कुदरत  का  कहर  क़यामत  के  आने   की  दस्तक  है  पानी  ही  पानी. इस से भी ख़राब हालात होंगे २०१२ में   ये परिणाम है  कुदरत से खिलबाड़ का........ “Plant Trees to Save Environment” , *खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "bundelkhandlive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | झाँसी

रास्ते में खतरे के पहले ट्रेन रुक जाएगी

Posted on 02 September 2010 by admin

झांसी- पटरी पर यदि खतरा है या आगे कोई गाड़ी खड़ी हुई है और सिग्नल लाल है और चालक लापरवाह तो भी डरने की जरूरत नहीं। ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हो ही नहीं सकती क्योंकि वह खतरे से कई मीटर दूरी पर अपने आप रुक जाएगी।

दुर्घटना रहित सुरक्षित यात्रा को सम्भव बनाया है टीपीडब्लूएस अर्थात ट्रेन प्रोटेक्शन एण्ड वार्निग सिस्टम ने। इस प्रणाली को प्रयोग के तौर पर अभी ताज एक्सप्रेस व महाकौशल एक्सप्रेस के इजनों में लगाया गया है। दोनों ट्रेनों में इसका परीक्षण आगरा-मथुरा स्टेशनों के बीच किया जा रहा है। इस प्रणाली का एक सप्ताह का प्रशिक्षण झाँसी में प्रणाली बनाने वाली कम्पनी के इजीनियरों ने शताब्दी, मेल ट्रेन चालकों, लोको इस्पेक्टरों व संरक्षा से जुड़े लोगों को दिया।

बताया गया है कि जिस इजन में यह प्रणाली लगी होगी उसके रूट की रेल लाइन व सिग्नल की रिले को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। यदि ट्रेन का चालक लाल सिग्नल के बावजूद गाड़ी को नहीं रोकता है तो इजन में लगा सिस्टम 600 मीटर दूर से ही चेतावनी देना शुरू कर देगा। चालक के फिर भी सतर्क नहीं होने की स्थिति में खतरे से 30 मीटर की दूरी पर ही इमर्जेन्सी ब्रेकिंग प्रणाली से रफ्तार पर ब्रेक लगा कर ट्रेन को रोक देगा। इसके बाद तभी गाड़ी आगे बढ़ सकेगी जब चालक इजन में लगे सिस्टम को पुन: चालू करेगा।

यही स्थिति कॉशन आर्डर अर्थात निश्चित स्थान पर ट्रेन के इजन की निर्धारित से कम गति पर संचालन के समय पर रहेगी। यदि चालक कॉशन आर्डर का पालन नहीं कर लापरवाही से ट्रेन की अपनी गति से निकालने की कोशिश करेगा तो वार्निग के बाद उसकी रफ्तार स्वत: नियन्त्रित हो जाएगी। इतना ही नहीं इजन के आगे के खतरे की जानकारी उपकरण के साथ लगी स्क्रीन पर भी स्पष्ट होगी।

यह उपकरण पाँच-पाँच मिनट में विशेष संकेत देकर चालक को सतर्क करता रहेगा। चालक द्वारा संकेत का जवाब नहीं देने की प्रतिक्रिया स्वरूप उपकरण इजन को रोक देगा। इतना ही नहीं चालक अपनी लापरवाही को छिपा नहीं पाएगा। उपकरण चालक की लापरवाही व गल्तियों को उजागर कर देगा। फिलहाल इस उपकरण के झाँसी तक काम करने की बेसब्री से प्रतीक्षा है।


Vikas Sharma
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दादा ध्यानचंद की होकी झाँसी के साथ-साथ देश से भी अनाथ हो गई है

