कुदरत  का  कहर  क़यामत  के  आने   की  दस्तक  है  पानी  ही  पानी. इस से भी ख़राब हालात होंगे २०१२ में   ये परिणाम है  कुदरत से खिलबाड़ का........ “Plant Trees to Save Environment” , *खाकी वर्दी वालो के कारनामे-जनता की जुवानी * सफेद कुर्ते वाले नेताओ के कारनामे-जनता की जुवानी "bundelkhandlive.com" पर, आप के पास है कोई जानकारी तो आप भी बन सकते है सिटी रिपोर्टर हमें मेल करे editor@upnewslive.com पर या 09415060119 फ़ोन करे , SPC मीडिया ग्रुप पेश करते है <UPNEWS>मोबाईल sms न्यूज़ एलर्ट के लिए अगर आप भी कहते है अपने और प्रदेश की खबरे अपने मोबाईल पर तो अपना <नाम-, पता-, अपना जॉब,- शहर का नाम, - टाइप कर 09415060119 पर sms, प्रदेश का पहला हिन्दी न्यूज़ पोर्टल जिसमे अपने प्रदेश की खबरें सरकार की योजनाएँ,प्रगति,मंत्रियो के काम की प्रगति www.upnewslive.com पर

Archive | समाज

जिलाधिकारी नियमित रूप से भू-रजिस्ट्रियों का स्थलीय निरीक्षण एवं स्टाम्प वादों की सुनवाई सुनिश्चित करें -बाबू सिंह कुशवाहा

Posted on 07 September 2010 by admin

लखनऊ -  स्टाम्प एवं पंजीयन मन्त्री श्री बाबू सिंह कुशवाहा ने अगस्त माह में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कुछ जनपदों में कम राजस्व वसूली होने पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुये राजस्व वसूली को बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अत्यन्त गम्भीर है तथा राजस्व वसूली में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जायेगा। माह अगस्त तक 2846.12 करोड़ रूपये राजस्व की वसूली हुयी है, जो गत वर्ष की तुलना में 54 प्रतिशत अधिक है।

श्री कुशवाहा आज यहॉ योजना भवन में स्टाम्प रजिस्ट्रेशन विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बड़ी रजिस्ट्री के सभी मामलों में अनिवार्य रूप से स्थलीय निरीक्षण किया जाये, जिससे स्टाम्प शुल्क की चोरी न हो सके। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रवर्तन कार्य करते रहने से लोग स्टाम्प शुल्क की चोरी नहीं करेंगे तथा सही मूल्य का स्टाम्प लगायेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे लिम्बत स्टाम्प वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करें। उन्होंने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी स्थलीय निरीक्षण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहें हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव को निर्देश दिये कि वे जिलाधिकारियों से स्थलीय निरीक्षण एवं स्टाम्प वादों की सुनवाई नियमित रूप से सुनिश्चित करायें।

अगस्त तक सबसे कम राजस्व वसूली वाले जनपदों में श्रावस्ती, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट, अम्बेडकर नगर, प्रतापगढ़, खीरी, मैनपुरी, महोबा तथा हरदोई शामिल हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव श्री कपिल देव, महानिरीक्षक पंजीयन श्री हिमांशु कुमार, विशेष सचिव श्री बी0पी0 सिंह के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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बुंदेलखंड में भी किराये की कोख की दस्तक

Posted on 07 September 2010 by admin

आधुनिक जीवनशैली, महंगे शौक, धन और सैर-सपाटे की चाह में भारत के लड़के शुक्राणु और लड़कियां अंडाणु बेचने में जरा भी हिचक नहीं रहे हैं। कुछ लड़कियां तो ऐसी भी हैं, जो पैसे के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

हमारे देश में पहले बिन व्याही मां बनना समाज के लिए कलंक की बात थी, आज भी है, लेकिन अब चंद रुपयों की खातिर लड़कियां घर से महीनों दूर रहकर कोख किराए पर देने जैसा जोखिम भरा काम कर रही हैं। विज्ञान में इन्हें ‘सरोगेट मदर’ कहा जाता है। एक इस काम के लिए इश्तहार देता है और दूसरा तत्काल तैयार हो जाता है। सुनने में यह बात अविश्वनीय लगे, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर दिल्ली तक यह व्यवसाय धड़ल्ले से चल निकला है। टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर की सुख-सुविधाएं भी कुवांरियों को मां बनने के लिए आकर्षित कर रही हैं। सरोगेसी के मामले में मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ- साथ बुंदेलखंड में भी  मेट्रो सिटी की तरह बढ़ रही है। आलम यह है कि यहां यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश तक से दंपत्ति सरोगेट मदर की तलाश में आ रहे हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें अविवाहित लड़कियों की भी बड़ी संख्या सामने आ रही है, जो पैसों की खातिर बिन व्याही मां बनने को भी तैयार हैं। अपना पूरा भविष्य दांव पर लगाने तैयार कुछ ऐसी ही कुछ लड़कियों से जब सेंटर स्टाफर बनकर बातचीत की गई, तो उन्‍होंने कई बातें बड़ी बेबाकी से सामने रखीं। उनका सीधा कहना है कि भविष्य की कोई गारंटी नहीं है। आज हमें कुछ महीनों में ही दो लाख रुपए तक मिल रहे हैं, वो भी बगैर कोई गलत कदम उठाए, तो फिर इसमें हर्ज क्या है? राजधानी में बीई की पढ़ाई कर रही इंदौर की अनुष्का  (परिवर्तित नाम) कहती है, ‘पापाजी की डेथ हो चुकी है। मां भी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। दो भाई हैं, जिन्हें मुझसे कोई सरोकार नहीं है। पढ़ाई के लिए तो पापा ने भेजा था। हमने एजुकेशन लोन लिया था। पापा मेरे नाम कुछ फिक्स डिवाजिट भी किए थे। दो साल पहले पापा की डेथ हो गई, तब से मैं सारे फैसले खुद ही ले रही हूं। अपने भविष्य को लेकर ही मैं फ्लैट लेना चाहती हूं। लिहाजा सरोगेट मदर बनकर फ्लैट के लिए रुपए जुटाने का फैसला किया है।’

