कुदरत  का  कहर  क़यामत  के  आने   की  दस्तक  है  पानी  ही  पानी. इस से भी ख़राब हालात होंगे २०१२ में   ये परिणाम है  कुदरत से खिलबाड़ का........ “Plant Trees to Save Environment” , *खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "bundelkhandlive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | कृषि

मण्डल स्तरीय किसान मेला और कृषि प्रदर्शनी का आयोजन

Posted on 13 March 2010 by admin

किसान मेले में खेती-बारी के गुर बताए

बांदा - कृषि विज्ञान केन्द्र कमासिन में मण्डल स्तरीय किसान मेला और कृषि प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। चारों जनपदो के किसान बड़ी सख्या में पहुंचे। कृषि विभाग के अधिकांश अधिकारी नदारद रहे। सी.डी.ओ हीरामणि मिश्रा ने फीता काटकर और इलाहाबाद बैंक के एल.डी.एम ए.के दीक्षित ने दीप जलाकर मेला प्रदर्शनी की शुरूआत की।

फसल वैज्ञानिक डा.जितेन्द्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि किसान, वैज्ञानिक और अधिकारियों के एक मंच पर आने से जागरूकता पैदा होगी। तकनीकी प्रबंधन से खेती, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य पालन और कृषि का विविधीकरण हो सकेगा। डा.तेजप्रकाश ने कृषि विज्ञान केन्द्र के उद्देश्य और कार्य बताए।

डा.प्रकाश ने बताया कि विज्ञान केन्द्र शोध और प्रदर्शन करता है। इसे खेत-खलिहानों तक ले जाने का काम दूसरे विभाग करते हैं। जिला कृषि अधिकारी हमीरपुर हबीब खां ने मृदा स्वास्थ्य पर जानकारी दी। किसान रामसनेही साहू और भरत यादव (महोबा) ने भी संबोधित किया।  मुख्य प्रबंधक इलाहाबाद ग्रामीण बैंक रामलखन कुशवाहा ने बैंक योजनाएं बताईं। कृषक क्लबों के गठन पर जोर दिया। प्रसार वैज्ञानिक मुलायम सिंह सहित सलाहकार रामविशाल पाल, उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी आरके सिंह, किसान जीपी सिंह, शिवमंगल सिंह चौहान आदि ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनी में कृषक क्लब भदेहदू प्रथम, दयाल फर्टिलाइजर द्वितीय, तिरूपति स्प्रिकलर तृतीय रहे।

Comments (0)

राई/सरसों की खेती में कीट रोगों से बचाव के उपाय

Posted on 20 January 2010 by admin

लखनऊ -  राई की खेती में फूल आने और दाना भरने की अवस्था अधिक  संवेदनशील होती है। राई में झुलसा रोग, सफेद गेरूई रोग, तुलसिता रोग, आरा मक्खी एवं मॉहू कीट आदि का प्रकोप हो जाता है, इनसे बचाव करके अच्छी उपज पाई जा सकती है।

कृषि विभाग के प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार राई में झुलसा रोग के तहत पत्तियों और फलियों पर गहरे कत्थई धब्वे बन जाते हैं जिसमें गोल गोल छल्ले स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसके अतिरिक्त सफेद गेरूई रोग में निचली सतह पर फफोले बनते हैं और बाद में पुष्प विन्यास विकृत हो जाता है। जब कि तुलसिता रोग में निचली सतह पर सफेद रोयेन्दार फफून्दी  के साथ ऊपरी सतह पर पीलापन आ जाता है। झुलसा, सफेद गेरूई एवं तुलसिता तीनों ही रोगों पर नियन्त्रण के लिए जिंक मैग्नीज काबोZनेट 75 प्रतिशत दो किलो ग्राम या जीरम 80 प्रतिशत 2 किलोग्राम या जिनेव 75 प्रतिशत 2.5 किलोग्राम प्रति हे0 की दर से 800-1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।     इन रोगों के अतिरिक्त आरा मक्खी कीट भी राई में लग जाते हैं। इसकी गिडार काले रंग की होती है, जो पत्तियों को बहुत तेजी से खाती है। इसकी रोकथाम के लिए इन्डोसल्फान 35 ई0सी0 1.25 लीटर पानी या मैलाथियान 50 ई0सी01.5 लीटर, क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत धूल अथवा इण्डोसल्फान 4 प्रतिशत धूल अथवा मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत धूल 25 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।