Posted on 29 August 2010 by admin

झाँसी  - दादा ध्यानचंद जिनका जन्मदिन (29 अगस्त) पूरा देश खेल दिवस के रूप में मनाता है ध्यानचंद ने तीन ओलंपिक खेलों [1928], [1932] और [1936] में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया। आंकड़ों से भी पता चलता है कि वह वास्तव में हाकी के जादूगर थे। भारत ने 1932 में 37 मैच में 338 गोल किए जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे। ध्यानचंद की अगुवाई में 1947 में भारत की युवा टीम ने पूर्वी अफ्रीका का दौरा किया। असल में तब जो न्यौता दिया गया था उसमें लिखा गया था कि यदि ध्यानचंद नहीं तो कोई टीम नहीं। ध्यानचंद तब 42 साल के थे और उन्होंने 22 मैच में 61 गोल दागे। उसी जादूगर की सबसे प्रिय ‘हॉकी’ आज कितनी दयनीय अवस्था में पहुँच गई है… ध्यानचंद की कर्म स्थली झाँसी में हर वर्ष  ध्यानचंद  की समाधी स्थल हीरोज फिल्ड पर हाकी एक वार फिर जिन्दा हो जाती है इस दिन झाँसी में मेराथन दोड़ का सुबह आयोजन किया जाता है और जगह जगह स्कूल कालेजो में खेलो का आयोजन किया जाता है……. वही  ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद देश में होकी के गिरते स्थर के लिए चिंतित है उनका कहना है की होकी के स्थर हो सुधारना है तो खिलाडियों को किरकेट  की  तर्ज पर शुभिधाओ  की अबशाकता है

बताने की जरूरत नहीं है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, लेकिन इस खेल के साथ 14 सालों तक जो खिलवाड़ हुआ , उसी का नतीजा रहा कि 8 स्वर्ण, 1 रजत और2 काँस्य ओलिम्पिक पदक जीतने वाला भारत 80 साल के ओलिम्पिक इतिहास में पहली मर्तबा बाहर था।

दादा ध्यानचंद हॉकी के जादूगर थे और अपने काल में ऐसा नाम कमाया कि ‘क्रिकेट के संत’ माने जाने वाले डॉन ब्रैडमैन भी उनके कायल हो गए थे। हॉकी को उन्होंने भरपूर जीया और देश के लिए तीन ओलिम्पिक (1928 एम्सटर्डम), 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन) खेलें और इन तीनों में वे ओलि‍‍म्पिक स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा बने। यदि दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध में नहीं झोंकी जाती तो दादा ध्यानचंद के गले में और स्वर्ण पदक लटकते रहते।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चलाने वालों को कुछ सद्‍बुद्धि आई और उन्होंने दादा ध्यानचंद को हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा खेल नायक मानकर हर साल 29 अगस्त को देश में ‘खेल दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया। बीते कई सालों से इस दिन पूरे देश में हॉकी यकायक जिंदा होती और अगले दिन फिर से मर जाती है। लकड़ी का यह जरा-सा डंडा (‍हॉकी स्टिक) सिर्फ उन हाथों तक सीमित रहता है, जो नियमित रूप से इसे गले से लगाए हुए हैं।

