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राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के गठन को मंजूरी

Posted on 04 September 2010 by admin

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिद् की बैठक में निम्न निर्णय लिए गए

लखनऊ -  उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिद् ने आज राज्य वन विकास अभिकरण के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। साथ ही मन्त्रिपरिद् ने राज्य वन विकास अभिकरण का गठन सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के अन्तर्गत किए जाने तथा सोसाइटी के मेमोरेण्डम ऑफ एसोसिएशन एवं नियमावली को भी अनुमोदित कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश में वन क्षेत्रों के कुछ भागों का संरक्षण संवर्धन एवं विकास स्थानीय ग्रामवासियों के साथ सहभागी प्रबन्धन से किया जा रहा है। इसके लिए वित्त पोण राश्ट्रीय वनीय कार्यक्रम के तहत राश्ट्रीय वनीकरण एवं पारिस्थितिकीय विकास बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। अब इस कार्यक्रम के संशोधित संचालन मार्ग निर्देश में राज्य स्तर पर वन विकास अभिकरण के गठन करने के निर्देश हैं।

प्रस्तावित राज्य वन विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश के समस्त प्रभागों के वन विकास अभिकरणों के संघ के रूप में कार्य करेगा। पूर्व में प्रभागों द्वारा वन विकास अभिकरण के प्रस्ताव भारत सरकार को अलग-अलग प्रेशित किए जाते थे। वर्तमान निर्देश के अनुसार समस्त वन प्रभागों से सम्बन्धित प्रस्ताव संहत रूप से भारत सरकार को प्रेशित किया जाना है। पूर्व में भारत सरकार द्वारा वित्त पोण सीधे प्रभाग स्तरीय वन विकास अभिकरण को किया जाता था। अब नए मार्ग निर्देश के अनुसार प्रदेश स्तर पर धनरािश भारत सरकार द्वारा राज्य वन विकास अभिकरण को उपलब्ध करायी जायेगी।

लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तिशल्पियों व निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनायें बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर देने का निर्णय

मन्त्रिपरिषद ने लघु उद्यमियों, विशिष्ट हस्तशिल्पियों तथा निर्यात प्रोत्साहन हेतु संचालित पुरस्कार योजनाओं का नामकरण बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों के नाम पर किये जाने का निर्णय लिया है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से जानी जायेगी। विशिष्ट हस्त शिल्पियों को दिये जाने वाला प्रादेशिक पुरस्कार योजना भी अब `बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर विशिष्ट हस्तशिल्पी प्रादेशिक पुरस्कार योजना` के नाम से होगी। इसी प्रकार निर्यात पुरस्कार योजना का नाम `मान्यवर श्री कांशीराम निर्यात पुरस्कार योजना` कर दिया गया है।

ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य हैं। प्रदेश के लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा प्रदेश के लघु उद्यमियों को लघु उद्योग पुरस्कार, हस्तशिल्पियों को हस्तशिल्प पुरस्कार एवं निर्यातकों को निर्यात पुरस्कार दिये जाने की योजना विद्यमान है। राज्य सरकार ने इन पुरस्कारों को बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर तथा मान्यवर श्री कांशीराम जी जैसे महानुभावों की स्मृति स्वरूप, इनके नाम पर संचालित करने का फैसला किया है। इन महानुभावों का देश व समाज के उन्नयन में बहुमूल्य योगदान रहा है। मन्त्रिपरिद के निर्णय से जहां एक ओर  इन पुरस्कार योजनाओं का मान बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर इन पुरस्कारों को पाने वाले व्यक्ति स्वयं को गौरवािन्वत महसूस करेंगे।

कृशि विश्वविद्यालयों एवं डीम्ड विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग को पुनरीक्षित वेतनमान देने का निर्णय

मन्त्रिपरिद् ने आज कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ, फैजाबाद, कानपुर एवं इलाहाबाद एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट (डीम्ड विश्वविद्यालय) इलाहाबाद के शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग को छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप वेतनमान पुनरीक्षित करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षकों/समकक्षीय संवर्ग के वेतनमानों का 01 जनवरी, 2006 से पुनरीक्षण कृषि मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र दिनांक 13 मार्च, 2009 के अनुसार होगा। वेतनमानों का पुनरीक्षण उन्हीं मामलों में अनुमन्य होगा, जिनमें 01 जनवरी, 2006 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिद के देय वेतनमान पा रहे थे। पुनरीक्षण वेतनमान का लाभ 01 जनवरी, 2006 से देय होगा तथा अन्य भत्ते उसी प्रकार दिए जायेंगे, जैसा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को स्वीकृत किये जाते हैं।

मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार नए वेतनमानों में नोशनल फिक्सेशन कर भुगतान 01 दिसम्बर, 2008 से देय होगा। पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर भुगतान के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया है कि 01 जनवरी, 2006 से 30 नवम्बर, 2008 तक के अवशेश/अन्तरवेतन का भुगतान तभी अनुमन्य होगा, जब आई0सी0ए0आर0 (भारत सरकार) दिनांक 01 जनवरी, 2006 से दिनांक 31 मार्च, 2010 तक की अवधि के एरियर के व्यय भार का 80 प्रतिशत वहन करने के लिए सहमति प्रदान करते हुए इस हेतु देय धनरािश अवमुक्त कर दे। देय अवशेश धनराशि का आधा भुगतान वर्ष 2010-11 में एवं शेश आधा भुगतान वर्ष 2011-12 में किया जायेगा। भुगतान की पद्धति राज्य कर्मचारियों के समान ही होगी।

अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु शिक्षण शुल्क का निर्धारण
मन्त्रिपरिषद द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं ( इन्जीनियरिंग कालेज) में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में वर्तमान में लागू शुल्क दरों को संशोधित किये जाने के प्रस्ताव को मन्जूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार सरकार द्वारा अनुदानित समस्त अभियन्त्रण संस्थाओं में, एन0आर0आई कोटे की पांच प्रतिशत सीटों को छोड़ते हुए शिक्षण सत्र 2010-11 से बी0 टेक, बी0 आर्क, बी0फार्मा आदि के लिये 40 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार एम0सी0ए0, एम0बी0ए0, एम0टेक के लिए 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष शुल्क निर्धारित किया गया है। इस शुल्क में छात्रावास शुल्क तथा परीक्षा शुल्क सम्मिलित नहीं है। छात्रावास शुल्क संस्थाओं द्वारा नियमानुसार अपनी अधिशाशी समिति के माध्यम से निर्धारित की जायेगी। परीक्षा शुल्क प्राविधिक विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित किया जायेगा।

यह शुल्क ऐसे छात्रों से लिया जायेगा, जो शिक्षण सत्र 2010-11 में प्रवेश लेंगे। शिक्षण सत्र 2010-11 से पूर्व के छात्रों पर पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। पिछले शिक्षण सत्र में प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्र जो या तो फेल हो गये हैं या किसी अन्य कारण से परीक्षा नहीं दे सके हैं और पुन: सत्र 2010-11 में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेते हैं, उन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू होगी।

एन0आर0आई0 की अधिकतम पांच प्रतिशत सीटों पर अधिकतम शुल्क 07 हजार यू0एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रति वर्ष होगा। इसके अलावा प्रवेश के समय छात्रों से एक बार पांच हजार रू0 की धनराशि प्रतिभूति के रूप में ली जायेगी, जो पाठ्यक्रम के अन्तिम वर्ष के समाप्त होते ही सम्बंधित छात्र को नियमानुसार वापस कर दी जायेगी।

राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस का निर्धारण भविश्य में आवश्यकता/औचित्य को देखते हुए संस्थान की प्रशासकीय परिद द्वारा किया जायेगा।
ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अभियन्त्रण संस्थाओं में बी0टेक0, बी0आर्क तथा बी0 फार्मा पाठ्यक्रमों हेतु 25 हजार रू0 प्रति छात्र प्रतिवर्ष, समस्त स्नात्कोत्तर पाठ्यक्रम हेतु 17 हजार रू0 प्रति छात्र प्रति वर्ष तथा एन0आर0 आई0 सीट हेतु पांच हजार यू0 एस0 डॉलर प्रति छात्र प्रतिवर्ष फीस वर्ष 2003 में निर्धारित की गई थी। अभियन्त्रण संस्थाओं को प्राप्त होने वाला अनुदान वर्ष 1998-99 से फ्रीज है। पिछले सात वर्षो में मुद्रा स्फीति की दरों तथा विभिन्न उपकरणों एवं अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में हुई वृद्धि एवं छठे वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू किये जाने से वित्तीय भार में हुई बढोत्तरी को दृिश्टगत रखते हुए राज्य सरकार ने पूर्व निर्धारित शुल्क को पुनरीक्षित करने का फैसला किया है।
01 अप्रैल, 2005 के पूर्व राज्य सरकार के अधीन किसी पेंशनयुक्त सेवा संवर्ग में नियुक्त ऐसे कर्मी जो 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पेंशनयुक्त सेवा में नियुक्त हों, को पुरानी परिभाशित लाभ पेंशन योजना से आच्छादित माने जाने की अनुमति

