Posted on 31 July 2010 by admin
(विकास कुमार शर्मा )
झाँसी। ‘मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की’। बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर की यही स्थिति है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा बुंदेलखंड में भूगर्भ जलस्तर के उपलब्ध कराए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। तीन जनपदों के कुछ स्थानों पर जलस्तर 3 मीटर से अधिक नीचे खिसक गया है। 18 स्थानों पर एक मीटर से अधिक जलस्तर घटा है। जलस्तर ऊपर उठाने की बुंदेलखंड में तमाम केंद्रीय और राज्य सरकार की योजनाएं चल रही हैं। स्वंयसेवी संगठन भी जुटे हुए हैं। लेकिन नतीजा ‘ढाक का तीन पात’ बना हुआ है। हालात सुधरने के बजाए और बिगड़ रहे हैं।
बुंदेलखंड में 19 से अधिक स्थानों पर एक मीटर से ज्यादा भूजल नीचे जा चुका है। इनमें बांदा, बंदौला, चित्रकूट में पुखरी पुरवा, प्रसिद्धपुर और रायपुरा, हमीरपुर में कुरारा, जालौन में डकोर किशोर मौजा, क्योंझारी, महोबा, चुर्खी, झांसी में दरुआ सागर, एरच, पंद्योहा मोड़ और ललितपुर में बांसी व वनपुर शामिल हैं।
बुंदेलखंड में गहरा रहे भूगर्भ जल संकट को लेकर प्रदेश सरकार शायद गंभीर नहीं है। यही वजह है कि भूगर्भ जल विभाग द्वारा यहां के लिए बनाई गई कई योजनाएं धूल खा रही हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व भूगर्भ निदेशालय ने कहा था कि बुंदेलखंड में जल संरक्षण और संग्रहण की प्रबल संभावनाएं हैं। वर्षा जल संचयन और संवर्धन से पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भूगर्भ जल विभाग ने एक योजना शासन को भेजी थी। इस पर आज तक कार्यवाही नहीं हुई। इसके अलावा बांदा में एक रेन सेंटर की स्थापना का भी प्रस्ताव किया था। इस सेंटर में यह सिखाने का प्रस्ताव है कि वर्षा जल को तकनीकी रूप से कैसे जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। इच्छुक लोगों को प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी प्रशिक्षण देंगें । सेंटर में एक छोटा पुस्तकालय भी होगा। जिसमें पानी से संबंधित किताबें और एटलस आदि भी होंगे। मगर ऐसी कई योजना आज भी अनुमति की प्रतिक्चा में धुल खा रही है बुंदेलखंड का मुख्या जिला झाँसी में तो रेन बाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कई सरकारी बिल्डिंगो में की गई मगर आज सब बेकार पड़ी है प्रशासन को कोई चिंता नही है रेन बाटर हार्वेस्टिंग को जरुरी बनाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया जा रहा है आज जहा नगर के सुन्दरीकरण के लिए नै सड़के सी सी रोड एपेक्स का जाल बिछाया जान जरुरी हो गया है वो तो वही रेन बाटर हार्वेस्टिंग भी जरुरी हो गया कियोकी बारिस का सारा पानी बहकर नालो में चल जाता है जमीन उसे सोख ही नही पाती है मगर इस और प्रशासन का ध्यान नही है
बुंदेलखंड में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। यहां पानी बहुमूल्य हो गया है और पानी की रखवाली खजाने की तरह की जा रही है। कुओं से लेकर हैंडपंप तक की रखवाली हथियारों के साये में हो रही है।
बुंदेलखंड का बुरा हाल है। यहां लोगों को कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रह है। आलम यह है कि पानी ढोने के काम में ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, जीप से लेकर मारुति कार तक का उपयोग हो रहा है।
प्रदेश सरकार में कई रसूखदार मत्रियों के जनपद का झाँसी मंडल मुख्यालय शहर भी भूगर्भ जलस्तर संकट की चपेट में। यहाँ तेजी से खिसक रहा हैं चिंताजनक है।
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Vikas Sharma
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Posted on 19 June 2010 by admin
