Posted on 08 September 2010 by admin

चित्रकूट- भदैई अमावस्या के मौके पर चित्रकूट धर्म नगरी पर श्रद्धालुओ का शैलाब उमड़ पड़ा । लगभग 5 लाख लोगों ने रिमझिम वारिश मे मंदाकिनी मे स्नान कर भगवान कामतानाथ जी की परिक्रमा लगाई। प्रशासन के सख्त निर्देशो के बाद भी श्रद्धालुओ को कठिनाईओ का सामना करना पड़ा।

Posted on 07 September 2010 by admin
भविष्य में आन लाइन पेंशन वितरण किया जायेगा
कई जनपदों की धीमी प्रगति पर कड़ी फटकार
लखनऊ - विकलांग पेंशन वितरण के लिए कम्प्यूटराइज्ड बैंक शाखा का आई0एफ0एस0सी0 कोड नं0 एक सप्ताह के अन्दर शासन में उपलब्ध कराया जाय। भविष्य में पेंशन मद में धनराशि का आवंटन जनपदवार निर्धारित लक्ष्य की संख्या के अनुरूप न करके जनपद में उपलब्ध स्वीकृत विकलांग पेंशनरों के नाम के अनुरूप किया जायेगा।
यह निर्देश आज बापू भवन सभागार में विकलांग कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव मुख्यमन्त्री एवं विकलांग कल्याण श्री राज प्रताप सिंह ने दिये। उन्होंने पूर्ण कम्प्यूटराइजेशन के कार्य में ढ़िलाई बरतने पर एन.आई.सी. के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
प्रमुख सचिव ने विकलांग कृत्रिम अंग अनुदान में ललितपुर, जालौन, बान्दा, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, औरैया, श्रावस्ती, छत्रपति शाहू जी महराज नगर की धीमी प्रगति पर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये। उन्होंने शादी-विवाह प्रोत्साहन योजना में महोबा मेरठ गोरखपुर, महाराजगंज, कन्नौज, बलरामपुर की असन्तोषजनक प्रगति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में विशेष सचिव श्री रामराज सिंह, निदेशक श्री अरविन्द कुमार द्विवेदी मुख्यालय के समस्त उप निदेशकों के साथ ही समस्त मण्डलीय उप निदेशक तथा जिला विकलांग कल्याण अधिकारी उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 02 September 2010 by admin
झांसी- पटरी पर यदि खतरा है या आगे कोई गाड़ी खड़ी हुई है और सिग्नल लाल है और चालक लापरवाह तो भी डरने की जरूरत नहीं। ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हो ही नहीं सकती क्योंकि वह खतरे से कई मीटर दूरी पर अपने आप रुक जाएगी।
दुर्घटना रहित सुरक्षित यात्रा को सम्भव बनाया है टीपीडब्लूएस अर्थात ट्रेन प्रोटेक्शन एण्ड वार्निग सिस्टम ने। इस प्रणाली को प्रयोग के तौर पर अभी ताज एक्सप्रेस व महाकौशल एक्सप्रेस के इजनों में लगाया गया है। दोनों ट्रेनों में इसका परीक्षण आगरा-मथुरा स्टेशनों के बीच किया जा रहा है। इस प्रणाली का एक सप्ताह का प्रशिक्षण झाँसी में प्रणाली बनाने वाली कम्पनी के इजीनियरों ने शताब्दी, मेल ट्रेन चालकों, लोको इस्पेक्टरों व संरक्षा से जुड़े लोगों को दिया।
बताया गया है कि जिस इजन में यह प्रणाली लगी होगी उसके रूट की रेल लाइन व सिग्नल की रिले को इस सिस्टम से जोड़ा गया है। यदि ट्रेन का चालक लाल सिग्नल के बावजूद गाड़ी को नहीं रोकता है तो इजन में लगा सिस्टम 600 मीटर दूर से ही चेतावनी देना शुरू कर देगा। चालक के फिर भी सतर्क नहीं होने की स्थिति में खतरे से 30 मीटर की दूरी पर ही इमर्जेन्सी ब्रेकिंग प्रणाली से रफ्तार पर ब्रेक लगा कर ट्रेन को रोक देगा। इसके बाद तभी गाड़ी आगे बढ़ सकेगी जब चालक इजन में लगे सिस्टम को पुन: चालू करेगा।