उत्तर प्रदेश मन्त्रिपरिद ने आज राज्य कर्मचारियों की पेंशन से सम्बन्धित एक मसले पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिसके तहत ऐसे सभी कर्मचारी जिन्होंने राज्य सरकार की अथवा ऐसे समस्त शासन के नियन्त्रणाधीन स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं, जिनमें राज्य कर्मचारियों की पेंशन योजना की भान्ति पेंशन योजना लागू थी और उनका वित्त पोशण राज्य सरकार की समेकित निधि से किया जाता है, की पेंशनयुक्त सेवा में 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात राज्य सरकार की अथवा शासन के नियन्त्रणाधीन उक्त उिल्लखित स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं की पेंशनयुक्त सेवा में अपनी पूर्व सेवा से कार्यमुक्त होकर अथवा तकनीकी त्यागपत्र देकर नियुक्त होते हैं, तो उसी पेंशन योजना से आच्छादित माने जायेंगे, जिस पेंशन योजना से वे दिनांक 01 अप्रैल, 2005 के पूर्व आच्छादित थे।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने 01 अप्रैल, 2005 को अथवा इसके पश्चात नई भर्तियों से आने वाले कर्मियों पर नई परिभाशित अंशदायी पेंशन योजना अनिवार्य रूप से लागू किया है।
उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम का नाम परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किया गया

मन्त्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सचिवालय खान-पान निगम के नाम को परिवर्तित कर उ0प्र0 सचिवालय सत्कार सेवा संस्था किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स, इको फ्रेण्डली व बीज शोधक रसायनों पर वर्ष 2010-11 में अनुदान दिये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मन्त्रिपरिषद ने बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों पर वर्ष 2010-11 में अनुदान दिये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। यह अनुदान वित्तीय वर्ष 2009-10 की भान्ति दिया जायेगा।
मन्त्रिपरिषद के फैसले के अनुसार लघु एवं सीमान्त कृशकों को बायो पेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।

अनुसूचित जाति/जन जाति के कृषकों को बायोपेस्टीसाइड्स तथा बायो एजेन्ट्स पर 90 प्रतिशत तथा इको फ्रेण्डली रसायनों पर 75 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इस श्रेणी के कुल लाभार्थियों में भी 30 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
बीज शोधक रसायनों पर कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य होगा।  25 प्रतिशत लाभार्थी अनुसूचित जाति/जनजाति के होंगे जिनमें महिला लाभार्थी 30 प्रतिशत होंगी।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा बायोपेस्टीसाइड्स, बायो एजेन्ट्स तथा इको फ्रेण्डली एवं बीज शोधक रसायनों की खपत में बढ़ोत्तरी के लिए इन पर अनुदान की योजना लागू की गई। इस योजना के लागू होने से फसलों में कीट/रोग नियन्त्रण की नई तकनीक को बढ़ावा मिला है।
उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित

मन्त्रिपरिषद ने उ0प्र0 अधिनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2010 प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) संवर्ग एक अधीनस्थ अराजपत्रित सेवा है, जिसमें राजकीय विद्यालयों में विभिन्न विषयों का अध्यापन कार्य सम्पादित करने वाले सहायक अध्यापक/सहायक अध्यापिका के पद सम्मिलित है। इस वर्ग के शिक्षकों के लिए उ0प्र0 अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 तथा उसका प्रथम संशोधन 1992 प्रख्यापित की गई थी।

नियम-8 (यथा संशोधित) में प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी के अध्यापकों के विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती की शैक्षिक अहर्तायें निर्धारित हैं। सीधी भर्ती के वर्तमान अहर्ताओं में डा0 शकुन्तला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा प्रदत्त बी0एड0 (विशेष शिक्षा) की अहर्ता को कतिपय पदों की सीधी भर्ती की अहर्ता में सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित था। यह संशोधन विकलांगों को सेवा योजन का अवसर प्रदान किये जाने के उद्देश्य से किया गया था।

सीधी भर्ती की प्रक्रिया सम्बन्धी नियमों में आवेदन पत्र के साथ ली जाने वाली फीस निर्धारित है। वर्तमान में यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के अभ्यर्थियों के लिए 5 रूपये तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए 15 रूपये निर्धारित है। यह फीस अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 40 रूपये तथा अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए 100 रूपये प्रस्तावित किया गया।

उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर अग्रिम अनुमन्य किए जाने का निर्णय

मन्त्रिपरिद् ने आज उत्तर प्रदेश वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर राज्य कर्मचारियों को भवन निर्माण/क्रय, भवन मरम्मत/विस्तार, मोटर कार/मोटर साइकिल/स्कूटर/मोपेड तथा व्यक्तिगत कम्प्यूटर क्रय हेतु अग्रिम अनुमन्य किए जाने की मंजूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिद् द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार भवन निर्माण/क्रय हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 7.50 लाख अथवा भवन की लागत, जो भी कम हो, भवन मरम्मत/विस्तार हेतु वेतन बैण्ड में 34 माह का वेतन या अधिकतम रूपये 1.80 लाख अथवा विस्तार की लागत, जो भी कम हो, को अनुमति प्रदान कर दी गई है। इसी प्रकार मोटर कार अग्रिम हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 19,530 या अधिक की पात्रता निर्धारित की गई है। मोटर साइकिल/स्कूटर हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 8,560 या अधिक तथा मोपेड/आटो साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 5,060 या अधिक पाने वाले कर्मचारियों को अग्रिम देने का निर्णय लिया गया है। साइकिल हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 9,300 या कम की पात्रता निर्धारित की गई है। व्यक्तिगत कम्प्यूटर अग्रिम हेतु वेतन बैण्ड में वेतन रूपये 14,880 या अधिक पाने वाले कर्मियों की पात्रता निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है।

ज्ञातव्य है कि विभिन्न अग्रिमों की अधिकतम अनुमन्य राशियों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। अग्रिमों से सम्बन्धित यह सभी निर्णय केन्द्र सरकार के वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर लिए गए हैं।

विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परिद एवं विकास प्राधिकरणों में कार्यरत वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को विनियमित करने का निर्णय

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में विभिन्न विभागों, नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में वशZ 1991 के पूर्व नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विनियमित करने का निर्णय लिया गया है।

मन्त्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार विभिन्न विभागों में नियुक्त/कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अधिसंख्य पद सृजित किये जायेंगे। इस निर्णय से सरकार पर लगभग 20 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा।

इसी प्रकार नागर निकायों, आवास-विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में कार्यरत समस्त वर्कचार्ज तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, जिनकी नियुक्ति 1991 से पहले की है, को सम्बंधित संस्थाओं में अधिसंख्य पद सृजित करते हुए विनियमित किया जायेगा। इन कर्मियों के विनियमितीकरण से स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों पर लगभग 60 करोड़ रूपये का वार्शिक अतिरिक्त व्यय भार आयेगा, जिसे सम्बंधित निकाय/प्राधिकरण द्वारा वहन किया जायेगा।

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में लगभग 10 हजार वर्कचार्ज तथा 9़800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्ष 1991 के पहले से कार्यरत है। इसी प्रकार नागर निकायों में लगभग 03 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, आवास-विकास परिशद तथा विभिन्न प्राधिकरणों में लगभग 03 हजार वर्कचार्ज और एक हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी वर्ष 1991 से पूर्व कार्य कर रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों में से अधिकांश को मा0 उच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशो के तहत न्यूनतम वेतन तथा उस पर देय भत्ता प्रदान किया जा रहा है। यह भी ज्ञातव्य है कि शासन द्वारा 29 जून, 1991 के पश्चात् दैनिक वेतन अथवा वर्कचार्ज पर नियुक्ति प्रतिबन्धित है।

राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 5200-20200 रू0 वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड-पे देने का निर्णय

सरकार के इस निर्णय से 3 लाख कर्मचारी लाभािन्वत होंगे

उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के तहत केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 रूपये वेतन बैण्ड तथा 1800 रूपये का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया गया है।

मन्त्रिपरिषद के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 03 लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च वेतन बैण्ड का लाभ मिलेगा, जिस पर लगभग 350 करोड़ रूपये का वार्शिक व्यय भार आयेगा। भारत सरकार की भान्ति राज्य सरकार द्वारा समस्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तात्कालिक प्रभाव से नई भर्ती नहीं करने का निर्णय लिया है।

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 रूपये का वेतन बैण्ड तथा 1300 रूपये ग्रेड पे रिप्लेसमेंट के रूप में दिया जा रहा है। वेतन समिति द्वारा यह संस्तुति की गई थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 का वेतन बैण्ड दिया जाय तथा ग्रेड पे 1300 रूपये से बढ़ाकर 1400 रूपये किया जाये तथा इनके ऊपर वाले वेतन में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिनकी संख्या लगभग 30 हजार होगी, को केन्द्र सरकार की भान्ति 5200-20200 वेतन बैण्ड एवं 1800 ग्रेड पे के रूप में दिया जाये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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चित्रकूट में भाजपा का चिन्तन शिविर का नितिन गडकरी ने किया शुभारम्भ