राई में लगने वाला मॉहू कीट भी काफी हानिकारक होता है। यह छोटा एवं कोमल शरीर वाला हरे मटमेले भूरे रंग का कीट है, जिसके झुण्ड पत्तियों, फलों, डंठलों,फलियों आदि पर चिपके रहते हैं एवं रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं। इसकी रोकथाम के लिए मैलाथियान 50 प्रतिशत ई0सी0 2 लीटर या इण्डोसल्फान 35 ई0सी0 1.25 लीटर मोनोक्रोटोफास 36 एस0एल0 0.75 लीट प्रति हे0 की दर से 800-1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

Vikas Sharma
upnewslive.com
E-mail :editor@bundelkhandlive.com
Ph-09415060119

Comments (0)

उपभोक्ताओं ने कटौती कम करने की मांग उच्चाधिकारियों से की

Posted on 17 January 2010 by admin

कई महीनों से लगातार जारी विद्युत कटौती से जिले के लोग पूरी तरह आजिज आ चुके हैं। इसके अलावा कड़ाके की ठण्ड के बावजूद भी दिन में पूरी बिजली न मिल पाने के कारण किसानों को रात के समय खेतों में पानी लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसी कारण ठण्ड के शुरुआती दौर में रात के समय पानी लगाने पर ठण्ड लगने से तबियत खराब हो जाने के चलते दो किसानों की मौत भी हो चुकी है। ग्राम्य विकास मंत्री द्वारा किसानों के लिए चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई थी। इसके बावजूद भी जिले के किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। किसानों ने दिन के समय बिजली दिलवाए जाने की मांग की है।

ज्ञात हो कि भारी बिजली कटौती के चलते जिले के किसानों को कुछ ही घंटों की बिजली मिल रही है वो भी रात के समय। जबकि कई वर्षो से सूखे की मार झेल रहे किसानों को खेती की सिंचाई के लिए अपने को प्रदेश सरकार द्वारा दस घंटे बिजली उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए थे। लेकिन कुछ दिन ही पर्याप्त बिजली मिलने के बाद से ही अंधाधुंध कटौती जारी कर दी गई। जिसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण इलाकों के किसानों का कहना है कि भीषण सर्दी के बावजूद भी उन्हें दिन में बिजली नहीं मिल पा रही जिसके कारण उन्हें अपने खेतों की सिंचाई रात में ही करनी पड़ती है। रात में खेतों की सिंचाई करने से किसान बीमार भी हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि अभी हाल ही में ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद ने किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अधिकारियों से कहा था। लेकिन जिले के कुछ भाग को छोड़ आज भी ज्यादातर इलाके में पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही। जो थोड़ी बहुत बिजली मिलती है वह भी रात के समय। किसानों का कहना है कि रात के समय जितनी बिजली मिलती है वह यदाकदा लाइन में आई फाल्ट के नाम पर काट दी जाती है और किसान रात-रात भर जागकर इन्तजार करना पड़ता है जिसके कारण नीन्द तो खराब होती ही है साथ ही काम का भी नुकसान होता है। किसानों ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है।

श्री गोपाल
9839075109

Comments (0)

कैम्प में किसानों को करोड़ों के ऋण व क्रेडिट कार्ड वितरित किए गये

Posted on 16 December 2009 by admin

मेगा कृषि ऋण वितरण कैम्प का आयोजन उप जिलाधिकारी बी. राम की अध्यक्षता में विकास खण्ड सभागार में किया गया। जिसमें लगभग 2000 किसानों को 7.5 करोड़ के ऋण वितरित किये गये।

