कुदरत  का  कहर  क़यामत  के  आने   की  दस्तक  है  पानी  ही  पानी. इस से भी ख़राब हालात होंगे २०१२ में   ये परिणाम है  कुदरत से खिलबाड़ का........ “Plant Trees to Save Environment” , *खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "bundelkhandlive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | पन्ना

सब्जी बेचने में उसकी मदद करने की बजाय स्कूल जा सकेंगे

Posted on 27 October 2009 by admin

पन्ना - मध्यप्रदेश की एक महिला सब्जी विक्रेता की किस्मत रविवार को चमक उठी जब यहां जारी हीरों की नीलामी में उसका एक हीरा 11.40 लाख रुपए में बिक गया। प्यारीबाई नामक इस महिला को यह हीरा अपने दिहाड़ी मजदूर पति के साथ पन्ना के पास उथली खदान में खुदाई के दौरान फरवरी में मिला था।

तीन दिनों से पन्ना में जारी हीरों की नीलामी में रविवार को प्यारीबाई का 11 कैरेट 40 सेंट का हीरा 11.40 लाख रुपए में नीलाम हुआ। उसे रायल्टी व आयकर चुकाने के बाद 9.86 लाख रुपए मिले। रामप्यारी ने बताया कि वह इन पैसों से अपना घर बनवाएगी। अब वह अपने बच्चों को पढ़ाएगी और खेती के लिए जमीन भी खरीदेगी। प्यारी बाई को इस बात की ज्यादा खुशी है कि अब उसके दो बेटे व एक बेटी सब्जी बेचने में उसकी मदद करने की बजाय स्कूल जा सकेंगे।

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मप्र के ताज में एक और ‘हीरा’

Posted on 13 October 2009 by admin

भोपाल- बहुराष्ट्रीय कंपनी रियो टिंटो छतरपुर में खोजे गए हीरों की छंटाई का काम दीपावली बाद शुरू करने जा रही है। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान यहां प्रोसेसिंग प्लांट का शुभारंभ करने वाले हैं।

बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत पहली बार यहां के हीरे दुनिया के बाजार में पेश होने के लिए तैयार होंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार बंदर प्रोजेक्ट प्रदेश में पहले से स्थित पन्ना की विख्यात हीरा खदान से 20 गुना ज्यादा उत्पादन करेगी। वर्ष 2002-06 के बीच इस इलाके में हीरे की खोज की गई थी।

बंदर प्रोजेक्ट का भंडार 40 से 70 मिलियन टन और ग्रेड 0.3 से 0.7 कैरेट प्रति टन बताया गया है। छतरपुर से करीब सौ किमी दूर बकस्वाहा के निकट यह प्लांट बनकर तैयार है। खदान क्षेत्र में ही डेंस मीडिया सेप्रेशन (डीएमएस) प्लांट की तैयारियां लंबे समय से जारी थी, जिसका उद्घाटन अब होने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में करीब डेढ़ सौ लोग काम कर रहे हैं और अधिकतर आसपास के गांवों के लोग हैं।

सूत्रों ने जानकारी दी कि काम शुरू होने के बाद काम करने वाले श्रमिको की संख्या चार सौ के आसपास होगी। इस प्रोजेक्ट पर कंपनी 120 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। यहां 60 हजार हेक्टेयर में दो माइनिंग लीज हैं।

यहां से निकले कच्चे माल की प्रोसेसिंग फिलहाल रियो टिंटो के बेंगलूर प्लांट में की गई है। कंपनी हीरा उत्पादन आस्ट्रेलिया, कनाडा और अफ्रीकी देशों में अपनी खदानों से कर ही रही है। भारत के हीरा व्यापार से भी रियो टिंटो का ताल्लुक ढाई दशक पुराना है। खनिज राज्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल व प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव भी इस समारोह में शामिल होंगे।

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सूखे की स्थिति का अध्ययन करने आएगा केंद्रीय दल

Posted on 03 September 2009 by admin

सागर- सागर सहित संभाग के पांचों जिलों में इस वर्ष सामान्य 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अल्प वर्षा से पैदा होने वाले सूखे के हालात का अवलोकन करने के लिए तीन केंद्रीय दल संभाग में आ रहे हैं। जो 8 एवं 9 सितंबर को पांचों जिलों का दौरा करेंगे।

संभाग में इस वर्ष खरीफ फसलों की बुवाई लक्ष्य से अधिक हुई है। सागर जिले में ही सोयाबीन की 3.13 लाख हक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हुई है। यही स्थिति संभाग के अन्य जिलों की भी है। 15 जून से लेकर 31 अगस्त के बीच कई बार हुई बारिश के कारण फसलों की स्थिति ठीक है। संभाग में खरीफ फसलों की बुवाई इस बार लक्ष्य की तुलना में सोयाबीन 112 प्रतिशत, उड़द 110 प्रतिशत, तिल 119 प्रतिशत, अरहर 137 प्रतिशत की गई है।

