का सौंदर्यीकरण तक नहीं हो पाया है। हालांकि हाल ही में राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग की ओर से मंदिर परिसर में सत्संग हाल का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे इसके जीर्णोद्धार की कुछ उम्मीदें बंधी हैं। ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व का होने के बावजूद पर्यटन विभाग या नगर पालिका के बोर्डो में इसे जगह नहीं दी जाती। वहीं अंधाधुंध अतिक्रमण भी प्रशासन की नजर में नहीं आ रहा है। इन्हीं कारणों के चलते इस मंदिर तक तीर्थयात्री व पर्यटक नहीं पहुंच पाते। इस संबंध में एसडीएम एसएल सेमवाल ने बताया कि कुछ दिन पहले राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग के प्रतिनिधि उत्तरकाशी पहुंचे थे। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण व विस्तारकरण की योजना बनाई है। अगले पर्यटक सीजन तक मंदिर का भव्य रूप सामने आने की उम्मीद है।
कुसुम भट्ट
Posted on 02 January 2010 by admin
उत्तराखंड से कुसुम भट्ट
गोपेश्वर। अप्रतिम शक्ति और भगवान राम की अनन्य भक्ति के प्रतीक पवन पुत्र हनुमान का आशीर्वाद कौन नहीं चाहता, लेकिन उत्तराखंड के जिला चमोली का एक गाव ऐसा भी है, जहा हनुमान की पूजा करना तो दूर, उनका नाम लेने तक से लोग कतराते हैं। हालाकि, गाव में भगवान राम की पूजा की जाती है, लेकिन रामलीला मंचन के दौरान हनुमान जी से जुड़ा कोई भी दृश्य नहीं दिखाया जाता। दरअसल यह गाव उस द्रोणागिरी पर्वत पर बसा है, जिसका बड़ा हिस्सा पवनसुत संजीवनी बूटी पहचान न पाने के कारण उखाड़ ले गए थे। यही वजह है कि स्थानीय लोग उन्हें अपना पहाड़ उजाड़ने का दोषी मानते हैं। चमोली जिले के जोशीमठ विकास खंड अंतर्गत द्रोणागिरी पर्वत की तलहटी पर द्रोणागिरी नामक गाव बसा हुआ है। इस गाव के लोग हनुमान जी की पूजा नहीं करते। ग्रामीणों का कहना है कि जब से हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर गए, तभी से यह नाराजगी चली आ रही है। मान्यता है कि लक्ष्मण के मूर्छित होने पर सुषेण वैद्य ने हनुमान जी को जीवनदायिनी संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत पर भेजा था। वहा जाते वक्त रास्ते में द्रोणागिरी गाव में हनुमान जी को एक वृद्ध महिला मिली, जिसने न सिर्फ उन्हें द्रोणागिरी पर्वत तक पहुंचने का रास्ता दिखाया, बल्कि पर्वत के संजीवनी बूटी वाले हिस्से से भी अवगत कराया। इसके बाद हनुमान पर्वत का एक हिस्सा उखाड़कर अपने साथ ले गए। द्रोणागिरी गाव के लोग मानते हैं कि दाया कंधा उखड़ जाने पर तभी से द्रोणागिरी पर्वत [जिसे वे पर्वत देवता कहते हैं] को पीड़ा होती रहती है। ग्रामीण इसका जिम्मेदार हनुमान को मानते हुए नाराज हैं और उनकी पूजा नहीं करते। खास बात यह है कि सदियों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक ये ग्रामीण आज भी पर्वत देवता का घाव जल्दी भरने के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन प्रार्थना में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता। इसकी वजह यह कि एक बुजुर्ग महिला ने ही हनुमानजी को द्रोणागिरी पर्वत का रास्ता दिखाया था। द्रोणागिरी गाव के निवासी दर्शन सिंह रावत के अनुसार गाव में वर्षो पूर्व रामलीला आयोजित की गई थी, लेकिन इसमें हनुमान का दृश्य न आए, इसके लिए धनुष यज्ञ से आगे का मंचन नहीं किया गया। गाव के पूर्व प्रधान बाला सिंह रावत इसे ग्रामीणों के प्रकृतिप्रेम व आस्था से जोड़ते हैं। वह कहते हैं कि पर्वत के उखड़ने से स्थानीय लोगों के कई प्राकृतिक संसाधन, जड़ी-बूटिया नष्ट हो गए थे, यही वजह है कि गाववालों की हनुमान के प्रति नाराजगी आज भी कायम है।…………

post by..कुसुम भट्ट