Posted on 10 January 2010 by admin
कोहरे और बर्फीली हवाओं का कहर जारी रहने से नगरवासियों को कड़कड़ाती ठण्ड से किसी प्रकार की राहत नहीं मिली। कल की अपेक्षा आज तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई, पर अपरान्ह सूर्य देव द्वारा अचानक आखें खोल देने से राहत मिली।
सुबह कोहरे में ढकी रहने से विलम्ब से दिनचर्या शुरू हो सकी और वाहनों की आवाजाही भी कम रही। माह का द्वितीय शनिवार होने के कारण सरकारी दफ्तरों के बन्द रहने से कर्मचारियों व अधिकारियों को राहत रही। बच्चों के स्कूल बन्द होने से अभिभावक परेशान नहीं हुए। जोरदार शीत लहर के कारण गर्म कपड़ो की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है,जिससे मंदे सीजन को कोस रहे दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे है।
क्षेत्रीय अनुसन्धान केन्द्र प्रभारी के अनुसार खुले क्षेत्र में आज अधिकतम तापमान 11.9 व न्यूनतम 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक-दो दिन इसी प्रकार का मौसम बने रहने की सम्भावना है।
Posted on 17 December 2009 by admin
सूखे की पीड़ा अभी पूरी तरह से मिट भी नहीं पाई थी कि आज कई ग्रामों में हुई ओला वृष्टि ने अन्नदाता की मेहनत के साथ उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पीड़ित किसानों ने ओलों से भरी ट्राली के साथ कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर क्षति पूर्ति की गुहार की।
मौसम विभाग द्वारा आसमान में बादलों के छाए रहने व छींटे गिरने की भविष्य वाणी के विपरीत आज प्रात: लगभग 7 बजे से वर्षा के साथ कई ग्रामों में ओला वृष्टि हुई। देखते ही देखते खेतों में 4 से 5 सेमी मोटा ओला बिछा दिखाई देने लगा। खेतों में मौजूद किसान व जानवर ओलों की तेज मार से चुटहिल हो गए।
जहा-जहा ओला वृष्टि हुई वहा की फसलें खेतों में बिछ गई क्योंकि रबी की फसल इस समय प्रारम्भिक अवस्था में है। सर्वाधिक क्षति सरसों, असली, राई व दलहनी फसलों को पहुची है। चना, गेहूं की फसल आशिक रूप से प्रभावित हुई। जानकारों का कहना है कि ओलों की मार से जहा प्रारम्भिक अवस्था के पौधों की पत्ती व टहनी को नुकसान पहुचा वहीं 5-6 घण्टे तक मिट्टी में ओलों के पड़े रहने व धीमे-धीमे घुलने से पौधों की जड़ों के सड़ने की सम्भावना प्रबल हो गई है।
ओलों की मार से प्रभावित झासी तहसील के ग्राम डोमागोर, कंचनपुर, नयाखेड़ा, सारमऊ, सारमऊ, अम्बावाय के किसान एक टै्रक्टर ट्राली में ओले भर कर कलेक्ट्रेट पहुचे। उन्होंने ब्लाक प्रमुख बबीना पंजाब सिंह व ब्लाक काग्रेस अध्यक्ष अजय यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। किसानों ने ओलों का आकार दिखाते हुए बताया कि डोमागोर, नया खेड़ा, कंचन पुर में खेतों में ओलों की चार इच की पर्त जमी है। पेड़-पौधों की पत्तिया झड़ चुकी है। फसलों के नष्ट होने से उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
किसानों ने बताया कि पाच वर्षो के सूखा के बाद उन्होंने बड़ी उम्मीदों से खेतों में फसल बोई थी, किन्तु ओलों ने फसल को चौपट कर दिया। उन्होंने जाच कर क्षतिपूर्ति की माग की। जब किसानों को पता चला कि जिलाधिकारी राजशेखर के निर्देश पर उप जिलाधिकारी सदर गावो का दौरा करने गए है तो वह ट्राली में भरे ओलों को कलेक्ट्रेट में ही पलट कर अपने गाव लौट गए। उप जिलाधिकारी ने कई प्रभावित ग्रामों का दौरा कर स्थिति को देखा और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि ओला वृष्टि से सर्वाधिक सरसों को नुकसान पहुचा है। फसलों की क्षति के आकलन के निर्देश दे दिए गए है। 50 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान होने पर मुआवजा हेतु शासन को लिखा जाएगा। क्षति के आकलन के लिए कृषि विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में दौरा करेगी।
Posted on 15 November 2009 by admin
मुख्यालय की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत मदन सागर तालाब इन दिनों अपने अस्तित्व के लिये संघर्षरत है। पूरे तालाब में गंदगी का साम्राज्य है। सरोवर में हो रही सिंघाड़े की फसल भी जलापूर्ति को बाधित कर रही है। जिससे आपूर्ति के पानी में कीड़े व बदबूदार पानी मिल रहा है। बावजूद इसके जल संस्थान बेहतर जलापूर्ति का दावा कर रहा है।