यही स्थिति कॉशन आर्डर अर्थात निश्चित स्थान पर ट्रेन के इजन की निर्धारित से कम गति पर संचालन के समय पर रहेगी। यदि चालक कॉशन आर्डर का पालन नहीं कर लापरवाही से ट्रेन की अपनी गति से निकालने की कोशिश करेगा तो वार्निग के बाद उसकी रफ्तार स्वत: नियन्त्रित हो जाएगी। इतना ही नहीं इजन के आगे के खतरे की जानकारी उपकरण के साथ लगी स्क्रीन पर भी स्पष्ट होगी।
यह उपकरण पाँच-पाँच मिनट में विशेष संकेत देकर चालक को सतर्क करता रहेगा। चालक द्वारा संकेत का जवाब नहीं देने की प्रतिक्रिया स्वरूप उपकरण इजन को रोक देगा। इतना ही नहीं चालक अपनी लापरवाही को छिपा नहीं पाएगा। उपकरण चालक की लापरवाही व गल्तियों को उजागर कर देगा। फिलहाल इस उपकरण के झाँसी तक काम करने की बेसब्री से प्रतीक्षा है।
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Vikas Sharma
Editor
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Posted on 01 September 2010 by admin
लक्ष्य से कम सिंचाई दर्ज कराने वाले प्रखण्डों के अभियन्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही होगी
प्रदेश के सिंचाई मन्त्री श्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को निर्धारित समय के अन्तर्गत पूरा किया जाय, जिससे उनका लाभ किसानों को मिल सके। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने हेतु पुनरीक्षित आगणन भेजने की परम्परा को समाप्त किया जाय। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य से कम सींच अधिकांश क्षेत्रों में रही है। उन्होंने कहा कि कम सींच दर्ज करने वाले प्रखण्डों को चििन्हत करके वहॉ के अभियन्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।
श्री सिद्दीकी आज यहॉ बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियन्ताओं, अधीक्षण अभियन्ताओं तथा अधीशासी अभियन्ताओं के साथ बैठक करके बुन्देलखण्ड क्षेत्र की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में उन्होंने निर्देश दिये कि वाणसागर नहर परियोजना की फीडर चैनल माह अक्टूबर 2010 तक पूर्ण करके आगामी रबी फसल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाय। इन परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु ए0आई0बी0पी0 के अन्तर्गत भारत सरकार से मिलने वाली सहायता धनराशि को शीघ्र प्राप्त करने के लिए उन्होंने मुख्य अभियन्ता को निर्देश दिये। बैठक में अवगत कराया गया कि अन्तर्राज्यीय कनहर, सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार एवं झारखण्ड राज्यों से अनापत्ति प्राप्त हो चुकी है तथा यह योजना भारत सरकार में विचाराधीन है। उन्होंने निर्देश दिये कि योजना भारत सरकार से अनुमोदित कराने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाय। तदोपरान्त इस वर्ष बजट आवंटन के सापेक्ष इस परियोजना पर कार्य कराये जायें।
श्री सिद्दीकी ने यह निदेेZश दिये कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में इस वर्ष पूर्ण कराये गये लखेरी, सिजार, कुरार एवं रसिन बांध परियोजनाओं में जल संग्रह सुनिश्चित किया जाय तथा आगामी रबी फसल में परियोजनाओं से सिंचाई सुनिश्चित की जाय। यमुना नदी पर औगासी पम्प नहर परियोजना के विषय में उन्होंने निर्देश दिये कि इसका निर्माण कार्य मार्च 2011 तक प्रत्येक दशा में पूर्ण किया जाय। यमुना नदी पर ही निर्माणाधीन चिल्लीमल लिफ्ट परियोजना के कार्य पर असन्तोष व्यक्त करते हुए उन्होंने निर्देश दिये
