मऊ (चित्रकूट) - दो पक्षों के बीच हुई मारपीट के मामले को सुलह समझौते के माध्यम से निपटाने के लिए पुलिस ने दोनो पक्षों को थाने बुलाया। एक पक्ष के लोग जब थाने पहुंच गए तो पुलिस ने समझौते का दबाव बनाते हुए हर्जाना मांगा। हर्जाना न देने पर अभद्रता करते हुए चाचा भतीजे को लाकप में डाल दिया। दूसरे दिन चाचा का चालान करते हुए नाबालिग लड़के को छोड़ दिया। पीड़ित ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिख न्याय की गुहार लगाई है।
मऊ थानान्तर्गत उफरौली गांव निवासी बाबूलाल पुत्र तिलंगा ने बताया कि बीती 9 मार्च 10 को गांव के ही दबंगो ने उसके साथ उसकी भाभी व भतीजे शिवभजन के साथ मारपीट की थी। जिसकी शिकायत उन्होंने थाने में की थी। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। दोबारा शिकायत करने पर 22 मार्च को एसआई ओ.पी शर्मा उनके गांव आए और दोनो पक्षों को सुलह समझौते के लिए थाने में बुलाया। बाबूलाल ने बताया कि वह मंगलवार को अपनी भाभी बच्ची पत्नी सन्तलाल व भतीजे मंजू उर्फ शिवभजन पुत्र सन्तलाल जिसकी उम्र 13 वर्ष है के साथ थाने पहुंच गया। उस दौरान उसके साथ दो अन्य लोग भी थे। जबकि दूसरे पक्ष के लोग थाने नहीं आए। लेकिन एसआई शर्मा ने उनकी बात न सुनते हुए गाली-गलौज कर रुपये की मांग करते हुए समझौते का दबाव डाला। लेकिन उनके द्वारा दूसरे पक्ष को बुलाने के लिए आरजू मिन्नत की गई। फिर भी एसआई ने अभद्रता करते हुए उसे व उसके नाबालिग भतीजे को लाकप में डाल दिया। बाबूलाल ने बताया कि बुधवार की सुबह शान्ति भंग की आशंका में उसका चालान कर उसे एसडीएम मऊ के सामने पेश किया, और भतीजे को अपनी कस्टडी में थाने में ही बिठाए रखा।
पीड़ित ने मानव अधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले थाने की पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। उधर चर्चा है कि थाना पुलिस के एस.आई ने मामला बढ़ता देख देर शाम बच्चे को छोड़ दिया। जब इस सम्बंध में एसआई शर्मा ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि लड़के को लाकप में नहीं बन्द किया था। वहीं अभद्रता व समझौते की बात को भी नकार दिया। मामले की जानकारी के बाद से कई मानव अधिकार के प्रतिनिधियों ने भी पुलिस के इस रवैए की आलोचना की है।
श्री गोपाल
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