प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र की 5 पीएनबी शाखाओं के 781 कृषकों को 5,24,77,000 रूपये स्वीकृत हुये। इनमें से शिविर में 655 किसानों को 4,67,93,000 रूपये के क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये। इसी क्रम में स्टेट बैंक की एक शाखा के 94 कृषकों को 88,80,000 रूपये स्वीकृत हुये। इन सभी को शिविर में ही क्रेडिट कार्ड वितरित कर दिया गया। क्षेत्र की 8 ग्रामीण बैंक शाखाओं के 408 किसानों को 1,69,16,000 रूपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इनमें से 402 किसानों को 1,66,97,000 रूपये के क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये। डीसीबी बैंक की एक शाखा के 407 किसानों को 13,54,000 की धनराशि स्वीकृत हुयी। इनमें 407 किसानों को 13,54,000 के कार्ड वितरित किये गये। एल.डी.बी की एक शाखा के 153 किसानों को 13,35,000 रूपये स्वीकृत हुये जिनके कार्ड शिविर में वितरित कर दिये गये। इस प्रकार कुल 1843 किसानों को 8,60,62,000 रूपये के ऋण क्रेडिट कार्डो के माध्यम से स्वीकृत हुये और आज के शिविर में कुल 1,711 कृषकों को 7.5159 करोड़ रूपये के क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये। शिविर में उपस्थित उपजिलाधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी विकास मिश्र तथा एल.डी.एम जगदेव सिंह आदि ने क्रेडिट कार्ड के महत्व पर प्रकाश डालते हुये किसानों को समझाया कि वे इस धन का सदुपयोग करे। इस धन को वे कृषि कार्य में ही लगायें और समय से ऋण की वापसी बैंक में कर दें। जो किसान इस धन को बर्वाद करेगे निश्चय ही वे इसे लौटा नहीं पायेंगे और उनकी साख खराब हो जायेगी। ऐसी स्थिति में बैंक उनकों दुबारा ऋण नहीं दे पायेगा और वे पुन: साहूकारों के चंगुल में फस जायेंगे। उप जिलाधिकारी ने शिविर में उपस्थित बैंक प्रबन्धकों से क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिये किसानों को अनावश्यक परेशान न करने की अपील की साथ ही किसानों से कहा कि यदि बैंक उन्हे परेशान करता है, तो वे अपनी परेशानी सीधे मुझे बता सकतें है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों भी शिकायतें सही पाये जाने पर आवश्यक कार्यवाही करने की चेतावनी दी।

Comments (0)

ऋण का सही उपयोग करें किसान

Posted on 18 November 2009 by admin

इलाहाबाद बैंक द्वारा आयोजित किसान जागरूकता समारोह को संबोधित करते हुए एलडीएम गोपाल झा ने कहा कृषक बैंकों से प्राप्त ऋण का कृषि विकास में सार्थक प्रयोग करें। फसल आने पर समय से इसकी अदायगी कर अपनी साख बनाये रखें ताकि बैंक आगे उन्हें अधिकतम सहयोग देने से न मना कर पायें। योजनाओं की जानकारी करने के बाद ही उचित योजना मे जरूरत के मुताबिक ऋण लेने के लिए ही बैंकों में संपर्क करें।

श्रीनगर क्षेत्र के डिगरिया गांव में इलाहाबाद बैंक द्वारा आयोजित किसान जागरूकता समारोह को संबोधित करते हुए एलडीएम गोपाल झा ने किसानों को सलाह दी कि कृषि विकास के लिए सरकार और बैंक हर तरीके का सहयोग देने को तत्पर हैं। बावजूद इसके योजनाओं की जानकारी करके उचित और जरूरत के मुताबिक ऋण के लिए ही आवेदन करें। समारोह में एलडीएम कार्यालय के राजेश श्रीवास्तव व जेपी निगम ने किसानों को इलाहाबाद बैंक की ओर से कृषि विकास के लिए चलायी जा रही विविध योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। श्रीनगर शाखा के प्रबंधक एके शर्मा ने ग्रीन कार्ड और किसान क्रेडिट कार्ड की बारीकियां समझाने के साथ ही बैंक की जमा योजनाओं की खूबियां बताई। कहा कि ऋण लेना बुरी बात नहीं है पर समय से इसकी अदायगी सुनिश्चित करके किसान आगे की योजनाओं के लिये ऋण पाने में ज्यादा कारगर हो सकते है। फसल आते ही किश्तों की अदायगी बिना किसी हीलाहवाली के करने वाले किसानों को ऋण देने में बैंकर्स जरा भी विलंब नहीं करते। समारोह में विभिन्न गांवों के ढाई सौ से ज्यादा किसान मौजूद रहे। आयोजन के समापन के बाद एलडीएम गोपाल झा ने मौजूद किसानों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उनकी अधीनस्थ शाखाओं में होने वाली किसी भी असुविधा के लिए गोपनीय सूचना देने की अपील की।

Comments (0)

बीज उत्पादन का लाभ बुंदेलखंड के किसानों को मिलेगा

Posted on 01 November 2009 by admin

चित्रकूट- मंडलीय किसान मेला व गोष्ठी के अवसर पर लखनऊ से आये अपर कृषि निदेशक राम बली ने यहां पर मौजूद किसानों को सीधे बीज का उत्पादन करने की सलाह दी।अपर कृषि निदेशक  ने कहा कि अगर बीज का उत्पादन यहां पर सही रूप में होता दिखाई देगा तो फिर विभाग को संयंत्र स्थापित करने में कोई दिक्कत नही आयेगी और इसका सीधा लाभ बुंदेलखंड के किसानों को ही मिलेगा। मंडल का कोई भी किसान अगर बीज तैयार करने की हसरत रखता है तो वह सीधे तौर पर आकर लखनऊ में सम्पर्क कर सकता है।