कि इसका निर्माण कार्य तत्काल प्रारम्भ किया जाय तथा मार्च 2012 तक समस्त निर्माण कार्य पूर्ण कर लिये जायें।
जनपद बान्दा में निर्माणाधीन बाढ़ परियोजनाओं की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सिंचाई मन्त्री ने निर्देश दिये कि इस वर्ष लक्षित कार्य प्रत्येक दशा में पूर्ण किये जायेंं। सिंचाई निर्माण खण्ड द्वितीय झांसी के अन्तर्गत अधीशाषी अभियन्ता के द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिये।
श्री सिद्दीकी ने बुन्देलखण्ड में निर्माणाधीन लहचूरा बॉध, कचनौदा बॉध, अर्जुन सहायक परियोजना, पहाडी बॉध, इटारी बॉध, रोहिणी बॉध, भौरठ बॉध, जमरार बॉध, पहुंज बाध की परियोजनाओं की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये कि इनके कार्य में तेजी लाई जाय। सिंचाई मन्त्री ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र में मनरेगा की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इसके अन्तर्गत अनुरक्षण तथा मूल निर्माण कार्य कराये जायें तथा इस सम्बन्ध में जिला स्तर पर समन्वय करके लक्ष्य के अनुरूप प्रगति प्राप्त की जाय। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं में लक्ष्य से कम की जा रही सींच पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त किया तथा यह निर्देश दिये कि इस वर्ष बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खरीफ की फसल में सिंचाई निर्धारित लक्ष्य 1, 35, 000 हेक्टेयर से किसी भी दशा में कम नहीं होनी चाहिए। सिंचाई में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध उन्होंने कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव सिंचाई श्री किशन सिंह अटौरिया, प्रमुख अभियन्ता श्री देवेन्द्र मोहन तथा सुरेश तिवारी सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं मुख्य अभियन्ता उपस्थित थे।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 01 September 2010 by admin
सेमिनार हेतु राज्य सरकार द्वारा साढ़े आठ लाख रूपये स्वीकृत
राज्य सरकार ने राज्य के छ: विश्वविद्यालयों में अकादमिक गतिविधियॉ बढ़ाने के लिए 10 सेमिनारों के आयोजन किये जाने हेतु साढ़े आठ लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। विश्वविद्यालयों को इसी वर्ष सेमिनारों का आयोजन करना होगा।
यह जानकारी देते हुए विशेष सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती अनीता मिश्रा ने बताया कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी, लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय तथा डा0 राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय लखनऊ में इस वित्तीय वर्ष में 10 उच्च स्तरीय सेमिनारों का आयोजन कराया जायेगा।