Posted on 28 August 2010 by admin

भाजपा के कई दिग्गज नेताओं व मन्त्रियों का लगा जमावडा1-4

चित्रकूट- भाजपा का तीन दिनी चिन्ता शिविर दीनदयाल शोध संस्थान परिसर प्रारम्भ हुआ । शिविर का विधिवत उद्धाटन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने किया।

इसके अलावा राश्ट्रीय संगठन मन्त्री रामलाल जी, उत्तर प्रदेश संगठन मन्त्री नगेन्द्र जी,म0प्र मुख्य मन्त्री शिवराज सिंह चौहान, म0प्र0 संगठन मन्त्री माखन, व अन्य राज्यों के संगठन मन्त्री और प्रान्त संगठन मन्त्री सहित भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, चन्द्रप्रकाश खरे, लवकुश चतुर्वेदी, राम औतार तिवारी इस अभ्यास वर्ग की शुरुवात में शामिल रहे।

पहले दिन विभिन्य राज्यों से आये पदाधिकारीयों ने चर्चा की । आगे आने वाले चुनाव और अयोध्या मुद्दे को देखते हुये चिन्तन शिविर महत्वपूर्ण माना जा रहा है इसमें देश सभी राज्यों से संगठन मन्त्री के रुप में 185 सदस्य प्रमुख रुप से हिस्सा लेगे।

भाजपा अध्यक्ष गडकरी ने इस कार्यक्रम की शुरुवात की और आगे आने वाले विधान सभा चुनाव में जोर देते हुुये पार्टी की मजबूती के लिये विशेश बल दिया। दो साल के अन्दर होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाने व पिछले लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा को अभ्यास वर्ग के रुप में भाजपा का चिन्ता शिविर की शुरुवात की।

इसके बाद भाजपा अध्यक्ष व म0प्र0 मुख्यमन्त्री सहित कई मन्त्री ग्रामोदय विश्व विद्यालय में नाना जी के छठमासिक श्राद्व कार्यक्रम में शामिल हुये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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अधिवक्ता गरीबों, पीड़ितों और शोषितों को न्याय दिलाने में मदद करें - सतीश चन्द्र मिश्रा

Posted on 21 August 2010 by admin

बच्चे राष्ट्र की धरोहर हैं - अध्यक्ष, राज्य सलाहकार परि

लखनऊ -     उत्तर प्रदेश राज्य सलाहकार परिद के अध्यक्ष श्री सतीश चन्द्र मिश्रा ने कहा है कि अधिवक्ता को गरीबों, पीड़ितों और शोषितों को न्याय दिलाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि कानूनी किताबें अधिवक्ताओं को मुकदमों की तैयारी करने में बेहद मददगार होती हैं, इस कार्य में पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

श्री मिश्रा आज बख्शी का तालाब तहसील परिसर में नवनिर्मित जस्टिस त्रिवेणी सहाय मिश्र अधिवक्ता पुस्तकालय भवन के लोकार्पण समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने अधिवक्ताओं के लिए विधि विशयक पुस्तकों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तकालय वकीलों तथा विधि छात्रों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे पुस्तकालय को समृद्ध बनाने में हर सम्भव मदद करेंगे।

राज्य सलाहकार परिद के अध्यक्ष ने आज ही जस्टिस त्रिवेणी सहाय शिक्षा निकेतन, इटौंजा तथा महाराजा टीकन नाथ शिक्षा निकेतन, मुसपिपरी के भवन का लोकार्पण भी किया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने आदर्श नगर योजना के अन्तर्गत नगर पंचायत, इटौंजा के वार्ड संख्या-7, 3, 2 तथा 9 में इण्टर लॉकिंग सर्फेस ड्रेन, के0सी0 ड्रेन, आर0सी0सी0 ड्रेन कवर तथा वार्ड संख्या-8 में बिटुमिन रोड, सर्फेस ड्रेन तथा नगर पंचायत, बख्शी का तालाब की पेयजल योजना का भी शिलान्यास किया।

जस्टिस त्रिवेणी सहाय शिक्षा निकेतन परिसर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार सभी की शिक्षा के लिए कटिबद्ध है और अपने सीमित संसाधनों से हर सम्भव प्रयास कर रही है। इसके साथ ही संविधान निर्माता डॉ0 भीमराव अम्बेडकर एवं मान्यवर श्री कांशीराम जी ने जो शिक्षा के माध्यम से स्वावलम्बन की परिकल्पना की थी, उसको साकार करने के लिए बच्चों, खासतौर से समाज के दबे-कुचले एवं वंचित वर्गों को शिक्षित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा निकेतन बच्चों में अच्छे संस्कारों का विकास करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा और इस क्षेत्र के दूर-दराज के बच्चे यहां शिक्षित होकर राश्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके पूर्वजों की कर्म भूमि रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस क्षेत्रों से शिक्षा के लिए किया गया छोटा सा प्रयास नििश्चत रूप से आस-पास की जनता के लिए उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि बच्चे राश्ट्र की धरोहर हैं।

इस अवसर पर प्रदेश के नगर विकास, पर्यावरण एवं मनोरंजन कर मन्त्री श्री नकुल दुबे मौजूद थे। बख्शी का तालाब तहसील में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के महाधिवक्ता श्री ज्योतिन्द्र मिश्रा, नगर आयुक्त सहित गणमान्य नागरिक एवं शासन एवं प्रशासन के वरिश्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695

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बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर की भयंकर स्थिति….

Posted on 31 July 2010 by admin

(विकास कुमार शर्मा )

झाँसी। ‘मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की’। बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर की यही स्थिति है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर के उपलब्ध कराए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। तीन जनपदों के कुछ स्थानों पर जलस्तर 3 मीटर से अधिक नीचे खिसक गया है। 18 स्थानों पर एक मीटर से अधिक जलस्तर घटा है। जलस्तर ऊपर उठाने की बुंदेलखंड में तमाम केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाएं चल रही हैं। स्वंयसेवी संगठन भी जुटे हुए हैं। लेकिन नतीजा ‘ढाक का तीन पात’ बना हुआ है। हालात सुधरने के बजाए और बिगड़ रहे हैं।

 बुंदेलखंड में  19 से अधिक स्थानों पर एक मीटर से ज्यादा भूजल नीचे जा चुका है। इनमें बांदा, बंदौला, चित्रकूट में पुखरी पुरवा, प्रसिद्धपुर और रायपुरा, हमीरपुर में कुरारा, जालौन में डकोर किशोर मौजा, क्योंझारी, महोबा, चुर्खी, झांसी में दरुआ सागर, एरच, पंद्योहा मोड़ और ललितपुर में बांसी व वनपुर शामिल हैं।

 बुंदेलखंड में गहरा रहे भूगर्भ जल संकट को लेकर प्रदेश सरकार शायद गंभीर नहीं है। यही वजह है कि भूगर्भ जल विभाग द्वारा यहां के लिए बनाई गई कई योजनाएं धूल खा रही हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व भूगर्भ निदेशालय ने कहा था कि बुंदेलखंड में जल संरक्षण और संग्रहण की प्रबल संभावनाएं हैं। वर्षा जल संचयन और संवर्धन से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भूगर्भ जल विभाग ने एक योजना शासन को भेजी थी। इस पर आज तक कार्यवाही नहीं हुई। इसके अलावा बांदा में एक रेन सेंटर की स्थापना का भी प्रस्ताव किया था। इस सेंटर में यह सिखाने का प्रस्ताव है कि वर्षा जल को तकनीकी रूप से कैसे जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। इच्छुक लोगों को प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी प्रशिक्षण देंगें । सेंटर में एक छोटा पुस्तकालय भी होगा। जिसमें पानी से संबंधित किताबें और एटलस आदि भी होंगे। मगर ऐसी कई योजना आज भी अनुमति की प्रतिक्चा में धुल खा रही है बुंदेलखंड का मुख्या  जिला झाँसी में तो रेन बाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कई सरकारी बिल्डिंगो में की गई मगर आज सब बेकार पड़ी है प्रशासन को कोई चिंता नही है रेन बाटर हार्वेस्टिंग को जरुरी बनाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया जा रहा है आज जहा नगर के सुन्दरीकरण के लिए नै सड़के सी सी रोड एपेक्स का जाल बिछाया जान जरुरी हो गया है वो  तो वही रेन बाटर हार्वेस्टिंग भी जरुरी हो गया कियोकी बारिस का सारा पानी बहकर नालो में चल जाता है जमीन उसे सोख ही नही पाती है  मगर इस और प्रशासन का ध्यान  नही है
बुंदेलखंड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। यहां पानी बहुमूल्य हो गया है और पानी की रखवाली खजाने की तरह की जा रही है। कुओं से लेकर हैंडपंप तक की रखवाली हथियारों के साये में हो रही है।

बुंदेलखंड का बुरा हाल है। यहां लोगों को कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रह है। आलम यह है कि पानी ढोने के काम में ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, जीप से लेकर मारुति कार तक का उपयोग हो रहा है।