बैतूल की अनीता  (परिवर्तित नाम) भोपल में रिसेप्शनिस्ट है। वह चाहती है कि उसकी खुद की कार हो, लेकिन परिवारिक परिस्थितियां और सेलरी से यह सपना पूरा नहीं हो सकता। तान्या ने कार लेने के लिए अब सरोगेट मदर बनने का रास्ता चुना है। बुंदेलखंड  की विभा (परिवर्तित नाम) की बचपन में ही शादी हो गई। गौने से 3 महीने पहले ही पति ने दूसरी शादी कर ली। अब वह आत्मनिर्भर होना चाहती है, लेकिन इसमें गरीबी आड़े आ रही है। विभा ने इसके लिए सरोगेट मदर बनने का रास्ता चुना।

भूमि (परिवर्तित नाम) के माता-पिता की मृत्यु हो गई। अब वह  एक ऑफिस में रिसेप्‍शनिस्ट है। उसे प्यार में धोखा मिला, अब भूमि ने आत्मनिर्भर होने के लिए सरोगेट मदर बनने का निर्णय लिया है। जब उससे यह पूछा गया कि क्या उसे ऐसा करने में समाज से डर नहीं लगता है, तो उसने कहा, ‘जब मुझे भूख लगती है, तो कोई पुछने नहीं आता, ऐसे में डरे किससे? क्या उस समाज से डरूं, जो मेरी मदद नहीं कर सकता।’

हालांकि, तलाक डर से इन दिनों कई लड़कियां सर्जरी की मदद से कौमार्य हासिल कर रही हैं। यहां तक कि कुछ तो डॉक्टर से वर्जिनिटी सर्टिफिकेट भी मांगती हैं। शादी के वक्त लड़की का गोरा रंग, दुबला शरीर और ऊंचा कद तो मायने रखता ही है, पर हमारे समाज में सबसे ज्यादा जरूरी है उसका अनछुई होना। शादी की रात ही यह जान कर कि दुलहन वर्जिन नहीं है, अपनी पत्नी को तलाक दे देना कोई नई बात नहीं है या यह जानने के बाद कि पत्नी का कभी किसी और से भी संबंध रहा है, उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त करना भी कोई नई बात नहीं है। अपने सपनों में अनगिनत लड़कियों को नोचता हुआ, चीरता हुआ यह शरीफ मर्द आंचल में ढंकी बीवी की ख्वाहिश करता है। शादी से पहले किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाया, तो आप बदचलन हैं। आपका करैक्टर आपकी वर्जिनिटी पर आधारित है। हमारे देश में औरत की वर्जिनिटी को उसकी इज्जत कहा जाता है। शायद, इसीलिए कोई वहशी किसी लड़की से बलात्कार करता है, तो वह आत्महत्या कर लेती है। अगर लड़की ऐसा न भी चाहे, तो समाज उसके साथ इतनी हिकारत से पेश आता है कि उसके सामने कोई चारा नहीं होता।

कुछ लड़कियों से जब यह पूछा कि अगर बिन व्याही मां बनने की बात समाज के सामने आ जाती है, तो फिर आपके भविष्य का क्या होगा। इसके जवाब में सभी का एक जैसा नजरिया था कि फैसला उनका अपना है, इसलिए वे भविष्य की हर परेशानी के लिए भी पूरी तरह से तैयार हैं।

टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के एक संचालक कहते हैं कि कोख किराए पर देने वाली महिलाओं का आंकड़ा बढऩे के पीछे वजह, इनके लिए उपलब्ध मार्केट है। वहीं उच्चवर्ग की महिलाएं अपने फिगर को मेंटेन रखने, गर्भपात होने से पैदा होने वाली परेशानियों से बचने के लिए सरोगेट मदर की मदद लेना ज्यादा बेहतर समझती हैं। ये महिलाएं झूठी स्‍वास्‍थ्‍य परेशानियों का बहाना बनाकर सरोगेट मदर्स का सहारा लेने की भरसक कोशिश करती हैं। वे कहते हैं, ‘गर्भधारण का अनुभव प्रमाण सहित होना जरूरी है। इसके लिए विवाहित होने की बाध्यता नहीं है। अविवाहित लड़िकयां भी गर्भधारण का अनुभव होने पर सरोगेट मदर बन सकती हैं। विवाहिता के पति की अनुमति जरूरी है। अविवाहिता और तलाकशुदा के लिए केवल उसकी अपनी मर्जी ही काफी है, जबकि तलाक के लंबित मामलों में महिला कोख किराए पर नहीं दे सकती। महिला को ऐसी कोई बीमारी न हो, जिसके बच्चे में स्थानांतरित होने की आशंका हो और उसकी उम्र 21 से 45 साल के बीच हो।’

यह तो रही कोख किराए पर देने वालों की दास्तान। यही कुछ हाल है शुक्राणु और अंडाणु बेचने वालों का। बताया जाता है कि बेहतर गुणवत्ता वाले शुक्राणु और अंडाणुओं की विदेशों में अच्छी-खासी कीमत मिल रही है। नीली आंखों वाली लड़कियों के अंडाणुओं की कीमत सबसे अधिक है। वहीं उच्च वर्ण, गोरा रंग और लंबाई वाले लड़कों के शुक्राणुओं का बाजार तेजी पकड़ रहा है। वैसे देश के महानगरों में भी इसका चलन जोर पकड़ रहा है, लेकिन फर्टीलिटी टूरिज्म के जरिए विदेशों में नि:शुल्क घूमने-फिरने और रहने का बोनस पैकेज युवाओं को ज्यादा लुभा रहा है।