विशेष सचिव ने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में समाज शास्त्र विभाग द्वारा कन्टेम्पोरेरी ट्रेन्डस ऑफ फेमिली इन इण्डिया, कला संकाय विभाग द्वारा वर्कशाप ऑन रिसर्च मैथोडोलॉजी, डा0 राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में रिलेवेन्स ऑफ इण्डियन पेनल कोड़ इन कन्ट्रोलिंग एण्ड काम्बैटिंग क्राइम इन मॉडर्न एज, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झांसी में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा ग्लोबल फाइनेिन्सयल क्राइसिस : इश्यूज, कन्सन्र्स एण्ड चैलेन्जेज फार इण्डिया एण्ड इमरजिंग मार्केट इकोनोमीज, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में एडल्ट कन्टीन्यूइंग एजुकेशन एण्ड एक्सटेन्सन विभाग द्वारा इनवारामेन्टल कन्जेरवेशन एण्ड सोशल अवेयरनेस तथा फार्मेसी विभाग द्वारा करेन्ट ट्रेन्डस इन हर्बल हेल्थ केयर, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुस्तकालय विभाग द्वारा नेशनल कान्फ्रेन्स ऑफ द इण्डियन एसोसिऐशन ऑफ स्पेशल लाइब्रेरीज एण्ड इन्फारमेशन सेन्टर्स, भूगोल विभाग द्वारा पापुलेशन ग्रोथ एण्ड रीजनल डेवलेपमेन्ट इन उत्तर प्रदेश तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अप्लाइड इकोनोमिक्स विभाग द्वारा सेमिनार ऑन इमरजिंग ट्रेन्डस इन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट इन इण्डिया तथा डिफेन्स स्टडीज विभाग द्वारा न्यूक्लीयर टेरोरिज्म एण्ड वल्र्ड सिक्योरिटी विषयों पर सेमिनार कराये जाने की राजाज्ञा जारी की गई है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 29 August 2010 by admin
महिलाओं को बराबर का प्रतिनिधित्व
लखनऊ - उत्तर प्रदेश सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना अन्तर्गत 10 लाख परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अत्यन्त वंचित वर्ग के पांच लाख परिवारों व 5 लाख महिला जॉबकार्ड धारकों अर्थात 10 लाख वंचितों को चिन्हित करते हुए इन्हें 100 दिन का रोजगार वित्तीय वर्ष 2010-11 में उपलब्ध कराना है।
यह जानकारी ग्राम्य विकास, सचिव श्री मनोज कुमार सिंह ने आज यहां दी। उन्होंने बताया कि वंचित वर्ग के लोग न केवल सबसे अधिक अशिक्षित हैं वरन् इनकी मुख्य सम्पत्ति भी प्राय: इनकी श्रम शक्ति ही है। उन्होंने बताया कि एक रणनीति बनाकर मनरेगा के तहत इन अत्यन्त वंचित वर्ग के परिवारों को लक्षित किया जाये तो योजना का सीधा लाभ निर्धनतम तबके के परिवारों को पहुंच सकता है।
श्री सिंह ने बताया कि मनरेगा के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्यांचल के जनपदों को छोड़कर प्रदेश के अन्य जनपदों में योजना के तहत महिलाओं की भागेदारी निर्धारित 33 प्रतिशत से बहुत कम है। इस कारण प्रदेश के 26 जनपदों में यह प्रस्तावित किया गया है कि कम से कम 5 लाख महिला जॉबकार्ड धारकों को चिन्हित कर उन्हें योजना के अन्तर्गत काम पर आने के लिए प्रोत्साहित किया जाय।
ग्राम्य विकास सचिव ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए सर्वप्रथम लक्षित जनपदों में वंचित परिवारों को चिन्हित कर इनका कम्प्यूटराइज्ड डाटावेस तैयार किया जायेगा। यह कार्य नोडल एजेन्सी तथा इसके द्वारा चयनित सिविल सोसाइटी अर्गनाइजेशन के द्वारा किया जायेगा। उन्होंने बताया कि लक्षित परिवारों को ग्राम पंचायतवार चिन्हित करने के उपरान्त सिविल सोसाइटी अर्गनाइजेशन द्वारा इन्हें प्रोत्साहित कर मनरेगा के अन्तर्गत समूह गठित कर नियत प्रक्रिया के अनुसार काम के लिए आवेदन कराया जायेगा।