प्रदेश सरकार में कई रसूखदार मत्रियों के  जनपद का  झाँसी मंडल मुख्यालय शहर भी भूगर्भ जलस्तर संकट की चपेट में। यहाँ तेजी से खिसक रहा  हैं  चिंताजनक है।


Vikas Sharma
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बुंदेलखंड की किस्मत प्लेटिनम से चमकेगी

Posted on 08 July 2010 by admin

 आने वाले समय में बुंदेलखंड दुनिया की बेशकीमती धातु ‘प्लैटिनम’ के लिए भी जाना जाएगा। झाँसी मंडल  के ललितपुर जिले में प्लैटिनम के भंडार का पता चला है। यह खोज भविष्य में  बुंदेलखंड की किस्मत बदल सकती है।  झाँसी मंडल  के ललितपुर जिले से 85 किलोमीटर दूर इकोना गांव में इन धातुओं का पता चला है। उत्तर प्रदेश के खनन विभाग को  इकोना गांव में प्लैटिनम समूह की कीमती धातुओं- पैलेडियम, इरीडियम तथा ओसमियम को होने का पता चला  है। यहां से मिले प्लैटिनम की तासीर 10.4 ग्राम एक टन मिट्टी से प्राप्त होने वाले प्लैटिनम की मात्रा  है। जबकि इसकी गुणवत्ता औसतन 5.5 ग्राम प्रति टन है। देश में इस गुणवत्ता वाला प्लैटिनम अभी कहीं नहीं मिला है। खास बात यह है कि राज्य के खनन विभाग को बेशकीमती धातु का खजाना जमीन की सतह पर ही उपलब्ध हो गया। वैसे उड़ीसा में प्लैटिनम समूह की विभिन्न धातुओं का लगभग 15 टन का भंडार मौजूद है। इसमें से 54 फीसदी भंडार को निकालने का आकलन होना बाकी है। बेशकीमती प्लैटिनम का उपयोग जहां आभूषणों में होता है, वहीं पैलेडियम का उपयोग कीमोथैरेपी में किया जाता है। उत्तर प्रदेश के जियोलॉजी व माइनिंग विभाग  ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि बुंदेलखंड में प्लैटिनम समूह की विभिन्न धातुओं की खोज हुई है। राज्य सरकार को इकोना गांव में 1.5 किलोमीटर लंबे तथा 400-500 मीटर चौड़े दायरे में प्लैटिनम का भंडार मिला है। खनन विभाग को जमीन से 250 मीटर नीचे तक प्लैटिनम समूह की विभिन्न धातुओं का पता चला है। ललितपुर के अलाबा  बुंदेलखंड के छह अन्य जिले  हमीरपुर, बांदा, महोबा, झांसी, चित्रकूट तथा जालौन में भी उत्तर प्रदेश का खनन विभाग सोना, चांदी, निकेल, क्रोमियम, यूरेनियम, एसबेस्टस, चाइना क्ले आदि के भंडार का पता लगा रहा है।

प्लैटिनम का मेल्टिंग प्वाइंट काफी ऊंचा 1768.3 डिग्री सेल्सियस  होता है। लिहाजा इसे कंप्यूटर सहित महंगे इलेक्ट्रानिक उत्पाद बनाने में प्रयोग किया जाता है। किसी धातु का मेल्टिंग प्वाइंट वह तापमान है जिस पर वह गलना शुरू हो जाती है। प्लैटिनम के आभूषण भी बनते हैं। अपने देश में उपलब्धता कम होने की वजह से इसकी कीमत अधिक है। सोने से भी ज्यादा कीमती  प्लैटिनम एक बहुमूल्य धातु है। बाजार में इसकी कीमत सोने से भी अधिक आंकी जाती है। इस समय इसकी कीमत 23 हजार रुपये प्रति दस ग्राम से अधिक है। जबकि सोना इस समय 19 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास है। देश में प्लैटिनम सर्वाधिक उड़ीसा और कर्नाटक में पाया जाता है। विश्व स्तर पर कनाडा एवं दक्षिण अफ्रीका इसके चल क्षेत्र समझे जाते हैं। 
 

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मन्त्रि-परिषद की बैठक में लिये गये महत्वपूर्ण निर्णय

Posted on 01 July 2010 by admin

लखनऊ -  उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मन्त्रि-परिषद की बैठक में निम्न प्रकार महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं।

बाह्य सहायतित परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इम्पावर्ड कार्यकारी समिति का गठन

मन्त्रिपरिषद ने बाह्य सहायतित परियोजनाओं के समय से प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए इम्पावर्ड कार्यकारी समिति के गठन सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार प्रदेश में चल रही बाह्य सहायतित परियोजनाओं के समय से सफल कार्यान्वयन के लिए विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियों में होने वाले विलम्ब को समाप्त करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय “इम्पावर्ड कार्यकारी समिति´´ गठित होगी। इस समिति में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, प्रमुख सचिव वित्त, नियोजन न्याय, कार्मिक, परियोजना के प्रशासकीय विभाग के प्रमुख सचिव/सचिव, सदस्य होंगे। समिति में प्रमुख सचिव/सचिव बाह्य सहायतित परियोजना सदस्य सचिव तथा परियोजना के निदेशक सदस्य सह सचिव होंगे।

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में प्रदेश में विश्व बैंक तथा जायका (जापान इण्टरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) आदि संस्थाओं की वित्तीय सहायता से उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना-।, उ0प्र0 स्टेट रोड परियोजना-।।, उ0प्र0 सोडिक लैण्ड रिक्लेमेशन परियोजना-।।।, उ0प्र0 सहभागी वन प्रबन्ध एवं निर्धनता उन्मूलन परियोजना एवं आगरा जल सम्पूर्ति (गंगाजल) परियोजना चलाई जा रही हैं। इनके अलावा प्रदेश में बाह्य संस्था द्वारा वित्त पोषण हेतु उत्तर प्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना-।।, उ0प्र0 स्टेट रोड परियोजना-।।, उ0प्र0 हेल्थ डेवलपमेन्ट सिस्टम परियोजना-।। तथा बौद्ध परिपथ-।। परियोजना प्रस्तावित है।

वृहत्तर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण सेवा विनियमावली में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर

मन्त्रिपरिषद ने वृहत्तर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण सेवा विनियमावली 1993 के नियम - 19(1) में संशोधन करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार अब सेवा में किसी पद पर मौलिक रिक्ति में या उसके प्रतिनियुक्ति किये जाने पर प्रत्येक व्यक्ति को एक वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जाएगा।

ज्ञातव्य है कि अभी तक सेवा में किसी पद पर मौलिक रिक्ति में या उसके प्रतिनियुक्ति किये जाने पर प्रत्येक व्यक्ति को दो वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखे जाने का नियम है।

उ0 प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के धारा 5(4) के तहत अनुज्ञा शुल्क आरोपित करने व धारा 15(1) के तहत अपराधों के प्रशमन हेतु निर्धारित अधिकतम धनराशि को बढ़ाने सम्बन्धी प्रस्ताव मंजूर

मन्त्रिपरिषद ने उ0 प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के धारा 5(4) में उल्लिखित प्राविधान के अन्तर्गत अनुज्ञा शुल्क आरोपित किये जाने तथा धारा 15(1) में उल्लिखित प्राविधान के अन्तर्गत अपराधों के प्रशमन हेतु निर्धारित अधिकतम धनराशि को बढ़ाये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार उ0 प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 5(4) के तहत दी जाने वाली प्रत्येक अनुज्ञा इस शर्त के साथ प्रदान की जाएगी कि अनुज्ञा प्राप्त करने वाले व्यक्ति/संस्था/आवेदक द्वारा पातन अनुज्ञा शुल्क प्रति वृक्ष 100 रूपये जमा की जाएगी।

ज्ञातव्य है कि उ0प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत वृक्षों के पातन अनुज्ञा जारी करने के समय कोई भी अनुज्ञा शुल्क लेने का प्राविधान नहीं था।

इसके अलावा मन्त्रिपरिषद ने उ0 प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 15(1) में उल्लिखित प्राविधान के अन्तर्गत अपराधों के प्रशमन हेतु निर्धारित अधिकतम धनराशि को बढ़ाने का भी फैसला किया है। निर्णय के अनुसार राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से किसी अधिकारी को, किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके विरूद्ध यह विश्वास करने का कारण है कि उसमें किसी वन, बाग या सार्वजनिक भू-ग्रहादि में स्थित वृक्ष से भिन्न किसी वृक्ष के सम्बन्ध में उ0 प्र0 वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 15(1) के अधीन अपराध किया है। इसके लिए पूर्व में निर्धारित प्रशमन शुल्क की धनराशि को पॉच हजार रूपये से  बढ़ाकर दस हजार रूपये कर दिया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 1976 से वर्तमान तक प्रशमन की धनराशि में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। विभिन्न प्रकाष्ठ की मूल्य में वर्ष 1976 से अप्रत्याशित वृद्धि होने से अवैध कटान में लिप्त अपराधी प्रशमन की अधिकतम् धनराशि पांच हजार रूपये होने से अपराध की पुनरावृत्ति हेतु हतोत्साहित नहीं होते हैं। अतएव यह आवश्यक हो गया है कि गैर वन भूमि पर स्थित वृक्षों के कटान को इस प्रकार नियन्त्रित किया जाये कि वे सक्षम स्तर से अनुमति लेकर ही वृक्षों का पातन करें, ताकि बिना अनुमति के वृक्ष काटने की प्रक्रिया को प्रश्रय न मिले। इससे एक ओर वृक्षावरण को बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा वृक्ष स्वामियों द्वारा आवश्यकतानुसार ही पातन किया जा सकेगा।