हिन्दुस्तान की हॉकी की दुर्दशा देखकर हर भारतीय का दु:खी होना लाजिमी है। जो लोग क्रिकेट को पागलों की तरह प्यार करते हैं, उनके दिल में भी राष्ट्रीय खेल के प्रति आस्था है लेकिन हॉकी पर से विश्वास इसलिए कम हो गया, क्योंकि बीते सालों में ऐसी लगातार कामयाबियाँ नहीं मिली, जिस तरह क्रिकेट में मिली।
बेशक यूरोपीय देश बहुमत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने तरीके से नियम बनाते चले गए और मैदान पर खेली जाने वाली एशियाई शैली की हॉकी को ‘हिट एंड रन’ वाली शैली में तब्दील करके इसे नाइलोन की घास वाले मैदान तक ले गए, जहाँ घास गर्म होने पर उसे पानी की फुहारों से ठंडा किया जाने लगा। आधुनिक हॉकी एशियाई हॉकी को पूरी तरह लील गई।
जब नियम बनाए जा रहे थे, तब भारत, पाकिस्तान, कोरिया, जापान जैसे ताकतवर एशियाई देशों ने विरोध नहीं किया। एक गलती यह भी है कि यदि नए नियम और एस्ट्रोटर्फ आ गए थे तो क्यों नहीं भारत ने भी इसके लिए तैयारियाँ की? हकीकत यह है कि इस बदलाव में हम काफी पिछड़ गए।
यह ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे कि गाँवों में मिट्‍टी पर लड़ने वाले पहलवान को बड़ा होने पर कुश्ती की मैट मिले और सुशील कुमार जैसे कम ही भाग्यशाली पहलवान होते हैं, जो अभाव में पलकर भी ओलिम्पिक से काँसे का पदक ले आते हैं। अब जबकि ‘गुदड़ी के दो लालों’ ने भारत को गरीब खेल माने जाने वाले कुश्ती और बॉक्सिंग में दो ओलिम्पिक पदक दिला दिए हैं तो हो सकता है कि इन खेलों का उद्धार करने पर भारत सरकार ध्यान दें।
1979 मेदादध्यानचंकोममेजानबामृत्यहुलेकिहोमेरहे, भारतीहॉकप्रति चिंतिरहेबेटअशोहमेशकहति मेरयहसपनि भारतीहॉकबाफिस्वर्णियुमेपहुँचेमेरबूढ़शरीमेभलनहीरहलेकिमैभारहॉकसम्मानजनस्थिति मेदेखनचाहतहूताकि खुजवामहसूसकूँ
इसमें कोई दो मत ‍नहीं कि दादा ध्यानचंद की आत्मा आज जहाँ भी होगी, वह इस बदहाली पर आँसू बहा रही होगी। जिस शख्स ने हॉकी में भारत की पहचान स्थापित की, आज उनकी ही कर्म स्थति झाँसी के साथ देश भी  हॉकी से  अनाथ हो गया  है।

परिचय -हॉकी के जादूगर दादा ध्यानचंद का जन्म प्रयाग (उत्तरप्रदेश) के राजपूत घराने में 29 अगस्त 1905 को हुआ था। उनके पिता सामेश्वर दत्त सिंह भारतीय फौज में सूबेदार थे। सेना में रहते हुए उन्होंने भी खूब हॉकी में अपने जौहर दिखाए। मूलसिंह और रूपसिंह ध्यानचंद के दो भाई थे। ध्यानचंद की तरह रूपसिंह का भी हॉकी का जाना-माना चेहरा थे। पिता के तबादले के कारण ध्यानचंद ढंग से किताबों में मन नहीं लगा सके। यही वजह थी कि छठी कक्षा के बाद ही उन्हें पढ़ाई को अलविदा कहना पड़ा। कालांतर में पूरा परिवार झाँसी आकर बस गया।


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नगर निगम : मेयर और पार्षदों का टूर पैसा निगम का

Posted on 22 August 2010 by admin

झांसी- एक बार फिर बाहरी सेमिनार में भाग लेने के लिए पार्षदों में होड़ मचने जा रही है। सेमिनार आयोजित करने वाले एनजीओ ने कार्यक्रम भेज दिया है,जिसके लिए आवेदन भरे जाने की तैयारी शुरू हो गई है।

ऑल इण्डिया इन्स्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेण्ट कॉरपोरेशन द्वारा समय-समय पर शहरों को संवारने के लिए नगर निगमों के प्रतिनिधियों के सेमिनार आयोजित किए जाते है। इसमें बताया जाता है कि कौन सी योजना किस प्रकार लागू होती है और उसके क्या लाभ होंगे। इस जानकारी के लिए मेयर समेत कई पार्षद विभिन्न शहरों में आयोजित सेमिनारों में भाग ले चुके है। सेमिनार में आने-जाने और खाने-पीने पर आने वाला खर्च नगर निगम वहन करता है। इससे एक पंथ दो काज हो जाते है। एक तो पार्षद घूम-फिर आते है और दूसरे कुछ नया सीख भी लेते है। कॉरपोरेशन ने केरल के कोच्चि में 25 से 28 तक तथा जापान में 19 से 22 अक्टूबर तक सेमिनार का कार्यक्रम भेज दिया है। यह खबर पाते ही कई पार्षदों ने सेमिनार में भाग लेने के लिए आवेदन-पत्र को तैयार कर लिया है। इस सम्बन्ध में मेयर डॉ. बी. लाल ने बताया कि सेमिनार के कार्यक्रम प्राप्त हो गए है। जापान में उनको अकेले बुलाया गया है। कोच्चि के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें कौन जाएगा, यह तय नगर आयुक्त करेगे। उन्होंने बताया कि कॉरपोरेशन ने जापान कार्यक्रम में आने-जाने वाला व्यय ही नगर निगम को वहन करना होगा, शेष खर्च कॉरपोरेशन उठाएगा। अब देखना यह होगा कि कितने पार्षद सेमिनार में जाते हैं और उनके आने-जाने, खाने-पीने पर जनता की गाढ़ी कमाई का कितना रुपया खर्च होता है, और यह भी देखना होगा कि वहां से आने के बाद कितनी योजनाओं को लागू कर शहर को सुन्दर बनाने का कार्य करते है।


