Posted on 28 March 2010 by admin
लखनऊ - ग्राम्य विकास विभाग द्वारा राजधानी लखनऊ मे आयोजित सरस मेला मे स्वयं सहायता समूह की मुखिया गुड्डी अहिरवार, गुलाब रानी अहिरवार तथा प्रीतम अहिरवार पहली बार अपने समूह द्वारा उत्पादित बाँस से बने विभिन्न प्रकार के खिलौने तथा दैनिक उपयोग की चीजें लेकर ललितपुर जनपद के मॅंडावरा ब्लाक से आए है। बाँस के उत्पाद की कम कीमत और सौंदर्य के चलते कला प्रेमी उपभोक्ताओ की उमड़ी भीड़ से दो दिन मे ही तीन हजार से अधिक मूल्य की बिक्री से खुशी का इज़हार करते हुए गुड्डी अहिरवार ने बताया कि हम पढ़े लिखे नैइयां लेकिन जो चीज़े हमने बनाई है उसे सभी खूब पसंद कर रहे है।
पहली बार टीकमगढ़ म.प्र. मे अपने उत्पादो को बेचकर अच्छे अनुभव ने उन्हे लखनऊ सरस मेले मे भाग लेने की हिम्मत मिली गुलाब रानी बताती है कि हमारे झेत्र मे रोजगार के साधन बहुत कम है, जंगली झेत्र होने के कारण लकड़ी और बाँस खूब मिलता है। ग्राम्य विकास विभाग ने हमारे स्वयं सहायता समूह को प्रशिझण दिला कर हमे रोजगार का अवसर प्रदान किया है हमारे द्वारा बनाए जा रहे बाँस के खिलौने लंबे समय तक खराब नही होते है तथा देखने मे अच्छे लगते है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com
Posted on 19 February 2010 by admin
विगत दिवस टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) जिला अन्तर्गत कस्बा पलेरा में एक ही रात में एक ही मोहल्ले मेें चोरी की 9 घटनाएं होने के बाद पुलिस अधीक्षक सैयद वसीम अहमद ने जनपद की पुलिस को भी अलर्ट कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी घटना को रोकने के लिए घूमन्तू जाति के लोगों, नटों आदि को अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर खदेड़ दें।
गौरतलब है कि बीती रात टीकमगढ़ जिलातंर्गत कस्बा पलेरा में चोरों ने एक ही मोहल्ले के 9 घरों में चोरी कर पुलिस को खुली चुनौती दी। चोर लाखों का माल समेट कर चम्पत हो गए थे। चूंकि जनपद की सीमायें तीन ओर से पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है। कहीं इस घटना की पुनरावृत्ति अपने जनपद में न हो जाए, इसके लिए उन्होंने जनपद पुलिस को अर्लट करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिये है। उन्हेांने कहाकि गश्त या पिकेट ड्यूटी करने वाले सिपाही रात्रि में खास तौर पर सतर्कता बरतें तथा किसी भी सन्दिग्ध व्यक्ति पर शक होने पर तत्काल उसकी तलाशी लें। उन्होंने कहाकि थानाध्यक्ष व अन्य अधिकारी रात्रि 12 से 4 के बीच में गश्त व पिकेट की जांच करे तथा लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करे। उन्होंने खासतौर पर बोर्डर के थानों की पुलिस कड़ी चौकसी बरते तथा वाहनों की सघन चेकिंग करने को कहा। उन्होंने कहा कि नट, मोगिया आदि घूंमन्तू जातियों के लोग जो नित अपना ठिकाना बदलते रहते है। ऐसे लेागों की अपराधों मं संलिप्तता पायी जाती है। अत: ऐसे लोगों को जनपद की सीमा से बाहर खदेड़ दें। साथ ही मुखबिरों का जाल फैलाकर इस बात की भी जानकारी करते रहे कि कहीं जनपद में कोई बाहरी गिरोह तो नहीं आ गया है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
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Posted on 31 October 2009 by admin
टीकमगढ़- पीडब्ल्यूडी विभाग ने शहर की नजरबाग गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल के नए भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 82 लाख 29 हजार रुपए का एस्टीमेट तैयार किया है।