गोष्ठी के अवसर पर बीज विकास निगम के महानिदेशक सरोज ने कहा कि बीज की कोई दिक्कत नही है। गोदामों में रबी के बीज आवश्कतानुसार मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर किसान यहां पर बीज तैयार करेंगे तो वे यहां की परिस्थिति के अनुकूल होंगे और उपज ज्यादा देंगे।

मुख्य विकास अधिकारी भारत यादव ने गोबर रूपी धन को नकदी धन मानते हुये इसे सुरक्षित करने की बात करते हुये कहा कि पशु पालन से ही यह संभव होगा। इससे न केवल बीमार होते खेतों की हालत में सुधार होगा बल्कि गौ पालन से और भी तमाम फायदे स्वत: ही हो जायेंगे। उन्होंने अन्ना प्रथा को बुंदेली खेती के लिये अभिशाप बताते हुये इसे खत्म करने के लिये जोर दिया। यादव ने कहा कि जिले में अब डीएपी खाद का संकट नही है, नई रैक उतर चुकी है। उन्होंने नरेगा व अन्य योजनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी।

संयुक्त कृषि निदेशक एल.एस.कटियार ने कहा कि किसान नयी तरह की खेती का प्रयोग सीखें और कृषि यंत्रों को समझें और अपने खेतों में इसका उपयोग करें। उप कृषि निदेशक मो. आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि किसान मेला लगाने का उद्देश्य यहां पर आये किसानों की संख्या ने पूरा कर दिया। तीन दिनों तक किसानों ने यहां खेती की नई तकनीक की जानकारी विशेषज्ञों से ली है अब इसे उपयोग में लाने की जरुरत है।

जिला कृषि अधिकारी एचएन सिंह ने कहा कि खाद की समस्या तो लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि किसान अगर फसल से ज्यादा उत्पादन लेना चाहते हैं तो बीजों के साथ ही खाद को न डालें इससे बीज जल जाते हैं और आधे से ज्यादा नष्ट हो जाते हैं। इसलिये खाद और बीज के डालने के बीच में थोड़ी अंतर बनाकर रखें।

इस दौरान भूमि संरक्षण अधिकारी जी पी कुशवाहा, जिला सलाहकार राजहंस सिंह, राम विशाल के साथ ही बांदा, जालौन, हमीरपुर, महोबा व बांदा के भूमि संरक्षण व कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। यहां पर ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के शिक्षक, छात्र-छात्रायें व महिला और पुरुष किसान मौजूद रहे।

Comments (0)