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‘राधे-राधे’ वाली मोबाईल कोलो का खोफ कई की हालत बिगड़ी

Posted on 19 August 2010 by admin

झांसी में इन दिनों अफवाहों का क्या कहना! मोबाइल फोन पर आने वाली कॉल पर सुनायी देने वाली ‘राधे-राधे’ की आवाज अब पुरे नगर में खौफ का पर्याय बनती जा रही है। बीते दो दिनों में फिर दो महिलायें मोबाइल फोन पर इन शब्दों को सुनने के बाद बेहोश हो गयीं। उनमें से एक को उपचार के लिये जिला राजकीय चिकित्सालय में दाखिल कराया गया है।

ये घटनायें कोत्बाली थाना क्षेत्र अन्तर्गत घटीं। मुहल्ला लक्ष्मी गेट निवासी मीरा रावत दो दिन पूर्व रक्षाबन्धन का त्यौहार मनाने के लिये जालौन के सिरसाकला स्थित ससुराल से अपने मायके आयी थी। उसके साथ उसका पति धर्मेन्द्र भी आया था। सुबह मीरा ने अपने मोबाइल फोन को चार्ज पर लगा दिया। सुबह 9.30 बजे उसके मोबाइल फोन पर घण्टी बजी। फोन करने वाले ने मिस्ड काल देकर घण्टी बन्द कर दी।

उस समय कमरे में मीरा के अलावा उसकी माँ रमा व पति धर्मेन्द्र भी मौजूद थे। मिस्ड काल आने के बाद मीरा ने उसी काल पर घण्टी दी। दूसरी तरफ घण्टी बजने के बाद किसी पुरुष ने फोन उठाते ही ‘राधे-राधे’ कहा। इतने पर ही मीरा को चक्कर आने लगे। घबराकर उसने मोबाइल से सिम निकाल कर तोड़ कर फेंक दी और इसके बाद बेहोश हो गयी। परिवार के लोग उसे लेकर जिला अस्पताल लाये, जहाँ उसे दाखिल कर लिया गया।

इसी तरह मुहल्ला सागर गेट स्थित जल संस्थान की पानी की टंकी परिसर में पम्प ऑपरेटर दीपचन्द्र परिवार सहित रहता है। आज शाम 6.23 बजे दीपचन्द्र के मोबाइल फोन पर काल आयी। दीपचन्द्र की पत्‍‌नी मीरा ने जैसे ही फोन अटैण्ड किया और दो बार हैलो बोलने के बाद भी जब दूसरी ओर से कोई आवाज नहीं आयी तो उसने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर दिया। इसके बाद जब उसने पुन: हैलो बोला तो दूसरी तरफ से किसी पुरुष ने ‘राधे-राधे’ कहा। यह सुनते ही मीरा के हाथ में झनझनाहट शुरू हो गयी और मोबाइल फोन की स्क्रीन लाल हो गयी। इस पर मीरा ने मोबाइल फोन फेंक दिया। बाद में जब उसके पति ने आये नम्बर पर फोन लगाया तो दूसरी ओर से उक्त नम्बर स्विच ऑफ मिला।
इस प्रकार की घटनाये झाँसी में ही नही वल्कि पुरे बुंदेलखंड में हो रही मग कियो इस का किसी पर जबाब नही है जब भारत संचार निगम के महा प्रबंधक से जानना चाहा तो उनके पास भी इन कोलो के बारे में संतोषजनक जबाब नही है.