नजरबाग गर्ल्स स्कूल परिसर में हायर सेकंडरी, हाईस्कूल, मिडिल और प्राइमरी स्कूल संचालित हैं। करीब तीन हजार छात्राएं इन स्कूलों में प्रतिदिन पढ़ने के लिए आती है। स्कूल में छात्राओं की संख्या अधिक होने की वजह से स्कूल दो शिफ्ट में चल रही है। स्कूलों के भवन राजाशाही के समय के हैं। भवन पुराने होने की वजह से बुरी तरह जर्जर हो गए हैं। इन्हें पीडब्ल्यूडी विभाग ने डेड घोषित कर दिया है। इसके बाद भी स्कूल पुराने डेड भवनों में संचालित हो रही है।
टीकमगढ़ पीडब्ल्यूडी विभाग ने गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल के नए भवन का एस्टीमेट तैयार किया है। एस्टीमेट में स्कूल की कक्षाओं के लिए एक हजार फीट और 360 फीट जगह बरामदे के लिए सुनिश्चित की गई है। इतनी जमीन में 54 क्लास रूम और 54 बरामदे बनेंगे। इसके अलावा टायलेट और बाथरूम के लिए अलग से जगह की जरूरत पड़ेगी।
पीडब्ल्यूडी विभाग के ईई सुभाष जैन के अनुसार स्कूल भवन निर्माण के लिए कच्चा एस्टीमेट तैयार किया गया है। तैयार किए गए प्रस्ताव में स्कूल बनाने 282.29 लाख रुपए का बजट बनाया गया है। पीडब्ल्यूडी ने तकनीकी प्रतिवेदन तैयार करके शिक्षा विभाग को सौंप दिया है।
Posted on 16 October 2009 by admin
टीकमगढ़- जिले में खाद संकट ने किसानों का बुरा हाल कर दिया है। वर्तमान में बोवनी के लिए 15 हजार टन खाद की जरूरत है। मंगलवार को हरपालपुर में खाद का एक रैक लगाया गया है। इसमें टीकमगढ़ जिले के लिए है। खाद पहुंचते ही खत्म भी हो गई हैं।
उप संचालक कृषि पी.के शर्मा ने बताया कि अक्टूबर माह में बोवनी के लिए 22 से 25 हजार टन खाद की जरूरत है। अब तक जिले में कुल मिलाकर 6 हजार टन खाद का ही वितरण किया जा सका है।शर्मा ने बताया कि जिले में फिलहाल 15 हजार टन खाद की जरूरत है। 15 हजार टन खाद की आपूर्ति के एवज में मंगलवार को हरपालपुर रेलवे स्टेशन पर लगे खाद के रैक में जिले के लिए मात्र 300 टन खाद ही आई है।
इसमें से भी 150 टन विपणन संघ के लिए और 150 टन खाद व्यापारियों के लिए आई है। हरपालपुर से व्यापारियों ने अपनी सारी खाद उठा ली है। विपणन संघ की खाद के ट्रक जिले की सभी 6 विपणन सहकारी समितियों पर पहुंचे। सेवा सहकारी समितियों तक पहुंचने से पहले ही इनकी नगद बिक्री कर दी गई है। अब पूरे जिले में किसान खाद के लिए परेशान घूम रहे हैं। पर उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है।
खाद के लिए भटक रहे किसानों के साथ विपणन संघ के कर्मचारी धोखेबाजी करने पर उतर आए हैं। किसानों ने खाद के लिए घंटों लाइन में लगकर विधिवत पर्ची ली, पर खाद लेने पहुंचे तो विपणन संघ के कर्मचारियों ने खाद देने से मना कर दिया। खाद के लिए गुरुवार को सुबह से ही जेल रोड के विपणन कार्यालय पर लाइन लग गई। आस-पास के गांवों की करीब दो दर्जन महिलाएं भी तेज धूप में खाद के लिए खड़ी रहीं।
मबई गांव की महिला शांति अहिरवार ने बताया कि पति की तबियत खराब है, घर में और कोई नहीं है। छोटे-छोटे बच्चों को अकेला छोड़कर खाद लेने आना पड़ा, लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गुरुवार को मात्र एक ट्रक खाद विपणन कार्यालय में उपलब्ध थी, जबकि वहां पर करीब पांच सौ से ज्यादा किसान खाद लेने के लिए पहुंचे। दोपहर 12 बजे तक तेज धूप में किसान खड़े रहे, पर पर्ची काटने के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।