नगर के लोगों को पीने का पानी एक समस्या बनती जा रही है। लंबे समय से पानी के लिये संघर्ष कर रहे लोगों को अब गंदे व बदबूदार पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नगर की आपूर्ति का मुख्य स्रोत मदन सागर भी अतिक्रमण के चपेट से नहीं बचा। सरोवर के चारों ओर कूडे व गंदगी के ढेर पटे पड़े है। तालाब के एक बड़े भाग में सिंघाड़ा की खेती की जा रही है। जिसका सीधा असर जलापूर्ति पर पड़ रहा है। मुनाफाखोरों ने पैसे के लालच में सरोवर की आरक्षित भूमि पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। शहर की गंदगी को तालाब के किनारे फेंका जा रहा है। शौच क्रिया करने के लिये भी लोग तालाब जाते है। जिससे इसका पानी प्रदूषित हो रहा है। कई वर्षो से नागरिकों को आपूर्ति उपलब्ध करा रहा मदन सागर खुद बदहाली का शिकार है। संस्थान की आपूर्ति का पानी बदबूदार व कीड़े युक्त मिल रहा है। जिससे नागरिक के स्वास्थ्य को खतरा बना हुआ है। आलम यह है कि लोगों को पीने के पानी के लिये हैण्डपंपों के पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि संस्थान के पानी में कीड़े आ रहे है। बावजूद इसके जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता आरआर यादव बेहतर जलापूर्ति करने का दावा कर रहे है। वह बताते है कि तालाब की सफाई के लिये पालिका को पत्र लिखा गया है।
Posted on 13 November 2009 by admin
स्वच्छ जल ही मानव जीवन का आधार है। मानव जीवन के लिए जल संचयन के तरीके अपनाये जाने की आवश्यकता है। जिससे जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके।
राजकीय इंटर कालेज के सभागार में जिला विज्ञान क्लब द्वारा आयोजित पर्यावरण जल जागरूकता अभियान के तहत हुई गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए सीडीओ जयराम लाल वर्मा ने कहा कि युवा वर्ग को जल संचयन के लिये जागरूक करने की आवश्यकता है। जिससे जल संकट की समस्या का सामना न करना पड़े। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विजय सिंह ने कहा कि पानी का दुरुपयोग रोकने के लिये सभी को सामूहिक प्रयास करना चाहिये। छात्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। जागरूकता अभियान के तहत जिला स्तरीय चित्रकला, भाषण एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विद्यालयों के छात्र छात्राओं ने इसमें प्रतिभाग किया। ग्रामोन्नित संस्थान, यंग साइंस क्लब व सप्त रंग ने विभिन्न प्रकार के माडल प्रस्तुत किये। छात्रा शिवानी, जेबा, सविता आदि ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। जिला समन्वयक ब्रजपाल कुटार ने जल संरक्षण पर विशेष प्रयास करने पर बल दिया। इस मौके पर जिला विज्ञान क्लब के सह समन्वयक शिवेंद्र प्रताप सिंह व प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्वनाथ त्रिपाठी ने किया।
Posted on 03 November 2009 by admin
ग्वालियर का मौसम जड़ी बूटियों के लिए अनुकूल है , आस-पास के वनों में औषधियों का बड़ा खजाना है।यहां यदि शोध किया जाय तो एक बड़े उद्योग के रूप में सामने आ सकता है। शहर के आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माताओं को 50 प्रतिशत से अधिक जड़ी बूटियां यहीं से मिलती हैं।
शहर के आसपास का हिस्सा पूरी तरह पेड़-पौधों से घिरा हुआ है। सामान्य रूप से हम इन्हें भले साधारण पेड़ समझते हैं लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यहां बड़ी तादाद में औषधीय पौधे हैं। शहर के औषधालय और फार्मेसी के साथ यहां की जड़ी बूटियां देश विदेश में भी सप्लाई की जाती हैं। शहर का मौसम यहां के रहवासियों के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय रहता है। कभी जरूरत से ज्यादा गर्मी तो कभी सर्दी, लेकिन विषय विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मौसम ही इन जड़ी बूटियों की बड़ी पैदावार का जिम्मेदार है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहर के आसपास स्थित जंगल में करीब 500 से अधिक प्रजातियों के औषधीय पेड़-पौधे हैं। इनमें अर्जुन, आंवला, हरण, बहेड़ा, अमलतास, खदिर, अश्वगंधा और शतावरी समेत कई पौधे शामिल हैं।