दिल्ली-एनसीआर के कई प्रजनन केंद्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके यहां दिल्ली विश्वविद्यालय की कई लड़कियां अपने अंडे का दान करने आती हैं और बदले में उनको अच्छी रकम भी मिल जाती है। ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय युवाओं को शुक्राणु और अंडाणु देने के एवज में 30 हजार डॉलर तक मिल रहे हैं। वैसे ब्रिटेन में शुक्राणु और अंडाणु दान करने वाले लोगों को अब 800 पौंड देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन ब्रिटिश दंपतियों में भारतीय नस्ल के बढ़ते क्रेज को देखते हुए इसकी कीमत इससे कहीं ज्यादा है। ह्युमन फर्टीलिटी एंड एम्ब्रियोलॉजी ऑथरिटी (ब्रिटेन) ने वीर्य दान करने वालों को अब ज्यादा भुगतान करने का प्रावधान किया है। इसके मुताबिक अब वीर्य दाताओं को 800 पौंड (लगभग एक लाख रुपए) मिलेंगे। पहले इसके एवज में वहां महज 250 पौंड का भुगतान किया जाता था।

ब्रिटेन जैसे देशों में महिलाओं में बांझपन व पुरुषों में नपुंसकता दर ज्यादा होने की वजह से उनके अंडाणु और शुक्राणु इनविट्रो फर्टीलिटी तकनीक (आईबीएफ) के लिए उपयुक्त नहीं रहे हैं। चूंकि भारत एक सम-शीतोष्ण देश है, इसलिए यहां के युवा प्रजनन के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। लेडी हार्डिंग अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा सिंघल का कहना है, ‘विज्ञान के विकास ने मां-बाप बनने की संभावनाओं को बढ़ाया है। इसकी वजह से लोग किसी भी कीमत पर अपनी सूनी गोद को हरी करना चाहते हैं। इसके एवज में वे कोई भी कीमत चुकाने को तैयार होते हैं, और लाभ उठाने वाले इसका लाभ उठाते हैं। इसके लिए आचार संहिता चाहिए, जो अभी नहीं है।’


Vikas Sharma
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जबावदेह कौन दैहिक शोषण का?

Posted on 10 August 2010 by admin

(विकास कुमार शर्मा )भारतीय राजनीति में महिला सशक्तिकरण का दौर दिन प्रतिदिन जोर पकड़ता जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों के विरोध के बावजूद महिला आरक्षण विधेयक न केवल चर्चा के विषय तक सीमित रहा है, बल्कि हर जगह महिलाओं में इसकी झलक भी दिखायी देने लगी हैं। समाज में महिलाओं के शोषण की बात भी कोई नयी बात नहीं है और यदि शोषण को मिटाना है तो महिलाओं को सशक्त करना भी अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