संभाग की सामान्य औसत वर्षा 1145.7 मिलीमीटर है। पिछले वर्ष 1154.5 मिमी हुई थी। इस बार एक जून से 31 अगस्त तक महज 474.1 मिमी हुई है। पिछले वर्ष इस अवधि में 1029.5 मिमी वर्षा हुई थी। सोयाबीन फसल का उत्पादन 10 से 25 प्रतिशत, उड़द-मूंग 20 से 25 प्रतिशत, धान 50 प्रतिशत, तिल 25 से 50 प्रभावित होने की आशंका है। सागर जिले की 10 से 15, दमोह की 10 से 25, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना की 20 से 50 प्रतिशत फसलों के प्रभावित होने की संभावना है। केंद्रीय अध्ययन दल के भ्रमण के सिलसिले में कमिश्नर एसके वेद ने बुधवार को सागर, दमोह, पन्ना छतरपुर और टीकमगढ़ के कलेक्टर को भ्रमण दल के लिए मिनिट टू मिनिट कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तीन केंद्रीय दलों में से दो दल दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा 7 सितंबर की शाम खजुराहो पहुंचेंगे। तीसरा दल 8 सितंबर को ग्वालियर होते हुए पहुंचेगा। सागर के कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी ने संयुक्त कलेक्टर एससी गंगवानी को सूखा राहत शाखा का प्रभारी अधिकारी बनाया है।8 सितंबर को एक दल पन्ना जाएगा, इसी दिन दूसरा दल सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ जिले का दौरा करने के बाद सागर में ही रात गुजारेगा। 9 सितंबर को सागर एवं दमोह जिले का दौरा करेंगे। 10 सितंबर को भोपाल में तीनों केंद्रीय दलों की बैठक होगी।

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विद्यार्थियों को नहीं मिलेगा अनुभव का लाभ

Posted on 10 August 2009 by admin

सागर- शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा रिटायर्ड व्याख्याताओं की दोबारा सेवाएं लेने की योजना शुरुआती दौर में फलाप हो गई है। कारण यह है कि रिटायर्ड व्याख्याताओं की रुचि अतिथि शिक्षक बनने में नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को उनके अनुभवों का लाभ मिलना संभव नहीं है। शिक्षा को गुणवत्ता युक्त बनाने की कवायद को शुरुआत में लगे झटके के बाद योजना फाइल में दबी है।

जबकि यह पहल हाई स्कूल परीक्षा के खराब रिजल्ट को सुधारने का एक हिस्सा थी। इस बार जिले के 35 फीसदी विद्यार्थी 10वी की परीक्षा पास कर पाए हैं। यही हाल प्रदेश के दूसरे जिलों में भी है। व्याख्याता ही नहीं उच्च श्रेणी शिक्षक भी स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को अपना अनुभव एवं ज्ञान बांटने से कतरा रहे हैं। संभाग के दूसरे जिलों में भी योजना को लेकर रिटायर्ड व्याख्याताओ में कोई उत्साह नहीं है।

छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में महज 24 रिटायर्ड व्याख्याता एवं उच्च श्रेणी शिक्षक अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हुए है। ये शिक्षक एक बार फिर अतिथि शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। शिक्षा में गुणवत्ता लाने की इस पहल के तहत पिछले माह संभाग में सेवानिवृत्त शिक्षकों की बैठक बुलाई गई थी।

जिसमें कम शिक्षक पहुंचे थे। जबकि सागर सहित संभाग के पांचों जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने पिछले पांच वर्र्षो के दौरान सेवानिवृत्त हुए व्याख्याताओ और उच्च श्रेणी शिक्षकों की लंबी फेहरिस्त संयुक्त संचालक कार्यालय को सौंपी थी। जिसमें 75 से अधिक शिक्षकों के नाम शामिल थे। सूची के आधार पर शारीरिक रूप से स्वस्थ व्याख्याताओं और उच्च श्रेणी शिक्षकों को बैठक में आमंत्रित किया गया था।
लेकिन उपस्थिति कम होने के कारण उनसे जिले के अकादमिक प्लान पर कोई खास चर्चा नहीं हुई थी।हालांकि उन्हें इस बात की छूट दी गई थी कि वह अपनी क्षमता के अनुसार जिस स्कूल में जिस विषय के अध्यापन के लिए सहमत होंगे उन्हें वहीं अतिथि शिक्षक बनाया जाएगा।

संयुक्त संचालक पी. पांडे का कहना है कि यह फैसला शैक्षिक गुणवत्ता के लिए जरूरी संसाधनों के साथ शिक्षकों के अनुभवों का फायदा लेने के मकसद से लिया गया है। लेकिन रिटायर्ड शिक्षकों की अनिच्छा के चलते अधिक कारगर नहीं हो सका है। हालांकि स्कूलों में व्याख्याताओं के खाली पदों को प्रमोशन एवं रिक्रूटमेंट से भरने का सिलसिला जारी है।

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