Posted on 02 November 2009 by admin
खुटला पंचानन मंदिर परिसर में पौधे रोपकर वृक्ष मित्र संगठन ने लोगों का आवाहन किया कि वह परिवार के सदस्य के जन्मदिन और कन्या की शादी के पश्चात एक वृक्ष जरूर लगायें।
वृक्ष मित्र संगठन की संरक्षक मीना कुमारी की अगुवाई में पौध रोपण हुआ। इस दौरान उपस्थित लोगों को जागरूक करते हुए मीना कुमारी ने कहा कि वृक्षों को काटकर हम प्रदूषण फैला रहे हैं और प्रदूषण इस पवित्र धरा को नरक बनाने पर तुला है। इस समस्या से निजात पाने के लिए वृक्षारोपण कर वन क्षेत्र को बढ़ाना संजीवनी के समान है। वृक्ष मित्र संगठन की रश्मि पटेल, रजनी गुप्ता, प्रीति चौरसिया, शशि प्रजापति, वंदना, गीता धुरिया, प्रियंका शिवहरे, रागिनी, सपना सिंह, विनीता सोनी, वर्षा सिंह और एकता निगम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान गीत गाकर लोगों का मनोरंजन किया। इस मौके पर खुटला कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मलका बेगम और सरिता सिंह ने सहयोग दिया। मंदिर परिसर में बादाम, आम, कटहल, जामुन, अनार, गुड़हल के पौधे रोपे गये।
Posted on 31 October 2009 by admin
बांदा- चित्रकूट मंडल में पौधरोपण का जायजा लेने आये मुख्य वन संरक्षक ने काम में हीलाहवाली मिलने पर वनाधिकारियों को जमकर फटकारा। मुख्य वन संरक्षक ने चेतावनी दी कि नरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं हुआ और इसकी शिकायत उन्हें मिली तो संबंधित अधिकारी बख्शे नहीं जायेंगे।
शुक्रवार को मवई स्थित सर्किट हाउस में मुख्य वन संरक्षक झांसी जोन उमाशंकर सिंह ने मंडलीय अधिकारियों की क्लास लेते हुए कहा कि पौधे रोपने भर से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। उनका रख रखाव और सिंचाई आदि की व्यवस्था भी इमानदारी से की जानी चाहिये ताकि सूखे बुंदेलखंड को हरा-भरा बनाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि नरेगा के तहत कराये गये काम की मजदूरी मजदूरों को तत्काल चेक के माध्यम से दिया जाये और उनके खाते नजदीकी बैंक में खुलवाये जायें।सिंह ने कहा कि अगर किसी मजदूर द्वारा भुगतान न मिलने की शिकायत उनके पास पहुंची तो संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। राजस्व एवं विभागीय कार्यो की समीक्षा बैठक में श्री सिंह ने नर्सरियों में मौजूदा पौधशाला की जानकारी ली। राजस्व वसूली मानक के अनुरूप न होने पर वनाधिकारियों को फटकार लगायी। बैठक में चित्रकूटधाम मंडल के वन संरक्षक कमल किशोर, डीएफओ नुरुल हुदा, चित्रकूट के वनाधिकारी डीके चोपड़ा, महोबा के रामराज गौतम, हमीरपुर के एचवी गिरीश उपस्थित रहे।
Posted on 27 October 2009 by admin
ग्वालियर -चंबल नदी में घड़ियालों की संख्या बढ़ेगी। देवरी घड़ियाल केन्द्र में वयस्क हो रहे 306 शावकों में से इस साल दो सौ को नदी में छोड़ा जाएगा। मुरैना वन मंडलाधिकारी ने शावकों को छोड़ने के लिए आला अफसरों से इजाजत मांगी है।
मुरैना के देवरी घड़ियाल केन्द्र में चंबल नदी से एकत्रित कर लाए गए घड़ियाल के अंडों को रखा जाता है। यहां शावकों के वयस्क होने पर चंबल या फिर केन नदी में छोड़ दिया जाता है। इस साल मार्च-अप्रैल महीने में वन विभाग ने चंबल नदी के विभिन्न स्थलों से घड़ियालों के 500 अंडे एकत्रित किए थे। इनमें से 401 शावक जन्म ले सके थे, 95 की मौत हो चुकी है। इस समय घड़ियाल केन्द्र में 306 शावक बचे हुए हैं। इनमें से 200 को नदी में छोड़ने के लिए वन मंडल मुरैना ने आला अफसरों को पत्र लिखा है। यदि अनुमति मिल जाती है तो मई-जून में इन्हें चंबल नदी, केन या फिर सोन नदी में छोड़ दिया जाएगा।
Posted on 27 October 2009 by admin
ललितपुर - साईबेरियाई पक्षियों को मारने के आरोप में एसओजी के अधिकारियों ने दो लोगों को गिरफ्तार किया।
जिले के एसओजी प्रभारी मलखे दीक्षित ने बताया कि एसओजी (विशेष कार्रवाई बल) ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बारौत इलाके में स्थित गोविंद सागर बांध की घेराबंदी कर छोटू और राकेश चौहान को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से पांच मृत साइबेरियाई पक्षी (साईबेरियन क्रेन) बरामद किए।