कम पानी वाली फसल बोयें किसान

Posted on 31 October 2009 by admin

चित्रकूट -मंडलीय किसान मेला व गोष्ठी के दूसरे जिलाधिकारी ने  पांच जनपदों से आये किसानों को संबोधित करते हुये कहा कि रबी की फसल में गेंहू के स्थान पर चना, मसूर, राई व अलसी को अधिक से अधिक क्षेत्रफल में उगाकर किसान ज्यादा फायदा कमायें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जब पानी की कमी है तो फिर हमें ऐसी फसलों का चुनाव करना चाहिये जिनमें पानी की खपत कम हो। इन फसलों में लागत भी कम होती है। उन्होंने गेंहू की बुवाई के लिए सिर्फ उन क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए कहा जहां पर पानी पर्याप्त मात्रा में है। मुख्य विकास अधिकारी भारत यादव ने कहा कि डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके बेहतर उर्वरक है। संयुक्त कृषि निदेशक एलएस कटियार ने रवी फसल की अगली रणनीति पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जमीन व पानी की स्थिति को देखकर ही फसल की बोवाई की जानी चाहिये। उप निदेशक मो. आरिफ सिद्दीकी ने कहा कि जिले में जो भी सिंचाई के लिये बांध है उनमें पानी काफी कम है। केवल गुंता बांध में ही पानी है वह भी केवल पन्द्रह दिनों के लिये। इसलिये गेंहू का क्षेत्रफल कम करके दलहनी और तिलहनी फसलों को ही बोया जाये। जिला कृषि अधिकारी एच एन सिंह ने गोदामों में उपलब्ध कीटनाशकों, बीजों व उर्वरकों के बारे में जानकारी दी। भूमि संरक्षण अधिकारी जी पी कुशवाहा ने भूमि संरक्षण के कार्यो को एक सुन्दर जमीनी माडल बताया। तकनीकी चर्चा के दौरान चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के डा. पीके राठी ने जल प्रबंधन पर प्रकाश डाला तो कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के डा. विजय सिंह ने बीज उत्पादन के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। मंडलीय अभियंता यूपी एग्रो काली चरण ने कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी। जहां एक तरफ दीवारी नृत्य ने लोगों को लुभाने का काम किया वहीं रात के सत्र में पाठा क्षेत्र की राई व कोलहाई बाहर से आये किसानों का मनोरंजन कर रही है। इस मेले में पांच जिलों के लगभग एक हजार किसान आये हैं। प्रदर्शनी में गेंहू और चने के बीज भी किसानों को बांटे जा रहे हैं। उप कृषि निदेशक बांदा विजय सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के डा. छोटे सिंह, कृषि वैज्ञानिक डा. जितेन्द्र सिंह आदि ने भी संबोधित किया। इस दौरान भारी संख्या में महिला व पुरुष किसानों की भागीदारी दिखाई दी। यहां पर कृषि विभाग लखनऊ, कृषि विभाग, भूमि संरक्षण, उद्यान, पशु पालन, मत्स्य, वन, जेट्रोफा मिशन, यूपी एग्रो, बीज विकास निगम, स्प्रिंगलर और पम्प सेट कम्पनियों व लघु सिंचाई के भी स्टालों पर भी लोग उमड़ रहे हैं। आर के एजेन्सी के स्टाल पर हैंडपम्प द्वारा पानी निकलता देखने के लिये किसानों में भारी संख्या में उत्सुकता दिखाई दे रही है।

Comments (0)

निषाद समाज ने मौरंग के पट्टे की माँग की

Posted on 30 October 2009 by admin

हमीरपुर- जिले की नदियों के किनारे बारी लगाने वालों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर तहसील स्तर पर 5 वर्ष और 10 वर्ष का पट्टा दिये जाने की मांग की। प्रदर्शन कारियों का कहना था कि निर्धारित राजस्व शुल्क पर पट्टा दिया जाये। बैंक से ऋण दिलाया जाये और दैवी आपदाओं से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति भी दिलायी जाये।

जिले में यमुना, बेतवा समेत आधा दर्जन नदियों के किनारे मौरंग में गेहूं, चना के साथ जायद की सब्जियों की खेती करने वाले मेहनतकश लोग दबंगों के अत्याचार का शिकार होते हैं। वर्ष 1960 के बाद यहां मिट्टी की जगह मौरंग आने लगी। जिस पर सब्जी की खेती लोग करने लगे, मगर पिछले 15 सालों से मौरंग ठेकेदार व दबंग इन बारियों को उजाड़कर खनन करते हैं। जबकि एक बारी के लगाने में हजारों रुपये का खर्च आता है। निषाद समुदाय के लोग इस उत्पीड़न से आर्थिक तौर पर पूरी तरह से कंगाल हो जाते हैं और कभी यह लोग दैवी आपदा के शिकार होते हैं। ग्राम समाज व किसानों के खेतों के ऊपर पड़ी मौरंग खनन का पट्टा राज्य सरकार करती है, मगर इन लोगों की सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता। जबकि यह मेहनतकश लोग सूदखोरों से ब्याज में पैसा लेकर सब्जी की खेती करते हैं और नुकसान होने पर दूसरे प्रदेशों में रोजी-रोटी के लिए पलायन को मजबूर होते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की मौरंग पर बारी लगाने का 5 व 10 वर्ष का पट्टा इच्छुक व्यक्ति को दिया जाये। बैंकों से ऋण दिलाया जाये, ताकि खाद, बीज, पानी की भरपाई हो सके। दैवी आपदाओं से क्षति होने पर मुआवजा भी दिलाया जाये।

Comments (0)

टोकन प्राप्त किसान अपना धान बेच सकेगा

Posted on 30 October 2009 by admin

अतर्रा-  प्रशासन ने  धान क्रय केंद्रों में बिचौलियों को रोकने के लिए टोकन सिस्टम की रणनीति बनायी है। किसान टोकन को लेकर निर्धारित क्रय केंद्र में अपना धान बेच सरकारी दाम पा सकेगा। इस प्रक्रिया से बिचौलियों व व्यापारियों में अफरा तफरी मच गयी है।