श्री सिंह ने बताया कि नोडल एजेन्सी एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था होनी चाहिए और इसका चयन एक समीति द्वारा किया जायेगा। चयन समीति सचिव, ग्राम्य विकास की अध्यक्षता में गठित की गई है। आयुक्त ग्राम्य विकास, निदेशक गिरि इंस्टीट्यूट लखनऊ, निदेशक अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान चित्रकूट तथा उपायुक्त मनरेगा समीति के सदस्य हैं। अपर आयुक्त मनरेगा को समीति का सदस्य सचिव बनाया गया है। श्री सिंह ने बताया कि इस पूरे अभियान और रणनीति के तहत की जा रही कार्यवाही और इसके प्रभाव का मूल्यांकन थर्ड पार्टी द्वारा कराया जायेगा।
श्री सिंह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण रणनीति के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों/जिला कार्यक्रम समन्वयकों और मुख्य विकास अधिकारियों को भेज दिये गये हैं।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 29 August 2010 by admin
झाँसी - दादा ध्यानचंद जिनका जन्मदिन (29 अगस्त) पूरा देश खेल दिवस के रूप में मनाता है ध्यानचंद ने तीन ओलंपिक खेलों [1928], [1932] और [1936] में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया। आंकड़ों से भी पता चलता है कि वह वास्तव में हाकी के जादूगर थे। भारत ने 1932 में 37 मैच में 338 गोल किए जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे। ध्यानचंद की अगुवाई में 1947 में भारत की युवा टीम ने पूर्वी अफ्रीका का दौरा किया। असल में तब जो न्यौता दिया गया था उसमें लिखा गया था कि यदि ध्यानचंद नहीं तो कोई टीम नहीं। ध्यानचंद तब 42 साल के थे और उन्होंने 22 मैच में 61 गोल दागे। उसी जादूगर की सबसे प्रिय ‘हॉकी’ आज कितनी दयनीय अवस्था में पहुँच गई है… ध्यानचंद की कर्म स्थली झाँसी में हर वर्ष ध्यानचंद की समाधी स्थल हीरोज फिल्ड पर हाकी एक वार फिर जिन्दा हो जाती है इस दिन झाँसी में मेराथन दोड़ का सुबह आयोजन किया जाता है और जगह जगह स्कूल कालेजो में खेलो का आयोजन किया जाता है……. वही ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद देश में होकी के गिरते स्थर के लिए चिंतित है उनका कहना है की होकी के स्थर हो सुधारना है तो खिलाडियों को किरकेट की तर्ज पर शुभिधाओ की अबशाकता है
बताने की जरूरत नहीं है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, लेकिन इस खेल के साथ 14 सालों तक जो खिलवाड़ हुआ , उसी का नतीजा रहा कि 8 स्वर्ण, 1 रजत और2 काँस्य ओलिम्पिक पदक जीतने वाला भारत 80 साल के ओलिम्पिक इतिहास में पहली मर्तबा बाहर था।
दादा ध्यानचंद हॉकी के जादूगर थे और अपने काल में ऐसा नाम कमाया कि ‘क्रिकेट के संत’ माने जाने वाले डॉन ब्रैडमैन भी उनके कायल हो गए थे। हॉकी को उन्होंने भरपूर जीया और देश के लिए तीन ओलिम्पिक (1928 एम्सटर्डम), 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन) खेलें और इन तीनों में वे ओलिम्पिक स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा बने। यदि दुनिया द्वितीय विश्वयुद्ध में नहीं झोंकी जाती तो दादा ध्यानचंद के गले में और स्वर्ण पदक लटकते रहते।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चलाने वालों को कुछ सद्बुद्धि आई और उन्होंने दादा ध्यानचंद को हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा खेल नायक मानकर हर साल 29 अगस्त को देश में ‘खेल दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया। बीते कई सालों से इस दिन पूरे देश में हॉकी यकायक जिंदा होती और अगले दिन फिर से मर जाती है। लकड़ी का यह जरा-सा डंडा (हॉकी स्टिक) सिर्फ उन हाथों तक सीमित रहता है, जो नियमित रूप से इसे गले से लगाए हुए हैं।