श्री गहोई वैश्य महिला सेवा संस्थान द्वारा श्री लक्ष्मणदास दमेले इंटर कालेज में योग शिविर के तृतीय दिन बड़ी संया में लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर योग विशेषज्ञ श्रीमती मनोरमा नीखरा ने हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा एवं थाइराईड से सम्बंधित गम्भीर बीमारियों को योग व मनोयोग से समूल नष्ट करने की विधि बताई। श्रीमती नीरजा श्रीवास्तव व सुषमा चौहान ने लोगों को योग प्रशिक्षण में सही प्रकार से क्रिया करने की सलाह दी। इन दिनों योग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। सायंकालीन सत्र में असाध्य रोगियो को परामर्श दिया जाता है। डा. श्रीमती नीखरा ने कहा कि योग एक अन्तçर्वज्ञान है। जिसे अपनाकर शारीरिक, मानसिक, बौçद्धक एवं अध्याçत्मक विकास सम्भव किया जा सकता है। योग जीवन जीने की एक कला है। उन्होंने कहा कि इससे आहार, विहार, चिन्तन व चरित्र का शरीर के अन्दर विकास होता है। आसन द्वारा हमारी मांसपेशियां लचीली शरीर सुगठित सुन्दर होता है। हमारे 72 हजार नलियों का शुçद्धकरण होता है और इससे हमें आत्मबोध होता है। पेट एक अदभुत रासायनिक लैबोट्री है। मçष्तष्क अनन्त क्षमता वाला कप्यूटर है। हमारा दायित्व है कि हम इसे क्षत विक्षत न होने दें। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा की गई ईष्र्या द्वेष ही अनेक बीमारियों की जननी है। हमें जो दायित्व मिले हैं उनको पूर्ण मनोयोग से करना ही योग है। इससे हमारा सर्वागींण विकास होगा। 19 जून को दीप महायज्ञ का समापन होगा।
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Posted on 12 June 2010 by admin
अनुसूचित जाति, सामान्य जाति,गरीब व्यक्ति की शादियों, बीमार व्यक्तियों के अनुदान स्वीकृति के लिए गठित समिति की आज बैठक में हुई। बैठक में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को बीमारी हेतु 95 हजार रुपए के अनुदान, इसी वर्ग के 539 लाभार्थियों को 20 हजार रुपए प्रत्येक शादी अनुदान के हिसाब से 1,07,80,000 रुपए की स्वीकृति दी गयी। सामान्य वर्ग में बीमारी के दो आवेदनों पर 10 हजार रुपए तथा 64 शादी अनुदान 10 हजार रुपए प्रत्येक के हिसाब से जनपद में 6.40 लाख रुपए शादी-अनुदान योजना पर खर्च की स्वीकृति दी गयी। इसी प्रकार पिछड़ा वर्ग के 16 बीमार आवेदकों को 80 हजार रुपए का अनुदान तथा शादियों हेतु 25 विधवा लाभार्थियों, 3 विकलांग व 123 सामान्य हेतु 15.90 लाख रुपए वितरित किए जाने का अनुमोदन किया गया। अल्पसंख्यक शादी अनुदान में 4 विधवाओं व 16 सामान्य लाभार्थी को 2 लाख रुपए अनुदान वितरित किए जाने है। इन सभी योजनाओं के लाभार्थियों को जल्द ही अनुदान वितरित किया जाएगा।
बैठक में योजनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी राज शेखर ने कहा कि शासकीय योजनाओं का लाभ भ्रमित कर लिया जाए और गलत सूचनाएं दी जाएं, तो ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। उन्होंने वर्षो पहले शादी कर चुके जोड़ों को अब आवेदन करने की जांच कर नोटिस देने को कहा। योजना में विधवा व विकलांग को वरीयता देने को कहा। समिति ने एक ही वित्तीय वर्ष में शादी की तिथियों में परिवर्तन आने पर आवेदन निरस्त करने की सिफारिश की।
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Posted on 09 June 2010 by admin
झांसी में सरकारी मशीनरी के खेल भी निराले है। यह जानते हुये भी आने वाले दिनों में झमाझम बारिश होने के पूरे आसार है, इसके बाद भी विकास के नाम पर मिट्टी के काम शुरू कराये जा रहे हैं।
जनपद के अम्बेडकर गांवों में विकास कार्यो की गति पर शासन की सख्ती से विभगाीय अधिकारियों की नींद उड़ी है। वह आनन-फानन में ऐसे प्रस्ताव तैयार कर रहे है, जिन पर सवाल खड़े होने लगे है। पूर्व में कराये गये विकास कार्यो की समीक्षा में मिली कमियों को अभी दूर नहीं किया जा सका है कि लोक निर्माण विभाग ने बीते रोज विभिन्न कार्यो में मिट्टी का लेविल डालने के लिये निविदायें आमंत्रित कर ली। यहां रोचक तत्थ्य यह है कि इस कार्य को पूरा करने के लिये निर्धारित समय सीमा में बारिश काल को भी शामिल किया गया है। जानकारों का कहना है कि निविदा के फाइनल होने तक बारिश का मौसम आ जायेगा। इससे काम के दौरान ठेकेदार पानी के बहाव में मिट्टी को कैसे रोक सकेंगे? उस स्थिति में लाखों रुपये के इस कार्य के पूरे होने का मतलब है होगा मिट्टी को पानी में बहा देना। इसके अलावा सम्पर्क मार्ग निर्माण के लिये भी ऐसी ही शर्त रखी गयी है।
विभागीय अधिकारियों की सोच के बाद तैयार हुये इन प्रस्तावों पर अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है, लेकिन जानकारों का कहना है कि अड़चनों में कराये गये विकास कार्यो की गुणवत्ता धराशायी हो सकती है।
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Posted on 04 June 2010 by admin