स्थिति को संभालने टीआई बीएल ध्रुबकारिया, एसडीएम बीके द्विवेदी और उपसंचालक कृषि पीके शर्मा मौके पर आना पड़ा। वहां सभी किसानों ने एसडीएम को घेर लिया और खाद दिलाने की गुहार लगाई। श्री द्विवेदी ने विपणन संघ के कर्मचारी को बुलाकर आदेश दिया कि जिन किसानों की पहले की पर्ची कटी है, उन्हें पहले दो-दो बोरी खाद दी जाए। इसके पहले बुधवार को कलेक्टर अखिलेश श्रीवास्तव के हस्ताक्षर वाले टोकन लेकर पहुंचे। फिर भी उन्हें खाद नहीं दी गई और उनके साथ गाली-गलौच की गई।
किसानों ने विपणन संघ के कर्मचारियों पर आरोप लगाया है कि दबंगों को बिना टोकन के ही खाद दिया जा रहा है। लखौरा गांव के किसान मनमोहन यादव ने बताया कि विपणन संघ के कर्मचारी कलेक्टर की पर्ची दिखाने पर कहते हैं कि उन्हीं से जाकर खाद ले आओ। मोहनगढ़ के किसान कमलेश अहिरवार ने बताया कि 7 दिन से लगातार खाद के लिए भटक रहे हैं लेकिन खाद नहीं मिल रही है।
Posted on 14 October 2009 by admin
Tikamgarh -A workshop was held on Inter-sectoral convergence with National Rural Employment Guarantee Scheme (NREGS) for enhancing productivity in selected pilot districts of Madhya Pradesh at Orchha today.
Union Minister of State for Rural Development Pradeep Jain, Secretary, Ministry of Rural Development Rita Sharma, Secretary, Planning Commission Sudha Pillai and other government officials from the Centre and state took part in the discussion, a release said.
Speaking on the occasion, Mr Jain stressed the need for awareness and better outreach of NRGES. He said there was large scale migration in the Bundelkhand region due to limited livelihood opportunities.
Ms Sharma highlighted the relevance of NRGES and water conservation, while Ms Pillai stressed the need for taking up health insurance for the poor households in Madhya Pradesh.
The Secretary, Water resources, spoke about the need to tap rainwater in the region. He highlighted different schemes and the activities under which convergence with NRGES might be taken up.
Posted on 03 September 2009 by admin
सागर- सागर सहित संभाग के पांचों जिलों में इस वर्ष सामान्य 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अल्प वर्षा से पैदा होने वाले सूखे के हालात का अवलोकन करने के लिए तीन केंद्रीय दल संभाग में आ रहे हैं। जो 8 एवं 9 सितंबर को पांचों जिलों का दौरा करेंगे।
संभाग में इस वर्ष खरीफ फसलों की बुवाई लक्ष्य से अधिक हुई है। सागर जिले में ही सोयाबीन की 3.13 लाख हक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हुई है। यही स्थिति संभाग के अन्य जिलों की भी है। 15 जून से लेकर 31 अगस्त के बीच कई बार हुई बारिश के कारण फसलों की स्थिति ठीक है। संभाग में खरीफ फसलों की बुवाई इस बार लक्ष्य की तुलना में सोयाबीन 112 प्रतिशत, उड़द 110 प्रतिशत, तिल 119 प्रतिशत, अरहर 137 प्रतिशत की गई है।