भारत पूर्व में जहां पुरूष प्रधान देशों की श्रेणी में आता था, वहीं भारत वर्तमान समय में नारी प्रधान देशों की श्रेणी में आकर खड़ा हो गया है। वर्तमान समय को नारी युग का दर्जा दिया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर महिलाओं के दैहिक शोषण के लिए जबावदेह कौन है? महिलाओं को बेसक उनके अधिकारों से संपन्न किया जाना चाहिए। इसमें कोई दोराय वाली बात नहीं है, पर महिलाओं के दैहिक शोषण को लेकर केवल पुरूषों पर दोषारोपड़ करना कहां तक उचित है ? कहीं न कहीं इसमंे महिलाओं और जिनके साथ देैहिक शोषण की घटनाएं घटी हैं, वे भी इसमें बराबर की जिम्मेदार हैं।
अकेले एक प्रदेश की बात करें तेा दर्जनों ऐसे जिले हैं जहां कई महिलाओं ने ही किशेरी आदिवासी बालाओं को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से उठवा कर खुद व उन आदिवासी युवतियों का दैहिक शोषण कराने कंसल्टेंसी कंपनियों और रईस घरानों में भेजती है। इस धंधे में लिप्त महिलाएं और युवतियां अपनी ही सद्वुद्धि तथा करनी का फल भोग रही हैं, हालात यहां तक बन गयें हैं कि अब इस धंधे में लिप्त महिलाएं व युवती लोकलाज के चलते पैसों के कारण इससे बाहर ही आना नहीं चाहती। इसका सबसे अच्छा एक उदाहरण  छत्तीसगढ़  का ही जशपुर जिला है। जहां से सैकड़ों की तादाद में युवतियों को चंद नोटों के लिए बेच दिया जाता है।
बात जब शिक्षित नहीं होने की आती है तो एक बच्चा जब मां की कोख से जन्म लेकर जैसे ही धरती पर अवतरित हेाता है तब उसके दूध के दांत निकलने से पहले ही उसे वह ज्ञान हो जाता है, जिसकी शायद कल्पना भी नहीं की जा सकती। अपनी आबरू को बचाकर रखना शिक्षित होने से कहीं ज्यादा आप पर निर्भर करता है। जैसे संस्कार बच्चे को मां से और घर परिवार के बड़े बुजुर्गों से मिलती हैं, वह वैसा ही पाता है।
पाश्चात्य संस्कृति की विचारधाराओं से प्ररित होकर और अर्द्धनग्न फिल्मों से प्रेरणा लेकर जिस तरह महिलाओं और नवयुवतियों ने अपनी वेशभूशा में परिवर्तन किया है और हमारे भारतीय परिधानों को धारण न कर दरकिनार कर दिया है, क्या यह किसी भी स्तर पर भारतीय संस्कार, सभ्यता और परिवेश में पली-बढ़ी महिला और शिक्षित महिलाओं के लिए शोभनीय है।
देशों और समाजों में जिस प्रकार नारियों के अनेकों रूप देखने को मिलते हैं ठीक उसी तरह पुरूष वर्ग में भी अनेकों रूप मिल जाते हैं। एक नारी वह होती है जो परिवार से मिले संस्कार को आधार बनाकर देश, समाज और अपना नाम रोशन करती है, वहीं दूसरी तरफ एक नारी वह भी होती है जो समाज, देश और अपने संस्कारों का वलिदान देकर उसे कलंकित करने का कार्य करती है। ठीक उसी तरह पुरूष भी। वहीं कुछ ऐसी महिलाएं और नवयुवतियां भी होती हैं जो मिले अधिकारों का इस्तेमाल सिर्फ गलत कार्यों में ही करती हैं, इसका मतलब यह नहीं कि पुरूष पूरी तरह से दोषी हो।
महिला आरक्षण का मुद्दा जोरशोर से उठाने वाली सोनिया गांधी भी तो एक महिला ही हैं और राहुल गांधी उनके पुत्र हैं, जो मां और पिता से मिले संस्कारों का सदुपयोग पर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। यदि उन्हें कुसंस्कार मिले होते तो वे उन मां के कपूतों की भूमिका निभा रहे होते, जो वर्तमान में मधुकोड़ा, बीएल अग्रवाल और रूचिका का हत्यारा राठोर अदा कर रहे हैं। इनकी जननी इन्हें कोशती होंगी कि इन्हें किन  महूरत में  जना था। जिन्होने परिवार, देश और समाज में उनका सिर शर्म से झुका दिया।
माता-पिता अपने बच्चों से यही अपेक्षा करते हैं कि बच्चे उनका नाम अच्छे कर्मों से रोशन करें, मगर यह बिडंबना ही है कि उसमें से बहुत कम ही ऐसे होते हैं, जो उनके सपनों को साकार करते हैं। कोई अपने बच्चों को महिलाओं और युवतियों के दैहिक शोषण करने के संस्कार नहीं देता। हां इतना है कि समाज और देश में कुछ अपवाद जरूर होते हैं जिन्हें ऐसे संस्कार विरासत से मिले होते हैं। राजनीति और संतों में दर्जनों ऐसे घिनौने चेहरे हैं जिसमें एक सफेद बस्त्र धारण करता है और दूसरा गेरूआ वस्त्र पहनकर महिलाओं व युवतियों के साथ रासलीला रचाता है। प्रदेश में भी कुछ ऐसे नेता मंत्री हैं जो चमड़ी के दीवाने हैं, पर समाज उन लोगों की पूजा करता है।
क़ानूनी ढांचे में कुछ इस तरह संशोधन होना चाहिए कि इससे महिलाओं का शोषण बंद हो और उन्हें इस काम के लिए मजबूर न किया जा सके. इससे भी अधिक जरूरी है कि भारत की सामाजिक संरचना को नुक़सान न पहुंचे.
देश की तरक्की और विकास के लिए इस मानसिकता को बदलना होगा और हर स्तर पर इसके लिए संघर्ष करना होगा, तभी महिलाओं का दैहिक शोषण थम सकता है।


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नौनिहालों के कंधों पर बस्ते का वजन

Posted on 02 July 2010 by admin

शासन के अनुसार नौनिहालों के कंधों पर बस्ते का कम से कम वजन होना चाहिए, लेकिन अधिकतर स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध न होने से एक से किलो की बोतल का अतिरिक्त वजन सहन करना पड़ रहा है।

भीषण गर्मी और उमस के बीच गुरुवार से शासकीय स्कूलों में नियमित कक्षाएं लगाने का क्रम शुरू हो जाएगा। लेकिन हैरानी इस बात की है कि जिले के अधिक शासकीय स्कूलों में बच्चों को प्यास बुझाने के लिए कोई इन्तजाम नहीं है।
एक ओर शासन अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून पारित कर शतप्रतिशत बच्चों को स्कूलों तक लाने के लिए तमाम प्रयास कर रहा है तो दूसरी ओर मानव विकास संसाधन विभाग बच्चों के बस्तों को बोझ कम करने का। लेकिन हो ठीक विपरीत रहा है। स्कूल पहुंचे बच्चे स्कूलों में प्यास बुझाने का इन्तजाम न होने के कारण पानी पीने के बहाने घर भाग लेते है तो जो पढऩा चाहते है, वह एक से डेढ़ किलो बोझ अतिरिक्त ले जाने के लिए मजबूर है।

एक सैकड़ा स्कूलों के पास नहीं पानी का कोई इन्तजामरू शासकीय स्कूलों में पीने के पानी के इन्तजाम की बात करें तो जिले के एक सैकड़ा से अधिक स्कूल ऐसे है, जहां पर पीने के पानी का कोई इन्तजाम नहीं है। यानि ऐसे स्कूलों को आसपास भी पानी की सुविधा नहीं है। ऐसे में इन स्कूलों में शिक्षक भी पानी आस-पड़ोस से मंगवाने के लिए मजबूर होते है।

ग्रामीण क्षेत्र हो या फिर शहरी स्कूलों में शिक्षक अपनी प्यास बुझाने के लिए मटकों का इन्तजाम तो कर लेते हैए लेकिन इन्हें भरने का काम बच्चों को करना होता है। स्कूल के पास लगे हैण्डपंप या फिर कुएं से पानी लाने की जिम्मेदारी बच्चों के कंधों पर होती है। इस पर भी बच्चों की प्यास बुझाने के लिए स्कूलों में कोई इन्तजाम नहीं किए जाते।

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ऑक्सीजन के बिना जीने वाले जीव