हिन्दुस्तान की हॉकी की दुर्दशा देखकर हर भारतीय का दु:खी होना लाजिमी है। जो लोग क्रिकेट को पागलों की तरह प्यार करते हैं, उनके दिल में भी राष्ट्रीय खेल के प्रति आस्था है लेकिन हॉकी पर से विश्वास इसलिए कम हो गया, क्योंकि बीते सालों में ऐसी लगातार कामयाबियाँ नहीं मिली, जिस तरह क्रिकेट में मिली।
बेशक यूरोपीय देश बहुमत के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने तरीके से नियम बनाते चले गए और मैदान पर खेली जाने वाली एशियाई शैली की हॉकी को ‘हिट एंड रन’ वाली शैली में तब्दील करके इसे नाइलोन की घास वाले मैदान तक ले गए, जहाँ घास गर्म होने पर उसे पानी की फुहारों से ठंडा किया जाने लगा। आधुनिक हॉकी एशियाई हॉकी को पूरी तरह लील गई।
जब नियम बनाए जा रहे थे, तब भारत, पाकिस्तान, कोरिया, जापान जैसे ताकतवर एशियाई देशों ने विरोध नहीं किया। एक गलती यह भी है कि यदि नए नियम और एस्ट्रोटर्फ आ गए थे तो क्यों नहीं भारत ने भी इसके लिए तैयारियाँ की? हकीकत यह है कि इस बदलाव में हम काफी पिछड़ गए।
यह ठीक वैसी ही स्थिति है जैसे कि गाँवों में मिट्टी पर लड़ने वाले पहलवान को बड़ा होने पर कुश्ती की मैट मिले और सुशील कुमार जैसे कम ही भाग्यशाली पहलवान होते हैं, जो अभाव में पलकर भी ओलिम्पिक से काँसे का पदक ले आते हैं। अब जबकि ‘गुदड़ी के दो लालों’ ने भारत को गरीब खेल माने जाने वाले कुश्ती और बॉक्सिंग में दो ओलिम्पिक पदक दिला दिए हैं तो हो सकता है कि इन खेलों का उद्धार करने पर भारत सरकार ध्यान दें।
1979 में दादा ध्यानचंद की कोमा में जाने के बाद मृत्यु हुई लेकिन जब तक वे होश में रहे, भारतीय हॉकी के प्रति चिंतित रहे। बेटे अशोक से हमेशा कहते थे कि मेरा यही सपना है कि भारतीय हॉकी एक बार फिर स्वर्णिम युग में पहुँचे। अब मेरे बूढ़े शरीर में भले ही दम नहीं रहा हो लेकिन मैं भारत की हॉकी को सम्मानजनक स्थिति में देखना चाहता हूँ ताकि खुद को जवान महसूस कर सकूँ।
इसमें कोई दो मत नहीं कि दादा ध्यानचंद की आत्मा आज जहाँ भी होगी, वह इस बदहाली पर आँसू बहा रही होगी। जिस शख्स ने हॉकी में भारत की पहचान स्थापित की, आज उनकी ही कर्म स्थति झाँसी के साथ देश भी हॉकी से अनाथ हो गया है।
परिचय -हॉकी के जादूगर दादा ध्यानचंद का जन्म प्रयाग (उत्तरप्रदेश) के राजपूत घराने में 29 अगस्त 1905 को हुआ था। उनके पिता सामेश्वर दत्त सिंह भारतीय फौज में सूबेदार थे। सेना में रहते हुए उन्होंने भी खूब हॉकी में अपने जौहर दिखाए। मूलसिंह और रूपसिंह ध्यानचंद के दो भाई थे। ध्यानचंद की तरह रूपसिंह का भी हॉकी का जाना-माना चेहरा थे। पिता के तबादले के कारण ध्यानचंद ढंग से किताबों में मन नहीं लगा सके। यही वजह थी कि छठी कक्षा के बाद ही उन्हें पढ़ाई को अलविदा कहना पड़ा। कालांतर में पूरा परिवार झाँसी आकर बस गया।
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Vikas Sharma
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Posted on 28 August 2010 by admin
चित्रकूट- भूमि संरक्षण इकाई चित्रकूट ने राश्ट्रीय जलागम योजना के तहत बाबूपुर गांव में कृशक गोश्ठी का आयोजन किया ।जिसमें खेत का पानी खेत में रोकने, जल संचय करने और पौध रोपण के लिये किसानों का प्रशिक्षण दिया गया। गोश्ठी मे भूमि संरक्षण विभाग और कृषि विभाग के लोग शामिल हुये।