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पीसीएस अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

Posted on 17 August 2010 by admin

मामला बिजली विभाग में ठेकेदारी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रिश्वत माँगना एक पीसीएस अफसर को ले डूबा। विजिलेंस ने रिश्वत लेते उसे रंगों हाथ पकड़ लिया।

बिजली विभाग में ठेकेदारी करने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय का एनओसी आवश्यक होता है। इसके बगैर लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। इतवारी गंज निवासी पवन कुमार साहू ने ठेकेदारी के लिए आवेदन किया था,जो लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग के कई दिन से चक्कर काट रहा था। उसने बताया कि लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर विद्युत विभाग निदेशालय के सहायक निदेशक मनोज कुमार सिंह ने उससे 60 हजार रुपए माँगे। न देने पर फाइल को लटका दिया। इस पर उसने सतर्कता विभाग से सम्पर्क किया। मामला पीसीएस अफसर का होने के कारण पहले तो शासन से स्वीकृति माँगी गई। जिलाधिकारी ने नायब तहसीलदार सदर सुबोध मणि शर्मा को गवाही के लिए लगा दिया। इसके बाद सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर अशोक कुमार आवेदक के साथ चाचा बनकर विद्युत परिषद कार्यालय गए और रुपए कम लेने की बात कहते हुए पाउडर लगे 10 हजार रुपए देने लगे। इस पर सहायक निदेशक ने कम रुपए होने के कारण लेने से मना कर दिया। 30 हजार रुपए पर मामला तय हुआ। आज पवन सर्तकता विभाग के इन्सपेक्टर के साथ पहुंचा और 30 हजार रुपए में रसायनिक पाउडर लगे एक हजार के दस तथा 500 के चालीस नोट दिए, तो सहायक निदेशक ने तुरन्त उनको पकड़ लिया। इस दौरान इन्सपेक्टर गवाह नायब तहसीलदार को अपना मोबाइल फोन चालू कर सारी बातें सुनाते रहे। जैसे ही मनोज ने रुपए लिए, उनको पकड़ लिया गया। सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर नरेश कुमार, सीएल दिनेश, जेपी सुमन ने कई लोगों के सामने हाथ धुलाए, तो सहायक निदेशक के हाथों से झाग के साथ गुलाबी पानी निकलने लगा। इस पर सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टरों ने आरोपी सहायक निदेशक को गिरफ्तार कर थाना नवाबाद के हवाले कर दिया। इस सम्बन्ध में सहायक निदेशक मनोज कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि रुपए टेबिल पर रखे थे, उन्होंने हाथ तक नहीं लगाया।

रिश्वत का ये ममला झाँसी में नया नही है लगभग हर विभाग में  रिश्वत का खेल चल रहा है कोई कम लेता है तो कोई ज्यादा. कर कर्मचारी अधिकारी  महगाई के ज़माने में सिर्फ सरकारी तनख्व में  गुजरा करने को त्येयार   नही है हर किसी  को कहिये  दो  नम्वर  का पैसा.

मगर  इसमें कुछ तो कभी कभी हिंदी फ़िल्म खट्टे मीठे के  “सचिन चिट्कुले”  की तरह अपना काम निकलने के लिए अधिकारियो या कर्मचारियों को फसाने की कोशिस भी करते है. आज हर विभाग में भार्स्ताचार का बोलबाला है जिसे मिटने में हर आम आदमी को सोचना पड़ेगा.