मकान मालिक के उत्पीड़न से त्रस्त होकर एक व्यक्ति ने आज अपने परिजनों समेत कलैक्टेट में पहुंच कर आत्मदाह करने का प्रयास किया। किन्तु ऐन वक्त पर मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे दबोच लिया तथा उसके आत्मदाह के प्रयास को विफल कर दिया। बताते है कि सदर थाना क्षेत्र के ग्राम सिमराहा निवासी महेन्द्र कोरी का अपने मकान मालिक से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप लगाया गया है कि इस पर मकान मालिक ने उसके घर में घुसकर सामान की तोड़-फोड़ कर दी, तथा उसका सामान घर के बाहर फेंक दिया। इससे क्षुब्ध होकर महेन्द्र अपनी पत्नी विद्या व बच्चों के संग कलैक्ट़ेट पहुंचा और अपने उपर मिटटी का तेल छिडक कर आत्मदाह करने का प्रयास किया। सूचना पाकर में मौके पर पुलिस पहुंची और उसे दबोच कर उसके प्रयास को विफल कर दिया।
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Posted on 26 May 2010 by admin
झांसी के पारीछा थर्मल विद्युत तापीय परियोजना में निर्माणाधीन 5वीं यूनिट की 220 मीटर ऊंची चिमनी के ढहने के बाद बचाव व राहत कार्य में तेजी आ गयी है। फिलहाल आज बुधवार को सुबह एक शव बरामद किया जा चुका है, जबकि दो लोगों के दबे होने की आशंका पुख्ता हो गयी है। वैसे बताया जा रहा है कि मलबे से छह घायल मजदूरों को निकाला जा चुका है, जिनमें से तीन गंभीर घायलों का इलाज चल रहा है।
पारीछा परियोजना में पांचवीं यूनिट में निर्माणाधीन 220 मीटर ऊंची चिमनी सोमवार दोपहर तेज आंधी के दबाव में ढह गयी। आशंका थी कि चिमनी के अंदर काम कर रहे दर्जनों मजदूर दब गये, लेकिन अब तक सिर्फ दो लोग लापता दिख रहे है। बचाव कार्य के लिए सोमवार शाम सेना को मौके पर बुला लिया गया। मंगलवार सुबह जिलाधिकारी राजशेखर व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनोद दोहरे ने दुर्घटनास्थल के पास डेरा डाल लिया। पूर्वाह्न केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य मौके पर पहुंचे। इसके बाद निजी बुलडोजर मंगवाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
इस बीच प्रशासन ने चिमनी के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के नमूनों को जांच के लिये जब्त कर लिया। जिलाधिकारी ने बताया कि यह नमूने प्रशासन के पास रहेगे और लखनऊ से आने वाली एजेंसी से घटना की जांच करायी जायेगी मगर मलवे को देख कर लगता है की निर्माण में जो शम्ग्री का प्रायोज किया गया है उस में कमी है सीमेंट भी नकली और रख मिला लगता है और सरिया तो vo लगा है जिशे लोग अपने घर में भी नही लगते है । जिलाधिकारी के अनुसार, हादसे में अधिकांश मजदूर सुरक्षित बच गये है, लेकिन सिर्फ दो मजदूर लापता हैं और उन्हीं के परिजन वहां कोहराम मचा रहे है, जिससे अंदेशा है कि दो लोगों की ही मौत हुई। इस घटना में लगभग 35 करोड़ से अधिक की क्षति होने का अनुमान है।
एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा
पारीछा हादसे को इस गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि निर्माण कराने वाली संस्था नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन के कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी और इस संबंध में कॉरपोरेशन को सचेत किया गया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि उक्त संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए केंद्र को पत्र लिखें।
वहीं, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि इस मामले में दोषी निर्माण एजेंसी के खिलाफ जांच कराकर कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये। चिमनी जिस समय टेढ़ी दिखने की शिकायत राज्य सरकार से की गयी थी, उसी समय या तो काम रोक देना चाहिये था या चिमनी गिराकर दूसरा निर्माण किया जाना चाहिये था।
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Posted on 15 May 2010 by admin
बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए केन्द्र सरकार से स्वीकृत विशेष पैकेज से संचालित योजनाओं की आज यहां उच्च स्तरीय बैठक में योजना आयोग व केन्द्र सरकार की टीम ने समीक्षा की। बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव व आधा दर्जन विभागों के प्रमुख सचिवों ने योजनाओं की प्रगति बताई। सदस्य सचिव योजना आयोग ने वर्षा के पहले योजनाओं को पूरा करने के लिए क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा।