आयोजन में उप कृशि निदेशक भूमि संरक्षण बान्दा विजय सिंह ने कहा कि गांवों में जो भूमि हीन किसान है वह छोटे छोटे कुटीर उधोग चलाकर अपना जीवन यापन कर सकते है। बताया कि बकरी पालन, दोना पत्ता,बढई गिरी, लोहार गिरी,कीट पालन, और मधुमक्खी पालन का व्यवसाय कर सकते है। इसके लिये जलगम योजना द्वारा ऋण प्रदान किया जायेगा।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 28 August 2010 by admin
चित्रकूट - जिलाधिकारी विशालराय ने जानकारी देते हुये बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिशद के द्विवासिक निर्वाचन 2010 के लिये इलाहाबाद,झांसी, खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के जनपद चित्रकूट के मतदेय स्थलों को आलेख सूची का प्रकाशन किया गया है जिसमें कर्वी में चित्रकूट इंटर कालेज, ब्लाक कर्वी पहाडी में क्षेत्र पंचायत कार्यालय पहाडी, मानिकपुर में क्षेत्र पंचायत कार्यलय मानिकपुर राजापुर में तुलसी इंटर कालेज, रामनगर में क्षेत्र पंचायत कालेज रामनगर व मउ में क्षेत्र पंचायत मउ को प्रस्तावित किया गया है । उन्होने कहा कि मतदेय स्थल के सम्बंध में आपत्ति जो भी व्यक्ति देना चाहता हो तो वह 30 अगस्त 2010 तक जिला निर्वाचन कार्यालय चित्रकूट में प्रस्तुत कर सकता है। जिन पर विचार विमर्श 31 अगस्त 2010 को आहूत बैठक में किया जायेगा। उन्होने कहा कि समस्त मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल के अध्यक्ष व मन्त्री व सांसद/विधानसभा व विधानपरिशद सदस्य व अन्य सम्बंधित अधिकारियों से कहा कि 31 अगस्त 2010 को अपरान्ह 1 बजे नबीन कलेक्ट्रेट में बैठक आहूत की गई है । जिसमें समय से भाग ले।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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Posted on 28 August 2010 by admin
चित्रकूट - उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा संघ में पूर्व माध्यमिक विद्यालय रगौली में शैक्षिक उत्रयन गोश्ठी का आयोजन किया गया । इसमें शिक्षा के स्तर को उठाने के लिये समयपालन,शिक्षण और स्वाध्याय की आवश्यकता पर बल दिया गया । बीएसए ने शासन की मंशानुरुप कार्य करने का आहवाहन किया। शैक्षिक गोश्ठी के मुख्य अतिथि ने संबोधित करते हुये जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार तिवारी ने कहा कि विद्यालय में तैनाम सभी शिक्षक जाग जाये। उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की मंशारुप शिक्षण कार्य के लिये शिक्षक अपने आप को तैयार कर ले। बीएसए ने कहा कि शिक्षक अपना कर्तव्य पूरी निश्ठा से निभायेगे तो उन्हे विभाग द्वारा पुरुस्कृत भी किया जायेगा।एबीएसए चित्रकूट जेएन त्रिपाठी ने सभी शिक्षको हिदायत दी कि समय से विद्यालय मे पहुंच कर शिक्षण कार्य करे। राश्ट्रपति पुरुस्कार पुरुस्कृत और पूर्व बीआर सी प्रभारी गया प्रसाद सिंह पटेल ने कहा कि शिक्षक साथियों को अध्यापन के लिये तीन चीजों की आवश्यकता है । उन्होने कहा कि समय पालन,गुणवक्तापूर्ण शिक्षण और स्वाध्याय की बेहद जरुरत है। कहा कि विशम परििस्थियों में भी शिक्षक को अपना कार्य करना चाहिये।रामनगर के अध्यक्ष अखिलेश कुमार पाण्डे ने संगठन के बारे में जानकारी दी। इसके पूर्व गोश्ठी में दयाशकंर सिंह,बैजनाथ प्रजापति,रामबहादुर सिंह, शिव सिंह, आदि शिक्षक मौजूद रहे।