संभाग की सामान्य औसत वर्षा 1145.7 मिलीमीटर है। पिछले वर्ष 1154.5 मिमी हुई थी। इस बार एक जून से 31 अगस्त तक महज 474.1 मिमी हुई है। पिछले वर्ष इस अवधि में 1029.5 मिमी वर्षा हुई थी। सोयाबीन फसल का उत्पादन 10 से 25 प्रतिशत, उड़द-मूंग 20 से 25 प्रतिशत, धान 50 प्रतिशत, तिल 25 से 50 प्रभावित होने की आशंका है। सागर जिले की 10 से 15, दमोह की 10 से 25, छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना की 20 से 50 प्रतिशत फसलों के प्रभावित होने की संभावना है। केंद्रीय अध्ययन दल के भ्रमण के सिलसिले में कमिश्नर एसके वेद ने बुधवार को सागर, दमोह, पन्ना छतरपुर और टीकमगढ़ के कलेक्टर को भ्रमण दल के लिए मिनिट टू मिनिट कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। तीन केंद्रीय दलों में से दो दल दिल्ली से हवाई जहाज द्वारा 7 सितंबर की शाम खजुराहो पहुंचेंगे। तीसरा दल 8 सितंबर को ग्वालियर होते हुए पहुंचेगा। सागर के कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी ने संयुक्त कलेक्टर एससी गंगवानी को सूखा राहत शाखा का प्रभारी अधिकारी बनाया है।8 सितंबर को एक दल पन्ना जाएगा, इसी दिन दूसरा दल सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ जिले का दौरा करने के बाद सागर में ही रात गुजारेगा। 9 सितंबर को सागर एवं दमोह जिले का दौरा करेंगे। 10 सितंबर को भोपाल में तीनों केंद्रीय दलों की बैठक होगी।
Posted on 10 August 2009 by admin
सागर- शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा रिटायर्ड व्याख्याताओं की दोबारा सेवाएं लेने की योजना शुरुआती दौर में फलाप हो गई है। कारण यह है कि रिटायर्ड व्याख्याताओं की रुचि अतिथि शिक्षक बनने में नहीं है। जिससे विद्यार्थियों को उनके अनुभवों का लाभ मिलना संभव नहीं है। शिक्षा को गुणवत्ता युक्त बनाने की कवायद को शुरुआत में लगे झटके के बाद योजना फाइल में दबी है।
जबकि यह पहल हाई स्कूल परीक्षा के खराब रिजल्ट को सुधारने का एक हिस्सा थी। इस बार जिले के 35 फीसदी विद्यार्थी 10वी की परीक्षा पास कर पाए हैं। यही हाल प्रदेश के दूसरे जिलों में भी है। व्याख्याता ही नहीं उच्च श्रेणी शिक्षक भी स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को अपना अनुभव एवं ज्ञान बांटने से कतरा रहे हैं। संभाग के दूसरे जिलों में भी योजना को लेकर रिटायर्ड व्याख्याताओ में कोई उत्साह नहीं है।
छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में महज 24 रिटायर्ड व्याख्याता एवं उच्च श्रेणी शिक्षक अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हुए है। ये शिक्षक एक बार फिर अतिथि शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। शिक्षा में गुणवत्ता लाने की इस पहल के तहत पिछले माह संभाग में सेवानिवृत्त शिक्षकों की बैठक बुलाई गई थी।
जिसमें कम शिक्षक पहुंचे थे। जबकि सागर सहित संभाग के पांचों जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने पिछले पांच वर्र्षो के दौरान सेवानिवृत्त हुए व्याख्याताओ और उच्च श्रेणी शिक्षकों की लंबी फेहरिस्त संयुक्त संचालक कार्यालय को सौंपी थी। जिसमें 75 से अधिक शिक्षकों के नाम शामिल थे। सूची के आधार पर शारीरिक रूप से स्वस्थ व्याख्याताओं और उच्च श्रेणी शिक्षकों को बैठक में आमंत्रित किया गया था।
लेकिन उपस्थिति कम होने के कारण उनसे जिले के अकादमिक प्लान पर कोई खास चर्चा नहीं हुई थी।हालांकि उन्हें इस बात की छूट दी गई थी कि वह अपनी क्षमता के अनुसार जिस स्कूल में जिस विषय के अध्यापन के लिए सहमत होंगे उन्हें वहीं अतिथि शिक्षक बनाया जाएगा।
संयुक्त संचालक पी. पांडे का कहना है कि यह फैसला शैक्षिक गुणवत्ता के लिए जरूरी संसाधनों के साथ शिक्षकों के अनुभवों का फायदा लेने के मकसद से लिया गया है। लेकिन रिटायर्ड शिक्षकों की अनिच्छा के चलते अधिक कारगर नहीं हो सका है। हालांकि स्कूलों में व्याख्याताओं के खाली पदों को प्रमोशन एवं रिक्रूटमेंट से भरने का सिलसिला जारी है।