कलेक्ट्रेट स्थित गाँधी सभागार में लगभग साढ़े पांच घण्टे चले मंथन में योजना आयोग व प्रदेश सरकार की टीम ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए मिले विशेष पैकेज से संचालित केन्द्रीय योजनाओं के अतिरिक्त योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की। बैठक में योजना आयोग की सदस्य सचिव सुधा पिल्लई ने कहा कि 19 नवम्बर 2009 में बुन्देलखण्ड पैकेज को को स्वीकृति मिली। वे इसके पहले 16 नवम्बर को लखनऊ आयीं थी और अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य/क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझा था। उन्होंने कहा कि एक वर्ष का समय निकल गया है और अब पैकेज के कार्यो को दो वर्ष में पूरा करना है। इसीलिए तय समय में कार्यो को पूरा किया जाए। सदस्य सचिव ने फील्ड अफसरों की शंकाओं का निराकरण भी किया। उन्होंने योजनाओं के नियमित अनुश्रवण व समीक्षा की जरूरत बताई। सीईओ नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी ऑफ इण्डिया डॉ. जेएस सामरा ने कहा कि विभिन्न विभागों के विभिन्न कार्यो के लिए कार्य शुरू कर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि पैकेज उदार है और जिला स्तरीय अधिकारी निर्धारित कार्यो के अलावा अन्य कार्यो पर भी विचार कर सकते है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे जाएं। इन योजनाओं को एक जून की बैठक में विचार किया जा सकता है।
बैठक में बताया गया कि बुन्देलखण्ड के सातों जिले झाँसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट के लिए कुल 3506 करोड़ रुपए स्वीकृत किए है। इसमें विभिन्न केन्द्रीय योजनाओं के अलावा 1595 करोड़ रुपया अतिरिक्त रूप से मिला है। इसमें से 332 करोड़ रुपया प्रदेश को दे दिया गया, जिसमें से 207 करोड़ रुपया जिलों को उपलब्ध करा दिया गया है।
प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने विभिन्न विभागों की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने विभाग प्रमुखों के साथ मण्डलायुक्त व सभी जिलाधिकारियों को इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह से जुट जाने को कहा है। जल संचय व जल संरक्षण की योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि समय सारणी बनाकर कार्य किया जाए और लगातार मासिक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड में एक फसल ली जाती है। खरीफ की फसल को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए दो फसली व्यवस्था करना ही कृषि का प्रमुख कार्य है। साथ ही पशुधन से सम्बन्धित योजनाओं पर भी विशेष काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पैकेज की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कृषि, पशु पालन, लघु सिंचाई, सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बैठक में डॉ. केएस रामचन्द्रम् सदस्य/तकनीकि विशेषज्ञ राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण, अपर आयुक्त एनआरएम सीएम पाण्डेय, अतिरिक्त आयुक्त पशुपालन व डेयरी विकास डॉ.पीवी शुक्ल ने विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त आरके शर्मा, प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. जेएन चैम्बर, प्रमुख सचिव कृषि कपिलदेव व प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास व उद्यान श्री कृष्ण, आयुक्त ग्राम्य विकास संजीव कुमार, प्रमुख सचिव लघु सिंचाई सुशील कुमार, प्रमुख सचिव सिंचाई किशन सिंह अटोरियम, प्रमुख सचिव पशुधन डॉ. हरिशरण दास, प्रमुख सचिव भूमि विकास व जल संसाधन योगेश कुमार, निदेशक मण्डी परिषद राजेश कुमार सिंह, आयुक्त रामगंगा कमाण्ड आरएन राम, प्रमुख सचिव वन चंचल कुमार तिवारी, प्रमुख सचिव दुग्ध विकास अशोक कुमार, बैठक में अपर आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराग यादव, प्रमुख अभियंता व विभाग प्रमुख राजेन्द्र मणि त्रिपाठी, प्रमुख वन संरक्षक डीएलएस सुमन, अतिरिक्त प्रमुख वन संरक्षक मो. अहसन के साथ मण्डलायुक्त झाँसी व चित्रकूट धाम मण्डल, सातों जिलों के जिलाधिकारी के अलावा मुख्य विकास अधिकारी उपस्थित रहे।
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Posted on 22 April 2010 by admin
झाँसी पुलिस का उत्पीडन का अमानवीय चहरा एक बार फिर सामने आ गया . घटना है झाँसी के नाबबाद थाने की जब थाने की पुलिस ने मानवाधिकारो की बखेडिया उधेड़ कर रख दी. जब शिकायत करने आये RMS कर्मचारी को पुलिस ने उस को ही पकड़ कर करदी पिटाई मगर बात मात्र पिटाई की नहीं है उसको पुलिस ने हत्कड़ी लगाकर रात भर नंगा करके थाने में खड़ा रखा. -