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पीसीएस अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

Posted on 17 August 2010 by admin

मामला बिजली विभाग में ठेकेदारी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रिश्वत माँगना एक पीसीएस अफसर को ले डूबा। विजिलेंस ने रिश्वत लेते उसे रंगों हाथ पकड़ लिया।

बिजली विभाग में ठेकेदारी करने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय का एनओसी आवश्यक होता है। इसके बगैर लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। इतवारी गंज निवासी पवन कुमार साहू ने ठेकेदारी के लिए आवेदन किया था,जो लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग के कई दिन से चक्कर काट रहा था। उसने बताया कि लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर विद्युत विभाग निदेशालय के सहायक निदेशक मनोज कुमार सिंह ने उससे 60 हजार रुपए माँगे। न देने पर फाइल को लटका दिया। इस पर उसने सतर्कता विभाग से सम्पर्क किया। मामला पीसीएस अफसर का होने के कारण पहले तो शासन से स्वीकृति माँगी गई। जिलाधिकारी ने नायब तहसीलदार सदर सुबोध मणि शर्मा को गवाही के लिए लगा दिया। इसके बाद सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर अशोक कुमार आवेदक के साथ चाचा बनकर विद्युत परिषद कार्यालय गए और रुपए कम लेने की बात कहते हुए पाउडर लगे 10 हजार रुपए देने लगे। इस पर सहायक निदेशक ने कम रुपए होने के कारण लेने से मना कर दिया। 30 हजार रुपए पर मामला तय हुआ। आज पवन सर्तकता विभाग के इन्सपेक्टर के साथ पहुंचा और 30 हजार रुपए में रसायनिक पाउडर लगे एक हजार के दस तथा 500 के चालीस नोट दिए, तो सहायक निदेशक ने तुरन्त उनको पकड़ लिया। इस दौरान इन्सपेक्टर गवाह नायब तहसीलदार को अपना मोबाइल फोन चालू कर सारी बातें सुनाते रहे। जैसे ही मनोज ने रुपए लिए, उनको पकड़ लिया गया। सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर नरेश कुमार, सीएल दिनेश, जेपी सुमन ने कई लोगों के सामने हाथ धुलाए, तो सहायक निदेशक के हाथों से झाग के साथ गुलाबी पानी निकलने लगा। इस पर सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टरों ने आरोपी सहायक निदेशक को गिरफ्तार कर थाना नवाबाद के हवाले कर दिया। इस सम्बन्ध में सहायक निदेशक मनोज कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि रुपए टेबिल पर रखे थे, उन्होंने हाथ तक नहीं लगाया।

रिश्वत का ये ममला झाँसी में नया नही है लगभग हर विभाग में  रिश्वत का खेल चल रहा है कोई कम लेता है तो कोई ज्यादा. कर कर्मचारी अधिकारी  महगाई के ज़माने में सिर्फ सरकारी तनख्व में  गुजरा करने को त्येयार   नही है हर किसी  को कहिये  दो  नम्वर  का पैसा.

मगर  इसमें कुछ तो कभी कभी हिंदी फ़िल्म खट्टे मीठे के  “सचिन चिट्कुले”  की तरह अपना काम निकलने के लिए अधिकारियो या कर्मचारियों को फसाने की कोशिस भी करते है. आज हर विभाग में भार्स्ताचार का बोलबाला है जिसे मिटने में हर आम आदमी को सोचना पड़ेगा.

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कुत्तों ने नोंच डाला डेढ़ साल का मासूम