मन्त्रिपरिषद द्वारा माल वाहनों के नेशनल परमिट हेतु कर सम्बन्धी अधिसूचना में संशोधन का प्रस्ताव अनुमोदित

मन्त्रिपरिषद ने माल वाहनों के नेशनल परमिट से सम्बन्धित नई कम्पोजिट फीस योजना के कार्यान्वयन हेतु पूर्व में जारी अधिसूचना दिनांक 28 अक्टूबर, 2009 में संशोधन करने सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।

मन्त्रिपरिषद द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार अब नेशनल परमिट से आच्छादित माल वाहनों से अन्य राज्यों के लिए कर का संग्रह राज्य स्तर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इस प्रकार के वाहनों के लिए पन्द्रह हजार रूपये प्रति वर्ष कम्पोजिट (एक मुश्त) कर का संग्रह करके भारत सरकार को भेजा जाएगा, जहॉं से वह एक निश्चित फार्मूले के आधार पर राज्यों को बटेगा। अखिल भारतीय स्तर पर इस प्रकार संग्रहीत हुए कर में से 10.497 प्रतिशत उत्तर प्रदेश राज्य को प्राप्त होगा।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 2007-08 में उत्तर प्रदेश राज्य को राष्ट्रीय परमिट फीस मद में कुल 98.35 करोड़ रूपये़, वर्ष 2008-09 में 104.36 करोड़ रूपये एवं वर्ष 2009-10 में कुल 115.70 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है। जबकि इन्हीं वर्षो में अखिल भारतीय स्तर पर क्रमश: 974.57 रूपये, 1056.58 रूपये एवं 1186.56 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है। उक्त फार्मूले के अनुसार राष्ट्रीय परमिट पर समेकित शुल्क में से 10.497 प्रतिशत उत्तर प्रदेश को प्राप्त होगा।

मन्त्रिपरिषद ने उ0प्र0 अनुसूचित वस्तु वितरण आदेश 2004 में संशोधन सम्बंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी

मन्त्रिपरिषद द्वारा उत्तर प्रदेश अनुसूचित वस्तु वितरण आदेश 2004 की धारा 28(1) में संशोधन सम्बंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गई।

ज्ञातव्य है कि प्रदेश में खाद्यानों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का सम्भरण बनाये रखने, उनका समान वितरण एवं उचित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित वस्तु वितरण आदेश 2004 निर्गत किया गया है। यह आदेश केन्द्र सरकार के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियन्त्रण) आदेश 2001 के परिपे्रक्ष्य में जारी किया गया है।

अनुसूचित वस्तु वितरण आदेश की धारा 28(1) में यह प्राविधानित है कि उचित दर दुकानों से सम्बन्धित सभी अपीलें मण्डलायुक्त को की जायेंगी जो उनकी सुनवाई या निपटारा करेगा अथवा वह अपनी शक्ति को आदेश द्वारा सहायक खाद्य आयुक्त को प्रत्योजित कर सकता है। मण्डलायुक्त के पास कार्य की अधिकता के कारण प्राय: उनके लिये यह सम्भव नहीं होता कि वे स्वयं इन अपीलों की सुनवाई/निपटारा कर सके। ज्ञातव्य है कि मण्डलायुक्त कार्यालय में प्रशासनिक सेवा के अपर आयुक्त भी तैनात होते हैं जिन्हें विभिन्न प्रकार के न्यायिक कार्यो का पूर्व अनुभव भी होता है। इसे दृष्टिगत रखते हुए धारा 28(1) में यह संशोधन किये जाने का निर्णय लिया गया कि मण्डलायुक्त अपीलों की सुनवाई/निपटारा करने की अपनी शक्ति को उपायुक्त खाद्य (सहायक खाद्य आयुक्त का परिवर्तित पदनाम) के साथ-साथ अपर आयुक्त को भी प्रत्योजित कर सकता है।

क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख पदों एवं स्थानों (वार्ड) तथा जिला पंचायतों के अध्यक्ष पदों एवं स्थानों (वार्ड) के आरक्षण एवं आवंटन नियमावली में संशोधन

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख पदों एवं स्थानों (वार्ड)    तथा जिला पंचायतों के अध्यक्ष पदों एवं स्थानों (वार्ड) के आरक्षण एवं आवंटन नियमावली में संशोधन कर दिया है। इस आशय के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी प्रदान कर दी गई।

मन्त्रिपरिषद् ने पंचायतों के आगामी सामान्य निर्वाचन के लिए आरक्षण व चक्रानुक्रम की व्यवस्था अपनाए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव एवं तदनुसार उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली 1994 के नियम-4 के उपनियम (4) तथा उपनियम (6), नियम-5 के उपनियम (2), उपनियम (4), उपनियम (5), उपनियम (6), उपनियम (7) तथा उपनियम (8) में संशोधन करने, उपनियम (9) को उपनियम (10) के रूप में क्रमांकित करने और एक नया उपनियम, उपनियम (9) के रूप में जोड़ने हेतु उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) (आठवां संशोधन) नियमावली-2010 के आलेख को भी अनुमोदित कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पंचायतों के निर्वाचन हेतु वर्ष 2005 में अपनायी गई आरक्षण व चक्रानुक्रम की व्यवस्था में विसंगतियां थीं। इसके तहत ऐसी क्षेत्र पंचायत, जिनमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्ग की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है, उनमें प्रमुख के पद को उसी जाति/वर्ग के लिए आरक्षित किया जायेगा और चक्रानुक्रम उसी जाति/वर्ग के पुरूष तथ स्त्री के मध्य करने की व्यवस्था की गई थी।

इस व्यवस्था से प्राय: ऐसी सभी क्षेत्र पंचायतें, जिनमें अनुसूचित जाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक थी, सदा के लिए अनुसूचित जाति के लिए तथा वह क्षेत्र पंचायतें जिनमें पिछड़े वर्ग की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक थी, सदा के लिए पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो गईं एवं अनारक्षित क्षेत्र पंचायतें भी सदा के लिए अनारक्षित की स्थिति में आ गईं, जिसके फलस्वरूप यह व्यवस्था आगामी निर्वाचन में अपनाने पर संविधान की भावना के अनुरूप क्षेत्र पंचायत के प्रमुख के पदों में चक्रानुक्रम से आरक्षण करना सम्भव नहीं है।

वर्ष 2005 में अपनायी गई व्यवस्था के अनुसार ऐसी जिला पंचायत जिनमें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्ग की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है, उनमें अध्यक्ष के पद को उसी जाति/वर्ग के लिए आरक्षित किया जायेगा चक्रानुक्रम उसी जाति/वर्ग के पुरूष तथा स्त्री के मध्य होगा।

इस व्यवस्था से प्राय: ऐसी सभी जिला पंचायतों, जिनमें पिछड़े वर्ग की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक थी, सदा के लिए पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो गईं, जिसके फलस्वरूप इस व्यवस्था को आगामी निर्वाचन में अपनाने पर संविधान की भावना के अनुरूप जिला पंचायत के अध्यक्ष के पदों में चक्रानुक्रम आरक्षण करना सम्भव नहीं होगा।

सम्प्रति नियमावली में चक्र चलाने हेतु मात्र पूर्ववर्ती निर्वाचन में किये गये आरक्षण को ही संज्ञान में लेने की व्यवस्था है, किन्तु संविधान में निहित भावना के अनुसार आरक्षण हेतु चलाये जाने वाले चक्र को इस प्रकार चलाया जाना है कि जहां तक सम्भव हो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में आरक्षित पद/स्थान आगामी निर्वाचन में पुन: उसी जाति/वर्ग के लिए आरक्षित न हो।

जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों में अनुसूचित जनजाति के लिए अवधारित पदों को आवंटित करने की प्रक्रिया का प्रावधान नियमावली में नहीं है। जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों को स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाने हेतु सामान्य जनसंख्या के आधार पर तैयार किये जाने वाले अवरोही क्रम में जनसंख्या के आकलन हेतु जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में से आरक्षित वर्गो की जनसंख्या को निकाला जाता है, किन्तु नियमावली में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या को निकालने के प्राविधान का उल्लेख नहीं है।

इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग की स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले एक तिहाई से अन्यून पदों से सम्बन्धित नियम-5 के उपनियम (6) के स्थान पर सम्प्रति नियमावली में त्रुटिवश उपनियम (5) अंकित है। जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों के आवंटन हेतु नियमावली में दी गई क्रमावली में अनुसूचित जनजाति की स्त्रियों तथा अनुसूचित जनजाति का उल्लेख नहीं है तथा प्रमुख के पदों के आवंटन हेतु नियमावली में क्रमावली नहीं है।

इन उपरोक्त विसंगतियों को समाप्त करने हेतु आगामी सामान्य निर्वाचनों में आरक्षण व चक्रानुक्रम के लिए वर्ष 1995 की व्यवस्था को अपनाये जाने के प्रस्ताव को मन्त्रिपरिषद् ने अनुमोदित कर दिया है। इसके तहत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग के लिए क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के क्रमश: प्रमुख पदों और अध्यक्ष पदों को सम्बन्धित पंचायत क्षेत्र में उनके प्रतिशत जनसंख्या के अवरोही क्रम में इस प्रकार से आरक्षित किया जायेगा कि जहां तक हो सके वह उसी श्रेणी के लिए पुन: आरक्षित न हो, जिसके लिए वह पूर्व के चुनावों में आरक्षित थे।

इसी प्रकार क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों के स्थानों (वार्ड) के आरक्षण में चक्रानुक्रम (रोटेशन) करने के लिए पूर्ववर्ती निर्वाचनों में किये गये आरक्षणों को भी संज्ञान में लिया जाने की व्यवस्था की गई है। जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों में अनुसूचित जनजाति के लिए अवधारित पदों के आवंटन की प्रक्रिया का प्राविधान किया जायेगा। स्त्रियों के लिए जिला पंचायत के अध्यक्ष पद आरक्षित करने हेतु सामान्य जनसंख्या के आकलन में जिला पंचायत की कुल जनसंख्या से में सम्प्रति प्राविधानित अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या को भी घटाया जाने का प्राविधान किया गया है।

जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों के आवंटन हेतु क्रमावली में सर्वप्रथम अनुसूचित जनजाति की स्त्रियों और उसके पश्चात् अनुसूचित जनजातियों का उल्लेख किया जाये। जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों के आवंटन की क्रमावली के अनुरूप ही प्रमुख के पदों के आवंटन में भी यथावश्यक संशोधन के साथ लागू किया जायेगा।

ग्राम पंचायत प्रधान के पदों में चक्रानुक्रम से आरक्षण के लिए की गई व्यवस्था के अनुरूप क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के आगामी निर्वाचनों में उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली-1994 में क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख के पद व स्थानों तथा जिला पंचायतों के अध्यक्ष के पदों व स्थानों के आरक्षण व चक्रानुक्रम के सम्बन्ध में वर्ष 2005 में अपनायी गई व्यवस्था से पूर्व वर्ष 1995 तथा 2000 में अपनायी गई व्यवस्था और जनपदवार प्रमुख के पदों के वितरण सम्बन्धी वर्ष 2000 की व्यवस्था को अपनाने के लिए नियमावली में तदनुसार आवश्यक संशोधन किया गया है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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कानून व्यवस्था से सम्बन्धित रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर थाने में आने वालों के साथ पूरा न्याय होना चाहिए - सुश्री मायावती

Posted on 29 June 2010 by admin

लखनऊ - उत्तर प्रदेश की मुख्यमन्त्री सुश्री मायावती ने निर्देश दिए हैं कि कानून व्यवस्था से सम्बन्धित रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर थाने में आने वाले गरीबों, असहायों एवं महिलाओं के साथ पूरा न्याय होना चाहिए। उन्होंने थानों की कार्य प्रणाली में और अधिक सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारी इस पर निगाह रखें और जिस भी स्तर पर लापरवाही पायी जाए, उस सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि थाना दिवसों को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि लोग अपनी समस्याओं को लेकर बेहिचक वहां आ सकें।

मुख्यमन्त्री के इन निर्देशों से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को आज यहां योजना भवन में आयोजित बैठक में कैबिनेट सचिव श्री शशांक शेखर सिंह एवं मुख्य सचिव श्री अतुल कुमार गुप्ता ने अवगत कराया। इस बैठक में अपर कैबिनेट सचिव श्री नेतराम, प्रमुख सचिव सूचना श्री विजय शंकर पाण्डेय, प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेह बहादुर, पुलिस महानिदेशक श्री करमवीर सिंह भी मौजूद थे।

सुश्री मायावती ने कारागार विभाग की कार्य प्रणाली को असन्तोशप्रद बताते हुए इसमें तुरन्त सुधार की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि हाल में ही घटी घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में जेल की कार्य प्रणाली की सघन समीक्षा की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि आगे इस प्रकार की घटनायें न घटें। उन्होंने कहा कि जेल में प्रतिबन्धित सामानों का पकड़ा जाना गम्भीर बात है। यह सामान बिना जेल कर्मियों की मिलीभगत के अन्दर नहीं जा सकता है। उन्होंने इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमन्त्री ने बड़े अपराधियों और माफियाओं द्वारा जेल से की जा रही गुण्डागर्दी के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन पर कड़ी नज़र रखने और इस गुण्डागर्दी पर प्रभावी अंकुश लगाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अपराधियों के क्रिमिनल नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाये। उन्होंने पुलिस के वरिश्ठ अधिकारियों को जेलों का आकिस्मक निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाओं की भविश्य में पुनरावृत्ति होने पर निचले स्तर के ही नहीं, बल्कि लखनऊ में बैठे वरिश्ठ अधिकारी एवं मण्डल/जनपद स्तर के अधिकारियों के विरूद्ध भी कठोर कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि जो नई जेलें बन रहीं हैं, उन्हें शीघ्रता से पूरा किया जाये, ताकि जेलों में बढ़ रही भीड़ से राहत पायी जा सके।

सुश्री मायावती ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की चर्चा करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य चलाये जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन विकास कार्यो के सम्बन्ध में प्राप्त फीडबैक से शासन को अवगत करायें, ताकि आवश्यकतानुसार कदम उठाये जा सकें। उन्होंने आदिवासियों के लिए दिए जा रहे पट्टों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें आ रही समस्याओं का पूरी तरह निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इसी के साथ उन्होंने कहा कि जिन मामलों में निस्तारण किया गया, वे भी सन्तोशप्रद नहीं हैं। उन्होंने आदिवासियों से सम्बन्धित भूमि विवाद के मामलों को शीघ्रता से गुणवत्ता के साथ हल करने की अपेक्षा की है।

मुख्यमन्त्री ने लखनऊ सहित अन्य बड़े नगरों में यातायात की मुकम्मल व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए सभी सम्बन्धित विभागों की एक उच्च स्तरीय बैठक शीघ्र की जाये। इस बैठक में उन सभी पहलुओं पर विचार कर एक नीति निर्धारित की जाये, जिसकी वजह से नगरों के यातायात प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि नोएडा में स्थापित कन्ट्रोल रूम से वहां की यातायात व्यवस्था को भी जोड़ा जाये। नोएडा में पुलिस विभाग को 100 गाड़ियां जी0पी0एस0 सिस्टम सहित उपलब्ध करा दी गईं हैं। उन्होंने ट्रैफिक हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए हैं।

सुश्री मायावती ने पी0ए0सी0 एवं पुलिस कर्मियों के लिए कार्य स्थल पर समुचित मूलभूत सुविधायें सुलभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कर्मियों के तैनाती स्थल पर यथासम्भव सुविधायें उपलब्ध हो जाने से इनकी कार्यप्रणाली में और बेहतर बदलाव आयेगा। जिन चौकियों को थानों में परिवर्तित किया गया है, उनमें सभी अवस्थापना एवं बुनियादी सुविधायें उपलब्ध करायी जायें, ताकि यह थाने प्रभावी रूप से कार्य कर सकें। उन्होंने निर्देश दिए कि लावारिस लाशों को सम्मान सहित संस्कार के लिए आवश्यकतानुसार धनराशि की व्यवस्था की जानी चाहिए तथा पोस्ट मार्टम गृहों की व्यवस्था भी ठीक की जाये। उन्होंने लम्बे समय से थानों में पड़े बिसरा की जांच शीघ्र कराकर कार्यवाही करने के भी  निर्देश दिए।

मुख्यमन्त्री ने प्रदेश की अग्नि शमन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इस विभाग के कर्मियों की समस्याओं को दूर करने के लिए सेवा नियमावली बनायी जाये। इसी प्रकार अग्नि शमन उपकरणों के क्रय करने की समय-सारिणी सुनिश्चित की जाये, जिससे कि शासन द्वारा उपलब्ध करायी गई धनराशि का फायदा प्रदेश की जनता को मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन अग्नि शमन केन्द्रों पर उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, वहां आवश्यकतानुसार उपकरण उपलब्ध कराये जायें। इसके अतिरिकत इस विभाग की अन्य समस्याओं को भी शीघ्रता से निस्तारित किया जाये।