Posted on 23 March 2010 by admin
झांसी - मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में स्टेट इनोवेशन इन फैमिली प्लानिंग सर्विस प्रोजेक्ट एजेंसी (सिप्सा) द्वारा आयोजित स्किल बर्थ अटेण्डेंस ट्रेनिंग फार द मेडिकल अफसरं नामक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शरुआत की गई, प्रशिक्षण कार्यक्रम में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के मेडिकल अफसरों को मातृ मृत्यु दर कम करने के तरीके बताए गए।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. गणेश कुमार आनन्द ने कहा कि महिलाएं आमतौर पर इलाज साधनों के अभाव व कम जागरूकता के कारण अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखती हैं, जबकि बच्चों को पैदा करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आनन्द ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योकि वह अपने पेट में एक बच्चे को पाल रही होती हैं। दुर्भाग्य से चिकित्सकों के अन्दर जागरूकता का अभाव होने के कारण वह गर्भवती महिलाओं को उचित सलाह नहीं दे पाते हैं, इस कमी को दूर करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. संजया शर्मा ने जानकारी दी कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं संचालित कर रखीं हैं। बावजूद इसके महिलाएं इनका लाभ प्राप्त नहीं करती हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डा. सुशीला खर्कवाल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को प्रत्येक माह अपने स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए। इसके लिए उन्हें नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र व अस्पताल में जरूर जाना चाहिए।
प्रो. बी. डी माथुर ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले बैच में झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर,बांदा व चित्रकूट जिले के छह मेडिकल आफिसरों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इस मौके पर सिप्सा की प्रोजेक्ट मैनेजर डा. फिरदौस सिद्दीकी ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का लक्ष्य सन 2012 तक क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर को प्रति एक लाख महिला आबादी पर 258 लाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा. लक्ष्मी जाटव, डा. बी डी माथुर, डा. विद्या चौधरी, डा. हेमा जे शोभने, डा. रजनी व डा.प्रीति गौतम आदि उपस्थित रहीं।
Posted on 24 February 2010 by admin
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के 14वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां पूर्ण कर ली गयीं है। परिसर में कल होने वाले समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के निदेशक बी.एस.बासवान पहुंच रहे है। अध्यक्षता परम्परागत रूप से प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति बी.एल.जोशी करेगे।
दीक्षांत समारोह के बारे में पत्रकारों को बताते हुये बुविवि के कुलपति प्रो. सुरेश बीर सिंह राणा ने बताया कि 11.15 बजे राज्यपाल की अनुमति से समारोह का उद्घाटन होगा। समारोह से पूर्व अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर साइन्स एवं बायोमेडिकल साइन्स भवनों का लोकार्पण किया जायेगा। तत्पश्चात कार्यक्रम आगे बढ़ाया जायेगा। कुलपति ने बताया कि समारोह में 154 पीएचडी की उपाधियां, परास्नातक छात्रों को 1275 तथा स्नातक के छात्र-छात्राओं को 1372 डिग्रियां प्रदान की जायेंगी। इसके साथ स्वर्ण, रजत तथा कास्य सहित 37 पदक तथा 39 इण्डोमेन्ट पदक अभ्यर्थियों को दिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि समिति के निर्णय अनुसार इस बार मानद उपाधि नहीं दी जा रही है। विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के सवाल पर कुलपति ने कहा कि केन्द्रीय विवि के मानकों अनुसार बुविवि में पर्याप्त भूमि नहीं है। इस कमी को दूर करने हेतु भूमि की स्वीकृति के लिये प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि 25 फरवरी को शाम 7 बजे दीक्षांत मण्डप में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी रखा गया है।
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