Posted on 02 July 2010 by admin

वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसे जीवों की खोज की है जो बिना ऑक्सीजन के जी सकते हैं और प्रजनन कर सकते हैं। ये जीव भूमध्यसागर के तल पर मिले हैं। इटली के मार्श पॉलीटेकनिक विश्वविद्यालय में कार्यरत रॉबर्तो दोनोवारो और उनके दल ने इन कवचधारी जीवों की तीन नई प्रजातियों की खोज की है। दोनोवारो ने बीबीसी को बताया कि इन जीवों का आकार करीब एक मिलीमीटर है और ये देखने में कवच युक्त जेलीफ़िश जैसे लगते हैं। प्रोफेसर रॉबर्तो दोनोवारो ने कहा, ये गूढ़ रहस्य ही है कि ये जीव बिना ऑक्सीजन के कैसे जी रहे हैं क्योंकि अब तक हम यही जानते थे कि केवल बैक्टीरिया ऑक्सीजन के बिना जी सकते हैं। भूमध्यसागर की ला अटलांटा घाटी की तलछट में जीवों की खोज करने के लिए पिछले एक दशक में तीन समुद्री अभियान हुए हैं। इसी दौरान इन नन्हे कवचधारी जीवों की खोज हुई।यह घाटी क्रीट द्वीप के पश्चिमी तट से करीब 200 किलोमीटर दूर भूमध्यसागर के भीतर साढ़े तीन किलोमीटर की गहराई में हैए जहां ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं है।

नए जीवों के अण्डे प्रोफेसर दानोवारो ने बीबीसी को बताया कि इससे पहले भी बिना ऑक्सीजन वाले क्षेत्र से निकाले गए तलछट में बहुकोशिकीय जीव मिले हैं लेकिन तब ये माना गया कि ये उन जीवों के अवशेष हैं जो पास के ऑक्सीजन युक्त क्षेत्र से वहां आकर डूब गए। प्रोफ़ैसर दानोवारो ने कहा हमारे दल ने ला अटलांटा में तीन जीवित प्रजातियां पाईं जिनमें से दो के भीतर अण्डे भी थे। हलांकि इन्हें जीवित बाहर लाना सम्भव नहीं था लेकिन टीम ने जहाज पर ऑक्सीजन रहित परिस्थितियां तैयार करके अण्डो को सेने की प्रक्रिया पूरी की। उल्लेखनीय है कि इस ऑक्सीजन रहित वातावरण में इन अण्डों से जीव भी निकले। दानोवारो ने कहा यह खोज इस बात का प्रमाण है कि जीव में अपने पर्यावरण के साथ समायोजन करने की असीम क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के समुद्रों में मृत क्षेत्र फैलते जा रहे हैं जहां भारी मात्रा में नमक है और ऑक्सीजन नहीं है। स्क्रिप्स इंस्टिट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी की लीसा लेविन कहती हैंए अभी तक किसी ने ऐसे जीव नहीं खोजे जो बिना ऑक्सीजन के जी सकते हों और प्रजनन कर सकते हों। उन्होंने कहा कि पृथ्वी के समुद्रों के इन कठोर परिवेशों में जाकर और अध्ययन करने की जरूरत है। इन जीवों की खोज के बाद लगता है कि अन्य ग्रहों पर भी किसी रूप में जीवन हो सकता है जहां का वातावरण हमारी पृथ्वी से भिन्न है।

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उत्तम सन्तान प्राप्ति के लिए

Posted on 02 July 2010 by admin

किसी भी देश का भविष्य बालकों पर निर्भर करता है | जो दम्पति सुविचारी, सदाचारी एवं पवित्रात्मा हैं तथा शास्त्रोक्त नियमों के पालन में तत्पर हैं ऐसे दम्पति के घर में दिव्य आत्माएं जन्म लेती हैं | ऐसी सन्तानों में बचपन से ही सुसंस्कार, सदगुणों के प्रति आकर्षण एवं दिव्यता देखी जाती है |वर्त्तमान में देश के सामने बालकों में संस्कारों की कमी यह एक प्रमुख समस्या है, जिससे उबरने ले हेतु सन्तानप्राप्ति के इच्छुक दम्पति को ब्रह्मज्ञानी सन्तों-महापुरुषों के दर्शन-सत्संग का लाभ लेकर स्वयं सुविचारी, सदाचारी बनना चाहिए, साथ ही उत्तम सन्तानप्राप्ति के नियमों को भी जान लेना चाहिए|

वास्तव में पत्थर, पानी, खनिज देश की सच्ची सम्पत्ति नहीं हैं अपितु ॠषि-परम्परा के पवित्र संस्कारों से सम्पन्न तेजस्वी बालक ही देश की सच्ची सम्पत्ति हैं लेकिन मनुष्य धन-सम्पत्ति बढ़ाने में जितना ध्यान देता है उतना सन्तान पैदा करने में नहीं देता | यदि शास्त्रोक्त रीति से शुभ मुहूर्त में गर्भाधान कर सन्तानप्राप्ति की जाय तो वह परिवार व देश का नाम रोशन करनेवाली सिद्ध होगी |

उत्त्म सन्तानप्राप्ति के लिए सर्वप्रथम पत-पत्नी का तन-मन स्वस्थ होना चाहिए | वर्ष में केवल एक ही बार सन्तानोत्पत्ति हेतु समागम करना हितकारी है |

हमारे पुराने आयुर्वेद ग्रन्थों में पुत्र-पुत्री प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रन्थों में भी इस बारे में जानकारी मिलती है।

यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपकी सुविधा के लिए हम यहां माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
पांचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
पन्द्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।

व्यास मुनि ने इन्हीं सूत्रों के आधार पर पर अम्बिका, अम्बालिका तथा दासी के नियोग (समागम) किया जिससे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर का जन्म हुआ। महर्षि मनु तथा व्यास मुनि के उपरोक्त सूत्रों की पुष्टि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अपनी पुस्तक संस्कार विधि में स्पष्ट रूप से कर दी है। प्राचीनकाल के महान चिकित्सक वाग्भट तथा भावमिश्र ने महर्षि मनु के उपरोक्त कथन की पुष्टि पूर्णरूप से की है।´ दो हजार वर्ष पूर्व के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं सर्जन सुश्रुत ने अपनी पुस्तक सुश्रुत संहिता में स्पष्ट लिखा है कि मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
2500 वर्ष पूर्व लिखित चरक संहिता में लिखा हुआ है कि भगवान अत्रिकुमार के कथनानुसार स्त्री में रज की सबलता से पुत्री तथा पुरुष में वीर्य की सबलता से पुत्र पैदा होता है।