सुश्री मायावती ने पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड के कार्यो की चर्चा करते हुए कहा कि नये चयनित आरक्षियों के प्रिशक्षण की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे पुलिस कर्मियों के रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही भी शीघ्रता से करें। इसके लिए पुलिस भर्ती बोर्ड को अधियाचन शीघ्र भेजा जाये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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राज्य सरकार के समक्ष मेयर के चुनाव प्रक्रिया के सम्बन्ध में कोई प्रकरण विचाराधीन नहीं

Posted on 10 June 2010 by admin

क्षेत्र पंचायतों में चुनाव के लिये 1994 से ही नियमावली है

क्षेत्र पंचायतों के चुनाव हमेशा से गैर दलीय आधार पर हो रहे है

अभी तक नगर निकायों का चुनाव नियमावली न होने के कारण निर्वाचन संचालन आदेश के तहत कराया जाता था

प्रस्तावित नियमावली के प्रारूप के सम्बन्ध में जन-साधारण से आपत्तियॉ, सुझाव आमिन्त्रत करने के लिये 11 मई, 2010 को प्रकाशित असाधारण गजट में 30 दिन का समय दिया गया है
लखनऊ - उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने नगर निकायों में चुनाव के लिए प्रस्तावित नियमावली के सम्बन्ध में आज यहॉ जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के समक्ष मेयर के चुनाव प्रक्रिया के सम्बन्ध में कोई प्रकरण विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में कतिपय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें निराधार है।

प्रवक्ता ने कहा कि जहॉ तक उत्तर प्रदेश नगर निकायों से सम्बन्धित प्रस्तावित निर्वाचन नियमावली-2010 का सम्बन्ध है, इस प्रकरण में राज्य सरकार ने संविधान एवं नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित सभी नियमों का बकायदा पालन किया है। उन्होंने कहा कि सभी को मालूम है कि क्षेत्र पंचायत चुनाव के लिये उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत नियमावली-1994, उत्तर प्रदेश जिला पंचायत नियमावली-1994, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत नियमावली-1994 तथा उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली-1994 पहले से ही बनीं हुई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायतों के चुनाव से सम्बन्धित इन नियमों में दलीय आधार पर चुनाव का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। परम्परानुसार गैर दलीय आधारित चुनाव ही होते है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों के लिये जो चुनाव चिन्ह भी आवंटित किये जाते है, वे भी किसी राजनीतिक पार्टी के चुनाव चिन्ह से सम्बन्धित नहीं होते।

प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर जहॉ क्षेत्र पंचायतों के चुनाव के लिये नियमावली बनायी गई है, वहीं दूसरी ओर अभी तक नगर निकायों का चुनाव नियमवाली न होने के कारण निर्वाचन संचालन आदेश के तहत कराया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि एक्ट के अन्तर्गत राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में नियमावली बनाना आवश्यक है। अपने इन्ही दायित्वों को निर्वहन करते हुए राज्य सरकार द्वारा नियमावली बनाने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि उ0प्र नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-296 तथा उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा-87 के तहत सरकार को नगर निकायों में चुनाव के लिये सुसंगत नियम बनाने का पूरा दायित्व है।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नगर निकायों के चुनाव के लिये जो नियमावली प्रस्तावित की गई है, उस पर समस्त सम्बन्धित व्यक्तियों एवं जन साधारण से उनके सम्बन्ध में आपत्तियॉं एवं सुझाव आमन्त्रित करने के लिये पर्याप्त समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियमावली को 11 मई, 2010 को सरकारी गजट में अधिसूचित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि गजट में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि प्रस्तावित नगर निकायों के चुनाव से सम्बन्धित नियमावली के बारे में यदि कोई आपत्तियॉ और सुझाव है, तो प्रमुख सचिव उ0प्र0 नगर विकास अनुभाग-1, बापू भवन लखनऊ को सम्बोधित करके लिखित रूप से प्रेषित की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि गजट में यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि केवल उन्हीं आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशित होने की दिनांक से 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी को प्राप्त होंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि सभी इच्छुक लोग या राजनैतिक दलों को 11 मई, 2010 के गजट में प्रकाशित 30 दिन की अवधि के अन्दर अपनी आपत्तियां एवं सुझाव उचित फोरम पर लिखित रूप से दर्ज करा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियमावली के सम्बन्ध में जो आपत्तियॉ एवं सुझाव प्राप्त होंगे, उन पर सम्यक विचार करके सरकार द्वारा निर्णय लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आपत्तियों एवं सुझावों के उचित निस्तारण के बाद ही प्रस्तावित नियमावली को मन्त्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिये प्रस्तुत किया जायेगा।

सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित नियमावली के सन्दर्भ में नियमानुसार जो प्रक्रिया तय की गई है, उसका लाभ सभी लोगों को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में अनावश्यक बयानबाजी या किसी अन्य फोरम पर बात उठाने से प्रस्तावित नियमावली को और बेहतर बनाने में कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का राजनैतिक दृष्टिकोण से विरोध करना उपयुक्त नहीं है। इसमें जिसको आपत्ति है, उसे नियमानुसार सुझाव/आपत्ति दाखिल करना चाहिए, ताकि इस कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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केन्द्र की सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के साथ अपनाये जा रहे सौतेले व उपेक्षापूर्ण रवैये का पर्दाफाश करने व आसमान छूती महंगाई के खिलाफ बी.एस.पी. का पहले चरण के तहत राज्य-व्यापी जनहित आन्दोलन प्रारंभ

Posted on 22 May 2010 by admin

बहुजन समाज पार्टी की  राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी के आह्वान पर, पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केन्द्र में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली यू.पी.ए. सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के साथ सौतेला व उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाकर प्रदेश को पिछड़ाß बनाये रखने की साज़िश तथा उसकी ग़लत आर्थिक नीति के कारण आसमान छूती महंगाई के खिलाफ जन-संघर्ष जारी रखते हुये, आज से शुरू हुये राज्य-व्यापी जनहित आन्दोलन के पहले चरण के तहत प्रदेश के 55 ज़िलों के एक विधानसभा मुख्यालय पर ज़ोरदार धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ व ज़िम्मेदार पदाधिकारियों, सांसदों, मन्त्रियों व विधायकों आदि ने भी भाग लिया।

केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के एक वर्ष पूरा होने के दिन आज से विधानसभा स्तर पर प्रारंभ किये गये इस जनहित आन्दोलन की सफलता को पूर्व की भान्ति स्वयं अपनी आंखों से देखने के बजाय, अपनी व्यस्तता के कारण सुश्री मायावती जी ने इस धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की सफलता का आंकलन करने के लिये पड़ोस के ज़िलों से पार्टी के दो-दो ज़िम्मेदार लोगों को हर ज़िले में यह निर्देशित करके नियुक्त किया कि वे लोग इस आन्दोलन की सफलता के सम्बंध में अपनी-अपनी रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश मुख्यालय को आज ही भेजें।

सुश्री मायावती जी ने बताया कि आज के ज़ोरदार धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आम जनता के समक्ष केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की जन-विरोधी नीतियों, उत्तर प्रदेश की आम जनता के साथ सौतेला रवैया, प्रदेश को केन्द्रीय धन का आवंटन समय पर जारी नहीं करने, प्रदेश की घोर उपेक्षा करने के साथ-साथ केन्द्र सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण जानलेवा महंगाई की पोल खोली तथा कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ नहीं, बल्कि कांग्रेस का हाथ पूंजीपतियों के साथ होने का पर्दाफाश किया।

इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी की आम आदमी-विरोधी नीतियों का विस्तारपूर्वक उजागर करते हुये बी.एस.पी. के वक्ताओं ने कहाकि प्रदेश में ग़रीब और ग़रीबी के प्रति कांग्रेस सरकार कभी भी गम्भीर नहीं रही है, जिस कारण ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लगभग 40 वर्षो के शासनकाल के दौरान इस प्रदेश से लोगों का सबसे ज्यादा संकट पलायनß हुआ और दुख की बात यह है कि कांग्रेस-शासित राज्यों में अपना घर-बार छोड़कर रोज़ी-रोटी के लिये गये उन लोगों पर होने वाले पक्षपात व अन्याय को रोकने के प्रति भी वहां की कांग्रेस पार्टी की सरकारें लगातार उदासीन बनी हुयी हैं। बी.एस.पी. के वक्ताओं ने इलज़ाम लगाया कि कांग्रेस पार्टी की आर्थिक नीतियां हमेशा ही बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नसेठों को हर क़ीमत पर लाभ पहुंचाने की रही है, जिस कारण ही वह इन पूंजीपतियों के हित में पेट्रोल व डीज़ल तथा रसोई गैस इत्यादि ज़रूरी वस्तुओं की क़ीमत लगातार बढ़ाती रहती है, जिससे महंगाई लगातार बढ़ी है और इसका ख़ामियाज़ा देश के आम आदमी को सीधे भुगतना पड़ा है।