Posted on 03 August 2010 by admin

आंखों के सामने ही कुत्ते उसके जिगर के टुकड़े को नोंचते रहे और वह चाह कर भी कुछ न कर सकी। हिम्मत कर दिल के टुकड़े को बचाने की कोशिश की तो नरभक्षियों ने उस पर भी हमला बोल दिया। किसी तरह से खूंख्वारों को दौड़ा लेने के बाद वह लहूलुहान हालत में मासूम को अस्पताल ले गयी, लेकिन उसने दम तोड़ दिया।
दिल दहला देने वाली यह घटना बबीना थाना क्षेत्र अन्तर्गत रेलवे कॉलोनी में सुबह लगभग 5.30 बजे घटी। रेलवे कॉलोनी में रहने वाला रामकुमार रेलवे में कार्यरत है तथा कॉलोनी में विभाग की ओर से आवण्टित क्वार्टर में परिवार सहित रहता है। सुबह लगभग 5.30 बजे लाइट न आने के कारण रामकुमार की पत्‍‌नी सुधा गर्मी से बेचैन अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र कुणाल को लेकर कमरे से बाहर निकल आयी और मेन गेट के पास खुली जगह में उसे लिटा दिया। इसके बाद वह अन्दर जा कर काम करने लगी। कुछ देर बाद उसे अपने पुत्र की जोर-जोर की रोने की आवाज सुनायी दी। इस पर वह दौड़ कर बाहर आयी।
वहाँ का नजारा देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गये। करीब आधा दर्जन कुत्तों का झुण्ड उसके मासूम को नोंच रहा था और वह नन्हीं जान तड़प रही थी। जिस समय सुधा बाहर आयी, उस समय तक कुत्ते मासूम कुणाल के शरीर के कई हिस्सों में अपने दाँत गड़ा चुके थे। यह देखकर उसने कुत्तों को भगाने की चेष्टा की, तो एक कुत्ते ने झपट कर उसे काट लिया। चीख-पुकार सुनकर अन्दर से रामकुमार के परिवार के अन्य सदस्य भी बाहर निकल आये। किसी तरह से कुत्तों को खदेड़ा गया, तब तक कुत्तों के दाँतों से मासूम कुणाल बुरी तरह से घायल होकर निढाल हो चुका था। उसे आनन-फानन में रक्तरंजित हालत में उपचार के लिये अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गयी।
विकास जायसवाल (संवाददाता)


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झाँसी मैं धसान नदी का जल स्तर आचानक

Posted on 27 July 2010 by admin

झाँसी मैं धसान नदी का जल स्तर आचानक बरने के कारन  दो मछुआरे  लहरों के बीच फँस गए  मऊरानीपुर के ये मछुआरे  नदी मैं मछली का शिकार करने गए थे !आचानक नदी का जल स्तर अधिक हो जाने के पांच मछुआरे किसी तरह निकल आये और दो मछुआरे नदी पर बनी टापू पर फँस गए !इसके बाद जिले के आला आधिकारी मौके पर रहत और बचओ कार्य मैं देर रात तक लगे रहे ! रहत और बचओ कार्य के लिए सेना को भी मौके पर बुलाया गया ! रहत और बचओ कार्य   में सेना ने दोनों मछुआरे को सकुसल निकल लिया गया हैं !
आज  सुभह सेना के जबानो ने अपने अभियान के तहत दोनों मछुआरे खेमचंद और गुन्मन को सुरक्चित बहार निकल लिया गया जिले के आला अधिकारीयोने ने सेना की मदद से ही दोनों मचुअरो को सुरक्चित निकला जा सका है

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मुहोब्बत से हतास युवक ने फाँसी लगाई

Posted on 23 July 2010 by admin

कभी-कभी  मुहब्बत भी इन्सान को इतना  डिप्रेशन में लेजाता है कि उस के दबाब में  इंसान अपने भविष्य के बारे में  सोच-समझ को खो देता है और अनजाने में डिप्रेशन के कारण आत्महत्या के सिवाय कोई रास्ता नहीं सूझता। कुछ ऐसा ही किया एमबीए के होनहार छात्र अनूप ने ।