-प्राचीन संस्कृत पुस्तक सर्वोदय में लिखा है कि गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा।
-यूनान के प्रसिद्ध चिकित्सक तथा महान दार्शनिक अरस्तु का कथन है कि पुरुष और स्त्री दोनों के दाहिने अण्डकोष से लड़का तथा बाएं से लड़की का जन्म होता है।
-चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रियाए पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है।


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महिलाओं को मिलेगी आज़ादी कांटे वाला फीमेल कॉन्डोम रोकेगा बलात्कार

Posted on 24 June 2010 by admin

aaसाउथ अफ्रीका की डॉक्टर सॉनेट एहलर्स ने ऐसा फीमेल कॉन्डोम डेवलप किया है जिसके इस्तेमाल से बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों पर रोक लग सकती है। बलात्कार की कोशिश करने वाले पुरुष को अपनी इस हरकत की सजा मिलेगी। बलात्कार की कोशिश करने के बाद उसे दिन में तारे नज़र आने लगेंगे और उसके गुप्तांग में बेहद तेज दर्द होगा। पुरूष को ज़माने भर की जग-हसांई मिलेगी सो अलग से।

‘रेप एक्स’ (यानि बलात्कार पर कुल्हाड़ी) नाम के इस कॉन्डम की खासियत यह है कि इसमें कांटों की एक कतार जैसी लगी होती है। अगर कोई पुरुष बलात्कार करने की करता है और महिला की योनि में अपना गुप्तांग प्रविष्ट करवाता है तो इस अनोखे कॉन्डोम पर लगे दांतों जैसे कांटे उसके पेनिस को जकड़ लेते हैं। पुरूष अपने पेनिस को निकालने की जितनी ज्यादा कोशिश करेगा, इन कांटों की पेनिस पर पकड़ और भी ज्यादा गहरी होती जाएगी। बलात्कारी पुरूष ना तो टॉयलेट जा सकेगा और न ही चल-फिर पाएगा।

ये चमत्कारी कॉन्डोम ‘रेप एक्स’ सिर्फ डॉक्टर की मदद से ही निकलवाया जा सकेगा। डॉक्टर एहलर्स ने बताया कि चूंकि ये कांटे घाव नहीं बनाते इसलिए पीड़ित महिला को हमलावर के शरीर से निकलने वाले किसी भी प्रकार के द्रव के संपर्क में आने का खतरा नहीं रहता है।

इस कॉन्डम को 20 बरसों के रिसर्च के बाद बनाया गया है। फिलहाल ये ट्रायल पीरियड में है लेकिन जल्द ही यह लगभग 100 रुपये में मिलने लगेगा। यह उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें जोखिम भरी जगहों  पर जाना हो।

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शादी अनुदान योजना में आवंटित धनराशि का शत-प्रतिशत वितरण 30 जून तक

Posted on 11 June 2010 by admin

शैक्षणिक संस्थानों के मास्टर डाटा 15 जुलाई तक तैयार करें

मान्यता प्राप्त मदरसों की सूची एक सप्ताह में उपलब्ध कराये

अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के महा प्रबन्धक लेखा श्री मसउद अख्तर को प्रतिकूल प्रविष्टी
-अनीस अहमद खॉं
लखनऊ -   उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) श्री अनीस अहमद खॉं उर्फ फूल बाबू ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अल्पसंख्यक छात्र/छात्राओं की छात्रवृत्ति का वितरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर कराये। उन्होंने कहा कि शादी अनुदान की धनराशि का वितरण भी 30 जून तक कराया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र/छात्राओं के शैक्षिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।

अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्य मन्त्री (स्वतन्त्र प्रभार) श्री अनीस अहमद खॉं उर्फ फूल बाबू आज यहां तिलक हाल में विभागीय कार्यों की समीक्षा के दौरान यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र/छात्राओं में शिक्षा के प्रति रूझहान बढ़ा है। इसका परिणाम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व दशम छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत वर्ष 2008-09 में 30 लाख छात्रों को लाभािन्वत किया गया था जो वर्ष 2009-10 में बढ़कर 34 लाख छात्र लाभािन्वत हुए इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के अन्तर्गत वर्ष 2008-09 में 1.19 लाख छात्र/छा़त्राओं को लाभािन्वत किया था जो वर्ष 2009-10 में बढ़कर 1.44 लाख हो गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया निर्धारित कर दी गई है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार छात्रवृत्ति वितरण की तैयारी पूर्व से ही कर लें। उन्होंने बताया कि समस्त शैक्षणिक संस्थानों में 31 अक्टूबर तक प्रवेश के लिये जायेंगे और छात्रवृत्ति हेतु मांग पत्र वर्ष में दो बार में प्रस्तुत किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष से उत्तीर्ण होकर अगले कक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्र/छात्राओं के मांग पत्र 15 अगस्त तक तथा नये छात्र/छात्राओं के प्रवेश होने पर उनके मांग पत्र 30 नवम्बर तक ही लिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित तिथियों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाय। अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर लें कि शैक्षणिक संस्थाओं के मास्टर डाटा 15 जुलाई तक बना लिया जाये ताकि कोई पात्र संस्था छूटने न पाये तथा कोई गलत संस्था जो चालू नहीं हैं वह मास्टर डाटा में सम्मिलित न होने पाये।