शासन धान उत्पादक किसानों को क्रय केंद्रों के माध्यम से पूरा लाभ देने के लिए कटिबद्ध हैं। इसके लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है। टोकन प्राप्त किसान ही निर्धारित क्रय केंद्रों में अपना धान बेच सकेगा। टोकन सिस्टम से बिचौलियों और किसानों के रूप में लाभ उठाने वाले व्यापारियों को रोकने की पूरी व्यवस्था की गयी है। अगर ये सिस्टम पूरी ईमानदारी से संचालित हुआ तो कोई शक नहीं कि किसानों को लाभ नहीं मिलेगा। फिर भी सिस्टम में कहीं न कहीं सुराख रह ही जाता है। जो बने-बनाये सिस्टम को कंडम करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। एसडीएम रामसहाय यादव का कहना हैं कि टोकन सिस्टम में वास्तविक धान उत्पादक किसान ही लाभ पायेंगे न कि बिचौलिये। यादव ने बताया कि तहसील क्षेत्र में दस धान क्रय केंद्र स्थापित किये गये हैं जिसमें से तीन भारतीय खाद्य निगम के हैं। पांच में पीसीएफ का क्षेत्रीय सहकारी समिति अतर्रा में, नेफेड का मंडी अतर्रा, विपणन शाखा का उपमंडी खुरहंड में, तथा नेफेड और विपणन शाखा का बिसंडा में धान क्रय केंद्र खोला गया है। इन पांचों को क्रमश: तहसील क्षेत्र के 31, 22, 23, 15 और दस ग्रामों के क्रय का अधिकार दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि दो केंद्र नेफेड मंडी खुरहंड में और एग्रो मंडी अतर्रा में ऐसे रहेंगे जिसमें तहसील क्षेत्र के कहीं का भी टोकन प्राप्त किसान अपना धान बेच सकेंगे।

एसडीएम ने बताया कि लेखपालों के माध्यम से गांव-गांव धान उत्पादक किसानों का व्यौरा तैयार कराया गया है। एसडीएम ने बताया कि सर्वे पूर्ण होते ही टोकन वितरण भी लेखपालों के माध्यम से करा क्रय केंद्रों में खरीद शुरू करा दी जायेगी। उन्होंने कहा कि सिस्टम को जो भी बिगाड़ने का प्रयास करेगा कार्रवाई का भागीदार बनेगा।

Comments (0)

धान खरीद -उपज व काश्तकारों का सर्वे शुरू

Posted on 29 October 2009 by admin

झांसी-  धान की सरकारी खरीद के 13 नवम्बर तक शुरू होने की सम्भावना है। इसके लिए धान की उपज व काश्तकारों का सर्वे शुरू करा दिया गया है।

प्रदेश में धान खरीद के सम्बन्ध में आज प्रमुख सचिव द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग की गई। इसमें बताया गया कि जिले में धान की खरीद हेतु समथर में दो, मोंठ व कोछाभावर में एक-एक खरीद केन्द्र बनाए गए है। इनमें 12-13 नवम्बर से खरीद शुरू कर दी जाएगी। खरीद के लिए तैयारियो को अंजाम देना शुरू कर दिया गया है। इस दौरान जिलाधिकारी राजशेखर, नगर मजिस्ट्रेट, प्रभारी अधिकारी धान खरीद उमाकात त्रिपाठी, डिप्टी आरएमओ दिनेश कुमार तिवारी आदि उपस्थित रहे।

प्रभारी अधिकारी धान खरीद ने बताया कि इस बार टोकन की नई व्यवस्था के तहत धान पैदा करने वाले किसानों का ग्रामवार सर्वे शुरू कर दिया गया है। इसके तहत बोए गए धान के क्षेत्र का आकलन, काश्तकार, उसके सहखातेदार व जमीन को लेकर चल रहे विवाद आदि का पता किया जाएगा। सर्वे के बाद पंचायत में खुली बैठकों में उपज पैदा करने वाले किसान को टोकन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 5 नवम्बर तक सम्बन्धित किसानों की सूची जारी कर दी जाएगी।

Comments (0)


www.internationalnewsandviews.com
Advertise Here

Advertise Here
-->


""काम की गारंटी है" हर गाव की गारंटी है"
                                         हर महिला पुरुष को दाम की गारंटी है""
महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
 Type in