सीपरी बाजार में मसीहागंज स्थित सेण्ट मैरी स्कूल के पास रहने वाले देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव डाक विभाग में कार्यरत है। उनका चौबीस वर्षीय पुत्र अनूप पूना के एक शिक्षण संस्थान में एमबीए का छात्र था। पिछले दिनों वह झाँसी आया और एक निजी कम्पनी में दो माह की  इण्टर्नशिप कर रहा था।  इण्टर्नशिप के व्यस्त अनूप अपनी गर्लफ्रेंड  को समय     न   देपाने के कारण आये दिन  फ़ोन  पर  नोक  झोक  होने  लगे निजी कम्पनी के कर्मचारियों  के अनुसार  उस दिन  भी अनूप ऑफिस  में रोया  और अपनी प्रेमिका  का  अफ्यर  किशी  अन्य  लड़के  की बात  बता  कर  ऑफिस  में रोनेलगा मगर  ऑफिस  के  लोगो  ने  अनूप  को  समझाया  मगर  वो डिप्रेशन के कारण के  कारण  परेशान  अनूप देर रात घर आया और बिना खाना खाए ही ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में सोने चला गया। आज सुबह जब वह देर तक सोकर नहीं उठा तो अनूप की माँ उसके कमरे के बाहर पहुँची और किसी प्रकार दरवाजा खोलकर अन्दर देखा तो घबरा गई। कमरे में साड़ी के सहारे छत के कुण्डे से अनूप ने फाँसी लगा ली थी। उसकी मौत हो चुकी थी। माँ के चीखने की आवाज सुनकर अन्य परिजन भी पहुँच गए और शव को फन्दे से नीचे उतारा। घटना की सूचना सीपरी बाजार पुलिस को दी गई। पुलिस ने पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

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मायाबती के राज में झाँसी में एक और नवलिग़ की इज्त हुई तार तार……..

Posted on 12 July 2010 by admin

घर से काम पर निकली एक 17 वर्षीय किशोरी कामांधों के हाथों चढ़ने के बाद 16 दिनों तक लगातार बलात्कार की शिकार होती रही।जब वह  जैसे-तैसे चंगुल से छूट कर पुलिस के पास पहुंची, तो बजाये मदद करने के, पुलिस ने अब तक रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की।

कोतवाली थाना क्षेत्र अन्तर्गत मुहल्ला दतिया गेट बाहर पठौरिया में रहने वाली 17 वर्षीय कल्पना के दुर्भाग्य की शुरूआत कुछ समय पूर्व उसके पिता के निधन के बाद ही हो गयी थी। पिता का साया उठने के बाद घर चलना मुश्किल हो गया तो वह घर-घर जाकर चौका-बर्तन का काम करने लगी। 20 जून को पूर्वाह्न वह सी.पी. मिशन कम्पाउण्ड में एक घर में काम करने जा रही थी। जब वह मिशन कम्पाउण्ड के गेट पर पहुंची, तभी एक सफेद रंग की मारुति वैन उसके बगल में आकर रुकी। इससे पहले कि कल्पना कुछ समझ पाती, वैन में बैठे चार युवकों में से दो युवकों ने उसे पकड़ कर वैन में खींच लिया और ग्वालियर ले गये।

कल्पना के अनुसार ग्वालियर में उसे एक मकान में ले जाकर बंधक बना लिया गया और 8 दिनों तक चारों युवक उससे बलात्कार करते रहे। इसके बाद उसे झाँसी में लाल कुर्ती स्थित एक मकान में लाया गया। युवकों की आपसी बातचीत से साफ हो गया कि वह मकान उनमें से एक युवक के नाना-नानी का है। वहां से तीन युवक चले गये, जबकि वह युवक रुका रहा, जिसके नाना-नानी का वह मकान था। फिर 8 दिनों तक वह युवक उससे जबरन बलात्कार करता रहा। गत दिवस जब युवक कहीं गया था, तो वह मौका पा कर भाग निकली और घटना की जानकारी आकर अपने परिजनों को दी। इधर, परिजन उसके लापता होने के बाद उसकी खोजबीन करते रहे और पुलिस को भी सूचना दी, लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।

परिवारवालों को पूरी आपबीती सुनाने के बाद कल्पना परिजनों को लेकर सीपरी बाजार थाने पहुंची, जहां उसे बदनामी होने का भय दिखा कर रिपोर्ट नहीं लिखी गयी। इसके बाद वह कोतवाली थाने पहुंची, जहां से उसे घटनास्थल सीपरी बाजार थाना क्षेत्र का होने के कारण सीपरी बाजार थाने में रिपोर्ट लिखाने को कह दिया गया। अब स्थिति यह है कि कल्पना दर-दर भटक रही है और पुलिस है कि उसकी पीड़ा सुनने को तैयार ही नहीं ।

Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
E-mail :editor@bundelkhandlive.com
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