श्री खान ने कहा कि प्रदेश में मान्यता प्राप्त मदरसों का विवरण रखने के उद्देश्य से निर्धारित प्रारूप पर एक सप्ताह में सूचना निदेशालय को प्रेषित कर दिया जाये, इसमें किसी प्रकार की शिथिलता बर्दास्त नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्य समुदाय के गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों की पुत्रियों की शादी हेतु अनुदान योजना के अन्तर्गत 6 करोड़ रुपये आवंटित की गई है। जिसमें मात्र 01 करोड़ रुपये व्यय किये गये गये हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर शादियॉं मई-जून में ही होती हैं। उन्हें समय से धनराशि मिल सके यही योजना का मुख्य उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि आवंटित धनराशि प्रत्येक दशा में पात्र परिवार के पुत्रियों को 30 जून तक उपलब्ध करा दिये जाये।  अल्पसंख्यक वर्ग के युवक/युवतियों को नगरी क्षेत्रों में स्वरोजगार स्थापित कराने हेतु उ0प्र0 अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम द्वारा संचालित “मान्यवर श्री काशी राम जी अल्पसंख्यक रोजगार योजना´´ की समीक्षा में प्रगति ठीक न होने पर महाप्रबन्धक लेखा श्री मसउद अख्तर को प्रतिकूल प्रविष्टी अंकित करने के निर्देश दिये।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक एवं वक्फ श्री बी.एम.मीना एवं विशेष सचिव श्री विमल चन्द्र श्रीवास्तव, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण श्री शहाबुद्दीन, समस्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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पानी पीने नदी पहुंचे निरीह जानवर फिर हुए शिकार

Posted on 13 May 2010 by admin

ग्रामीणों ने लगाया विभागीय लोगों पर मिली भगत का आरोप

जानवर चराने गए चरवाहों ने 15 सांभर और 2 चीतलों के मरने की दी जानकारी

गर्मी के मारे प्यास से व्याकुल हुए निरीह जंगली जानवरों की मजबूरी है कि उन्हें पानी पीने के लिए जंगलों में मौजूद चोहड़ों और नदी के दहारों पर में आना पड़ता है। पाठा के जंगलों में विचरण करने वाले लुप्तप्राय हो रहे बेजुबान जानवर शिकारियों का शिकर बन जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकारियों की कारस्तानी की जानकारी विभागीय लोगों की होती है तो वे उनसे मिलीभगत कर मामले को दबा देते हैं।

मानिकपुर विकास खण्ड क्षेत्र जनपद चित्रकूट के निही चिरैया ग्राम पंचायत के मजरे कोड़रिया कोलान निवासी ग्रामीणों ने बताया कि उनके यहां के कुछ चरवाहे बुधवार की सुबह जंगलों में अपने पालतू जानवर चराने गए थे। जहां उन्होंने बरदहा नदी दहार के पास रानीपुर वन्यजीव बिहार के 17 लुप्तप्राय बेशकीमती जानवर मृत अवस्था में पड़े देखे तो उनके होश उड़ गए। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार की शाम अपने घर लौटे चरवाहों ने नदी के दहार के पास 15 सांभर व 2 चीतल मरे पाए जाने की खबर उन लोगों ने अन्य ग्रामीणों को दी। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। लोगों ने तत्काल इसकी जानकारी बीट प्रभारी विजयपाल को दी। लेकिन बीट प्रभारी बुधवार की देरशाम तक घटना स्थल नहीं पहुंचे और अगले दिन गुरुवार को अपने कुछ साथियों के कोड़रिया कोलान पहुंचे और वहां रहने वाले कैरा व कुरीवा दो आदिवासियों को पकड़ कर अपने साथ लेकर जंगलों के बीच स्थित बरदहा नदी दहार पहुंचे। उनके साथ गांव के अन्य ग्रामीण भी मौके पर गए।

ग्रामीणों ने बताया कि वहां कई घंटे रुकने के बाद वे दोनो लोगों को लेकर वापस गांव चले आए। जिन्हें देर शाम छोड़ दिया। वही दूसरी ओर जानवरों के शवों को घने जंगलों में फिकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वनकर्मियों की लापरवाही के चलते ही पाठा के जंगलों में इस तरह की घटनाएं घट रही हैं।

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं

पाठा क्षेत्र के वन्यजीवन बिहार से लगे ग्रामीण इलाकों के ग्रामीण बताते हैं कि भीषण गर्मी में पानी की कमी का परिणाम बेजुबान जंगली जानवरों को भुगतना पड़ रहा है। जंगल में मौजूद पोखरों व तालाबों व चोहड़ों का पानी सूख जाने के कारण वन्यजीव बिहार में विचरण करने वाले सांभर, चीतल, हिरन आदि बेशकीमती जानवर पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कभी-कभी रात के समय तो ये जानवर पानी की तलाश में गांवों के भीतर तक आ जाते हैं। जिनका फायदा इलाके में सक्रिय अवैध शिकारी उठाते हुए उन्हें अपना निशाना बनाते हैं और इन्हें मार कर अच्छी खासी कमाई करते हैं। ग्रामीणो का आरोप है कि उनकी इस कारस्तानी में मिली भगत विभागीय लोगों की भी रहती है। जिसका खामियाजा बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर भरना पड़ता है। वे कहते हैं कि बुधवार को घटी घटना कोई नई नही है। इसके पहले भी बीते अप्रैल माह के अन्तिम सप्ताह में सकरौहां गांव के पयासी पुरवा स्थित एक जंगली तालाब के किनारे कुछ जंगली जानवरों सहित ग्रामीणों के पालतू पशु इन शिकारियों की करतूतों का शिकार हुए थे। जब इस सम्बंध में विभाग के उच्चाधिकारी से बात की गई थी तो उन्होंने कहा था कि मामले की जांच कर कार्रवाई करेंगे। अगले दिन ग्रामीणों ने बताया था कि विभाग के कुछ लोग आए थे और पशुपालकों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन देते हुए सादे कागजों में उनके हस्ताक्षर करवा वापस चले गए थे। लेकिन उसके बाद से न तो उन्हें कोई मुआवजा ही मिला और न ही  विभागीय लोगों ने जानवरो की हत्या के कारणों का ही पता किया था। ग्रामीण कहते हैं कि यदि पहले वाली घटना में ही विभागीय लोग सचेत हो जाते तो दुबारा फिर बेजुबानों को अवैध शिकारियों का शिकार न बनना पड़ता।