कांग्रेस पार्टी के कुछ ज़िम्मेदार नेताओं द्वारा विकास के मामले में अपनाये जा रहे संकुचित द्रष्टिकोण की तीव्र आलोचना करते हुये, बी.एस.पी. वक्ताओं ने कहाकि ये नेतागण सीमित व संकुचित राजनीतिक द्रष्टिकोण अपनाकर समूचे उत्तर प्रदेश की बीस करोड़ जनता के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के इन ज़िम्मेदार नेताओं को यू.पी. में केवल दो ही संसदीय क्षेत्र अर्थात् रायबरेली व अमेठी के लोगो के ही दुख-तकलीफ व उनकी दयनीय स्थिति नज़र आती है जिसके लिये विदेश के कुछ लोगों को बुलाकर तथा स्थानीय लोगों की ग़रीबी व दयनीय स्थिति की नुमाइश करके विदेशी सहायता की मांग की जाती है।

लेकिन यही ज़िम्मेदार कांग्रेसी नेता जब प्रदेश के दूसरे ज़िलों में जाते हैं तो इनका दोहरा चरित्र लोगों को देखने को मिलता है। वे दूसरे ज़िलों के लोगों की दुख-तकलीफ व उनकी ग़रीबी को दूर करने के लिये विदेशी सहायता की फरियाद करना तो दूर की बात, वे केन्द्र में चल रही अपनी पार्टी की सरकार पर भी इस सिलसिले में किसी प्रकार का दबाव डालने से कतराते हैं। इस प्रकार जब कांग्रेस पार्टी के ज़िम्मेदार लोगों का उत्तर प्रदेश के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया व दोहरा चरित्र है तो ऐसी स्थिति में इनकी पार्टी के नेतृत्व वाली केन्द्रीय सरकार का उत्तर प्रदेश के लोगों के कल्याण व उत्थान के मामले में सौतेला व पक्षपातपूर्ण रवैया क्यों ना हो ?

बुन्देलखण्ड क्षेत्र को विशे आर्थिक सहायता नहीं जारी करने तथा उत्तर प्रदेश बसपा सरकार द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विकास हेतु मांगे गये 80 हजार करोड़ रुपये के विशे आर्थिक पैकेज के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने के लिये केन्द्र की कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना करते हुये बी.एस.पी. वक्ताओं ने कहाकि केवल पिछले तीन वशोZं के दौरान केन्द्रीय अंश की लगभग 17,492 करोड़ रुपये की धनराशि समय पर उपलब्ध नहीं कराना यह साबित करता है कि केन्द्र का रवैया उत्तर प्रदेश के प्रति सौतेला व पक्षपातपूर्ण है, जिससे आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े प्रदेश, उत्तर प्रदेश की आम जनता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

बी.एस.पी. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विकास के मामलों के साथ-साथ सामाजिक मामलों पर भी केन्द्र का रवैया उदासीन व नकारात्मक है जिस कारण प्रदेश के लोगों को समुचित न्याय नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़े वर्गों की 16 जातियों, जिसमें (1) कहार, कश्यप (2) केवट, मल्लाह, निशाद    (3) कुम्हार, प्रजापति (4) धीवर (5) बिन्द (6) भर, राजभर (7) धीमर (8) बाथम     (9) तुरहा (10) गौड़ (11) माझी (12) मछुआ (13) लोनिया (14) नोनिया          (15) लोनिया-चौहान (16) पाल/बघेल/धनगर आदि शामिल हैं, को अनुसूचित जाति /जनजाति कोटे में शामिल होने का लाभ नहीं मिल पा रहा है जबकि अनुसूचित जाति /जनजाति कोटे में वृद्धि करके इनको भी उसमें शामिल करने की मांग बसपा सरकार लगातार करती रही है।

इसी प्रकार, पश्चिम उत्तर प्रदेश में विशे रूप से आगरा एवं मेरठ की जनता द्वारा वहां माननीय उच्च न्यायालय की एक खण्डपीठ की स्थापना की मांग पर केन्द्र सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड, पूर्वांचल एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रूप में अलग राज्य बनाकर, प्रदेश विभाजन के लिये भी केन्द्र सरकार को अनेकों बार चिट्ठी लिखी गई है जिस पर आज तक भी कोई जवाब नहीं आया है। इस प्रकार, प्रदेश की आम जनता से जुड़े ज्यादातर मामलों में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार का सहयोग ना करने का रवैया लगातार देखने में आ रहा है।

विभिन्न ज़िलों से पार्टी अधिकृत लोगों द्वारा प्रदेश पार्टी कार्यालय को आज के इस धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की जो रिपोर्ट मिली है वह काफी उत्साहवर्धक है अर्थात् सभी जगह राज्य-व्यापी जनहित आन्दोलन कार्यक्रम काफी कामयाब रहा है, जिसके लिये बी.एस.पी. की राश्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती जी ने पार्टी के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं हर स्तर के जनप्रतिनिधियों का  हार्दिक आभार प्रकट किया है। साथ ही यह उम्मीद ज़ाहिर की है कि अगले बुधवार को छोड़कर प्रत्येक बुधवार को ज़ोन के एक विधानसभा मुख्यालय पर होने वाले इस जनहित आन्दोलन को इसी प्रकार कामयाब बनाने में पार्टी के हर स्तर के लोग जी-जान से लगातार जुटे रहेंगे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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योजनाओं का लाभ जनता को अवश्य मिलना चाहिए - केन्द्रीय दल

Posted on 20 May 2010 by admin

बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज का सही उपयोग करने की दी सलाह
पानी व अन्ना प्रथा की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कई  योजनाओं पर भी की गई चर्चा                    दो वर्षो में 6 हजार से अधिक तालाब खोदे जाएंगे

बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के तहत विभागवार बनाई गई योजनाओं का लाभ जनता को अवश्य मिलना चाहिए। यह निर्देश जिला स्तरीय अधिकरियों को केन्द्र की ओर से आई टीम ने दिए। इस दौरान जिले के सिंचाई, लघु सिंचाई, डीपीएपी, वनविभाग, पशुपालन विभाग, दुग्ध विभाग, कृषि विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, उद्यान व मण्डी परिषद द्वारा 409.54 करोड़ के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए। जिसमें वन विभाग व डीपीएपी को 5.87 करोड़ रुपया बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज से प्राप्त भी हो चुके हैं।

गुरुवार को बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के बारे में चर्चा करने के लिए आए केन्द्रीय दल के बी के बहुगुणा प्रशासन एवं वित्त अपर सचिव भारत सरकार व डा. आलोक सिक्का तकनीकी विशेषक/अपर सचिव भारत सरकार ने विभाग वार अधिकारियों से पैकेज पर चर्चा की। उनका कहना था कि इसका लाभ जनता को मिलना चाहिए। साथ ही मुख्यरूप से बुन्देलखण्ड में वर्षा के पानी का सदुपयोग हो तथा अन्ना प्रथा को समाप्त करने के लिए भी सभी मिलकर जागरूकता लाएं। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन क्षेत्रा में वृक्षारोपण करे तो लघु व सिंचाई विभाग तथा भूमि संरक्षण और कृषि विभाग इन योजनाओं को इस प्रकार से संचालित करे कि वन व जल संचयन का लाभ लोगों को मिल सके।

बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी पी के श्रीवास्तव ने बुंन्देलखण्ड विकास निधि कमेटी के सामने विभागवार केन्द्रांश व राज्यांश के साथ लाभर्थीअंश का जिक्र करते हुए बताया कि जनपद के दस विभागों द्वारा इस योजना में काम किया जाना है जिसमें केन्द्रांश 136.96 करोड़, राज्यांश 10.21 करोड़, लाभर्थी अंश 8.57 करोड़, मनरेगा 65.07 करोड़, एसीए 185. 57 करोड़ रुपये देगा। बैठक के दौरान केन्द्रीय प्रतिनिधि श्री सिक्का ने कहा कि इन योजनाओं को लागू करने में केन्द्र भरपूर सहयोग करेगा। लेकिन उसको सदुपयोगी व कारगर बनाने में मनरेगा की तरह काम न कर समय से पूरा करें। इस बीच उन्होंने कहा कि पानी की कमी को देखते हुए जल संचयन के क्षेत्रा में वर्ष 2010-11 में 3 हजार 91 तालाब व वर्ष 2011-12 में 3 हजार 91 तालाब बनवाए जाए तभी पानी की समस्या से जूझ रहे यहां के लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलवाया जा सकेगा।

इसके पूर्व जिलाधिकारी विशाल राय ने केन्द्रीय सचिवों को पुष्पगुच्छ भेंट करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस बीच उन्होंने कहा कि योजनाओं को धरातल में उतारने के लिए सभी को प्रोजेक्ट के अनुसार भरपूर मेहनत करनी होगी। तभी यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकेगी। बैठक में उप कृषि निदेशक एम ए सिद्दीकी, जलनिगम अधिशासी अभियन्ता जे पी सिंह, जिला कृषि अधिकारी एच एन राजपूत, भूमिसंरक्षण अधिकारी जीपी कुशवाहा, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई के एस लाल, डीएफओ बीके चोपड़ा समेत सभी सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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