पुलिस के अनुसार छोटू और राकेश ने स्वीकार किया कि उन्होंने साईबेरियाई पक्षियों को गोविंद सागर बांध के पानी में जहर डालकर मारा। एसओजी प्रभारी ने बताया कि दोनों अभियुक्तों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
Posted on 26 October 2009 by admin
उरई- जिला अस्पताल में नियमित रूप से निकलने वाला चिकित्सीय कचरा नष्ट न किए जाने की स्थिति में संक्रामक रोगों के फैलने की वजह बन जाता है। इसके बावजूद उक्त खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग नहीं है। हालत यह कि अस्पताल में ही जगह जगह चिकित्सीय कचड़ा कई-कई दिन तक पड़ा रहता है। इतनी ही नहीं यहां से उठाये गए कचरे को नष्ट करने के लिए न अलग से कोई स्थल है और न ही डंपिंग ग्राउंड है। इसकी वजह से यहां से उठाया गया उक्त कचरा मलिन बस्तियों की कच्ची गलियों में पुराई के लिए डाल दिया जाता है। हालांकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी का दावा है कि हर रोज जिला अस्पताल से चिकित्सीय कचरा उठाया जा रहा है।
जिला अस्पताल एवं जिला महिला अस्पताल में हर रोज करीब एक ट्राली चिकित्सीय कचड़ा निकलता है। हादसों में घायल मरीजों की ड्रेसिंग के दौरान निकली खून और मवाद से सनी रूई और कपड़े एवं आग से झुलसे मरीजों की त्वचा से साफ करने के दौरान गंदी हुई पट्टियों को खुले में फेंकने से उनकी वजह से संक्रामक रोग फैलने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। इसीलिए स्पष्ट आदेश हैं कि इस तरह के कचरे को तत्काल नष्ट किया जाना चाहिए। इसके लिए पहले जिला अस्पताल में करीब बारह लाख रुपये की लागत से इंसीनेटर मशीन स्थापित कराई गई थी जिसमें जलाकर इस तरह के कचरे को नष्ट करने की योजना बनाई गई थी लेकिन उक्त मशीन सफेद हाथी साबित हुई। कभी भी जिला अस्पताल में चिकित्सीय कचरा नष्ट करने के लिए उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। इस तरह के कचरे को जिला अस्पताल के पीछे या फिर किसी पुराने कमरे में डाल दिया जाता है। अब अस्पताल भवन के पीछे इतना चिकित्सीय कचरा जमा हो गया है कि अगर साफ किया जाए तो चार ट्रक भर जाएंगे। इंजेक्शन लगाने में इस्तेमाल सिरिंज और सुइयां भी कचरे के ढेर में ही फेंक दी जाती हैं। स्मैकिए सुई सिरिंज और प्लास्टिक की बोतलें ढूंढने के लिए इसी खतरनाक कचरे में हाथ डाल देते हैं। इसकी वजह से वे भी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ जाते है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी के सामने रोज इस तरह का नजारा देखा जाता सकता है। सफाई सिर्फ उसी दिन दिखाई देती है जब किसी अधिकारी के यहां निरीक्षण पर आने की खबर होती है। हालांकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर वीवी आर्या का कहना है कि पहले इंसीनेटर मशीन का प्रयोग कचरा नष्ट करने में किया जाता था। लेकिन उससे भी फैक्चर वाले मरीजों के इलाज के बाद काटा गया प्लास्टर नष्ट नहीं किया जा सकता था। इस वजह से उसे नष्ट करने में व्यवहारिक कठिनाई होती थी लेकिन अब व्यवस्था बदली हुई है। कचरा उठाने का ठेका एक फर्म को दिया गया है। हर रोज ठेकेदार की गाड़ी अस्पताल आती है और चौबीस घंटे में निकले कचरे को समेट कर यहां से ले जाती है। उन्होंने कहा कि अगर ठेकेदार द्वारा इस काम में लापरवाही की जाती है तो उसका भुगतान रोक दिया जाता है। हालांकि अभी तक एक भी बार ठेकेदार का भुगतान उक्त शिकायत पर रोकने का उदाहरण नहीं है। जिला अस्पताल से उठाया गया कचरा बाद में कई बार मलिन बस्तियों की कच्ची गलियों में डाल दिया जाता है जिससे बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। कचरा यहां वहां फेंकने की सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां कहीं पर इस तरह की गंदगी को फेंकने के लिए स्थायी डंपिंग ग्राउंड नहीं है। पर उक्त गंभीर समस्या पर किसी का ध्यान नहीं होने से इसके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।