धीरेन्द्र मिश्रा

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अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र

Posted on 08 May 2010 by admin

इस लेख को पढ़ने के बाद मुझे यकीन है कि कोई भी महिला कभी भूण हत्या नही करेगी

भ्रूण हत्या पर कटाक्ष करते हुए अजन्मी बेटी का मां के नाम पत्र

मैं खुश हूं और भगवान से प्रार्थना करती हूं कि आप भी सुखी रहें। यह पत्र मैं इसलिये लिख रही हूं क्योंकि मैने एक सनसनीखेज खबर सुनी है जिसे सुनकर सिर से पांव तक कांप उठी।

स्नेहदात्री मां! आपको मेरे कन्या होने का पता चल गया है और आप मुझ मासूम को जन्म लेने से से रोकने जा रही हैं। यह सुनकर मुझे तो यकी नही नहीं हुआ। भला मेरी प्यारीप्यारी कोमल ह्रदया मां ऐसा कैसे कर सकती है कोख में पल रही अपनी लाडली के सुकुमार शरीर नश्तरों की चुभन एक मां कैसे सह सकती है?

पुण्यशीला मां! बस, आप एक बार कह दीजिये के यह जो कुछ मैने सुना है वह सब झूठ है। दरअसल यह सब सुनकर मै दहल सी गई हूं। मेरे तो हाथ भी इतने कोमल है कि इनसे डाक्टर की क्लीनिक की तरफ जाते वक्त आपकी चुन्नी ज़ोर से नहीं खींच सकती ताकि आपको रोक लूं। मेरी बांह भी इतनी पतली और कमजोर है कि इन्हें आपके गले में डालकर लिपट भी नहीं सकती।

मधुमय मां! मुझे मारने के लिये आप जो दवा लेना चाहती हैं वह मेरे नन्हें से शरीर को बहुत कष्ट देंगी। स्नेहमयी मां! उससे मुझे दर्द होगा। आप तो देख भी नहीं पायेंगी कि वह दवाई आपके पेट के अन्दर मुझे कितनी बेरहमी से मार डालेगी। डाक्टर की हथौड़ी कितनी क्रूरता से मेरी कोमल खोपड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर डालेगी। उसकी कैंची मेरे नाज़ुक-नाज़ुक हाथ पैरों को काट डालेगी। अगर आप यह दृश्य देखती तो ऐसा करने को कभी सोचती भी नहीं।

सुखमयी मां! मुझे बचाओ कृपा करो, दयामयी मां! मुझे बचाओ वह दवा मुझे आपके शरीर से इस तरह फिसला देगी जैसे गीले हाथों से साबुक की टिकिया फिसलती है। भगवान के लिये मां। ऐसा मत करना। मैं यह पत्र इसालिये लिख रही हूं क्योंकि अभी तो मेरी आवाज़ भी नहीं निकलती। कहूं भी तो किससे और कैसे? मुझे जन्म लेने की बड़ी ललक है मां! अभी तो आपके आंगन में मुझे नन्हें-नन्हें पैंरों से छम-छम नाचना है, आपकी ममता भरी गोद में खेलना है।
चिन्ता नहीं करों मां! मैं आपका खख्र नहीं ब़ाऊंगी। मत लेकर देना मुझे पायल, मैं दीदी की छोटी पड़ गई पायल पहन लूंगीं। भैया के छोटे पड़ गये कपड़ों से तन ढ़क लूंगीए मां! बस एक बार -एक बार मुझे इस कोख से निकालकर चांदतारों से भरे आपके आसमान तले जीने का मौका तो दीजिये। मुझे भगवान की मंगलमय सृष्टि का विलास तो देखने दीजिये।

मैं आपकी बेटी हूं , आपकी लाडली शहज़ादी। मुझे अपने घर में आने दो मां! बेटा होता तो आप पाल लेती फिर मुझमें क्या बुराई है? क्या आप दहेज के डर से मुझे नहीं चाहती, ना्-ना आप दहेज से मत डरना यह सब कुछ भुलावा है। कुछ कोशिश आप करना, कुछ मैं करुंगी। बड़ी होकर मैं अपने पैरों में खड़ी हो जाऊंगी,फिर दहेज क्या चीज़ है? इसका भय तो फुर्र हो जायेगा। देखना, मेरे हाथों पर भी मेंहदी रचेगी, शगुनकारी डोली निकलेगी और आपके आंगन से चिड़िया बनकर मैं उड़ जाऊंगी। आज अभी से मुझे मत उड़ाइये। मैं आपका प्यार चाहती हूं।

एक बेटे के लिये कई मासूम बेटियों की बलि देना कहां तक उचित है? आखिर यह महापाप भी तो आप और आपके चहेते बेटे के सिर पर ही चढ़ेगा। ना्-ना ऐसा कभी मत होने देना, मां…..मेरी प्यारी मां। अब कृपा करके मुझे जन्म दे दीजिये। मुझे मत मारिये, अपनी बगल की डाल पर फूल बनकर खिल जाने दीजिये।

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Zia-ul Haq

+919935019243

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""काम की गारंटी है" हर गाव की गारंटी है"
                                         हर महिला पुरुष को दाम की गारंटी है""
महात्मा गाँधी राष्टीय गामीणरोजगार अधिनियम
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